रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 2 संगत का असर, कर्तव्य, तेजस्वी बालक नरेंन्द्रनाथ, जीवन और समस्याएं, संघर्ष का महत्व

by | Mar 11, 2021 | MOTIVATIONAL INCIDENTS




संगत का असर, कर्तव्य, तेजस्वी बालक नरेंन्द्रनाथ, जीवन और समस्याएं, संघर्ष का महत्व

INTERESTED INCEDENTS

CITIZEN UTILITY
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail

K. L. SEN MERTA

प्रेरक प्रसंग 1 – ‘संगत का असर’

एक अध्यापक अपने शिष्यों के साथ घूमने जा रहे थे । रास्ते में वे अपने
शिष्यों के अच्छी संगत की महिमा समझा रहे थे । लेकिन शिष्य इसे समझ नहीं पा रहे थे
। तभी अध्यापक ने फूलों से भरा एक गुलाब का पौधा देखा । उन्होंने एक शिष्य को उस पौधे
के नीचे से तत्काल एक मिट्टी का ढेला उठाकर ले आने को  कहा ।

जब शिष्य ढेला उठा लाया तो अध्यापक बोले – “ इसे अब सूंघो ।”

शिष्य ने ढेला सूंघा और बोला – “ गुरु जी इसमें से तो गुलाब की बड़ी अच्छी
खुशबू आ रही है ।”

तब अध्यापक बोले – “ बच्चो ! जानते हो इस मिट्टी में यह मनमोहक महक कैसे
आई ? दरअसल इस मिट्टी पर गुलाब के फूल, टूट टूटकर गिरते रहते हैं, तो मिट्टी में भी
गुलाब की महक आने लगी है जो की ये असर संगत का है और जिस प्रकार गुलाब की पंखुड़ियों
की संगति के कारण इस मिट्टी में से गुलाब की महक आने लगी उसी प्रकार जो व्यक्ति जैसी
संगत में रहता है उसमें वैसे ही गुणदोष आ जाते हैं ।

संगति का असर कहानी से सीख Moral
of the Story on Sangati Ka Asar  :  इस शिक्षाप्रद कहानी से सीख मिलती है कि हमें सदैव
अपनी संगत अच्छी रखनी चाहिए ।

किसी भी
व्यक्ति के जीवन मे अगर शील यानी चरित्र ना हो तो उनके जीवन के अन्य सभी सद्गुण निरर्थक
है। हमारी संस्कृति में बल, बुद्धि, विद्या,धन और शील यह पांच सद्गुणों का बहुत बड़ा
महत्व है। लेकिन इन पांचो सद्गुणों में शील यानी चरित्र सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। अगर
अच्छा चरित्र नहीं है तो बल, बुद्धि और विद्या का कोई अर्थ नहीं रहता। किसी ने ठीक
ही कहा है-

 “when wealth is lost nothing is lost, when
health is lost something is lost but when character is lost everything is lost”

प्रेरक प्रसंग 2 – ‘कर्तव्य’

एक समय की बात है । एक नदी में एक महात्मा स्नान कर रहे थे । तभी एक बिच्छू
जो पानी में डूब रहा था, उसे बचाते हुए बिच्छु ने महात्मा को डंक मार दिया ।

महात्मा ने उसे कई बार बचाने की कोशिश की । बिच्छू ने उन्हें बार – बार
डंक मारा । अंतत: महात्मा ने उसे बचाकर नदी के किनारे रख दिया । थोड़ी दूर खड़े यह सब
महात्मा के शिष्य देख रहे थे । जैसे ही वे नदी से बाहर आये तो शिष्यों ने पूछा कि जब
वह बिच्छू आपको बार – बार डंक मार रहा था तो आपको उसे बचाने की क्या आवश्यकता थी ।

तब महात्मा ने कहा – बिच्छू एक छोटा जीव है, उसका कर्म काटना है, जब वह
अपना कर्तव्य नहीं भूला, तो मैं मनुष्य हूँ मेरा कर्तव्य दया करना है तो मैं अपना कर्तव्य
कैसे भूल सकता हूँ ।

कर्तव्य की कहानी से सीख Moral
Of Kartvya Ki Kahani : इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि मार्ग कितना भी कठिन क्यों
न हों । मनुष्य को कभी अपना कर्तव्य नहीं भूलना चाहिए ।


Prerak-Prasang-223x300
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail
OIP
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail
OIP (3)
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail
OIP (2)
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail
dharmik-Kahaniya
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail
OIP (1)
  • Facebook
  • Twitter
  • Gmail

प्रेरक प्रसंग 3 – ‘तेजस्वी बालक
नरेंन्द्रनाथ’

स्वामी विवेकानंदजी जी को बचपन में सब लोग बिले नाम से पुकारते थे। बाद
में नरेन्द्रनाथ दत्त कहलाये। नरेन्द्रनाथ बहुत उत्साही और तेजस्वी बालक थे। इस बालक
को बचपन से ही संगीत, खेलकूद और मैदानी गतिविधियों में रुचि थी। नरेन्द्रनाथ बचपन से
ही अध्यात्मिक प्रकृति के थे और यह खेल – खेल में राम, सीता, शिव आदि मूर्तियों की
पूजा करने में रम जाते थे। इनकी माँ इन्हें हमेशा रामायण व महाभारत की कहानियां सुनाती
थी जिसे नरेन्द्रनाथ खूब चाव से सुनते थे।

एक बार बनारस में स्वामी विवेकानंद जी माँ दुर्गा जी के मंदिर से निकल
रहे थे कि तभी वहां पहले से मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे उनसे प्रसाद
छिनने के लिए उनके नजदीक आने लगे। अपने तरफ आते देख कर स्वामी स्वामी जी बहुत भयभीत
हो गए। खुद को  बचाने के लिए भागने लगे। पर
वे बंदर तो पीछा छोड़ने को तैयार ही नहीं थे।

पास में खड़ा एक वृद्ध संयासी ये सब देख रहा था, उन्होंने स्वामी जी को
रोका और कहा – रुको ! डरो मत, उनका सामना करो और देखों कि क्या होता है। बृद्ध संयासी
की बात सुनकर स्वामी जी में हिम्मत आ गई और तुरंत पलटे और बंदरों की तरफ बढ़ने लगे।
तब उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उनके सामना करने पर सभी बंदर भाग खड़े हुए थे। इस
सलाह के लिए स्वामी जी ने बृद्ध संयासी को बहुत धन्यवाद दिया।

इस घटना से स्वामी जी को एक गंभीर शिक्षा मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक
सभा में इस घटना का जिक्र किया और कहा – यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो, तो उससे
भागों मत, पलटो और सामना करों। वास्तव में, यदि हम अपने जीवन में आये समस्याओं का सामना
करे तो यकीन मानिए बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जायेगा।


प्रेरक प्रसंग 4 – ‘जीवन और समस्याएं’

किसी शहर में, एक आदमी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। वो अपनी ज़िन्दगी
से खुश नहीं था, हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था। एक बार शहर से कुछ
दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका । शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी। बहुत से
लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे, उस आदमी ने भी महात्मा के दर्शन करने
का निश्चय किया।

छुट्टी के दिन सुबह-सुबह ही उनके काफिले तक पहुंचा । बहुत इंतज़ार के बाद
उसका का नंबर आया।

वह बाबा से बोला- “बाबा , मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ, हर समय समस्याएं
मुझे घेरी रहती हैं, कभी ऑफिस की टेंशन रहती है, तो कभी घर पर अनबन हो जाती है, और
कभी अपने सेहत को लेकर परेशान रहता हूँ …।”

बाबा कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं
और मैं चैन से जी सकूँ ?

बाबा मुस्कुराये और बोले – “पुत्र, आज बहुत देर हो गयी है मैं तुम्हारे
प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा … लेकिन क्या तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे …?”

“हमारे काफिले में सौ ऊंट हैं, मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल
रखो …जब सौ के सौ ऊंट बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना …”

ऐसा कहते हुए महात्मा अपने तम्बू में चले गए ।

अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पुछा – ” कहो बेटा, नींद अच्छी
आई।”

वो दुखी होते हुए बोला – “कहाँ बाबा, मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया। मैंने
बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों को नहीं बैठा पाया, कोई न कोई ऊंट खड़ा हो ही जाता

बाबा बोले – “बेटा, कल रात तुमने अनुभव किया कि चाहे कितनी भी कोशिश कर
लो सारे ऊंट एक साथ नहीं बैठ सकते, तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो
जाएगा। इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी कारणवश दूसरी खड़ी हो जाएगी
” पुत्र जब तक जीवन है ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं … कभी कम तो कभी ज्यादा …।”

“तो हमें क्या करना चाहिए ?” – आदमी ने जिज्ञासावश पुछा।

“इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो”

कल रात क्या हुआ ? :

1) कई ऊंट रात होते -होते खुद ही बैठ गए,

2) कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए,

3) बहुत से ऊंट तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे … और बाद में तुमने
पाया कि उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए …।

कुछ समझे? समस्याएं भी ऐसी ही होती हैं।।

1) कुछ तो अपने आप ही ख़त्म हो जाती हैं ,

2) कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो

3) कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं ,

ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो, उचित समय पर वे खुद ही ख़त्म हो जाती हैं।

जीवन है, तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी, पर इसका ये मतलब नहीं की
तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो …

समस्याओं को एक तरफ रखो और जीवन का आनंद लो, चैन
की नींद सो, जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएँगी”

बिंदास मुस्कुराओ क्या ग़म है, ज़िन्दगी में टेंशन
किसको कम है ।।

अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है, जिन्दगी का नाम ही,
कभी ख़ुशी कभी ग़म है।


प्रेरक प्रसंग 5 – ‘संघर्ष का महत्व’

एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया। कभी बाढ़ आ जाये, कभी
सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये। हर बार कुछ ना कुछ कारण
से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये। एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा – देखिये
प्रभु,आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है,
एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये, जैसा मैं चाहूँ वैसा मौसम हो, फिर आप
देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा। परमात्मा मुस्कुराये और कहा – ठीक है, जैसा
तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा।

अब, किसान ने गेहूं की फ़सल बोई, जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी चाही
तब पानी। तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और
किसान की ख़ुशी भी, क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी। किसान ने मन ही मन सोचा
अब पता चलेगा परमात्मा को की फसल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान
करते रहे।

फ़सल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन
जैसे ही फसल काटने लगा ,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के
अन्दर गेहूं नहीं था, सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी, बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा
से कहा – प्रभु ये क्या हुआ ?

तब परमात्मा बोले – ”ये तो होना ही था , तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा
सा भी मौका नहीं दिया। ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया,
उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया, इसीलिए सब पौधे खोखले
रह गए। जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पौधा अपने बल से ही खड़ा
रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता
है वो ही उसे शक्ति देता है, उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है। सोने को भी
कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता
है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है। ”

इसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती
ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता। ये चुनौतियां
ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं, अगर प्रतिभाशाली
बनना है तो चुनौतियां तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे।
अगर जिंदगी में प्रखर बनना है, प्रतिभाशाली बनना है, तो संघर्ष और चुनौतियों का सामना
तो करना ही पड़ेगा।

फ्रेंड्स अगर आपको उपर्युक्त नैतिक और प्रेरणादायक छोटी शिक्षाप्रद प्रेरक प्रसंग कहानियां अच्छी  लगी  हो तो हमारे Facebook Page को जरुर like करे और  इस post को share करे | और हाँ हमारा free email subscription जरुर ले ताकि मैं अपने future posts सीधे आपके inbox में भेज सकूं |

हमारे YOUTUBE चैनल को यहाँ क्लिक करके SUBSCRIBE जरुर कीजिए




Facebook-f


Twitter


Linkedin-in



RBSE / BSER CLASS 1 TO 12 ALL BOOKS 2021

RBSE / BSER CLASS 1 TO 12 ALL BOOKS 2021 RBSE / BSER CLASS 1 TO 12 ALL BOOKS 2021

ORDERS AND CIRCULARS OF JANUARY 2021

ALL KIND OF EDUCATIONAL ORDERS AND CIRCULARS OF JANUARY 2021

श्री प्रवेश कुमार शर्मा द्वारा विकसित एक्सल प्रोग्राम

PRAVESH KUMAR SHARMA, Pravesh Kumar Sharma Excel Software, Pravesh Kumar Sharma Excel Program, pravesh-kumar-sharma, प्रवेश कुमार शर्मा AAO द्वारा विकसित बेहतरीन एक्सल प्रोग्राम केवल शाला सुगम पर

उपार्जित अवकाश सेवा नियम एवं व्याख्या व नियमों का मूल आदेश

उपार्जित अवकाश से संबंधित सेवा नियम एवं इसमे समय समय पर किए गए परिवर्तन तथा उनके प्रभावों की व्याख्या तथा नियमों का मूल आदेश Basic Order of Privilege Leave Service Rules and Interpretation and Rules

REVISED SYLLABUS CLASS 6 TO 12 SESSION 2023-24

सत्र 2023-24 के लिए NCERT ने नया NCERT संशोधित पाठ्यक्रम 2023-24 (REVISED SYLLABUS) जारी किया हैं | यह पाठ्यक्रम उन राज्यों के लिए हुबहू लागु होगा जिनके यहाँ NCERT का सम्पूर्ण पाठ्यक्रम लागू हैं |

डिजिटल प्रवेशोत्सव एवं CTS सर्वे APP प्रक्रिया और प्रपत्र

सत्र 2023-24 के लिए प्रवेश आवेदन पत्र फोर्मेट, / विद्यालय प्रवेश आवेदन प्रपत्र 2023-24, विद्यालय प्रवेश आवेदन प्रपत्र PDF, SCHOOL ADMISSION FORM AND FORMAT PDF, डिजिटल प्रवेशोत्सव CTS सर्वे फोर्मेट 2023-24, CHILD TRACKING SURVEY FORMAT 2023-24, CHILD TRACKING SURVEY FORMAT PDF

LATEST SCHOOL ADMISSION FORM AND FORMAT PDF

सत्र 2023-24 के लिए प्रवेश आवेदन पत्र फोर्मेट, / विद्यालय प्रवेश आवेदन प्रपत्र 2023-24, विद्यालय प्रवेश आवेदन प्रपत्र PDF, SCHOOL ADMISSION FORM AND FORMAT PDF, डिजिटल प्रवेशोत्सव CTS सर्वे फोर्मेट 2023-24, CHILD TRACKING SURVEY FORMAT 2023-24, CHILD TRACKING SURVEY FORMAT PDF

परीक्षा परिणाम तैयार करने का एक्सल प्रोग्राम 2023 श्री हीरा लाल जाट

BEST RESULT EXCEL SHEET PROGRAM HEERA LAL JAT EXCEL SHEET EXPERT, HEERA LAL JAT EXCEL PROGRAMER परीक्षा परिणाम तैयार करने का एक्सल प्रोग्राम

AMAZING RESULTS SHEET PROGRAM UMMED TARAD 2023

RESULTS SHEET PROGRAM 2023 UMMED TARAD Excel Software Ummed Tarad Excel Utilities RESULT EXCEL SOFTWERE 2022-23 | RESULT EXCEL PROGRAM 2022-23

[LATEST] SIQE CCE Summative Assessment AMAZING SAMPLE PAPER CLASS 1th TO 4th 2023

RBSE YEARLY EXAM AMAZING SAMPLE PAPER FOR CLASS 6th AND 7th 2023

[LATEST] RBSE YEARLY EXAM AMAZING SAMPLE PAPER FOR CLASS 6th AND 7th 2023

RBSE YEARLY EXAM AMAZING SAMPLE PAPER FOR CLASS 6th AND 7th 2023

पेंशन मास्टर प्रोग्राम : श्री प्रवेश कुमार शर्मा

PENSION MASTER EXCEL PROGRAM PRAVESH KUMAR SHARMA MR. PRAVESH KUMAR SHARMA Pravesh Kumar Sharma, AAO-Iआयुक्त उपनिवेशन विभाग, बीकानेर[email protected] आप सभी शिक्षको, मंत्रालयिक कर्मचारी बंधुओ का मेरे इस PENSION MASTER EXCEL PROGRAM PRAVESH KUMAR SHARMA पेज पर मैं...

परीक्षा समय सारणी व प्रवेश पत्र जनरेटर एक्सल प्रोग्राम

UPDATED ON 05/04/2023 : नमस्कार आदरणीय शिक्षक बंधुआ और संस्था प्रधान साथियों, यहाँ आपके लिए इस ब्लॉग पोस्ट में सत्र 2023 के लिए स्थानीय परीक्षाओ के लिए परीक्षा समय सारणी और परीक्षा से सम्बंधित प्रपत्र तैयार करने के लिए Exam Time Table Admit Card Generator and Exam...

पेंशन मास्टर प्रोग्राम के महत्वपूर्ण पेंशन ऑर्डर

यहाँ आपके लिए PENSION MASTER EXCEL PROGRAM PRAVESH KUMAR SHARMA के महत्वपूर्ण IMPORTANT PENSION ORDER COLLCETION PENSION MASTER अपलोड किये गये जिन्हें आप डाउनलोड करके उपयोग में ले सकते हैं। यूजर इस सूची में दिये गये हाइपरलिंक पर क्लिक करके सीधे पेंशन मास्टर प्रोग्राम...

श्री उम्मेद तरड द्वारा विकसित एक्सल प्रोग्राम

Ummed Tarad Excel Software श्री उम्मेद तरड द्वारा विकसित एक्सल प्रोग्राम

बाल गोपाल योजना के अंतर्गत दूध पाउडर, चीनी एवं तैयार दूध की मात्रा की गणना, LATEST BAL GOPAL MILK YOJANA CALCULATOR 2023

बाल गोपाल योजना के अंतर्गत दूध पाउडर, चीनी एवं तैयार दूध की मात्रा की गणना, LATEST BAL GOPAL MILK CALCULATOR 2023

Mid Day Meal Milk Distribution Excel Program By Ummed Tarad मध्याह्न भोजन तथा मुख्यमंत्री बाल गोपाल दुग्ध योजना प्रोग्राम

Mid Day Meal Milk Distribution Excel Program By Ummed Tarad : सरकारी विद्यालयों हेतु मध्याह्न भोजन तथा मुख्यमंत्री बाल गोपाल दुग्ध योजना प्रोग्राम Prepared By:-Ummed Tarad (Teacher,GSSS Raimalwada) Mob.No-9166973141 EmailAddress:[email protected]इस एक्सेल...

BAL GOPAL YOJNA MILK DISTRIBUTION REGISTER IN EXCEL By Ummed Tarad | बाल गोपाल योजना राजस्थान

BAL GOPAL YOJNA MILK DISTRIBUTION REGISTER 2022 मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना – दुग्ध वितरण एवम् स्टॉक संधारण पंजिका Excel Program Dt. 30-11-2022

RBSE 12th Board Exam Best Model Paper 2022-23 राजस्थान बोर्ड मॉडल-पेपर कक्षा-12वीं के लिए मॉडल पेपर जारी किए यहां से डाउनलोड करे

RBSE 12th Board Exam Best Model Paper 2022-23 राजस्थान बोर्ड मॉडल-पेपर कक्षा-12वीं के लिए मॉडल पेपर जारी किए यहां से डाउनलोड करे

RBSE 10th Board Exam Best Model Paper 2022-23 राजस्थान बोर्ड मॉडल-पेपर कक्षा-10वीं के लिए मॉडल पेपर जारी किए यहां से डाउनलोड करे

RBSE 10th Board Exam Best Model Paper 2022-23 राजस्थान बोर्ड मॉडल-पेपर कक्षा-10वीं के लिए मॉडल पेपर जारी किए यहां से डाउनलोड करे

RBSE 8th Best Model Paper 2023, BSER 8th Question Paper 2023, Raj Board VIII Model Question Paper 2023

RBSE 8th Model Paper 2023, BSER 8th Question Paper 2023, Raj Board VIII Model Question Paper 2023

कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा प्रश्न बैंक 2022-23 Rajasthan Board Class 12th Questions bank 2022-23

कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा प्रश्न बैंक 2022-23 Rajasthan Board Class 12th Questions bank 2022-23

रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 3 समय अनमोल है समय की कीमत नमक का स्वाद भगवान भरोसे भगवान का अस्तित्व

रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 2 समय अनमोल है समय की कीमत नमक का स्वाद भगवान भरोसे भगवान का अस्तित्व समय अनमोल है

रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 1 प्रसन्नता का राज, सरदार पटेल की कर्तव्यनिष्ठा, अस्पृश्य (अछूत), स्वभाव बदलो, काम लेने का तरीका, अंत का साथी

1- प्रसन्नता का राज 2- सरदार पटेल की कर्तव्यनिष्ठा 3- अस्पृश्य (अछूत) 4- स्वभाव बदलो 5- काम लेने का तरीका 6- अंत का साथी

वीर सावरकर के प्रेरक प्रसंग

पहला प्रसंग

वीर सावरकर को अंग्रेजों के द्वारा दिया गया घोर कष्ट, भोगी गयी यातनाएँ, भोगलिप्सा के शिकार लोगों को लज्जित कर सही हैं। उन्हीं से अपने कष्टों का बयान सुनते हैं।

‘जब मैं विदेश को प्रस्थान कर रहा था, उस समय मुझे विदा करने को जो परिवार या मित्र उपस्थित थे, उनमें ज्येष्ठ बन्धु भी थे। उस समय मैंने उनके दर्शन किए थे। उसके बाद लम्बा अर्सा बीत जाने पर अब (अण्डमान) जेल में उनके दर्शन करने थे। मन में आया मिलने से उन्हें अत्यनत दुःख होगा। अतः मिलने की इच्छा छोड़ देनी चाहिए। मगर उसी क्षण विचार आया कि मिलना टालना तो दुःख से डरना होगा। दुःख रूपी गजराज जब पूरा का पूरा अन्दर समा ही गया, तो केवल उसकी पूँछ से क्या डर? वे अपनी आशाओं पर राख डालकर अत्यन्त करूणाजनक स्थिति में आज मुझे देख रहे थे। क्षण भर तो वे विमूढ़ बने रहे। उनके मूक दुःख का परिचायक केवल एक ही उद्गार उनके मुख से फूट निकला-

‘तात्याँ, तुम यहाँ कैसे?’ ये शब्द उनकी असहाय वेदनाओं के प्रतीक थे और मेरे हृदय में भाले की तरह बैठ गए।”

दूसरा प्रसंग

अब वीर सावरकर की अण्मान जेल की दिल दहलाने वाली आपबीती सुनें-

”सबेरे उठते ही लंगोटी पहनकर कमरे में बंद हो जाना तथा अन्दर कोल्हू का डण्डा हाथ से घुमाते रहना। कोल्हू में नारियल की गरी पड़ते ही वह इतना भारी चलता कि कसे हुए शरीर के बन्दी भी उसकी बीस फेरियाँ करते रोने लगते। बीस-बीस वर्ष तक की आयु के चोर-डाकुओं तक को इस भारी मशक्कत के काम से वंचित कर दिया जाता, किन्तु राजबन्दी, चाहे वह जिस आयु का हो, उसे यह कठिन और कष्टकर कार्य करने से अण्डमान का वैद्यक शास्त्र भी नहीं रोक पाता। कोल्हू के इस डण्डे को हाथों से उठाकर आधे रास्ते तक चला जाता और उसके बाद का अर्धबोला पूरा करने के लिए डण्डे पर लटकना पड़ता, क्योंकि हाथों में बल नहीं रहता था। तब कहीं कोल्हू की गोल दाँडी पूरा चक्कर काटती। कोल्हू में काम करते भीषण प्यास लगती। पानी वाला पानी देने से इनकार कर देता। जमादार कहता- ‘कैदी को दो कटोरी पानी देने का हुक्म है और तुम तो तीन पी गए और पानी क्या तुम्हारे बाप के घर से लाएँ?’ लंगोटी पहनकर सवेरे दस बजे तक काम करना पड़ता, निरन्तर फिरते रहने से चक्कर आने लगते। शरीर बुरी तरह से थक कर चूर हो जाता, दुखने लगता। रात को जमीन पर लेटते ही नींद का आना तो दूर, बेचैनी में करवटें बदलते ही रात बीतती। दूसरे दिन सवेरे पही कोल्हू सामने खड़ा होता। उस कोल्हू को पेरते समय पसीने से तरह हुए शरीर पर जब धूल उड़कर उसे सान देती, बाहर से आते हुए कूड़े-कचरे की तह उस पर जम जाती, तब कुरूप बने उस नंग-धड़ंग शरीर को देखकर मन बार-बार विद्रोह कर उठता। ऐसा दुःख क्यों झेल रहे हो, जिससे स्वयं पर घृणा पैदा हो।

इस कार्य के लिए, मातृभूमि के उद्धार के लिए, कौड़ी का भी मूल्य नहीं है। वहाँ (भारत में) तुम्हारी यातनाओं का ज्ञान किसी को भी नहीं होगा। फिर उसका नैतिक परिणाम तो दूर की बात है। इसका न कार्य के लिए उपयोग है, न स्वयं के लिए। इतना ही नहीं भार, भूत बनकर रहने में क्या रखा है? फिर यह जीवन व्यर्थ में क्यों धारण करते हो? जो कुछ भी इसका उपयोग होना था, हो चुका। अब चलो फाँसी का एक ही झटका देकर जीवन का अन्त कर डालो।”

इस भयंकर अन्तर्द्वन्द्व एवं ग्लानि में भी वीर सावरकर अडिग-अडोल बने रहे।

तीसरा प्रसंग

वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे, जिन्हें राजद्रोह के आरोप में दो आजनम कारावास की सजा सुनायी गई। इन्होंने पहले लेखक की ख्याति ‘1857 का स्वातंन्न्य समर’ लिखकर प्राप्त किया। इस ग्रन्थ का प्रचार भगतसिंह और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने किया। ये पहले साहसी बन्दी थे जिन्होंने इंगलैण्ड से भारत लाए जाते समय सामुद्रिक जहाज से कूदकर भागने का प्रयास किया। ये पहले लेखक थे, जिनके अधिकांश ग्रन्थ जब्त किए गए। इनकी इंगलैण्ड में लिखी कविताओं ‘ओ शहीदो’ और ‘गुरू गोविन्द सिंह’ को जब्त किया गया और स्कॉटलैण्ड के पुलिस अधिकारी ने कहा – ‘जिस कागज पर सावरकर लिखते हैं, वह जलकर राख क्यों नहीं हो जाता?’

उन्होंने पचास वर्ष के काले पानी की सजा साहस और धैर्य से स्वीकार करते हुए अधिकारी से कहा- ‘क्या मुझे इस निर्णय की प्रति देखने को मिल सकती है?’ अधिकारी ने कहा था, ‘यह बात मेरे हाथ में नहीं है, फिर भी आपके लिए मुझसे जो कुछ बनेगा, अवश्य करूँगा। तथापि इतनी लम्बी सजा का समाचार, जो मुझ जैसे व्यक्ति को भी विदीर्ण करने वाला था, आपने जिस धैर्य से सुना, उसे देखकर मैं यह नहीं मानता कि आप किसी भी सहायता या सहानुभूति के पात्र होंगे।’

इस पोस्ट को आप अपने मित्रो, शिक्षको और प्रतियोगियों व विद्यार्थियों (के लिए उपयोगी होने पर)  को जरूर शेयर कीजिए और अपने सोशल मिडिया पर अवश्य शेयर करके आप हमारा सकारात्मक सहयोग करेंगे

❤️🙏आपका हृदय से आभार 🙏❤️

 




      नवीनतम अपडेट

      EXCEL SOFTWARE



      प्रपत्र FORMATS AND UCs

      PORATL WISE UPDATES



      LATEST RESULTS

      Pin It on Pinterest

      Shares
      Share This

      Share This

      Share this post with your friends!