बैग फ्री सैटरडे कालांश वार नो बैग डे – शिक्षा में नई चेतना की ओर एक कदम
राजस्थान बजट 2020 में शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न जनउपयोगी- शिक्षा उपयोगी घोषणाओं के लिए राजस्थान सरकार का हार्दिक अभिनंदन। विशेष रुप से शनिवार को बस्ते की छुट्टी करने के लिए अर्थात बैग फ्री सैटरडे घोषित करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी और शिक्षा मंत्री महोदय का हृदय की गहराइयों से बहुत-बहुत अभिनंदन साधुवाद। जितने व्यापक स्तर पर इस घोषणा स्वागत हुआ है उससे स्पष्ट है कि यह जन आकांक्षाओं के अनुरूप लिया गया निर्णय हैं और बहुतायत में सभी ने इसकी प्रशंसा की है।
राजस्थान सरकार ने शनिवार को बैग फ्री सैटरडे की घोषणा की है । ठीक प्रकार से क्रियान्वित होने पर यह संकल्पना ,यह योजना शिक्षा के वास्तविक उद्देश्यों और लक्ष्यों के अनुरूप हैं ।स्वामी विवेकानंद से लेकर महात्मा गांधी तक तमाम विद्वानों ने शिक्षा को व्यक्ति की अंतर्निहित शक्तियों का प्रकटीकरण करने वाला बताया है , मन बुद्धि और आत्मा का विकास करने वाला बताया है। शनिवार के दिन बिना बस्ते के भी बहूत कुछ सीखा जा सकता है और यह होने वाली पढ़ाई एवं गतिविधियां बालक के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करने में सहायक सिद्ध होगी। यह योजना भारतीय शिक्षण पद्धति के अनुरूप है।
यह वर्ष पूज्य महात्मा गांधी जी के जन्म का 150 वां वर्ष है और सौभाग्य से यह योजना महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षा के सिद्धांतों के अनुरूप हैं । इससे बहुत सारे प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष लाभ होंगे। शिक्षा में पाठ्य सहगामी क्रियाओं का भी महत्व रेखांकित होगा एवं शिक्षक पर गंभीरता से लेंगे क्योंकि पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं की बालक के व्यक्तित्व के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।
बच्चे भारी भरकम बस्ते के बोझ से मुक्त तनाव रहित होकर शिक्षा को आनंद मय वातावरण में उत्सव के रूप में ग्रहण करें, इस दृष्टि से पिछले 12 वर्षों से बस्ते का बोझ कम करने की दिशा में प्रयत्नशील हूँ। समाधान स्वरूप मासिक पाठ्य पुस्तक एवं शनिवार को बस्ते की छुट्टी की संकल्पना की थी। सौभाग्य से दोनों ही सुझावों को धीरे धीरे मान्यता मिल रही है।
शनिवार के दिन बिना बस्ते के पढ़े जा सकने वाले शिक्षण बिंदुओं को एक आलेख के रुप में लिखा था । जो शिविरा पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ। यदि इस प्रकार से कालांश विभाजन की योजना बन जाएगी तो यह बैग फ्री सैटरडे योजना सरलता से सफलतापूर्वक क्रियान्वित हो सकेगी।
बस्ता मुक्त शनिवार क्यो-
कंधे पर भारी भरकम बस्ते का बोझ, एक हाथ में पानी की बोतल दूसरे हाथ में लंच बॉक्स के साथ( निजी विद्यालय) लिए धीमी गति से …थके थके से चलते पांव एवं मासूम चेहरों को देखते ही मन में पीड़ा होती हैं ।हम उसे सभ्य ,सुसंस्कृत ,सुयोग्य नागरिक बनने की शिक्षा दे रहे हैं अथवा केवल कुशल भारवाहक बनने का प्रशिक्षण ??
बचपन की मस्तियां ,शैतानियां, नादानियां ,किलकारियां, निश्छल हँसी ,उन्मुक्तता , जिज्ञासा आदि अनेक बालसुलभ क्रियाओं को बस्ते के बोझ ने अपने वजन तले दबा दिया है । बचपन का सावन, , कागज की कश्ती और बारिश के पानी के बालक केवल बातें ही सुनता है । स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का लगातार बढ़ता हुआ बोझ एक समस्या के रूप में समाज के सामने है । आजादी के बाद से ही इस पर लगातार चिंतन मनन होता रहा है और लगभग सभी शिक्षा आयोगों ,समितियों ने इसकी चर्चा की है, इस बोझ को कम करने की सिफारिश भी की है।बैग फ्री सैटरडे कालांश वार नो बैग डे – शिक्षा में नई चेतना की ओर एक कदम
शिक्षा क्या है-
शिक्षा बालक के सर्वांगीण विकास का आधार है । सा विद्या या विमुक्तये हो या विद्या ददाति विनयम ….मन बुद्धि और आत्मा के विकास की बात हो अथवा बालक की अंतर्निहित शक्तियों के प्रकटीकरण की बात ….शिक्षा मूल रूप से जीवन का आधार है, शिक्षा के बारे में मूल भारतीय चिंतन यही है । विभिन्न विद्वानों और विचारकों ने शिक्षा की परिभाषा में अलग-अलग शब्दों में इन्हीं भावों और उद्देश्यों को रेखांकित किया है। किंतु वर्तमान शिक्षा प्रणाली और परीक्षा प्रणाली बालक को केवल रटना सीखा रही हैं। उसे अधिकाधिक अंकों की दौड़ में प्रतिस्पर्धी मात्र बना रही है । ऐसे में सर्वांगीण विकास की बात अधूरी रह जाती हैं । बालकों की जन्मजात प्रतिभाएं, रुचियाँ एवं नैसर्गिक बचपन इस होड़ाहोडी में उलझ कर रह गये है । भारी भरकम बस्ते के बोझ तले पीसता बचपन अभिभावकों एवं स्कूल की ऊँची अपेक्षाओं की बलि चढ़ रहा है । बाल सुलभ जीवन चर्या के विपरीत उसका जीवन तनावपूर्ण हो रहा है । यह समस्या मनोवैज्ञानिकों ,समाजशास्त्रियों, शिक्षाविदों एवं अभिभावकों के लिए भी चिंता का कारण बनी है।
बस्ता शिक्षा का आधार नहीं है, न ज्ञानार्जन की प्रक्रिया भारी भरकम बस्ते पर अवलम्बित है। अक्सर विद्यालय से छुट्टी के बाद बालक घर जाकर जिस तरह से बस्ते को रखता हैं, पटकता है उससे उसके बालमन पर बस्ते और स्कूल के तनाव को सहजता से समझा जा सकता है।
एक शिक्षक के रूप में मैंने इस समस्या को निकट से अनुभव किया हैं । मैं पिछले 12 वर्षों से बस्ते के बोझ की समस्या को हल करने के लिए प्रयासरत हूं और इस अवधि में समाधान के रूप में दो विकल्प देश भर के शिक्षा प्रेमियों शिक्षाविदों , शिक्षकों और अभिभावकों के सामने रखे हैं। इन प्रयासों को एक बड़ा मुकाम मिला जब कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं NCERT के तत्वावधान में बस्ते की बोझ की समस्या के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ ।मैं भी इस कार्यशाला में आमंत्रित था। इस कार्यशाला में मुझे देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों और अधिकारियों के सामने अपने सुझाव रखने का अवसर मिला।समस्या ही नहीं समाधान की भी चर्चा होनी चाहिए, इस बात का अनुसरण करते हुए मैंने अपने दो सुझाव प्रस्तुत किये ।ये सुझाव देश भर में चर्चा का विषय बने। एक सुझाव को देश के विभिन्न राज्यो द्वारा लागू किया है । साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन ने देश भर में प्राथमिक कक्षाओं के लिए भी इस सुझाव को लागू किया है।
मेरा सुझाव था कि सप्ताह में एक दिन बस्ते की छुट्टी कर दी जाए। देश के विभिन्न भागों में कर्मचारियों के लिए “फाइव डे वीक” की योजना चलती है जिसमें सरकारी कार्यालय सप्ताह में 5 दिन ही खुलते हैं ।
शनिवार को विद्यालयों की छुट्टी भले न करें पर शनिवार को बस्ते की छुट्टी अवश्य कर देनी चाहिए अर्थात बच्चे एवं स्टाफ विद्यालय तो आएँ किंतु बस्ते के बोझ से मुक्त होकर व होमवर्क के दबाव के बिना। यहां सहज कुछ प्रश्न खड़े होते है। पहला तो यह कि यदि बच्चे बस्ता नहीं लाएँगे तो विद्यालय में करेंगे क्या ?
समाधान है सप्ताह में एक दिन बच्चे शरीर, मन, आत्मा का विकास करने वाली शिक्षा ग्रहण करेंगे। अपनी प्रतिभा का विकास करेंगे। शिक्षा शब्द को सार्थकता देंगे। और इस शनिवार को नाम दिया “आनंदवार ” अर्थात शनिवार की शिक्षा बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आनंद उल्लास और उमंग देने वाली भी हो।
यह एक प्रयास हैं बालक को तनाव मुक्त, आनंददायी, सृजनात्मक/प्रयोगात्मक शिक्षा देने का । वर्तमान में चल रही शिक्षा प्रणाली में बिना ज्यादा बदलाव किए, वर्तमान दायरे में रह कर भी शिक्षा को सहज, बोधगम्य, तनाव रहित, व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का विकास करने वाला बनाया जा सकता है। ऐसी अनेक बातें है,विभिन्न प्रकार के विषय है जो क्रिया आधारित है। जिनके लिए किताब या बस्ता ज़रूरी नहीं है। आनंदवार अर्थात शनिवार को भी नियमानुसार कालांश तो लगे पर उनका प्रकार कुछ बदला सा हो। “सादर विचारार्थ” सुझाव स्वरूप यह कालांश योजना प्रस्तुत है जिनके आधार पर दिनभर की गतिविधिया सम्पन्न हो सकती है।बैग फ्री सैटरडे कालांश वार नो बैग डे – शिक्षा में नई चेतना की ओर एक कदम
प्रथम कालांश – “योग, आसन, प्राणायाम व्यायाम”
प्रार्थना सत्र के पश्चात पहला कालांश योग-आसन, प्राणायाम, व्यायाम का रहे। बालक का शरीर स्वस्थ रहेगा, मज़बूत बनेगा तो निश्चित रूप से अधिगम भी प्रभावी होगा। कहा भी गया है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है । प्राणायाम-व्यायाम के संस्कार विद्यार्थी के लिए जीवन पर्यंत काम आएँगे। इस कालांश में कौन से योग व्यायाम करवाना इसके लिए हमारे विभाग मे बहुत से एक्सपर्ट शारीरिक शिक्षक उपलब्ध है उनसे सलाह करके एक कॉमन योग कार्यक्रम तय किया जा सकता है । इसका एक सरल तरीका और है । विश्व योग दिवस का जो प्रोटोकॉल है, वह भी लगभग 40 मिनिट का है, उसका अभ्यास हो सकता है। उसमें सब प्रकार के योग व्यायाम एवं प्राणायाम सम्मिलित हैं । उसे हुबहू भी अपना सकते हैं अथवा कुछ संशोधन करके भी अपना सकते हैं । इस पहले कालांश को शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए काम में लिया जाना चाहिए
दूसरा कालांश – श्रमदान / स्वच्छता / पर्यावरण संरक्षण
इस कालांश में विद्यालय परिसर की स्वच्छता का कार्य, श्रमदान एवं पर्यावरण संबंधित कार्यों का निष्पादन होगा। विद्यालय में वृक्षारोपण, उनकी सार संभाल, सुरक्षा, पानी पिलाना, आवश्यकता होने पर कटाई-छंटाई, कचरा निष्पादन आदि कार्य।
तीसरा कालांश – संगीत अभ्यास
इस कालांश में गीत अभ्यास, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, प्रतिज्ञा, प्रार्थना का अभ्यास हो। कई बार यह देखा जाता है कि वर्षों तक विद्यालय में पढ़ने के बावजूद कुछ छात्रों को प्रार्थना और प्रतिज्ञा भी याद नहीं हो पाते हैं ,यह कालांश उनके लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा ।उपलब्ध हो तो वाद्ययंत्र का अभ्यास और कभी-कभी डांस क्लास (नृत्य अभ्यास) भी इस कालांश में करवाया जा सकता है।
चतुर्थ कालांश – खेलकूद
कुछ खेल इनडोर हो सकते है कुछ आउटडोर हो सकते है। अत्यधिक धूप की स्थिति में कक्षा कक्ष में ही दिमागी खेल, छोटे समूह के खेल इत्यादि हो सकते है। कुल मिलाकर इस खेल कालांश के लिए दो प्रकार की योजनाएं की जानी चाहिए – इंडोर गेम्स और आउटडोर गेम। शारीरिक शिक्षकों की सलाह लेकर ऐसे अलग-अलग खेलों की विस्तृत सूची बनाकर सभी विद्यालयों को देनी चाहिए। बहुत सारे खेल ऐसे होते हैं जिन्हें बिना किसी साधन के भी अथवा न्यूनतम खर्च के संसाधनों के द्वारा खेला जा सकता है जैसे कबड्डी, विभिन्न प्रकार के दौड़े ,रुमाल झपट्टा ,ऊंची कूद लंबी कूद इत्यादि
पंचम कालांश -अभिव्यक्ति कालांश
मध्यावकाश बाद के इस कालांश में कविता,नाटक, वाद-विवाद समूह चर्चा (ग्रुप डिस्कशन) अंत्याक्षरी (हिन्दी- अग्रेंजी) चित्रकला इत्यादि। बस्ता नहीं लाना है तो चित्रकला की कॉपी भी नहीं लानी है।अतः श्यामपट्ट पर, कक्षा कक्ष अथवा बरामदे में फर्श पर चॉक से, मैदान में पेड़ों की छांव तले मिट्टी पर पानी छिड़क कर छोटी लकड़ी से भी चित्र बनाए जा सकते है। मैदान के कंकरों की सहायता से रंगोली भी बनायी जा सकती है।यह प्रयोग हमने किया हुआ है। कंकर को रंग करने के बाद उनसे विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां और रंगोलियां बनाई जा सकती है। इसमें लाभ यह है कि एक बार काम में लेने के बाद इन्हें पुनः काम में लिया जा सकता है जबकि सामान्य रंगोली के कलर दोबारा काम नहीं आ सकते । साथ ही बड़ी कक्षाओं में समूह चर्चा के लिए बहुत सारे विषय छाँट कर उनकी एक विस्तृत सूची बनाकर समस्त विद्यालयों को उपलब्ध करवाई जा सकती है । वर्ष भर में लगभग 40 शनिवार कार्य दिवस के रूप में आएंगे । ऐसे में लगभग 80 विषयों की सूची बनाकर विद्यालय को देनी चाहिए जिनमें से शिक्षक अपनी सुविधानुसार कक्षाओं में समूह चर्चा ले सकें जैसे पर्यावरण संरक्षण, साक्षरता में हमारी भूमिका, सड़क सुरक्षा, हमारे महापुरुष ,आदर्श विद्यार्थी के गुण, मेरा गांव मेरा गौरव, स्वास्थ्य के आधार बिंदु ,भोजन क्या करें कैसे करें …इत्यादि बहुत सारे विषय हो सकतेहैं
षष्ठम कालांश – पुस्तकालय एवं वाचनालय
इस कालांश में सभी कक्षाओं में छात्र संख्या के अनुरूप पुस्तकें वितरित की जाएं। पुस्तकालय प्रभारी संबंधित कक्षाओं के शिक्षकों को पुस्तकें देंगे। इस कालांश में पढ़कर पुनः शिक्षक के माध्यम से पुस्तकालय प्रभारी को जमा करना है। लगभग सभी विद्यालयों में जितने विद्यार्थी हैं इतनी पुस्तकें तो उपलब्ध है ही। उससे ज्यादा भी हो सकती हैअपवाद स्वरूप यदि किन्हीं विद्यालयों में पुस्तकालय में पुस्तक नहीं है तो बैग फ्री सैटरडे के बहाने वहां भी पुस्तकालय विकसित हो जाएगा।किसी न किसी योजना से सभी विद्यालयों में पुस्तकालय तो होना ही चाहिए
सप्तम कालांश -मौखिक गणित एवं भूगोल
यह भी अनेक बार का अनुभूत प्रयोग हैं ,कई बार करवाया है और बच्चों को इसमें बड़ा आनंद आता है । पहाड़ा अभ्यास, हाथ की अंगुलियों पर -टिप्स पर सामान्य गणितीय क्रियाओं का मौखिक अभ्यास, जोड बाकी गुणा भाग, प्रतिशत बट्टा आदि। साथ ही इस कालांश में सामान्य ज्ञान एवं भूगोल को भी पढ़ाया जा सकता है। मानचित्र परिचय, विश्व, भारत, राजस्थान के राजनैतिक, प्राकृतिक मानचित्र का अवलोकन, उसमें अलग अलग स्थानों को , नदी, पर्वत खोजना इत्यादि। (उपलब्ध हो तो इस कालांश में कम्प्यूटर शिक्षण भी हो सकता है।)
अष्टम कालांश – अभिप्रेरणा
बालसभा, बोधकक्षा, नैतिक शिक्षा, कैरीयर गाईडेंस इत्यादि। सप्ताह भर में आने वाले सभी उत्सव एवं महापुरुषों की जयंतियों का आयोजन भी इस कालांश में हो सकता है।
पहला एवं अन्तिम कालांश सामूहिक भी रह सकता है और सुविधानुसार कक्षानुसार भी हो सकता है।
कालांशो के विषय सुझाव स्वरूप उल्लेखित किए है। विभागीय आदेश ही मान्य होंगे। इनका क्रम विद्यालय स्तर पर सुविधानुसार निर्धारित किया जा सकता है, कक्षानुसार बदला जा सकता है।
बैग फ्री सैटरडे का अर्थ यह कतई नहीं है की अध्ययन अध्यापन में कोई कंजूसी हो । पांच दिन जमकर पढाई और छठे दिन शनिवार को व्यक्तित्व विकास, सजृनात्मकता अभिव्यक्ति। बैग फ्री सैटरडे की आर्थात आनंदवार की योजना से हमारी कालांश व्यवस्था में भी बहुत विशेष फर्क नहीं पड़ेगा कारण की सभी कक्षाओं में प्रतिदिन एक न एक पीरियड कला शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा या समाजोपयोगी कार्य के के नाम पर होता है । सप्ताह भर के उन सारे कलांशो को मिलाकर शनिवार के 1 दिन में मर्ज करना, इतनी सी बात है ।विभिन्न विषयों को मिलने वाले अध्ययन अध्यापन के कालांश उतने ही रहेंगे । जितने भी सह शैक्षणिक आयोजन करने हैं रैली इत्यादि निकालनी है वह सभी आयोजन इस बैग फ्री सैटरडे को हो सकते हैं शेष 5 दिन केवल शुद्ध रूप से अध्यापन अध्ययन कार्य ही चले ।
इस प्रकार राज्य सरकार द्वारा बेग फ्री सेटरडे की घोषणा मौजूदा शिक्षा प्रणाली में बिना बदलाव के, बिना किसी वित्तीय भार के इस उपाय से शिक्षा को आनंददायी और विद्यालय परिसर को जीवन निर्माण केन्द्र बना सकने में सक्षम होगी। विद्यार्थियों के सामने भविष्य में आने वाली सामाजिक, स्वास्थ्य एवं नैतिक मूल्यों से जुडी चुनौतियों का सामना करने वाली पीढ़ी के निर्माण में इस विचार की क्रियान्विति महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकती है।
पुनः एक बार शनिवार को बस्ते की छुट्टी करने के लिए अर्थात बैग फ्री सैटरडे लिए राज्य सरकार का , शिक्षा मंत्री जी का बहुत-बहुत आभार, धन्यवाद, अभिनंदन - संदीप जोशी, जालोर
विद्या संबल योजना राजस्थान 2022: ऑनलाइन आवेदन | मानदेय दरे व चयन प्रक्रिया
विद्या संबल योजना (Vidya Sambal Yojna)
Rajasthan Vidya Sambal Yojana Apply Online | विद्या संबल योजना राजस्थान चयन प्रक्रिया | Rajasthan Vidya Sambal Yojana Official Website
राजस्थान सरकार ने राज्य के युवाओ के लिए एक नई योजना की शुरुआत की है, जिसका नाम राजस्थान विद्या संबल योजना है। इस योजना के माध्यम से सरकार का उदेश्ये यह है की फैकल्टी की कमी को दूर किया जाये। इस योजना के तहत स्कूलों / शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों /कॉलेजों/ व्याख्याताओं की भर्ती करने का मुख्य उद्देश्य है। इसके अंतगर्त राज्य सरकार सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भर्ती करेगी। उसी के संबंध में सरकार ने एक ऑनलाइन अधिसूचना भी शुरू कर दी है। आप से निवेदन है की आप हमारे आर्टिकल पर जाएँ आयुष्मान भारत योजना और जो भी उम्मीदवार ऑफिसियल पोर्टल पर जा सकते हैं और विद्या संबल योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
Rajasthan Vidya Sambal Yojana 2022
राज्य सरकार ने राज्य के नागरिको के लिए विद्या संबल योजना निकाली है। इस योजना के तहत सरकार का उद्देश्य यह है कि युवाओ को रोजगार देना और फैकल्टी को कम करना है। विद्या संबल योजना 2022 के अंतगर्त स्कूलों / शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों /कॉलेजों / व्याख्याताओं की भर्ती करना है। इसी के साथ सरकार द्वारा अधिसूचना भी आरम्भ कर दी गयी है। तो दोस्तों आज हम आपको विद्या संबल योजना से सम्बंधित सभी जानकारी बताने जा रहे है। जैसे की इस योजना के उदेश्ये क्या है, इसके लाभ क्या है, विद्या संबल योजना के कौन कौन से जरूरी दस्तावेज है, इस योजना के पंजीकरण करने की प्रकिर्या क्या है, आदि आप से अनुरोध है, की आप हमारे लेख को ध्यान से पूरा पढ़े।
विद्या संबल योजना राजस्थान का उद्देश्य
राजस्थान सरकार द्वारा संबल योजना की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति करना है। राज्य के कई शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी देखने को मिली है, जिससे उन शिक्षण संस्थानों में बच्चो के पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पता था। इस योजना के माध्यम से गेस्ट फैकल्टी के रूप में शिक्षकों की नियुक्ति से राज्य के शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। यह योजना निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने में कारगार सिद्ध होगी। इसके आलावा Vidya Sambal Yojana Rajasthan के कार्यान्वयन से बेरोजगार अभ्यार्थियों को भी रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। अब राज्य में किसी भी शिक्षण संसथान में शिक्षकों की कमी नहीं होगी।
योजना के अंतर्गत मानदेय
पद
कक्षा
प्रति घंटा मानदेय
अधिकतम महावार मानदेय
अध्यापक लेवल 1 और 2
पहली से आठवीं कक्षा
300 रुपए
21000रुपए
वरिष्ट अध्यापक
9 से 10 कक्षा
350 रुपए
25000रुपए
प्राध्यापक
11वीं और 12वीं कक्षा
400 रुपए
30000रुपए
शारीरिक शिक्षा अनुदेशक
—-
300 रुपए
21000रुपए
प्रयोगशाला सहायक
—-
300 रुपए
21000रुपए
विद्या संबल योजना के अंतर्गत भरे जाएंगे रिक्त पद
विद्या संबल योजना के माध्यम से महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम तथा अन्य इंग्लिश मीडियम स्कूलों के पद भरे जायेंगे। जिसके अंतर्गत अध्यापक, वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता पद सम्मिलित है। इस योजना के अंतर्गत शिक्षकों को कमी की पूर्ति करने के लिए इस स्कूलों में अध्यापको को नियुक्त किया जायेगा। इसके अतिरिक्त शिक्षा निदेशालय द्वारा आवेदन प्राप्त करने की अवधि और नियुक्ति का कैलेंडर जारी किये जाने की घोषणा इस योजना के तहत की गई है, इसके बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया प्रारम्भ की जाएगी। इसके साथ ही इसमें उपलब्ध रिक्त पदों को भरने हेतु साक्षरता प्रक्रिया का भी आयोजन किया जायेगा, इसके अतिरिक्त विद्या संबल योजना के अंतर्गत अध्यापको की भर्ती गेस्ट फेकल्टी के रूप में भी की जाएगी। इस योजना के तहत इन सभी आधार पर अध्यापको की नियुक्ति की जाएगी:-
विद्या संबल योजना के माध्यम से ऐसे पद जिन पर साक्षरता की प्रक्रिया कम से कम एक बार की गई हो लेकिन फिर भी पदों की पूर्ति नहीं हुई हो तो उन रिक्त पदों पर ”गेस्ट फेकल्टी” शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
इस योजना के अंतर्गत गेस्ट फेकल्टी के रूप में आवेदन सिर्फ निजी अभ्यर्थी कर सकते है, या फिर सेवानिवृत्त शिक्षक आवेदन कर सकते है।
इसके अलावा रिटायर अध्यापक द्वारा रिटायरमेंट के वक्त जिस भी पद पर कार्य किया जा रहा था, वह उसी पद हेतु गेस्ट फैकल्टी के तौर पर आवेदन कर सकते है।
रिटायर अध्यापको के लिए इस योजना के अंतर्गत आरईईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त शिक्षक लेवल 1 और 2 के लिए नहीं की गई है।
सिर्फ 65 साल की उम्र तक ही रिटायर अध्यापक गेस्ट फेकल्टी के रूप में कार्य कर सकते है, 65 वर्ष की आयु के पश्चात शिक्षक कार्य नहीं कर सकते।
विद्या संबल योजना के अंतर्गत की जाने वाली शिक्षकों की नियुक्ति प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में की जाएगी।
समिति में संबंधित सीबीईओ ब्लॉक के अन्य महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में से 2 वर्ष सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी, इस स्थिति में जब कोई भी वरिष्ठ शिक्षक मौजूद नहीं होंगे।
इसके अतिरिक्त अगर किसी भी खाली पद पर रिक्तियों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो इस स्थिति में वरीयता सूची तैयार की जाएगी और अध्यापको की नियुक्ति मेरिट के आधार पर की जाएगी।
चयन किये गए सभी अध्यापको को गेस्ट फैकल्टी के पद हेतु प्राप्त हुए प्रस्ताव पर 7 दिन के अंदर सहमति प्रदान करनी होगी तथा शिक्षण संस्थान की ओर से तय किए गए समय पर उन्हें कार्य करने आना होगा।
अगर अध्यापक बीएड उत्तीर्ण तो वह अध्यापक लेवल 2 तथा बीएसटीसी डीएलएड उत्तीर्ण है तो अध्यापक लेवल 1 के लिए पात्र होंगे।
पदवार न्यूनतम वांछित योग्यता
क्र.सं.
पदनाम
शैक्षिक अर्हता
प्रशैक्षिक अर्हता
1
व्याख्याता (जीव विज्ञान)
प्राणी विज्ञान / वनस्पति विज्ञान / जीव-प्रौद्योगिकी में वि.अ.आ. द्वारा मान्यता प्राप्त अंग्रेजी स्नातकोत्तर या समतुल्य परीक्षा परन्तु उन्होंने स्नातक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम में वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान का अध्ययन किया हो
B.Ed
2
व्याख्याता (भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित)
सुसंगत विषय में विश्व विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त अंग्रेजी माध्यम में स्नातकोत्तर अथवा समतुल्य परीक्षा
B.Ed
3
i. वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, तृतीय भाषा)
वैकल्पिक विषय के रूप में सम्बन्धित विषय के साथ अंग्रेजी माध्यम में स्नातक या समतुल्य परीक्षा
B.Ed
ii. वरिष्ठ अध्यापक (विज्ञान)
भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, प्राणी विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी जैव रसायन विज्ञान में से कम से कम दो विषय वैकल्पिक विषयों के रूप में लेकर अंग्रेजी माध्यम में स्नातक या समतुल्य परीक्षा
B.Ed
iii. वरिष्ठ अध्यापक (सामाजिक विज्ञान)
इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र, लोक प्रशासन, दर्शन शास्त्र में से कम से कम दो विषय वैकल्पिक विषयों के रूप में लेकर अंग्रेजी माध्यम में स्नातक या समतुल्य परीक्षा
B.Ed
4
अध्यापक लेवल द्वितीय (अंग्रेजी / गणित)
न्यूनतम 50% अंको सहित गणित / अंग्रेजी (संबंधित पद हेतु) वैकल्पिक विषय के साथ अंग्रेजी माध्यम में स्नातक
B.Ed / D.EIe.Ed + न्यूनतम अंको के साथ रीट लेवल द्वितीय परीक्षा उत्तीर्ण जिसकी वैद्यता अवधि समाप्त नहीं की गई हो।
5
अध्यापक लेवल प्रथम
50% अंको सहित उमावि / समकक्ष परीक्षा अंग्रेजी माध्यम में उत्तीर्ण
D.Ele.Ed + न्यूनतम अंको के साथ रीट लेवल प्रथम परीक्षा उत्तीर्ण जिसकी वैद्यता अवधि समाप्त नहीं की गई हो।
6
शारीरिक शिक्षा शिक्षक
किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से अंग्रेजी माध्यम में सीनियर सैकण्डरी अथवा समतुल्य परीक्षा
C.P.Ed. or D.P.Ed. or B.P.Ed.
7
पुस्तकालयाध्यक्ष
किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से अंग्रेजी माध्यम में सीनियर सैकण्डरी अथवा समतुल्य परीक्षा
पुस्तकालय विज्ञान में प्रमाण-पत्र / पुस्तकालय और सूचना विज्ञान में स्नातक/ पुस्तकालय और सूचना विज्ञान डिप्लोमा में
8
प्रयोगशाला सहायक
भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन विज्ञान, गणित में से कम से कम तीन विषय वैकल्पिक विषयों के रूप में लेकर अंग्रेजी माध्यम में सीनियर सैकण्डरी या समतुल्य परीक्षा
–
Overview of Vidya Sambal Yojana
नाम
विद्या संबल योजना
आरम्भ की गई
राजस्थान सरकार द्वारा
लाभार्थी
राज्य के लोग
आवेदन की प्रक्रिया
ऑनलाइन
उद्देश्य
राज्य के नागरिको को सहायता पहुचना
प्रथम श्रेणी शिक्षक
प्रति दिन 400 रुपये और अधिकतम 30,000 रुपये प्रति माह मिलेगा
न्यूनतम राशि 300 रुपये और अधिकतम राशि 21,00 रुपये है
वित्तीय ग्रेड शिक्षक
रुपए 350 प्रति दिन और अधिकतम रुपए 25,000 प्रति माह
प्रथम श्रेणी शिक्षक
प्रति दिन 400 रुपये और अधिकतम 30,000 रुपये प्रति माह मिलेगा
प्रयोगशाला सहायता
रुपए 21,000
प्रशिक्षक
रुपए 21,000
सहेयक प्रोफेसर
रुपये प्रति दिन 80 और अधिकतम रुपये 45000
कॉलेजों में शिक्षक
12000 रुपये प्रतिदिन और 60000 रुपये
विद्या संबल योजना के तहत वेतन विवरण
Grade -1
11th to 12th Per Hour
Rs 400
Per Month
Rs 30,000
Grade-2
9th to 10th Per Hour
Rs 350
Per Month
Rs 25,000
Grade-3
1st to 8th Per Hour
Rs 300
Per Month
Rs 21,000
Laboratory Helper
Lab Tech. Per Hour
Rs 300
Per Month
Rs 21,000
Instructor
Instructor Per Month
Rs 300
Per Month
Rs 21,000
राजस्थान विद्या संबल योजना चयन प्रक्रिया
राजस्थान विद्या संबल योजना के तहत संस्था प्रधान द्वारा संबंधित सेवा नियमों में अंकित योग्यता के अनुसार अपने स्तर पर संस्था में रिक्त चल रहे पद पर नियुक्ति की जा सकती है।
सरकार द्वारा इस योजना के लिए जिले में एक जिला स्तरीय कमेटी का भी गठन किये जाने की घोषणा की गई है, इस कमेटी के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होंगे। इसके अतिरिक्त इस कमेटी के माध्यम से भी गेस्ट फेकल्टी का चुनाव किया जा सकेगा।
पूर्व जिला मुख्यालय पर शिक्षा सत्र आरम्भ होने के पश्चात समिति द्वारा सार्वजनिक सूचना तैयार कर निर्धारित योग्यता रखने वाले सभी अध्यापको के आवेदनों को आमंत्रित किया जायेगा।
इसके अलावा निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार वरीयता सूची को तैयार किया जायेगा और इसी सूची के अनुसार गेस्ट फेकल्टी का चयन भी किया जायेगा।
इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा घोषणा की गई है कि रिक्त पदों के विरुद्ध ही गेस्ट फैकल्टी के आवेदन स्वीकृत किये जायेंगे।
इसके तहत गेस्ट फैकेल्टी के कामो की मॉनिटरिंग भी की जाएगी तथा संतोषजनक कार्य सत्यापन के आधार पर ही उनको भुगतान इसका भुगतान किया जायेगा।
गेस्ट फैकेल्टी के सभी रिक्त पदों की पूर्ति हो जाने के पश्चात इसके अंतर्गत अन्य आवेदन नहीं आमंत्रित किए जाएंगे।
इस योजना के अंतर्गत कोचिंग हेतु संस्थान के प्रमुख बजट के प्रावधान अनुसार सीधे अपने स्तर पर भी भुगतान किया जा सकता है।
विद्या संबल योजना 2022 के लाभ व विशेषताए
हर संस्थान में सत्र की शुरुआत में, वे शिक्षकों के रिक्त पदों की गणना करेंगे, उसके बाद रिक्त पदों की ओर से भर्ती का आयोजन किया जाएगा।
इसके अलावा, जिला कलेक्टर या चयनित प्राधिकरण गैस शिक्षकों की भर्ती करेगा।
जब शैक्षणिक वर्ष शुरू होता है, तो समिति जिला मुख्यालय पर सूचित करेगी और फिर आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। अतिथि शिक्षकों का चयन उनकी योग्यता, अंकों और उनके अनुभव के आधार पर होता है।
संबंधित विभाग के लिए जिला स्तर पर योग्य उम्मीदवारों के लिए एक पैनल तैयार किया जाता है। इस पैनल में तीन उम्मीदवार हैं जो प्रत्येक रिक्ति के लिए तैयार हैं। इस पैनल को ब्लॉक वार, विषयवार और श्रेणीवार चुना जाएगा।
अतिथि शिक्षकों की सुविधा लें, उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा।
शिक्षकों के काम की निगरानी, और उनके प्रदर्शन की निगरानी के बाद तदनुसार नकद भुगतान किया जाएगा।
जब अतिथि शिक्षकों के सभी रिक्त पद भरे जाएंगे तो भर्ती प्रक्रिया अपने आप रुक जाएगी।
चूंकि छात्रावासों में शिक्षक का पद तैयार नहीं है, इसलिए छात्रावासों में सम्मानित विषय की कोचिंग के लिए कोई अनिवार्य पद नहीं है।
कोचिंग के लिए संस्थान के प्रमुख बजट प्रावधान के अनुसार सीधे अपने स्तर पर भुगतान कर सकते हैं।
राजस्थान विद्या संबल योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदक राजस्थान का स्थाई निवासी होना चाहिए।
निवास प्रमाण पत्र
जाति प्रमाण पत्र
शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र
शिक्षक एवं प्रशिक्षण दस्तावेज
विकलांगता प्रमाण पत्र यदि लागू हो तो
भूमि प्रमाण पत्र
आधार कार्ड
पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
मोबाइल नंबर
विधायक संबल योजना अतिथि संकाय भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
सभी आवेदक ऑफिसियल पोर्टल पर जा सकते हैं और राजस्थान अतिथि संकाय योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
सबसे पहले आवेदक को आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर विद्या संबल योजना के अंतगर्त पंजीकरण पत्र डाउनलोड करना होगा।
इसके बाद आपको को व्यक्तिगत विवरण, संपर्क विवरण, पता विवरण, शैक्षिक योग्यता, प्रशिक्षण आदि भरना होगा।
आवेदक को ऑनलाइन पंजीकरण पत्र के साथ जरूरी दस्तावेज, शपथ पत्र संलग्न करना होगा।
इसके बाद संबंधित विभाग को ऑनलाइन पंजीकरण करें।
राजस्थान विद्या संबल योजना चयन प्रक्रिया
विद्या संबल योजना के माध्यम से संस्था प्रधान द्वारा अपने स्तर पर संस्था में रिक्त चल रहे पद पर संबंधित सेवा नियमों में अंकित योग्यता के अनुसार राजस्थान नियुक्ति की जा सकती।
सभी पद भरे जाने के पश्चात गेस्ट फैकेल्टी के लिए और आवेदन नहीं स्वीकार किए जाएंगे।
संस्थान, कोचिंग के लिए प्रमुख बजट प्रावधान के अनुसार सीधे अपने स्तर पर भी भुगतान राशि अदा कर सकता है।
इन सब के अतिरिक्त जिले में एक जिला स्तरीय कमेटी का भी गठन किया जाएगा। जिसका अध्यक्ष जिला कलेक्टर होगा। गठित कमेटी के द्वारा भी गेस्ट फैकल्टी का चयन किया जा सकेगा।
शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद पूर्व जिला मुख्यालय पर समिति द्वारा सार्वजनिक सूचना तैयार कर निर्धारित योग्यता रखने वाले सभी अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
सत्र पूर्ण होने के पश्चात वरीयता सूची निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। तथा इस सूची के आधार पर ही गेस्ट फैकल्टी का चयन किया जाएगा।
गेस्ट फैकल्टी के आवेदन केवल उन रिक्त पदों के विरुद्ध ही लिए जाएंगे जो रिक्त है।
गेस्ट फैकेल्टी के कार्य की मॉनिटरिंग की जाएगी एवं कार्य सही होने पर सत्यापन के आधार पर ही गेस्ट फैकेल्टी को भुगतान किया जाएगा।
पूछे गए प्रश्नों के उत्तर
विद्या संबल योजना शुरू करने के लिए राजस्थान सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
राजस्थान सरकार ने गार्ड फैकल्टी भर्ती के माध्यम से शिक्षक, प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर के सभी रिक्त पदों को भरने के लिए यह योजना शुरू की है।
विद्या संबल योजना के तहत वेतन क्या है?
गार्ड संकाय के लिए वेतन प्रति घंटा भुगतान किया जाएगा और यह उपरोक्त पोस्ट में अच्छी तरह से समझाया गया है।
क्या युवा संबल योजना और विद्या संबल योजना में कोई समानता है?
नहीं! ये दोनों योजनाएं एक-दूसरे से अलग हैं।
इस योजना में अतिथि दोष के लिए चयन मानदंड क्या है?
इस योजना के तहत, अतिथि संकाय का चयन आवेदक की शिक्षा योग्यता, अंकों और व्यक्तिगत साक्षात्कार में प्रदर्शन पर आधारित है।
कार्यालय निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर
क्रमांक :–शिविरा–माध्य/संस्था/ एफ-1ए / गेस्ट फेकलटी/12226/2021/79-83 दिनांक – 17/02/2022
समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी
विषय : “विद्या संबल योजना” लागू किये जाने सम्बन्धी बजट घोषणा संख्या 54.0.54 की क्रियान्विति के सम्बन्ध में। प्रसंग : शासन का पत्रांक प.17 ( 23 ) शिक्षा – 2 / 2021 जयपुर दिनांक 30/06/2021 एवं प.17 (50) शिक्षा-2/2021 दिनांक 24/01/22
उपरोक्त विषयान्तर्गत माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा वर्ष 2021-22 में की गई बजट घोषणा संख्या 54.0.05 “राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों-विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में विषय विशेषज्ञ अनुभवी व्यक्तियों को गैस्ट फैकल्टी के रूप में लेने के लिए विद्या संबल योजना” लागू की जावेगी की क्रियान्विति हेतु वित्त (सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम) विभाग द्वारा जारी परिपत्र दिनांक 30/03/2021 के द्वारा दिशा-निर्देश जारी किये गये है।
विभाग में शिक्षण कार्यों में शिक्षकों / प्रशिक्षकों / प्रयोगशाला सहायकों के रिक्त पद होने के कारण नियमित अध्यापन कार्य में व्यवधान उत्पन्न होता है, अतः विद्यार्थी हित को ध्यान में रखते हुए संस्थानों / महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम राजकीय विद्यालयों में अध्यापन कार्य को सुचारू बनाने के लिए “विद्या संबल योजना लागू की जा रही है, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला मुख्यालय पर सम्बन्धित जिले के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को एतद् द्वारा नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाकर निम्नांकित सामान्य निर्देश जारी किए जाते है:
गैस्ट फैकल्टी केवल स्वीकृत रिक्त पद के विरूद्ध ली जा सकेगी।
सम्बन्धित सेवा नियमों में अंकित योग्यता आदि की पात्रता रखने वाले सेवानिवृत कार्मिक को गैस्ट फैकल्टी के रूप में लगाया जा सकेगा।
गैस्ट फैकल्टी हेतु देय मानदेय की दरें: विद्यालय / प्रशिक्षण संस्थान
पद (अध्यापक / प्रशिक्षक)
कक्षा
प्रति घंटा मानदेय
अधिकतम मासिक मानदेय
ग्रेड-III
1 से 8
300/
21000/-
ग्रेड-II
9 से 10
350/
25000/-
ग्रेड-I
11 से 12
400/
30000/-
शारीरिक प्रशिक्षक अनुदेशक
–
300/
21000/-
प्रयोगशाला सहायक
–
300/
21000/-
रिक्त पद भरे जाने पर उपरोक्त व्यवस्था स्वतः समाप्त समझी जावेगी।
ब्लॉक जिला शिक्षा अधिकारी अधीनस्थ संस्थाओं / महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम राजकीय विद्यालयों में संवर्गवार एवं विद्यालयवार गैस्ट फैकल्टी की आवश्यकता का आकलन कर प्रस्ताव मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को उपलब्ध कराएगें।
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी गैस्ट फैकल्टी हेतु रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु ब्लॉक जिला शिक्षा अधिकारियों से प्राप्त सूचना को समेकित कर संवर्ग वार रिक्त पदों के अनुरूप सेवा निवृत कार्मिकों को संविदा पर नितांत अस्थाई तौर पर सत्रांत तक अथवा पद भरने तक नियुक्ति हेतु सूचना जारी कर आवेदन आमंत्रित करेगें एवं प्राप्त आवेदन पत्रों को संवर्गवार समेकित कर व्याख्याता एवं समकक्ष पद पर नियुक्ति के पात्र कार्मिकों की संविदा नियुक्ति हेतु माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर को, वरिष्ठ अध्यापक एवं समकक्ष पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु सम्बन्धित संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा को एवं तृतीय श्रेणी अध्यापक एवं समकक्ष पदों पर संविदा नियुक्ति हेतु प्राप्त आवेदनों को जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक को नियुक्ति हेतु प्रेषित करेंगे।
गैस्ट फैकल्टी के कार्य की समुचित मॉनिटरिंग मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा सुनिश्चित की जावेगी।
संस्था प्रधान द्वारा संतोषजनक कार्य सत्यापन के आधार पर भुगतान की कार्यवाही की जावेगी। गैस्ट फैकल्टी के रूप में रखे जाने वाले कार्मिकों को भुगतान सम्बन्धित विद्यालय में 01-संवेतन उपमद में उपलब्ध रिक्त पद के बजट प्रावधान से किया जावेगा।
आरक्षण के संबंध में कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करावें
एक ही पद हेतु एक से अधिक आवेदन पत्र प्राप्त होने पर संविदा नियुक्ति की वरियता आवेदक द्वारा प्रस्तुत गत 2 वर्षों के परीक्षा परीणाम एवं सेवा निवृत न्यूनतम आयु के प्रार्थी को प्राथमिकता दी जावेगी।
विद्या संबल योजनान्तर्गत गैस्ट फैकल्टी हेतु सेवा निवृत राजकीय कार्मिक के आवेदन के क्रम में
नितांत अस्थाई तौर पर सत्रांत तक अथवा पद भरने तक की अवधि के लिए संविदा नियुक्ति हेतु सेवा निवृत राजकीय कार्मिकों से आवेदन पत्र वांछित रिक्त पदों हेतु आमंत्रित किये जा रहे है:
इच्छुक आवेदक रिक्त पदों अनुसार संविदा नियुक्ति हेतु पृथक-पृथक (पदवार / विद्यालयवार) आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
आवेदन हेतु सत्रांत समाप्ति की तिथि की गणना अनुसार 65 वर्ष से कम उम्र के सेवा निवृत कार्मिक ही पात्र होंगे।
आवेदन हेतु संवर्गवार / विद्यालयवार जिले में रिक्त पदों का विवरण मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किया जावेगा।
महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में आवेदन हेतु महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के निर्धारित मापदण्ड की योग्यता वाले प्रार्थी ही आवेदन कर सकेंगें।
आवेदन हेतु अन्तिम तिथि सूचना प्रकाशित होने के 05 दिवस तक रहेगी। 6. आवेदन सम्बन्धित विद्यालय में ही प्रस्तुत किया जावेगा।
अन्तिम तिथि पश्चात आवेदन स्वीकार नहीं किया जावेगा। 8. आवेदक द्वारा जिस पद हेतु संविदा नियुक्ति हेतु आवेदन किया जा रहा है, उसके साथ निम्नांकित दस्तावेज संलग्न किये जाने है: (अ) निर्धारित आवेदन पत्र (ब) निर्धारित शपथ पत्र (स) सेवानिवृति के पूर्व के दो वर्षों के परीक्षा परीणाम की प्रमाणित प्रति (द) आवेदित पद हेतु निर्धारित योग्यता के प्रमाण पत्र
राजस्थान में शिक्षा के बढ़ते कदम : क्रमवार जानकारी RKSMBK STEP WISE WORK PLAN
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पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों के लिए फीडबैक form
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यह फीडबैक फॉर्म केवल भविष्य में प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए एकत्र किया जाता है। कृपया प्रशिक्षण के बारे में पूरी तरह से स्पष्ट प्रतिक्रिया साझा करें।
RKSMBK – Panchayat Trainings – Teacher Feedback Form
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NPS – NSDL Account Se Paisa Kaise Nikalen एनपीएस – एनएसडीएल अकाउंट से मेच्योरिटी से पहले 25% पैसा कैसे निकाले
NPS Withdrawal Latest News Update: पेंशन पाने वाले कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम के सब्सक्राइबर्स को अपना पूरा पैसा निकालने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. PFRDA ने कहा है कि वो सब्सक्राइबर्स जिनका कुल पेंशन कॉर्पस 5 लाख रुपये या इससे कम है, वो बिना एन्युटी खरीदे अपना पूरा पैसा निकाल सकते हैं|
NPS से निकाल सकते हैं पूरा पैसा?
पेंशन रेगुलेटर PFRDA के अनुसार, जिन सब्सक्राइबर के परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट में इकट्ठा पेंशन राशि 5 लाख रुपये या इससे कम है या प्राधिकरण की तय सीमा के मुताबिक है, ऐसे सब्सक्राइबर्स के पास बिना एन्यूटी खरीदे ही पूरी पेंशन रकम निकालने का विकल्प होगा. यहां एन्यूटी खरीदने का मतलब इंश्योरेंस कंपनियों से पेंशन प्लान खरीदने से है|
NPS – NSDL अकाउन्ट से मेच्योरिटी से पहले पैसा निकालने के नियम, कौन सा फार्म भरना होगा आदि सभी जानकारी विस्तृत रूप से नीचे अवश्य देखें NPS – NSDL Account Se Maturity Se Pahle Paisa Kaise Nikalen
NPS Withdrawal Rules In Hindi – National Pension Scheme India – नेशनल पेंशन स्कीम NPS-NSDL से शासकीय कर्मचारी या अंश धारक चाहे तो रिटायरमेंट से पहले कुछ नियम शर्तों के साथ अपना अकाउंट से पैसा निकाल सकता है। पेंशन कोष नियामक पीएफआरडीए PFRDA ने राष्ट्रिय पेंशन प्रणाली (एनपीएस )को आसान बनाने के लिए अंशधारकों आंशिक निकासी Partial Withdrawal की छूट दी है। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण PFRDA ने परिपत्र जारी कर कहा की जिन NPS अंश धारकों ने 3 वर्ष तक योगदान दिया है, वे कुछ निर्धारित खर्चों के लिए कुल कोष से 25 प्रतिशत तक की राशि निकाल सकते है।
आपको बता दें कि NPS सब्सक्राइबर्स तीन साल बाद ही अपने अकाउंट से पैसा निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए भी कुछ शर्तें तय हैं. मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालने पर ये रकम कुल योगदान का 25 परसेंट से ज्यादा नहीं हो सकती है. ये आंशिक निकासी बच्चों की पढ़ाई, बच्चों की शादी, घर खरीदने या किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए की जा सकती है. NPS सब्सक्राइबर्स पूरी अवधि के दौरान तीन बार ही इस तरह की आंशिक निकासी कर सकते हैं. एक बात ध्यान देने वाली है कि ये सभी निकासियां इनकम टैक्स नियमों के तहत बिल्कुल टैक्स फ्री होती है.
सब्सक्राइबर्स का पेंशन का अधिकार हो जाएगा खत्म
हालांकि PFRDA ने ये बताया है कि इसके बाद NPS के तहत या सरकार या नियोक्ता से किसी भी पेंशन या अन्य राशि प्राप्त करने के लिए ऐसे ग्राहक का अधिकार समाप्त हो जाएगा. इसके अलावा पेंशन रेगुलेटर ने सब्सक्राइबर्स को एक और राहत भी दी है. गैजेट नोटिफिकेशन में PFRDA ने कहा है कि NPS में मैच्योरिटी से पहले एकमुश्त निकासी लिमिट को बढ़ाया गया है, पहले सब्सक्राइबर्स 1 लाख रुपये निकाल सकते थे, अब 2.5 लाख रुपये निकाल सकेंगे|
NPS में एंट्री-एग्जिट की उम्र बढ़ाई
पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में एंट्री के लिए उम्र की सीमा को 65 साल से बढ़ाकर 70 साल कर दिया है, यानी कोई 70 साल का व्यक्ति भी NPS में निवेश की शुरुआत कर सकता है. जबकि एग्जिट लिमिट को PFRDA ने 75 साल कर दिया है. यानी वो अब NPS खाता 75 साल की उम्र तक चालू रख सकते हैं. बाकी सभी दूसरे सब्सक्राइबर्स के लिए मैच्योरिटी की सीमा 70 साल है|
अपने खाते की रिपोर्ट जनरेट करके इसका अवलोकन करें :
सबसे पहले अपने NPS खाते में लॉग इन करें |
इसके लिए दिए गए लॉग इन बटन पर क्लिक करें |
अब नयी विंडो में अपने PRAN नंबर एवं पासवर्ड डालकर एवं कैप्त्चा भरकर लॉग इन करें |
अब Demographic Changes टैब में FATCA Self Declaration पर क्लिक करें| भरा हुआ होने पर FATCA/CRS certification already done लिखा आएगा |
अन्यथा आपको FATCA Self Declaration भरकर ऑनलाइन ही सबमिट करना होगा | बिना FATCA Self Declaration के किसी भी प्रकार की निकासी संभव नहीं होगी|
अब Exit from NPS टैब में Initiate Withdrawal Request पर क्लिक करें|
अब जो स्क्रीन प्रदर्शित होगी उसमें Total Valuation as on Date के सामने आपके अकाउंट में जमा कुल राशि प्रदर्शित होगी| या तो इसका स्क्रीनशॉट ले लें अथवा इस राशि को कागज़ पर लिख लें | NPS से राशि की निकासी कब कर सकते हैं ?
पीएफआरडीए (एनपीएस के अंतर्गत निकास और आहरण) विनियम, 2015 के अनुसार अभिदाता निम्नलिखित परिस्थितियों में एनपीएस से निकास कर सकता हैः
सूपरैन्यूएशन पर : जब अभिदाता सूपरैन्यूएशन / 60 वर्षकी आयु प्राप्तकर लेता है तो उसे संचित पेंशन राशिमें से कम से कम 40% भाग का उपयोग वार्षिकीकी खरीदके लिए करना होगा जो उसे एक नियमित मासिक पेंशन प्रदान करेगी। बाकि शेषनिधियोंका आरहरण एक मुश्तरूप में किया जा सकता है। यदि कुल संचित पेंशन राशि 5 लाख रूपएया उससे कम है तो अभिदाता 100% राशिके एक मुश्त आहरणके विकल्प का चयन कर सकता है। समय पूर्व निकास:एनपीएस से समय पूर्व निकास (सूपरैन्यूएशन/60 वर्षकी आयु प्राप्त करने से पूर्व निकास) के मामलेमें अभिदाताको संचित पेंशन निधिके कम से कम 80 भाग का उपयोग वार्षिकीकी खरीदके लिए करना पड़ेगा जो उसे नियमित मासिक पेंशन प्रदान करेगा। शेष राशिका आहरण एक मुश्त रूपमें किया जा सकता है। हालांकि, आप केवल 5 वर्ष पूरे करने पर भी एनपीएससे निकास कर सकते है। यदि कुल राशि 2.5 लाख रूपए या उससे कम है तो अभिदाता 100% राशिके एक मुश्त आहरणके विकल्प का चयन कर सकता है। अभिदाताकी मृत्यु होने पर – समग्र संचित पेंशन निधि (100%) का भुगतान अभिदाताके नामिति/कानूनी हकदार को कर दिया जाएगा।
NPS अंशधारक अपने सेवा काल में कितने बार राशि आहरण कर सकता है उसकी जानकारी हेतु इसे देखें-
Purpose of withdrawal निम्न कारणों से आप NPS Account से राशि निकाल सकते है – NPS-NSDL अंश धारक नीचे दिए कारणों के वजह से ही राशि निकाली जा सकती है –
NPS नेशनल पेंशन स्कीम के तहत अंशधारक कम से कम 3 वर्ष तक अंशदान जमा कर चूका हो।
बच्चों की उच्च शिक्षा एवं शादी हेतु।
दुघटना/गंभीर एक्सीडेंट होने पर
कैंसर होने पर
गुर्दा ख़राब होने पर
लकवा होने पर
ह्रदय सम्बन्धी सर्जरी,रोग के लिए
कोमा
अंधत्व/अँधा होने पर
स्ट्रोक एवं अन्य गंभीर बीमारी होने पर
Portial Withdrawal Process Pension System एनपीएस खाता से राशि निकालने की प्रक्रिया – NPS-NSDL अकाउंट से राशि निकालने के लिए नीचे दिए फार्म को भरना होगा और निम्न दस्तावेज दस्तावेज की आवश्यकता होगी सम्पूर्ण जानकारी नीचे देखें-
निम्न फार्म भरना होगा-
NPS खाता से राशि,जमा अंशदान निकालने के लिए FORM -302 भरना होगा। इस फार्म को 60 वर्ष से कम आयु वाले अंशधारक/कर्मचारी भर सकते है। इस फॉर्म में निजी जानकारी ,एनपीएस खाते की संख्या,निकासी का ब्यौरा,एन्युटी का विकल्प और बैंक विवरण भरना होगा। अंशदाता के मृत्यु के मामले में नॉमिनेशन के लिए फार्म में एनेक्शचर जुड़ा होता है।
निम्न दस्तावेज की होगी आवश्यकता-
NPS से राशि निकालने के फॉर्म के साथ निम्न दस्तावेज को संलग्न करना होगा –
पैन कार्ड की प्रति
कैंसल्ड चेक
NPS से मिली रकम की प्राप्ति को स्वीकार करने वाली रसीद।
पहचान एवं पते का सबूत।
NPS Portial Withdrawal Online Process ऑनलाइन राशि आहरण की सुविधा-
ऑनलाइन आहरण हेतु निकासी के लिए सब्सक्राइबर अनुरोध कर सकते है। इस अनुरोध को पीओपी सेवा प्रदाता सत्यापित करते है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में अपने आवेदन की प्रोसेस भी चेक कर सकते है। प्रोसेस पूरा होने पर अंशदाता के खाते में एकमुश्त रकम डाल दी जाती है।
कितनी राशि आहरण / Withdrawal कर सकते है –
सब्सक्राइबर अपने जमा अंशदान का 25 प्रतिशत तक राशि निकाल सकते है। उक्त राशि की निकासी हेतु NPS-NSDL अकाउंट की अवधि कम से कम 3 वर्ष से अधिक होना चाहिए। NPS खाता धारक सम्पूर्ण सेवा काल में तीन बार तक आंशिक राशि आहरण कर सकता है।
NPS फंड से निकासी की शर्तें
सब्सक्राइबर को NPS कम से कम 3 साल के लिए होना चाहिए। निकासी राशि सब्सक्राइबर द्वारा किए गए योगदान के 25% से अधिक नहीं होगी।सदस्यता के पूरे कार्यकाल के दौरान निकासी अधिकतम 3 बार हो सकती है। किसी खास वजहों से निकासी की अनुमति दी जाती है, उदाहरण के लिए बच्चों की उच्च शिक्षा, बच्चों की शादी, क्रिटिकल बीमारियों के इलाज के लिए (निर्दिष्ट शर्तों में) , घर की खरीद या निर्माण के लिए।
NPS से आंशिक राशि की निकासी का धन प्राप्त करें :
25% की राशि की निकासी के लिए Transact Online टैब में Withdrawal मेन्यु में Partial Withdrawal from Tier 1 पर क्लिक करें |
यहाँ पर आपका PRAN नंबर लिखा आएगा| अब SUBMIT पर क्लिक करें |
अब प्रतिशत में 25%चुनें |
Reason में निकासी का कारण चुनें और सबमिट करें | (कारण ऊपर दर्शाए हुए हैं उनमे से कोई एक कारण पूछा जाएगा|)
अब समस्त डिटेल्स देखें और Confirm बटन पर क्लिक करें|
अब घोषणापत्र को टिक्क लगाकर स्वीकार करें और Online Bank Account Verification पर क्लिक करें |
Success का मेसेज दिखने पर OKपर क्लिक करें |
अब Confirm पर क्लिक करें |
अब आधार आधारित OTP से वेरीफाई करें और फाइनल सबमिट करें |
आपको SMS और इमेल पर अलग-अलग OTP मिलेंगे दोनों को वेरीफाई करना आवश्यक है |
अब FINAL SUBMIT कर दें|
आपकी रिक्वेस्ट सफलता पूर्वक सबमिट हो गयी है | अगले 5 कार्यदिवसों में यह राशि आपके बैंक खाते में पहुँच जायेगी |
नोट- PFRDA पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा NPS खाता धारकों के लिए आंशिक राशि निकालने के सम्बन्ध में जारी सर्कुलर को नीचे दिए लिंक से सीधे डाउनलोड कर अध्ययन कर सकते है –
Exit from NPS टैब में Initiate Withdrawal Request पर क्लिक करें| [अब जो स्क्रीन प्रदर्शित होगी उसमें Total Valuation as on Date के सामने आपके अकाउंट में जमा कुल राशि प्रदर्शित होगी| यदि यह राशि 2,50,000 से कम है तो आप 100% राशि प्राप्त कर पायेंगे | (नोट: जब तक राजस्थान सरकार द्वारा ऑफिसियल नॉटीफिकेशन प्राप्त नहीं होता तब तक कृपया यह प्रयास नहीं करें | इसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे)]
अब आप Withdrawal due to* में Pre Mature Exit Select करें तथा OK पर क्लिक करें|
अब Lump-Sum and ASP Withdrawal को सेलेक्ट करें |
Date of Resignation/Exit: * में 31/03/2022 भरें |
Towards Withdrawal (in %) * में 100 लिखें |
अब SUBMIT पर क्लिक करें |
अब समस्त डिटेल्स देखें और Confirm बटन पर क्लिक करें|
अब घोषणापत्र को टिक्क लगाकर स्वीकार करें और Online Bank Account Verificationपर क्लिक करें |
Success का मेसेज दिखने पर OK पर क्लिक करें |
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राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत किसी अभिदाता के व्यक्तिगत पेंशन खाते के बंद होने की प्रक्रिया को निकास कहा जाता है।
2. अभिदाता एनपीएस के कब निकास प्राप्त कर सकता है?
पीएफआरडीए (एनपीएस के अंतर्गत निकास और आहरण) विनियम, 2015 के अनुसार अभिदाता निम्नलिखित परिस्थितियों में एनपीएस से निकास कर सकता हैः
सूपरैन्यूएशन पर : जब अभिदाता सूपरैन्यूएशन / 60 वर्षकी आयु प्राप्तकर लेता है तो उसे संचित पेंशन राशिमें से कम से कम 40% भाग का उपयोग वार्षिकीकी खरीदके लिए करना होगा जो उसे एक नियमित मासिक पेंशन प्रदान करेगी। बाकि शेषनिधियोंका आरहरण एक मुश्तरूप में किया जा सकता है। यदि कुल संचित पेंशन राशि 5 लाख रूपएया उससे कम है तो अभिदाता 100% राशिके एक मुश्त आहरणके विकल्प का चयन कर सकता है।
समय पूर्व निकास: एनपीएस से समय पूर्व निकास (सूपरैन्यूएशन/60 वर्षकी आयु प्राप्त करने से पूर्व निकास) के मामलेमें अभिदाताको संचित पेंशन निधिके कम से कम 80 भाग का उपयोग वार्षिकीकी खरीदके लिए करना पड़ेगा जो उसे नियमित मासिक पेंशन प्रदान करेगा। शेष राशिका आहरण एक मुश्त रूपमें किया जा सकता है। हालांकि, आप केवल 5 वर्ष पूरे करने पर भी एनपीएससे निकास कर सकते है। यदि कुल राशि 2.5 लाख रूपए या उससे कम है तो अभिदाता 100% राशिके एक मुश्त आहरणके विकल्प का चयन कर सकता है।
अभिदाताकी मृत्यु होने पर – समग्र संचित पेंशन निधि (100%) का भुगतान अभिदाताके नामिति/कानूनी हकदार को कर दिया जाएगा।
3. सूपरैन्यूएशनके समय /60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर अभिदाता के पास एनपीएस के निकास से संबंधित कौन.कौन से विकल्प उपलब्ध हैं?
अभिदाता एनपीएस में निवेश जारी रखने (75 वर्ष तक) अथवा एनपीएस से निकास के संबंध में निणर्य कर सकता है। एनपीएस अभिदाताओं के लिए निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध हैं:
एनपीएस खातेको जारी रखना : अभिदाता 60 वर्ष/ सूपरैन्यूएशन की आयुके बाद भी (75 वर्ष तक) एनपीएस खातेमें अंशदान करना जारी रख सकते हैं। 60 वर्षकी आयुके बाद अंशदान करने पर अभिदाता एनपीएसके अंतर्गत विशेष करलाभ प्राप्त करने के लिए पात्रभी बन जाते हैं।
आस्थगन (वार्षिकी साथही साथ एक मुश्त राशिका): अभिदाता अपने आहरणका अस्थगित कर सकता है और 75 वर्षकी आयु तक एनपीएसमें निवेश करना जारी रख सकता है। अभिदाता यदि चाहेतो केवल एक मुश्त आहरण एकेवल वार्षिकीको या वार्षिकीके साथ-साथ एक मुश्त आहरण दोनोंका अस्थगित कर सकता है।
अपनी पेंशन प्रारंभ करना: यदि अभिदाता अपने एनपीएस खाते को जारी नहीं रखना चाहता अथवा अस्थगित नहीं करना चाहता तो वह एनपीएससे निकास कर सकताहै। वह निकास अनुरोध ऑनलाइन भेज सकता है और एनपीएसके निकास संबंधी दिशा निर्देशोंके अनुसार पेशन प्राप्त करना आंरभ कर सकता है।
4. मैं आहरण फॉर्म कहां से प्राप्त कर सकता हूं? आहरण फॉर्म कितने प्रकार के होते हैं?
आप इस वेबसाइट पर उपलब्ध संबंधित सेक्टर के ‘फॉर्म’ अनुभाग से आहरण फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं। विभिन्न प्रकार के आहरण अनुरोध के आधार पर निम्नलिखित फॉर्म उपलब्ध हैं
सूपरैन्यूएशन
समय पूर्व निकास
मृत्यु
5. एक्जिट क्लेम आईडी क्या है और इसके उपयोगिता क्या है?
सीआरए द्वारा सूपरैन्यूएशनकी आयु/60 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले अभिदाता के लिए सूपरैन्यूएशन/60 वर्ष की आयु की तिथि से 6 महीने पूर्व एक क्लेम आईडी तैयार की जाती है। सीआरए द्वारा क्लेम आईडी तैयार किए जाने की सूचना अभिदाता को ई-मेल, पत्र, एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जाता है।
सूपरैन्यूएशनके मामले में,सीआरए सूपरैन्यूएशन या 60 वर्ष की आयु की तिथि से छः महीने पहले एक क्लेम आईडी का निर्माण करता है। क्लेम आईडी के बारे में अभिदाता को ई-मेल, पत्र, एमएमएस के माध्यम से अभिदाता को सूचित किया जाता है। क्लेम आईडी की सूचना प्राप्त होने से अभिदाता आहरण अनुरोध प्रारंभ करने से पूर्व अपने एनपीएस खाते में यदि कोई परिवर्तन (जैसे जन्म-तिथि, पता इत्यादि) करना चाहते हैं तो छः महीने पहले कर सकते हैं। क्लेम आईडी निर्माण किए बिना आहरण अनुरोध दर्ज नहीं कराया जा सकता।
समय पूर्व निकास के मामले में,पेंशन फंड से आहरण हेतु अभिदाता को क्लेम आईडी तैयार करने के लिए पीओपी से सम्पर्क करने की आवश्यकता होती है। यदि पीओपी द्वारा आहरण अनुरोध दर्ज किया जाता है तो क्लेम आईडी सृजित करने की आवश्यकता नहीं होती।
मृत्यु होने पर ऑन लाइन आहरण अनुरोध की प्रक्रिया में क्लेम आईडी सृजित करने की आवश्यकता नहीं होती। मृत्यु के मामले मेंपीओपी द्वारा सीधे आहरण अनुरोध दर्ज कराया जा सकता है।
6. मैं सीआरए सिस्टम में किस प्रकार आहरण अनुरोध दर्ज कर सकता हूं?
अभिदाता अपने एनपीएस खाते में लॉग-इन करने के माध्यम से ऑनलाइन आहरण अनुरोध दर्ज कर सकते हैं। ऐसे अनुरोध को संबंधित पीओपी द्वारा सत्यापित और प्रमाणित किए जाने की आवश्यकता होती है। यदि अभिदाता ऑनलाइन आहरण अनुरोध दर्ज करने में समर्थ नहीं है तो उसे अपेक्षित दस्तावेजों के साथ वास्तविक आहरण फॉर्म पीओपी के पास जमा कराना पड़ता है। अभिदाता के अनुरोध के आधार पर, पीओपी अभिदाता की ओर से ऑनलाइन आहरण अनुरोध दर्ज करेगा।
इस संदर्भ में अपनाये जाने वाले चरणों की विस्तृत जानकारी के लिए आप इसे वेबसाइट पर दिए गए ‘सब्सक्राइबर कॉर्नर‘ के अंतर्गत ‘नॉलिज सेंटर’ भाग में उपलब्ध ‘विड्रावल प्रोसेस फॉर नॉन गवर्मेंट सब्सक्राइबर‘ के ‘सेल्फ रनिंग डेमो‘ को देख सकते हैं।
7. सूपरैन्यूएशनएवं समय-पूर्व निकास के मामले में कौन-कौन से दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?
सूपरैन्यूएशन एवं समय-पूर्व निकास के मामले में ठीक प्रकार से भरे गए आहरण फॉर्म के साथ निम्नलिखित दस्तावेज जमा कराने अपेक्षित हैं:
मूल (ओरिजनल) प्रान कार्ड
पूरी तरह भरी गई एडवांस स्टैम्पड रिसीप्त और अभिदाता द्वारा क्रॉस हस्ताक्षरित रेवन्यू स्टैम्प
केवाईसी दस्तावेज (पता और फोटो आईडी साक्ष्य )
बैंक साक्ष्य के रूप में कैंसल चेक,अभिदाता का नाम, बैंक खाता संख्या और आईएफएस कोड सहितद्ध अथवा अभिदाता के नाम बैंक खाता संख्या और आईएफएस कोड वाले बैंक के लेटर हैड पर बैंक सर्टिफिकेट को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। बैंक पासबुक की एक प्रतिलिपि को स्वीकार किया जा सकता है हांलाकि उस पर अभिदाता का फोटोग्राफए नाम और आईएफएस कोड होना चाहिए और अभिदाता द्वारा स्वयं सत्यापित होनी चाहिए।
यदि सम्पूर्ण आहरण के लिए पात्र हैं तो रिक्वेस्ट कम अंडरटेकिंग फॉर्म
अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत करने के बादपीओपी द्वारा आहरण अनुरोध को प्रमाणित किया जाएगा।
8. क्या मैं सूपरैन्यूएशन और समय-पूर्व निकास के मामले में 100% आहरण का दावा कर सकता हूं?
हां अभिदाता निम्नलिखित मामलों में आहरण का दावा कर सकता है :
सूपरैन्यूएशन के मामले में यदि सूपरैन्यूएशन60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर अभिदाता की कुल संचित निधि रू 5 लाख से कम है तो अभिदाता 100% आहरण का दावा कर सकता है।
समय पूर्व निकास के मामले में यदि अभिदाता की कुल संचित निधि 2.5 लाख रूपए से कम है तो अभिदाता सम्पूर्ण आहरण के विकल्प का उपयोग कर सकता है। हालांकिएनपीएस में केवल 5 वर्ष पूरेहोने के बाद ही आप निकास कर सकते हैं।
9. क्या मैं एनपीएस मे अपनी अवधि के दौरान कुछ राशि का आहरण कर सकता हूं और अपने एनपीएस खाते को जारी रख सकता हूं?
हां, एनपीएस अभिदाता अपने किए गए अंशदान की कुछ राशि का आहरण कर सकते हैं। इसे एनपीएस के अंतर्गत आंशिक आहरण कहा जाता है, कृपया आंशिक आहरण की शर्तों के बारे में जानने के लिए प्रश्न संख्या 10 का संदर्भ लें।
10. आंशिक आहरण के लिए क्या – क्या शर्ते हैं ?
11. आंशिक आहरण किस प्रकार किया जा सकता है?
12. अभिदाता की मृत्यु होन पर आहरण अनुरोध के मामले में नामितिकर्ता/दावाकर्ता को कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए?
पूरी तरह भरे गए आहरण फॉर्म के साथ निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए:
मूल (ओरिजनल) प्रान कार्ड
एडवांस्ड स्टैम्पड रिसीप्त को पूरी तरह भरी होनी चाहिए और अभिदाता द्वारा राजस्व टिकट पर क्रास हस्ताक्षर किए होने चाहिए।
केवाईसी दस्तावेज (पता और फोटो आईडी साक्ष्य)
बैक साक्ष्य के रूप में कैंसल चेक (दावाकर्ता का नामएवं बैंक खाता संख्या आईएफएस कोड सहित) अथवा दावाकर्ता के नाम बैंक खाता संख्या और आईएफएस कोड वाले बैंक के लेटर हैड पर बैंक सर्टिफिकेटको प्रस्तुत किया जाना चाहिए। बैंकपासबुक की एक प्रतिलिपि को स्वीकार किया जा सकता है| हांलाकि उस पर दावाकर्ता का फोटोग्राफ नाम और आईएफएस कोड होना चाहिए और दावाकर्ता द्वारा स्वयं सत्यापित होनी चाहिए।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र की मूल प्रति
अपेक्षित दस्तावेज प्राप्त करने के पश्चात, पीओपी को ऑनलाइन आहरण अनुराध को कैप्चर करने की आवश्यकता होती है। चेकर आईडी द्वारा ऑथराइज करने पर पीओपी कवरिंग लेटर के साथ आहरण फॉर्म और समर्थित दस्तावेज को स्टोरेज के प्रयोजनार्थ सीआरए को भेजेगा।
13. एनपीएस में एक से अधिक नामिति पंजीकृत होने पर मृत्यु संबंधी मामलों का निपटान कैसे किया जाता है?
ऐसे आहरण दावों का निपटान नीचे उल्लिखित परिदृश्य में किया जाता है :
आहरण अनुरोध सीआरए में पंजीकृत सभी नामितियों द्वारा किया जाना चाहिए।
यदि कोई नामिति एनपीएस निधि हेतु दावा नहीं करना चाहता तो
ऐसे नामिति/नामितियों जो एनपीएस लाभ हेतु दावा नहीं करना चाहते उन्हें अभित्याग विलेख (रीलिंक्यूशमेंट डीड) प्रस्तुत करनी चाहिए।
एनपीएस लाभों के लिए दावा करने वाले नामिति द्वारा एक क्षतिपूर्ति बांड (इंडेमनिटी बांड)प्रस्तुत करना चाहिए।
ऐसे मामले में जहां एक नामिति वयस्क तथा अन्य नामिति नाबालिक होने पर
वयस्क नामिति अपना आहरण फॉर्म जमा कराएगा।
अभिभावक (अव्यस्क की ओर से) नाबालिक के जन्म तिथि के प्रमाण के साथ आहरण फॉर्म जमा कराएगा।
14. अभिदाता/दावाकर्ता को आहरण राशि किस प्रकार प्राप्त होती है?
आहरण राशि केवल इलैक्ट्रोनिक पद्धति के माध्यम से अभिदाता/दावाकर्ता के बैंक खाते (ऑनलाइन आहरण अनुरोध जमा कराते समय उपलब्ध कराए गए बैंक विवरण के अनुसार) में जमा की जाती है।
15. अभिदाता किस प्रकार आहरण अनुरोध की स्थिति की जांच कर सकता है?
अभिदाता नीचे उल्लिखित विकल्पों के अनुसार आहरण अनुरोधकी स्थिति की जांच कर सकते हैं :
अभिदाता सीआरए वेबसाइट (www.cra-nsdl.com) के होम पेज पर उपलब्ध ‘लिमिटेड एक्सेस व्यू‘ कार्यपद्धति(लॉगइन से पहले) के माध्यमसे जांच कर सकता है।
अभिदाता एनपीएस खातेमें लॉगइन करके ‘एक्जिट विड्रावल रिक्वेस्ट‘ मेन्यूके अंतर्गत ‘विड्रावल रिक्वेस्ट स्टेटस व्यू‘ में जाकर स्थितिकी जांच कर सकते हैं।
16.वार्षिकी (annuity) क्या है?
एनपीएस के संदर्भ में, वार्षिकी से तात्पर्य उस मासिक राशि से है जिसे अभिदाता वार्षिकी सेवा प्रदाता (एएसपी) से प्राप्त करता है। अभिदाता द्वारा निर्धारित पेंशन राशि के एक प्रतिशत भाग (न्यूनतम 40%,सूपरैन्यूएशनएवं 80 %समय पूर्व निकास और मृत्यु होने के कारण आहरण की स्थिति में) का उपयोग पैनलबद्ध वार्षिकी सेवा प्रदाता से वार्षिकी की खरीद के लिए किया जाता है।
17. वार्षिकी सेवा प्रदाता कौन है?
एनपीएस से निकास के बाद अभिदाताओं को एक नियमित मासिक पेंशन प्रदान करने की जिम्मेदारी वार्षिकी सेवा प्रदाता (एएसपी) की होती है। ये एएसपी मूलतः बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा विनियमित वे बीमा कंपनियां है जिन्हें पीएफआरडीए द्वारा एनपीएस अभिदाताओं को वार्षिकी सेवाएं प्रदान करने के लिए पैनलबद्ध किया गया है। एएसपी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप कृपया इस बेवसाइट पर दिए गए ‘एन्यूटी सर्विस प्रोवाइडर‘ सेक्शन (होमपेज पर ‘Important Links ‘ के अंतर्गत दिया गया है) को देखें।
18. समय पूर्व निकास के मामले में, अभिदाता की वार्षिकी (पेंशन) कब से शुरू होगी?
पूर्व निकास के मामले में, समय यदि अभिदाता आयु और वार्षिकी की खरीद (एएसपी के चयन और संबंधित वार्षिकी सेवा प्रदाता की वार्षिकी योजना के आधार पर) के लिए कार्पस के मानदंडों को पूरा करता है तो वार्षिकी (पेंशन) तुरंत शुरू हो जाएगी।
19. कौन-कौन सी वार्षिकी योजनाएं उपलब्ध हैं?
एनपीएस के अंतर्गतएएसपी के पास निम्नलिखित योजनाएं उपलब्ध हैं :
आजीवन वार्षिकी– वार्षिकीकर्ताकी मृत्यु पर, वार्षिकीका भुगतान बंद कर दिया जाता है।
आजीवन वार्षिकीके साथ मृत्यु होने पर खरीद मूल्यकी वापसी– वार्षिकीकर्ताकी मृत्युहोने पर वार्षिकीका भुगतान बंद कर दिया जाता है और खरीद मूल्यको नामितिको वापस लौटा दिया जाता है।
आजीवन वार्षिकीके साथ वार्षिकी कर्ताकी मृत्यु होने पर पति/पत्नीको 100% वार्षिकी का भुगतान– वार्षिकीकर्ताकी मृत्यु होने पर, नामितिको आजीवन वार्षिकीका भुगतान किया जाता है। यदि पति/पत्नीकी मृत्यु वार्षिकीकर्तासे पहले हो जाती है तो वार्षिकीकर्ताकी मृत्युके बाद वार्षिकी बंद कर दी जाएगी।
आजीवन वार्षिकीके साथ वार्षिकीकर्ताकी मृत्यु होने पर पति/पत्नीको आजीवन 100% वार्षिकीका भुगतान और खरीद मूल्यकी वापसी- वार्षिकीकर्ताकी मृत्यु होने पर, पति/पत्नीको उसके जीवन कालके दौरान वार्षिकीका भुगतान किया जाता है और पति/पत्नीकी मृत्यु होने पर नामितिको खरीद मूल्य वापस लौटा दिया जाता है।
20. मुझे वार्षिकी सेवा प्रदाताओं (एएसपी) द्वारा प्रदान की जाने वाली संभावित पेंशन राशि के बारे में जानकारी कहां से प्राप्त होगी?
पेंशन राशि की गणना वार्षिकी सेवा प्रदाताओं द्वारा दी जाने वाले संभावित वार्षिकी दरों (समय-समय पर होने वाले परिवर्तनों के अध्यधीन) के आधार पर की जा सकती है। हालांकि, वास्तवित वार्षिकी राशि वार्षिकी की खरीद के समय प्रचालित दरों पर निर्भर करेगी। संभावित पेंशन राशि के बारे में जानने के लिए आप हमारी वेबसाइट के पेज पर ‘एन्यूटी सर्विस प्रोवाइडर (एएसपी)‘ देख सकते हैं। इसके अलावा, संभावित पेंशन राशि के लिए आप संबंधित एएसपी की वेबसाइट भी देख सकते हैं।
21. क्या अभिदाता वार्षिकी की खरीद के बाद वार्षिकी सेवा प्रदाता या वार्षिकी के प्रकार को परिवर्तित कर सकता है?
एक बार वार्षिकी खरीद लेने पर,वार्षिकी रद्द करने या अन्य वार्षिकी सेवा प्रदाता या किसी अन्य योजना में पुन: निवेश करने की अनुमति नहीं होगी जब तक कि वार्षिकी सेवा प्रदाता द्वारा निर्दिष्ट समय सीमा (आईआरडीए द्वारा विशेष रूप से दी गई अथवा वार्षिकी अनुबंध के संबंध में दी गई फ्री लुक अवधि) के भीतर ऐसा न किया जाए।
22. क्या अभिदाता चरणबद्ध तरीके से आहरण कर सकता है?
एनपीएस अभिदाताओं के लिए चरणबद्ध आहरण की सुविधा उपलब्ध है। अभिदाता 60 वर्ष (अथवा नियोक्ता द्वारा निर्धारित सेवानिवृत्ति की कोई अन्य आयु) से 75 वर्ष की अवधि के दौरान एक चरणबद्ध तरीके (10 किश्त तक ) में एकमुश्त राशि के आहरण के विकल्प का चुनाव कर सकता है। हालांकि, अभिदाता को चरणबद्ध आहरण से पूर्व वार्षिकी को खरीदना पड़ता है।
23. क्या अभिदाता एनपीएस में बने रहने के विकल्प को चुनने के बाद आस्थगन विकल्प का चयन कर सकता है?
नहीं, अभिदाता जारी रखने के विकल्प का चयन करने के बाद आस्थगन (एकमुश्त और वार्षिकी) के विकल्प का चुनाव नहीं कर सकता।
24. क्या अभिदाता टीयर । खाते को जारी रखने के साथ-साथ टीयर ।। खाते को भी जारी रख सकता है?
हां, टीयर । खाता सक्रिय रहने तक अभिदाता अपने टीयर ।। खाते को जारी रख सकता है।
25. टीयर। खाता बंद करने पर, मेरे टीयर ।। खाते का क्या होगा?
यदि आप टीयर । खाता बंद करने का अनुरोध करते हैं तो आपका टीयर ।। खाता भी बंद हो जाएगा। टीयर ।। खाते की यूनट्सि का मोचन (रीडिम्ड) कर दिया जाएगा और राशि को आपके द्वारा दिए गए बैंक खाते में अंतरित कर दिया जाएगा।