How to Get all payment timely at retirement

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सेवानिवृति से पूर्व क्या तैयारी करें कि सेवानिवृति का सम्पूर्ण पैसा आपको समय पर मिल जाएँ 

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 श्री भगवती लाल सनाढ्य

अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, (डाईट) बून्दी (जिला – बून्दी)

सेवानिवृत्ति के समय समस्त परिलाभ समय पर प्राप्त हो, इसके लिए समयबद्ध की जाने वाली समस्त कार्यवाही की जानकारी

प्रश्न : मेरी सेवानिवृत्ति दिनांक 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 के मध्य में है मुझे समय-समय पर क्या क्या कार्यवाही करनी चाहिए ताकि सेवानिवृत्ति के समय समस्त परिलाभ मुझे समय पर ही मिल जाए?

उत्तर : इसके लिए निम्न कार्यवाही प्रारंभ करें।

 

  • स्वयं तथा नॉमिनी एवं अन्य परिवार के सदस्यों के निम्न दस्तावेज की फोटो कॉपी करें
    • आधार कार्ड
    • पैन कार्ड
    • बैंक खाता पासबुक
    • कक्षा दसवीं की मार्कशीट
  • कक्षा दसवीं की मार्कशीट के आधार पर उपर्युक्त सभी दस्तावेजों में नाम, पिता का नाम व जन्म तिथि में एकरूपता होनी चाहिए जरा सी भी गलती नहीं होनी चाहिए अगर कहीं पर गलती है तो कक्षा दसवीं की मार्कशीट के आधार पर सभी जगह सही करवा लेवे।
  • अपनी पेमैनेजर की आईडी से अपने मास्टर डाटा का प्रिंट निकाले एवं गत माह की पे स्लिप भी निकाल लेवे।
  • अपने मास्टर डाटा में अंकित प्रविष्टियों की जांच बारीकी से करें अगर कहीं छोटी या जरा सी भी गलती है तो उसे सुधार करवाएं मास्टर डाटा के प्रत्येक कालम की पूर्ति अति आवश्यक है।
  • मास्टर डाटा में अंकित प्रविष्टियाँ ही एक रूपता के साथ में ही अपने एस.एस.ओ. व शाला दर्पण में दर्ज होनी चाहिए।

 

पेंशन सीरीज भाग -दो : अगर आपने मास्टर डाटा वेल अपडेट कर दिया हो तो आगे निम्न प्रक्रिया अपनाएं अपनी सेवा पुस्तिका में निम्न विवरणानुसार कंप्लीट चेक करना है।

  • सर्विस बुक के प्रथम पृष्ठ पर नॉमिनेशन फॉर्म (जी.ए.126) लगा होना चाहिए।
  • प्रथम नियुक्ति आदेश और स्थायीकरण का दाखिला लगा होना चाहिए।
  • प्राप्त सभी चयनित वेतनमान/ए.सी.पी. का दाखिला लगा होना चाहिए
  • सर्विस बुक के प्रथम पृष्ठ की समस्त प्रविष्ठियों का मूल रिकॉर्ड से अक्षरत: मिलान होना चाहिए।
  • सर्विस बुक अतिरिक्त अटैच है तो उसमें भी प्रथम पृष्ठ की पूर्तियां करनी चाहिए।
  • प्रथम नियुक्ति से आज दिन तक सेवा प्रमाणीकरण होना चाहिए। दिनांक पर कटिंग नहीं होनी चाहिए व दोहरा सत्यापन नहीं होना चाहिए । अगर कटिंग हो गई है तो वहीं से प्रमाणित करनी चाहिए । प्रत्येक सेवा प्रमाणीकरण पर लाल स्याही से क्रम से क्रमांक अंकित होने चाहिए।
  • पीएल व मेडिकल अवकाश चेक करें (पीएल की जांच करने के लिए राजसेवक वेबसाईट पर श्री हंसराज जी जोशी, प्रधानाचार्य द्वारा तैयार किया गया सॉफ्टवेयर उपयोग में ले सकते हैं) व अवकाश लेखा के ऊपर नाम, पद, जन्मतिथि, प्रथम नियुक्ति तिथि, सेवानिवृत्ति तिथि व निवास स्थान अगर अंकित नहीं है तो लिख देवें।
  • डीडीओ की सील पर कहीं पर हस्ताक्षर छूट गए है तो करवाना है।
  • समस्त फिक्सेशन व विकल्प पत्र की प्रविष्ठियां चेक कर लेवे।
  • समस्त वार्षिक वेतन वृद्धियां चेक कर लेवे व वार्षिक वेतन वृद्धि के सामने सेवा पुस्तिका के कॉलम नंबर 8 में कार्मिक के हस्ताक्षर चेक कर लेवे।
  • प्रथम नियुक्ति से आज दिन तक स्थानांतरण, समायोजन, पदोन्नति होने पर कार्यमुक्त व कार्यग्रहण का दाखला चेक करें।
  • सेवा पुस्तिका के प्रथम पृष्ठ पर जन्मतिथि अंकों व शब्दों में सही लिखी हुई होनी चाहिए 10th बोर्ड प्रमाण पत्र संख्या डालकर संस्था प्रधान द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।
  • अगर आपसे कोई अधिक भुगतान की वसूली की गई है तो पूर्ण विवरण के साथ सेवा पुस्तिका में दाखला लगा होना चाहिए।
  • अगर निलंबित रहे हो या अवैतनिक अवकाश लिया है तो भी दाखिला होना चाहिए।
  • अगर कोई दीर्घकालीन ऋण लिया है तो उसका पूर्ण विवरण दर्ज होना चाहिए।

 

पेंशन सीरीज – भाग-3, अगर सेवा पुस्तिका पूर्णतया: चेक कर ली हो तो निम्न विवरणानुसार आगे की कार्यवाही करें :-

  • माह नवंबर 2022 में ₹50 का स्टांप पेपर अपने नाम का लेकर उस पर ‘प्रपत्र 6’ टाइप कर नोटरी से प्रमाणित कराकर अपने संस्था प्रधान को दे देवें ताकि समय पर सेवानिवृत्ति आदेश जारी हो सके।
  • माह नवंबर 2022 के वेतन बिल से राज्य बीमा की अंतिम कटौती करवावे।
  • दिसंबर 2022 के प्रथम सप्ताह में अपनी एसएसओ आईडी से राज्य बीमा क्लेम लेने हेतु ऑनलाइन आवेदन करना है और आवेदन की प्रिंट निकाल कर हार्ड कॉपी अपने संस्था प्रधान को देनी है साथ ही मूल राज्य बीमा पॉलिसी बांड भी देना है राज्य बीमा पासबुक भी अंतिम कटौती तक प्रविष्टि करके देना है।
  • राज्य बीमा अंतिम भुगतान हेतु ऑफलाइन परिपक्वता दावा प्रपत्र पार्ट-अ एवं पार्ट- ब तथा परिशिष्ट-क भी भर कर देना है।
  • सत्र 2011-12 से आज दिनांक तक अपने पेमैनेजर की आई.डी. से GA55 ए की प्रिंट निकाल कर हार्ड कॉपी अपने संस्था प्रधान को देना है।
  • संस्था प्रधान से निवेदन कर राज्य बीमा परिपक्वता अंतिम भुगतान प्राप्त करने हेतु अग्रेषण पत्र लगाकर उपर्युक्त समस्त दस्तावेज अपने जिले के राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग को भिजवा देवें ताकि अप्रैल 2023 के प्रथम सप्ताह में आपको राज्य बीमा क्लेम की राशि प्राप्त हो जाए।

 

पेंशन सीरीज – भाग 4, अब इससे आगे निम्न विवरणानुसार कार्य करें।

  • अपनी सेवानिवृत्ति की तिथि से 8 माह पूर्व पेंशन कुलक 4 प्रतियों में तैयार करें। एक प्रति अपने पास रखे एवं 3 प्रति अपने संस्था प्रधान को देकर प्राप्ति रसीद ले लेवे।
  • SHALA SUGAM वेबसाइट पर श्री प्रवेश कुमार जी शर्मा, लेखाधिकारी, बीकानेर का पेंशन कुलक सॉफ्टवेयर को उपयोग में ले सकते हैं जो पूर्णतया: राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप बनाया है|
  • Pension Master Software for Rajasthan State Employees Update 22-05-2022
  • Pension Master Software for Rajasthan State Employees Update 24-01-2022
  • Pension Kulak Software for Both ( GPF AND NPS ) Employees Retirement Case (01-01-2004 से पूर्व एवं पश्चात नियुक्त कार्मिकों की सेवानिवृत्ति पर पेंशन केस तैयार करने बाबत एक्सेल प्रोग्राम) DA 34 प्रतिशत Update Dt. 07-05-2022
  • अपने संस्था प्रधान से निवेदन कर अग्रेषण पत्र लगवा कर यथा स्थान पेंशन कुलक पर उनके हस्ताक्षर करवाकर मोहर लगवाकर उनसे उच्च अधिकारी के पास भिजवा देवें।
  • अपनी सेवानिवृत्ति से 1 माह पूर्व जीपीएफ की कटौती बंद करवा देवें।
  • GA55 सत्र 2011-12 से आज तक प्रिंट निकाल कर अपने संस्था प्रधान को हार्ड कॉपी दे देवें।
  • जीपीएफ पासबुक अंतिम कटौती तक अपडेट कर दे देवें।
  • सेवानिवृत्ति के माह के प्रथम सप्ताह में अपनी एस.एस.ओ. आई.डी. से जी.पी.एफ. का अंतिम भुगतान प्राप्त करने हेतु ऑनलाइन आवेदन करें और उसके बाद उसकी प्रिंट निकाल कर अपने संस्था प्रधान को दे देवें।
  • अपने नाम का ₹50 का स्टांप पेपर लेकर उस पर जीपीएफ अंतिम भुगतान प्राप्त करने हेतु शपथ पत्र टाइप करवा कर किसी भी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित करवा कर अपने संस्था प्रधान को दे देवें
  • निम्न डॉक्यूमेंट की नाम वाइज पीडीएफ बनावे तथा ऑनलाइन करने से पूर्व उन पीडीएफ को नाम वाइज अपलोड करें
    • सेवानिवृत्ति आदेश
    • जीपीएफ पासबुक
    • शपथ पत्र
  • अपने संस्था प्रधान से अग्रेषण पत्र लगवाकर अपने जिले के राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग को भिजवा देवें ताकि आप की सेवानिवृत्ति माह के अगले माह के प्रथम सप्ताह में भुगतान प्राप्त हो सके।

 

पेंशन सीरीज : भाग – 5 पांच अब आगे सेवानिवृत्ति के दिन निम्न विवरणानुसार कार्य करें।

  • अपने पास जो भी चार्ज हो वह संस्था प्रधान की आज्ञा से संबंधित को संभलाकर अदेय प्रमाण पत्र तैयार कर उस पर संबंधित प्रभारियों से नो डूयूज़ के हस्ताक्षर करवाकर संस्था प्रधान से प्रमाणित करवा कर एक प्रति अपने पास में रख कर एक प्रति संस्था प्रधान को दे देवें।
  • शाला दर्पण से अपना कार्यमुक्ति आदेश निकलवा कर मूल दो प्रति में प्राप्त करें उसमें से एक प्रति अपने पास रखे व एक प्रति को कोषालय में जीपीओ, सीपीओ व पीपीओ का भुगतान प्राप्त करने के समय पर दे देवें।
  • सेवानिवृत्ति के समय जितनी भी पी.एल. शेष है उसका भुगतान प्राप्त करने हेतु निर्धारित आवेदन पत्र भरकर अपने संस्था प्रधान को देवें।
  • संस्था प्रधान से सेवानिवृत्ति पर शेष पी.एल. के भुगतान करने की स्वीकृति प्राप्त करें।
  • सेवानिवृत्ति के दिन या उसके आगे के दिनों में पी.एल. का भुगतान करने हेतु डी.डी.ओ. की पे मैनेजर की आई.डी. से बिल बनाने हेतु अपने संस्था प्रधान से निवेदन करें ताकि समय पर आपको भुगतान मिल सके।
  • सेवानिवृत्ति के माह का भुगतान प्राप्त हो जाए तो एल.पी.सी. दो प्रति में मूल प्राप्त करें।
  • सेवानिवृत्ति के बाद जब भी कोषालय में वर्किंग-डे हो उस दिन वहां जाकर अपने जीपीओ, पीपीओ व सीपीओ की राशि प्राप्त करने हेतु कोषाधिकारी से मिले एवं आवश्यक दस्तावेज उन्हें उपलब्ध करावे सिखो और सिखाओ ग्रुप के सदस्यों द्वारा कड़ी मेहनत से तैयार कर एडमिन पैनल द्वारा अप्रूव होने के बाद निस्वार्थ भाव से शेयर की गई रोजाना एक प्रश्न की प्रश्नोत्तरी क्रमांक 457 को देखें
  • जब सभी भुगतान प्राप्त हो जाए तब अपने घर, परिवार की आवश्यकता के अनुरूप राशि रखकर बाकी की शेष राशि को केंद्रीय, राज्य, राष्ट्रीयकृत बैंक की विभिन्न योजना या सावधानीपूर्वक अन्य कहीं निवेश करें।

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How to Get all payment timely at retirement

राज्य बीमा पॉलिसी के परिलाभ एंव पॉलिसी का बीमा धन ज्ञात करना ? To find out the benefits of the state insurance policy and the sum insured of the policy

प्रश्न : राज्य बीमा पॉलिसी के परिलाभ एंव पॉलिसी का बीमा धन ज्ञात करना ? To find out the benefits of the state insurance policy and the sum insured of the policy

राजस्थान कर्मचारी राज्य बीमा योजना क्या है ?

राज्य बीमा (State Insurance Scheme for Rajasthan Government employees.) राज्य कर्मचारियों, पंचायत समिति एवं जिला परिषद के कर्मचारियों तथा सरकार द्वारा नियमित किये गये वर्कचार्ज कमचारियों का राज्य सरकार से अनुबंध है जिसके अन्तर्गत बीमेदार द्वारा बीमाकर्ता (राज्य बीमा विभाग) को नियमित प्रीमियम देने पर बीमेदार अथवा उसके मनोनीत को किसी घटना विशेष के घटित होने पर पूर्व निश्चित धन राशि के भुगतान हेतु आश्वस्त किया जाता है अथवा सेवानिवृत्ति पर बीमाधन एवं देय बोनस राशि का भुगतान किया जाता है।

बीमाधन क्या है ?

बीमानुबंध में प्रविष्टि पर बीमेदार की आगामी वर्षगांठ पर आयु एवम् उसके द्वारा देय प्रीमियम के आधार पर राशि, जो कि घटना विशेष के घटित होने पर देय है, बीमाधन कहलाती है।

राज्य बीमा योजना (State Insurance Scheme) क्या है ?

राज्य बीमा योजना (State Insurance Scheme) राज्यकर्मियों के जीवन पर जोखिम वहन करने वाली एक कल्याणकारी योजना है जिसके द्वारा बचत को प्रोत्साहन देने के साथ साथ राज्यकर्मी तथा उसके परिजनों को आर्थिक सम्बल प्राप्त होता है।

योजना किन नियमों के अन्तर्गत लागू है ?

राजस्थान सरकारी कर्मचारी बीमा नियम, 1998 के अन्तर्गत यह योजना लागू है। पूर्व में यह योजना वर्ष 1953 के नियमों के अन्तर्गत लागू थी ।

योजना कब से एवम् किन-किन श्रेणियों के कर्मचारियों पर अनिवार्य / ऐच्छिक रूप से लागू है ?

योजना विभिन्न चरणों में निम्न प्रकार से लागू की गयी है –
01.08.1943 से तत्कालीन जयपुर रियासत के कर्मचारियों पर,
01.01.1954 से राजस्थान सरकार के कर्मचारियों पर,
01.04.1989 से पंचायत समिति एवम् जिला परिषद् के कर्मचारियों पर,
01.04.1995 से राज्य सरकार द्वारा नियमित किये गये वर्कचार्ज कर्मचारियों पर अनिवार्य रूप से तथा
01.04.1998 से सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों राजस्थान सरकार के अधीन के किसी पब्लिक सैक्टर उपक्रम के अधीन पद धारण करने वाले किसी कर्मचारी का इस बीमा स्कीम के अधीन बीमा करने के के लिये स्वतंत्र होगा यदि उक्त उपक्रम के 50 प्रतिशत या उससे अधिक कर्मचारी बीमा कराने के लिये सहमत हों एवम् राजस्थान केडर के अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर ऐच्छिक रूप से ।

कर्मचारी कब बीमित होता है ?

कर्मचारी के सेवा में प्रविष्ट होने के दो वर्ष (परिवीक्षा काल ) पूर्ण होने के पश्चात् आने वाले मार्च से कर्मचारी बीमित होगा। इसके लिए मार्च माह के वेतन में प्रीमियम की प्रथम कटौती की जाती है। कर्मचारी के वेतन में वृद्धि होने अथवा बीमा की खण्ड दर में परिवर्तन होने पर बढ़ी हुई दर पर प्रीमियम की कटौती भी आगामी मार्च माह के वेतन से दिये जाने का प्रावधान है।

वर्तमान में प्रीमियम कटौती दर क्या है ?

राज्य सरकार के आदेश क्रमांक प.13 (21) वित्त / राजस्व / 76 पार्ट जयपुर दिनांक 13.03.2020 के अनुसार वर्तमान में प्रीमियम की कटौती दर निम्न प्रकार है:

क्रम संख्या वेतन स्लेब / पे स्लेब न्यूनतम प्रीमियम कटौती जो करवायी जानी
अनिवार्य है।
अधिकतम प्रीमियम कटौती करवाई
जा सकती है।
1 22000 तक 800 2200
2 22001 से 28500 1200 3000
3 28501 से 46500 2200 5000
4 46501 से 72000 3000 7000
5 72001 से अधिक 5000 7000
6 अधिकतम 7000 7000

उल्लेखनीय है कि कर्मचारी अपनी नियत वेतन खण्ड से दो स्लेब अधिक स्वेच्छा से बीमा प्रीमियम की कटौती करवा सकता हैं किन्तु प्रिमियम में वृद्धि 55 वर्ष की आयु तक ही मान्य हैं इसके बाद प्रिमियम स्थिर रहता है ।

क्या स्वयम् को अधिक बीमाधन के लिए बीमित करवाया जा सकता है ?

वेतन खण्ड के लिए निर्धारित प्रीमियम की कटौती करवाना अनिवार्य है। हाँ, यदि कोई बीमेदार चाहे तो स्वेच्छा से अपने वेतन खण्ड से आगामी दो वेतन खण्डों के लिए निर्धारित दर पर कटौती करवाकर अधिक बीमाधन के लिए भी बीमित हो सकता है। लेकिन वेतनखण्ड 05 के अन्तर्गत आने वाले बीमेदार अधिकतम 7000/- रू. प्रतिमाह तक की ही कटौती करवा सकते हैं।

क्या इस योजना के अन्तर्गत की गयी कटौतियों पर आयकर में छूट का प्रावधान है ?

हॉ, इस योजना के अन्तर्गत जमा प्रीमियम राशि पर धारा 80ब आयकर अधिनियम 1961 के अन्तर्गत आयकर में छूट का प्रावधान है।

क्या राज्य सरकार पॉलिसी के अन्तर्गत देय लाभों के भुगतान की गारण्टी देती है ?

हाँ, राज्य सरकार बीमा संविदाओं के अन्तर्गत देय लाभों के राज्य की संचित निधि से भुगतान की गारण्टी देती है।

बीमा पॉलिसी के अन्तर्गत देय लाभों का भुगतान कब कब एवम् किन किन परिस्थितियों में देय है ?

परिपक्वता / मृत्यु / अध्यपर्ण राशि का योजना के अन्तर्गत निम्न परिस्थितियों में भुगतान देय है:
बीमेदार की मृत्यु होने पर उसके मनोनीत को,
पॉलिसी की परिपक्वता तिथि पर बीमेदार को,
पॉलिसी की परिपक्वता तिथि से पूर्व बीमेदार राज्य सेवा छोड़ने या उसे सेवा से अलग कर दिये जाने पर उसके द्वारा अन्य किसी विकल्प को न चुनने की स्थिति में बीमेदार को अध्यर्पण राशि का भुगतान किया जाता है।

राज्य बीमा योजना से राज्य कर्मियों को क्या लाभ मिलते है ?

प्रीमियम के बदले बीमेदार को पॉलिसी की परिपक्वता तिथि पर बीमाधन मय बोनस प्राप्त होता है। परिपक्वता तिथि से पूर्व बीमेदारकी मृत्यु होने पर उसके मनोनीत को बीमाधन की दो गुनी राशि का भुगतान मय बोनस किया जाता है।

परिपक्वता तिथि से पूर्व राज्य सेवा से अलग हो जाने वाले बीमेदारों के प्रकरणों में उनके द्वारा अध्यर्पण भुगतान के विकल्प का चयन करने की स्थिति में, अध्यर्पण राशि (सेवा से अलग होने तक की पॉलिसी अवधि से सम्बन्धित अध्यर्पण गुणांक के आधार पर निर्धारित) का भुगतान किया जाता है।

बीमाधन की गणना का आधार एवम् प्रक्रिया क्या है ?

राज्य बीमा पॉलिसियों के बीमाधन की गणना हेतु योजना में बीमेदार की प्रविष्टि पर आयु हेतु गुणक निर्धारित है। बीमेदार की आगामी वर्षगांठ पर आयु से सम्बन्धित गुणांक को उसके द्वारा देय मासिक प्रीमियम से गुणा कर बीमाधन निर्धारित किया जाता है।

कालान्तर में निर्धारित प्रीमियम दर से अधिक कटौती की स्थिति उत्पन्न होने पर देय अतिरिक्त बीमाधन की गणना भी उपर्युक्तानुसार की जाती है।

विभाग द्वारा कितने प्रकार की पॉलिसी जारी की जाती है ?

वर्तमान में विभाग द्वारा केवल सावधि (एण्डोमेंट) पॉलिसी जारी की जाती है। पूर्व में सावधि पालिसी के अतिरिक्त आजीवन पालिसी भी जारी की जाती थी।

सावधि बीमा पॉलिसी पर कितने प्रकार के बोनस देय है ?

सावधि बीमा पॉलिसी पर चार प्रकार के बोनस देय हैं:

रिवर्शनरी बोनस: यह बोनस प्रति वर्ष बीमा निधि के मूल्यांकन के आधार पर मूल्यांकन अवधि के अंत में प्रवृतमान पॉलिसियों हेतु राज्य सरकार द्वारा घोषित दर से दिया जाता है। वर्ष 2015-16 के लिए रिवर्शनरी बोनस की दर सावधि पॉलिसी पर 90/- प्रति हजार बीमाधन प्रति वर्ष है एवम् प्रवृतमान आजीवन पॉलिसी पर 112.5 /- प्रति हजार बीमाधन प्रतिवर्ष है।

अंतरिम बोनस:- यह बोनस किसी वर्ष रिवर्शनरी बोनस घोषित न किये जाने की स्थिति में घोषित वर्ष के रिवर्शनरी बोनस की दर के आधार पर दिया जाता है।

अतिरिक्त बोनस: यह बोनस पूर्व में जारी समाश्वासनो (एश्यारेंसेज) पर सेवा निवृति की आयु में परिर्वतन के कारण मूल्यांकक (एक्च्यूरी) द्वारा निर्धारित गुणांक की दर से दिया जाता है।

टर्मिर्नल बोनस: यह बोनस बीमा पॉलिसी के पूर्ण अवधि तक जारी रहने की स्थिति में दिया जाता है। वर्ष 2015-16 की समाप्ति पर इसकी दर 4 /- प्रति हजार बीमाधन प्रति वर्ष है।

बोनस निर्धारण का आधार एवम् प्रक्रिया क्या है ?

बोनस निर्धारण हेतु योजना के अन्तर्गत वर्ष की प्राप्तियों, भुगतान, ब्याज प्राप्तियाँ एवम् प्रबन्धकीय व्यय के आधार पर सम्पतियों एवम् दायित्वों की बैलेन्सशीट तैयार की जाती है। बैलेन्सशीट में अधिशेष की स्थिति में मूल्यांकक कुल बीमाधन के आधार पर प्रति हजार बीमाधन के लिए बोनस दर की अनुशंषा करता है। मूल्यांकक की अनुशंषा के आधार पर राज्य सरकार राज्य बीमा पॉलिसी पर बोनस के आदेश जारी करती है। स्वत्व राशि के निर्धारण के समय विभिन्न अवधियों के लिए घोषित बोनस दरों के अनुसार बीमाधन पर बोनस राशि की गणना की जाती है।

क्या राज्य सरकार द्वारा निधि में जमा राशि पर ब्याज दिया जाता है ?

निधि में जमा राशि पर राज्य सरकार द्वारा ब्याज दिया जाता है। वर्तमान में राज्य सरकार के आदेश क्रमांक एफ4 (99) एफडी / रेवेन्यु / 92 दिनांक 17.04.2020 के द्वारा इसकी दर 7.5 प्रतिशत वार्षिक है।

क्या बीमा योजना में बीमेदार को ऋण की सुविधा उपलब्ध है ?

योजना के अन्तर्गत बीमेदार द्वारा कुछ शर्तों के अधीन ऋण प्राप्त किया जा सकता है ।

अधिक कटौती किस आयु तक की जा सकती है ?

अधिक कटौती 55 वर्ष की आयु तक की जा सकती है।

क्या बीमा ऋण पर विभाग द्वारा ब्याज लिया जाता है ?

वर्तमान में दिनांक 01.04.2020 से बीमा ऋण पर बीमेदार से लिये जाने वाले ब्याज की दर 7.5 प्रतिशत वार्षिक है। नवीन बीमा नियमों के अन्तर्गत निधि पर देय एवम् ऋण प्रकरणों में लागू ब्याज दर में समानता निधि द्वारा अर्जित ब्याज के परिप्रेक्ष्य में लाई गई है।

राज्य बीमा योजना में नाम निर्देशिती किसे किया जावे ?

बीमाकृत व्यक्ति अपने पति / पत्नि, संतान / संतानों, भ्राता (भ्राताओं), बहिन (बहिनों), पिता या माता को नाम निर्देशिती रूप में नियुक्त करने का हकदार होग। यदि नाम निर्देशन करते समय उल्लेखित कोई भी संबंधी जीवित नही है तो, अन्य व्यक्ति को अपने नाम निर्देशिती के रूप में नियुक्त करने का हकदार होगा।

परन्तु यह कि बीमाकृत व्यक्ति के विवाह के पूर्व किसी भी व्यक्ति के पक्ष में किया गया और तत्पश्चात रद्द नही किया गया नाम निर्देशन उसके विवाह के पश्चात उसी पत्नि / पति के पक्ष में स्वतः रद्द किया हुआ समझा जायेगा ।

परिपक्वता के पश्चात् पॉलिसी जारी रखना ?

बीमाकृत व्यक्ति को उसकी सेवानिवृत्ति के ठीक पश्चात् आने वाले 31 मार्च तक बीमे को जारी रखने की अपनी इच्छा व्यक्त करने को विकल्प होगा। ऐसी स्थिति में बीमाकृत राशि, विस्तारित अवधि के बोनस सहित, उसकी सेवानिवृत्ति के ठीक पश्चात आने वाले प्रथम अप्रैल को संदेय होगी।

राज्य सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों के कल्याणार्थ व सामाजिक सुरक्षा हेतु चलाई जा रही योजनाओं में राज्य बीमा पॉलिसी के तहत राज्य कर्मचारियों का अनिवार्य बीमा किया जाता है जिसमें प्रत्येक कर्मचारी के वेतन से मूल वेतन के आधार पर प्रीमीयम की प्रतिमाह कटौती होती है राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर माह मार्च 2020 से राज्य बीमा प्रीमियम में बढ़ोत्तरी की है इसलिये राज्य बीमा की न्यनतम कटोती तो नियमानुसार होती है परन्तु राज्य बीमा नियम 1998 के मुताबिक कोई भी कर्मचारी अपनी वेतन शृंखला से दो स्लेब आगे के प्रिमियम की कटौती करवा सकता है यह राज्य बीमा योजना वर्तमान में बीमा क्षेत्र की देश की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में से एक है। न्यूनतम एवं अधिकतम कटौती की तालिका निम्नानुसार हैं-

पुनरीक्षित वेतनमान 2017 में बीमा प्रीमियम की दरें

वेतन स्लेब / पे स्लेब न्यूनतम प्रीमियम कटौती जो करवायी
जानी अनिवार्य है।
अधिकतम प्रीमियम कटौती
करवाई जा सकती है।
01 22000 तक 800 2200
02 22001 से 28500 1200 3000
03 28501 से 46500 2200 5000
04 46501 से 72000 3000 7000
05 72001 से अधिक 5000 7000
06 अधिकतम 7000 7000
si deduction slab in 7th pay commission rajasthanयह भी जरूर पढ़ें 👉  राजश्री पोर्टल पर राजश्री स्कीम इंचार्ज द्वारा आवेदन करने तथा PEEO द्वारा अप्रूव करने की संपूर्ण प्रक्रिया क्या हैं ?

सातवें वेतन आयोग के अनुसार सामान्यतः कर्मचारियों का मूल वेतन 22001 से 28500 एवं 28501 से 46500 के बीच है इन दोनों बेतन स्लेव के मुताबिक न्यूनतम व अधिकतम प्रिमियम के आधार पर वार्षिक वोनस की गणना कर आपको इस पालिसी के न्यूनतम कटोती एवं अधिकतम कटौती के अन्तर एवं लाभ को समझाया जा रहा है ।

20 साल का एक कर्मचारी एक वर्ष में 21600 रुपये अधिक प्रीमियम का भुगतान कर 94284 रुपये एवं 25 वर्ष आयु का एक कर्मचारी वर्ष में 33600 रुपये अधिक भुगतान कर 122976 रुपये का अधिक बोनस लाभ प्राप्त कर सकेगा। राज्य सरकार द्वारा कर्मचारी को इस पॉलिसी पर न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा व सेवानिवृति पर अत्यधित आर्थिक परिलाभ दिया जाता है। किसी कार्मिक के साथ अनहोनी घटित हो जाने के बाद उसके परिवार को इस योजना के तहत बहुत अधिक आर्थिक सम्बल मिलेगा।

नियमों की जानकारी के अभाव में हम केवल न्यूनतम कटोती करवाये जाने के कारण इस कल्याणकारी योजना से मिलने वाले अधिकतम बोनस का फायदा नहीं उठा पाते है। अधिकतर कर्मचारी आयकर से छूट हेतु एल.आई.सी. या पी.एल.आई. या अन्य कम्पनियों की बीमा योजना का सहारा लेते है जबकि उक्त योजना में परिलाभ उपर्युक्त बीमा कम्पनियों की योजनाओं से दुगुना है। राज्य बीमा योजना अतिलाभकरी बीमा योजना है।

राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक कार्मिक की अनिवार्यता राज्य बीमा पॉलिसी की जाकर उसके वेतन से प्रतिमाह प्रिमियम की कटौती की जाती है। राज्य बीमा पॉलिसी के बीमा धन की गणना हेतु निम्न सूचनाओं की आवश्यकता होती हैं।

1. बीमा कटौती प्रारम्भ होने की तिथि (DOR) : राज्य बीमा योजना में प्रथम व अधिक कटौती सदैव माह मार्च देय अप्रैल के वेतन से ही होती हैं अतः प्रथम अप्रैल को बीमा कटौती की जोखिम वहन तिथि कहलाती हैं।

2. कर्मचारी की जन्म तिथि : प्रत्येक बीमित कर्मचारी की जन्म तिथि

3. कर्मचारी की आयु कर्मचारी की जोखिम बहन तिथि पर आयु ज्ञात करना जिससे जोखिम तिथि या उसके बाद अगली जन्म तिथि पर आयु क्या होगी।

आयु ज्ञात करने के आधार ए कार्मिक बी कार्मिक
अनुबंध तिथि (DOR ) 01.04.2018 01.04.2018
कर्मचारी की जन्म तिथि 05.04.2000 05.02.1988
अन्तर 00.00.0018 00.02.0030
अनुबंध तिथि पर आयु 18 वर्ष 31 वर्ष

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4. बीमा पॉलिसी की अवधि वर्तमान में राज्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्त आयु 60 वर्ष हैं अतः कार्मिक को 60 वर्ष की आयु तक प्रिमियम चुकाना हैं अतः बीमा पॉलिसी की अवधि सेवानिवृति की आयु तक होती हैं। जैसे सेवानिवृति आयु (60–18) वर्ष = 42 वर्ष बीमा अवधि, सेवा निवृति आयु (60-31 ) वर्ष = 29 वर्ष बीमा अवधि है।

5. बीमा प्रिमियम राशि : राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर वेतन खण्ड के आधार पर बीमा प्रिमियम निर्धारित किया जाता हैं जो वर्तमान में इस प्रकार हैं-

वेतन स्लेब / पे स्लेब न्यूनतम प्रीमियम कटौती जो करवायी जानी अनिवार्य है। अधिकतम प्रीमियम कटौती करवाई जा सकती है।
01 22000 तक 800 2200
02 22001 से 28500 1200 3000
03 28501 से 46500 2200 5000
04 46501 से 72000 3000 7000
05 72001 से अधिक 5000 7000
06 अधिकतम 7000 7000

उल्लेखनीय है कि कर्मचारी अपनी नियत वेतन खण्ड से दो स्लेब अधिक स्वेच्छा से बीमा प्रीमियम की कटौती करवा सकता हैं किन्तु प्रिमियम में वृद्धि 55 वर्ष की आयु तक ही मान्य हैं इसके बाद प्रिमियम स्थिर रहता है ।

6. बीमा परिपक्वता तिथि: सेवानिवृत माह के अगले 1 अप्रैल को बीमा पॉलिसी परिपक्व होती है एवं बीमित को बीमा पॉलिसी का परिलाभ का भुगतान किया जाता है।

7. एक रुपये की प्रिमियम देय बीमाधन : 1 रुपये की प्रिमियम पर देय बीमा धन की गणना निम्नलिखित तालिका से जोखित वहन तिथि पर ज्ञात आयु के फेक्टर को 1 रुपये का बीमा धन माना जाता है।

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एक रुपया प्रिमियम का बीमाधन

बीमा कटौती प्रारम्भ होने या अधिक कटौती प्रारम्भ
होने पर कर्मचारी की आयु
बीमा धन बीमा कटौती प्रारम्भ होने या अधिक कटौती प्रारम्भ
होने पर कर्मचारी की आयु
बीमा धन
18 622 35 314
19 602 36 298
20 582 37 282
21 562 38 265
22 544 39 251
23 525 40 237
24 507 41 224
25 488 42 210
26 470 43 196
27 451 44 182
28 433 45 169
29 415 46 155
30 398 47 144
31 381 48 132
32 364 49 121
33 348 50 109
34 331
insurance amount on deduction of re 1/- premium in SI Policy

8. बीमाधन- एक रुपया के बीमाधन फेक्टर को प्रिमियम से गुणा करके ज्ञात किया जाता हैं जिसकी सरलतम गणना निम्न काल्पनिक सारणी से-

बीमाधन गणना के बिन्दु ए कर्मचारी बी कर्मचारी
DOR 01.04.2018 01.04.2018
DOB 05.04.2000 05.02.1988
आयु 00.00.0018 00.02.0030
अवधि 18 वर्ष 31 वर्ष
प्रिमियम 1300 3000
DOM 01.04.2061 01.04.2048
बीमाधन फेक्टर 622 381
बीमाधन=फेक्टर x प्रिमियम 622 x1300=808600 381 x3000=1143000
प्रतिवर्ष बोनस 72774 102870

राज्य सरकार द्वारा राज्य बीमा पॉलिसी पर प्रतिवर्ष बोनस की घोषणा की जाती है। बोनस की घोषणा प्रति हजार बीमा धन के आधार पर होती हैं वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा सामान्यतः प्रति हजार बीमा धन पर 90 रुपये बोगस दिया जा रहा है। कर्मचारी स्वय बीमा धन को बोनस की दर से गुणा करके उसमें 1000 का भाग देकर बोनस की राशि ज्ञात कर सकता है। अतः ऊपर के उदाहरण से स्पष्ट है ।

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10. अगर कर्मचारी को पॉलिसी पूर्व में जारी हैं और वेतन वृद्धि या राज्य सरकार द्वारा प्रिमियन की दरों में परिर्वतन या कर्मचारी द्वारा एक या दो स्लेव अधिक कटौती करवाये जाने पर राज्य बीमा विभाग द्वारा बढे हुए प्रिमियम पर अलग समाश्वासन जारी किये जाते हैं जिस पर बीमाधन व बोनस गणना निम्न प्रकार होगी ।

  • जैसे किसी कार्मिक को 01.04.2016 को बीमाधन 5,00000
  • बोनस गणना – 01.04.2016 से 31.03.2017 तक 500000×90 1000 = 45000
  • 01.04.2017 को प्रिमियम वृद्धि से बीमाधन 2,00000
  • बोनस गणना 01.04.2017 से 31.03.2018 तक 700000×90 1000 = 63000

बोनस की राशि बीमेदार को प्रतिवर्ष निहित हो जाती हैं किन्तु इसका भुगतान स्वत्व (दावा) के साथ किया जाता है। इससे पूर्व देय नहीं है। बीमा पॉलिसी के परिपक्व होने पर परिपक्वता दावे के समय पॉलिसी पर टर्मिनल बोनस भी दिया जाता है।

11. बीमा पॉलिसी धारक की परिपक्वता तिथि से पूर्व आकरिमक या सामान्य मृत्यु होने पर राज्य सरकार द्वारा बीमाधन की दुगुनी राशि (कार्मिक ए की पॉलिसी पर 1617200 रुपये व कार्मिक बी की पॉलिसी पर 2286000 रुपये) बोनस सहित भुगतान किया जाता है। चाहे कार्मिक की मृत्यु प्रथम माह का प्रिमियम अदा करने के बाद हो गई हो ।

12. राज्य कर्मचारी अपनी बीमा पॉलिसी पर ऋण ले सकता है जो अधिकतम 60 किश्तों में अदा करना होता है एव जिस पर 8 प्रतिशत ब्याज ऋण राशि चुकने के बाद ली जाती है।

13. मनोनयन- किसी कार्मिक के अविवाहित होने पर उसके द्वारा राज्य बीमा पॉलिसी में जिसे मनोनित नियुक्त किया जाता है। शादी होने के बाद वह मनोनयन स्वतः ही पत्नी के पक्ष में हो जाता है परन्तु अन्य मामलों में कर्मचारी स्वय राज्य बीमा विभाग के संबंधित जिला कार्यालय में आवेदन पत्र के जयें मनोनयन में परिर्वतन करवा सकता है।

14. प्रोबेशन पूर्ण होने के बाद Next मार्च से SI की कटौती प्रारम्भ की जाती है. इस हेतु कार्मिक को अपनी SSO-ID से प्रथम घोषणा पत्र भरना पड़ता है वह चाहे तो पहली बार स्लैब से एक या दो स्टेप आगे की कटौती करवा सकता है. उसको उस हिसाब में प्रीमीयम की राशि अपने घोषणा पत्र में सलेक्ट करनी पड़ती है.

15.  एक अप्रैल को जिनकी आयु 55 वर्ष से कम है वह स्केब से एक या दो स्टेप अगली SI की कटौती बढ़ा सकते है. उनको SSO-ID से furthuer contract (अधिक घोषणा) पत्र भरना पड़ता है।

16.  एक अप्रैल को जिनकी आयु 55 वर्ष या इससे अधिक हो रही है, इनके SI की वर्तमान कटौती यथावत रहेगी क्योकि SI द्वारा उनके रिस्क कवर नही की जाती है.

17.  प्रथम या अधिक घोषणा पत्र भरने से पहले अपने DDO लॉगिन से पहले कार्मिक की सर्विस डिटेल्स, बेसिक Pay एवं नॉमिनी डिटेल्स को अपडेट करवाया जाना जरूरी है. State Insurance Deduction Rules

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18. SI की वर्तमान कटौती जो चल रही है वह किसी भी कारण से कम नही की जा सकती है।

19.  किसी कर्मिक के प्रोबेशन पूर्ण हो चुका है, परन्तु स्थाईकरण एवम वेतन नियमितीकरण नही हुआ है. ऐसे मामले में स्थाईकरण के बाद जब नियमित वेतन का निर्धारण होगा. उसके एरियर से मार्च महीने की प्रथम SI कटौती की जायेगी एवं उसी समय उसका प्रथम घोषणा पत्र भरा जाएगा.

20.  घोषणा पत्र भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लेवे कि आपकी SIPF EMPLOYEE ID वर्तमान DDO के पास होनी चाहिए अन्यथा भरा गया घोषणा पत्र पुराने वाले DDO की ID पर शो होगा. ऐसी स्थिति में वर्तमान DDO से ID को Pull करे या पुराने DDO से ID नये DDO को ट्रांसफर करावे।

21.  किसी का वेतन 5वे या 6ठे वेतनमान में आहरित हो रहा है उनकी SI की कटौती यथावत रहेगी. उनका जब 7 वे वेतनमान में फिक्सेशन होने के बाद एरियर बनेगा उसमे SI अंतर की राशि स्लैब अनुसार कटौती हो जाएगी.

22. जुलाई में वेतनवृद्धि लगने से SI की कटौती स्लैब के अनुसार बढ़ जाती है तो उसकी बढ़ोतरी Next मार्च से ही की जाती है।

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प्रसूति अवकाश के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी क्या हैं ? What are the necessary information regarding maternity leave?

प्रश्न :  प्रसूति अवकाश के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी क्या हैं ? What are the necessary information regarding maternity leave?

प्रसूति अवकाश नियम (Maternity Leave Rule)

मातृत्व अवकाश – मातृत्व अवकाश एक महिला सरकारी सेवक को दिया जा सकता है, जिसके शुरू होने की तारीख से 180 दिनों की अवधि तक दो जीवित बच्चे हैं। हालांकि, अगर जीवित रहने के बाद भी कोई जीवित बच्चा नहीं है, तो दो बार मातृत्व अवकाश एक और अवसर पर दिया जा सकता है।

ऐसी अवधि के दौरान वह छुट्टी पर जाने से ठीक पहले आहरित वेतन के बराबर छुट्टी वेतन की हकदार होगी। इस तरह की छुट्टी को छुट्टी खाते में डेबिट नहीं किया जाएगा, लेकिन इस तरह की प्रविष्टि को सेवा पुस्तिका में अलग से बनाया जाना चाहिए।

ध्यान दें-  गर्भपात सहित गर्भपात के मामले में दो से कम जीवित बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारी को भी मातृत्व अवकाश दिया जा सकता है ।

The existing rule except Note and clarification substituted vide FD Notification No. F.1(43)FD/Rules/83 dated 6.12.2004.

मातृत्व अवकाश – एक सक्षम प्राधिकारी किसी महिला सरकारी कर्मचारी को उसकी सेवा की पूरी अवधि के दौरान दो बार मातृत्व अवकाश प्रदान कर सकता है। हालांकि, अगर दो बार इसका लाभ उठाने के बाद भी कोई जीवित बच्चा नहीं है, तो मातृत्व अवकाश एक और अवसर पर दिया जा सकता है। मातृत्व अवकाश की अनुमति एक अवधि के लिए पूर्ण वेतन पर दी जा सकती है जो इसके प्रारंभ होने की तारीख से 120 दिनों की अवधि तक बढ़ाई जा सकती है।

नोट और जीआरडी को छोड़कर मौजूदा नियम और एफडी अधिसूचना संख्या F.1 (5) FD / नियम / 96 दिनांक 2.4.1998 को हटाकर स्पष्टीकरण को रद्द कर दिया गया।


एक महिला सरकारी कर्मचारी को मातृत्व अवकाश का अनुदान जो बच्चे के जन्म के समय सरकारी सेवा में नहीं थी

DOWNLOAD FINANCE DEPARTMENT ORDER

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Maternity Leave Rules – प्रसूति अवकाश नियम

  • प्रसूति अवकाश (Maternity Leave Rule) नियम 103 दो से कम उत्तरजीवी संतानोें वाली किसी महिला कर्मचारी को प्रारम्भ की तारीख से 180 दिन का अवकाश देय है ।
  • दो बार उपभोग करने पर भी उत्तरजीवी सन्तान नही हो तो प्रसूति अवकाष एक बार और स्वीकृत किया जा सकता है ।
  • पहली बार में जुडवां सन्तान होने पर दो इकाई मानी जायेगी।
  • पहली बार मे एक दुसरी बार में जुडवां सन्तान होने पर एक इकाई मानी जायेगी। सेवा पुस्तिका में ऐसे अवकाश की अलग से लाल स्याही से प्रविष्टी की जायेगी ।
  • समय पूर्व प्रसव के कारण निःशक्त बच्चा होने पर बच्चों की संख्या की गणना में शामिल नही किया जायेगा।
  • एसीपी (ACP) स्वीकृति हेतु बच्चो की संख्या की गणना में समय पूर्व प्रसव के कारण दिव्यांग सन्तान को शामिल नही किया जायेगा । एफ.14(88)वित्त(नियम)2008 प्रथम एवं द्वितीय दिनांक 16.112011
  • शिशु गृह से ली गयी दत्तक गृहीत सन्तान के कारण सन्तानों की संख्या दो से अधिक हो जाती है, तो दत्तक गृहीत सन्तान को सन्तानों की संख्या में नही माना जायेगा।
  • ऐसे किसी व्यक्ति की पदोन्नति पर 3 वर्ष तक विचार नही होगा- व्यक्ति की पदोन्नति पर उस तारीख से जिसको उसकी पदोन्नति देय हो जाती है 3 भर्ति वर्षो तक विचार नही किया जायेगा यदि उसके 1 जून 2002 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हो।

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम-2017, मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 1961 का संशोधित रूप है। इस बील को राज्यसभा में 11 अगस्त 2016 और लोकसभा में 09 मार्च 2017 में पारित किया गया था। गर्भवती महिला कर्मचारियों को इस बिल का लाभ पहुंचाने के लिए इसे अप्रैल 2017 में लागू कर दिया गया था।


(1) प्रसूति अवकाश सेवा में कितनी बार मिलता है?

उत्तर:- सम्पूर्ण सेवाकाल मे प्रसूति अवकाश दो बार मिलता है यदि पूर्व में कोई संतान जीवित नही होने पर तीसरी बार भी प्रसूति अवकाश देय होता है।

(सेवा नियम 103)

 

(2) प्रसूति अवकाश किस आधार पर एवम कितने दिन का मिलता है?

उत्तर:-राजस्थान सेवा नियम 103 के अनुसार Dr के प्रमाण पत्र के आधार पर एक महिला कार्मिक को प्रसूति अवकाश 180 दिन के लिए सवैतनिक अवकाश मिलता है ।

(आदेश:- FD/Date-11.10.2008)

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(3) प्रसूति अवकाश कब से लिया जा सकता है?

उत्तर:-राजस्थान सेवा नियम 103 के अनुसार प्रसूति के दिन से यह अवकाश ले सकते है परंतु Dr के प्रमाण पत्र के आधार पर प्रसूति के पहले से भी प्रसूति अवकाश लिया जा सकता है।

 

(4) क्या प्रसूति अवकाश में नियमित वेतन का भुगतान होता है ?

उत्तर:- हाँ प्रसूति अवकाश में कार्मिक को नियमितअवकाश वेतन का भुगतान किया जाता है।

【सेवा नियम:-97(1)】

 

(5) प्रसूति अवकाश में वेतन का भुगतान किस दर से किया जाता है ?

उत्तर:- प्रसूति अवकाश में कार्मिक को वेतन का भुगतान अवकाश पर जाने से पहले वह जिस दर से वेतन आहरित कर रहा था उसी दर के अनुसार 180 दिन तक अवकाश वेतन का भुगतान किया जाता है।

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(6) प्रसूति अवकाश के दौरान यदि DA बढ़ता है तो क्या कार्मिक को DA का भुगतान किस दर से किया जायेगा?

उत्तर:- DA की दर में वृद्धि होती है तो प्रसूति अवकाश में भी DA का भुगतान बढ़ी हुई दर के अनुसार किया जाता है।

 

(7) प्रसूति अवकाश के दौरान यदि HRA बढ़ता है तो कार्मिक को HRA का भुगतान किस दर से किया जायेगा?

उत्तर:- यदि प्रसूति अवकाश के दौरान HRA की दर में वृद्धि होती है तो प्रसूति अवकाश में भी HRA का भुगतान अवकाश पूर्व लागू दरों के अनुसार किया जाएगा।

मकान किराया भत्ता नियम 6(क)

 

(8) क्या प्रसूति अवकाश में कार्मिक के नियमित वेतनवृद्धि देय होती है ?

उत्तर:-कार्मिक के वेतनवृद्धि नियमित एक जुलाई से ही स्वीकृत की जायेगी जो काल्पनिक होगी । वेतनवृद्धि का आर्थिक लाभ कार्मिक को प्रसूति अवकाश से पुनः कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से देय होगा।

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(9) क्या कार्मिक को प्रोबेशनकाल में प्रसूति अवकाश मिलता है ?

उत्तर:-हाँ कार्मिक के प्रोबेशनकाल में भी नियमानुसार 180 दिन का प्रसूति अवकाश देय होता है तथा इससे प्रोबेशनकाल में वृद्धि नही होती है

(आदेश:- FD Date-15/02/2012)

 

(10) प्रसूति अवकाश की स्वीकृत  किस के द्वारा की जाती है?

उत्तर:- प्रसूति अवकाश की स्वीकृत आहरण वितरण अधिकारी (Ddo) द्वारा की जाती है एवम प्रोबेशनकाल में भी प्रसूति अवकाश की स्वीकृति Ddo द्वारा की जाती है।

 

(11) प्रसूति अवकाश के दौरान किसी के 2 वर्ष का प्रोबेशनकाल पूरा हो रहा है तो उस स्थिति में उसके स्थाईकरण की क्या प्रक्रिया रहेगी एवम स्थाईकरण के बाद वेतन निर्धारण के बाद एरियर का भुगतान कब से होगा?

उत्तर:- प्रसूति अवकाश के दौरान किसी कार्मिक का प्रोबेशनकाल पूर्ण हो रहा है तो उसका स्थाईकरण 2 वर्ष का प्रोबेशन पूर्ण करने की तिथि से ही होगा एवम नियमित वेतन निर्धारण उसी दिन से किया जाएगा जो काल्पनिक रहेगा वेतन निर्धारण का आर्थिक लाभ प्रसूति अवकाश से पुनः कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से ही देय होगा क्योंकि प्रसूति अवकाश में पूर्व वेतन की दर से ही अवकाश वेतन का भुगतान किया जाता है।

 

(12) प्रसूति अवकाश के क्रम में साथ -साथ अन्य कोई अवकाश लिया जा सकता है?

उत्तर:-हाँ प्रसूति अवकाश के क्रम में साथ-साथ CL के अलावा अन्य किसी भी प्रकार का अवकाश लिया जा सकता है परन्तु यह ध्यान रखे लगातार अवकाश के दिनों की संख्या 180 दिन से अधिक होने पर अवकाश की स्वीकृति विभागाध्यक्ष द्वारा ही की जायेगी।

( आदेश:-FD Date-26.02.02)

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(13) संविदा कार्मिको को भी क्या प्रसूति अवकाश मिलता है ?

उत्तर:- यदि सविंदा महिला कार्मिक की नियुक्ति वित्त विभाग के अनुमोदन के उपरान्त हुई है तो ऐसे संविदा कार्मिको को भी प्रसूति अवकाश मिलता है।

(आदेश:-FD दिनांक-19.06.2009)

 

(14) किसी महिला कार्मिक के गर्भपात हो गया है तो क्या उसे प्रसूति अवकाश देय होता है ?

उत्तर:-गर्भपात होने पर प्रसूति अवकाश देय नही होता है।

Dr के प्रमाण पत्र के आधार पर जिसमे गर्भपात का स्पस्ट उल्लेख हो कार्मिक को सेवाकाल में  ( एक बार अथवा दो बार) कुल मिला कर 42 दिन का गर्भपात अवकाश मिलता है ।

(आदेश:-FD Date-14.07.2006)

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(15) महिला कार्मिक द्वारा कोई संतान गोद लेने पर प्रसूति अवकाश मिलता है?

उत्तर:-किसी महिला कार्मिक के दो से कम जीवित संतान होने पर कार्मिक द्वारा एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे को वैधानिक रूप से दत्तक ग्रहण करने पर उसको 180 दिन का दत्तक ग्रहण अवकाश मिलता है।

(RSR 1951 का नियम 103(B)

 

(16) एक महिला कार्मिक ने प्रसूति अवकाश लिया है तथा प्रसूति के बाद बच्चे की मृत्यु हो गई है तो क्या उसका प्रसूति अवकाश जारी रहेगा ?

उत्तर:-बच्चे की मृत्यु होने के बाद भी पूर्व से स्वीकृत प्रसूति अवकाश का उपयोग किया जा सकता है ।

लेकिन महिला कार्मिक प्रसूति अवकाश का उपयोग अगली डिलेवरी के अवसर पर लेना चाहती है तो पूर्व में स्वीकृत प्रसूति अवकाश को निरस्त करवा कर जितने दिन के अवकाश का उपयोग किया है उसे अर्जित अन्य किसी भी प्रकार के अवकाश में बदल कर पुनःड्यूटी जॉइन कर सकती है।

सधन्यवाद 👉 पेमेनेजर इन्फो 

 

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प्रश्न -1.मातृत्व अवकाश के लिए आवश्यक एवम अनिवार्य दस्तावेज क्या क्या है ?
उत्तर – मातृत्व अवकाश हेतु लिखित में मातृत्व अवकाश का आवेदन पत्र एवं गर्भधारण/प्रसूति संबंधित दस्तावेज के आधार पर उक्त अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। चिकित्सालय में भर्ती एवं डिस्चार्ज पत्र एवं संतान का जन्म प्रमाणपत्र आदि की अनिवार्यतः आवश्यकता नही है। डीडीओ के द्वारा चाहे जाने पर अन्य संबंधित दस्तावेज अवकाश समाप्ति पश्चात कार्यग्रहण पर भी प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न-2.क्या सिकनेस एव फिटनेस मातृत्व अवकाश हेतु अनिवार्य दस्तावेज है ?
उत्तर – प्रसूति (मातृत्व) अवकाश हेतु सिकनेस एवम फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य दस्तावेज नही है। प्रसूति अवकाश कोई बीमारी नही है।
किसी बीमारी के आधार पर PL/HPL/CPL/WPL अवकाश लेने पर ही फिटनेस व सिकनेस प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।

प्रश्न-3.जिस अस्पताल/डॉक्टर द्वारा सिकनेस जारी किया गया है क्या उसी का फिटनेस आवश्यक है अथवा किसी अन्य डॉक्टर का फिटनेस भी मान्य है ?
उत्तर – जब सिकनेस जरूरी ही नही है तो फिटनेस की भी आवश्यकता नही है। यदि कार्मिक उपलब्ध करवाता है तो भी एक ही डॉक्टर का सिकनेस व फिटनेस प्रमाणपत्र होना अनिवार्य नही है।

प्रश्न-4. एक कार्मिक ने पूर्व में दो बार मातृत्व अवकाश ले लिया है। उसका एक बच्चा ही वर्तमान में जीवित है। क्या उसे अगले बच्चे के जन्म पर मातृत्व अवकाश लाभ मिलेगा ?
उत्तर – नही। वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 1(6)एफडी(रूल्स)/2011 दिनांक 15.02.2012 द्वारा राजस्थान सेवा नियम 122A (ii) में यह जोडा गया है कि यदि महिला कार्मिक द्वारा दो बार प्रसूति अवकाशों का उपभोग करने के उपरांत भी उसके कोई जीवित संतान वर्तमान में नहीं हों तो ऐसे प्रकरण में एक बार और (अर्थात तीसरी बार ) प्रसूति अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है ।

प्रश्न-5. अगर किसी महिला कार्मिक के दो संतान पहले से हैं और उसने केवल एक ही संतान पर मातृत्व अवकाश लिया है तो क्या तीसरी संतान पर उसे अवकाश मिलेगा ?
उत्तर – नहीं। यदि दो प्रसव के बाद भी कोई संतान जीवित नहीं है तो ही मातृत्व अवकाश लाभ मिलेगा।

प्रश्न-6. मातृत्व अवकाश के बाद जॉइन करने के तुरंत बाद CCL ले सकते है क्या ?
उत्तर- मातृत्व अवकाश की निरंतरता/जॉइन करने के तुरंत बाद संतान देखभाल अवकाश ले सकते है। PEEO/DDO एक बार मे न्यूनतम 5 दिन एवं अधिकतम 120 दिन तक का संतान देखभाल (CCL) अवकाश उचित कारण के आधार पर स्वीकृत कर सकते है।

प्रश्न-7. मातृत्व अवकाश की समाप्ति पर यदि राजपत्रित अवकाश हो तो वह मातृत्व अवकाश की अवधि में शामिल होगा या नहीं ?
उत्तर – रा.से.नि. भाग-1 के नियम 61 व 63 के तहत पूर्ववर्ती एवं पश्चावर्ती राजपत्रित अवकाश का लाभ कार्मिक को मिलता है अतः मातृत्व अवकाश के पूर्व या पश्चातवर्ती राजपत्रित अवकाश अवधि को मातृत्व अवकाश में नहीं गिना जाएगा।

प्रश्न-8. सर्विस बुक में मातृत्व अवकाश स्वीकृति का इंद्राज अवकाश पर प्रस्थान के समय होगा या पुनः कार्यग्रहण करने पर होगा ?
उत्तर – किसी भी अवकाश पर प्रस्थान से पूर्व अवकाश की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है अतः अवकाश स्वीकृति आदेश जारी होते ही तत्काल सेवा पुस्तिका में अवकाश का इंद्राज किया जाएगा।

प्रश्न-9. मातृत्व अवकाश वेतन लगातार प्रतिमाह मिलेगा या कार्यग्रहण करने पर एक साथ देय होगा ?
उत्तर – राजस्थान सेवा नियम भाग 1 के नियम 97(1) एवं 103 के अनुसार मातृत्व अवकाश के दौरान अवकाश पर प्रस्थान से ठीक पूर्व आहरित वेतन लगातार मिलेगा। उक्त अवकाश के दौरान बिना किसी वजह के वेतन रोकने पर डीडीओ पर कार्यवाही की जा सकती है।

प्रश्न-10. क्या एक महिला कर्मचारी प्रोबेशन काल में मातृत्व अवकाश का उपभोग कर सकती है एवं अगर मातृत्व अवकाश का उपभोग कर सकती है तो क्या मातृत्व अवकाश का उपभोग करने पर प्रोबेशन काल आगे बढ़ेगा ?
उत्तर – राजस्थान सेवा नियम 103 एवं 122A के अनुसार महिला कार्मिक प्रोबेशन में भी मातृत्व अवकाश का उपभोग कर सकती है। प्रोबेशन में मातृत्व अवकाश पर रहने से परिवीक्षाकाल आगे नही बढेगा।
प्रश्न-11. एक कार्मिक का मातृत्व अवकाश के दौरान स्थानांतरण दूसरे स्कूल में हो जाता है तो इस स्थिति में वह महिला कर्मचारी दूसरे स्कूल में जॉइन करने के पश्चात निरन्तर मातृत्व अवकाश पर चलेगी या उसका मातृत्व अवकाश खत्म हो जाएगा ?
उत्तर- स्थानांतरण दूसरे स्कूल में होने पर कार्यमुक्त होने से पहले विद्यालय में कार्यग्रहण करना होगा। कार्यग्रहण किए बिना कार्यमुक्ति संभव नही है अतः कार्यग्रहण करते ही मातृत्व अवकाश समाप्त माना जाएगा। कार्मिक चाहे तो कार्यग्रहण अवधि विस्तार हेतु आवेदन कर सकती है।

प्रश्न -12. एक महिला कार्मिक न्यायिक प्रक्रिया का पालन कर अनाथालय से बच्चा गोद लेती है तो उसे मातृत्व अवकाश मिलेगा या नही ?

उत्तर – उक्त मामलों में राजस्थान सेवा नियम 1951 खण्ड प्रथम के नियम 103 (ख) के अनुसार 180 दिन का बच्चा दत्तक ग्रहण अवकाश स्वीकृत किया जाएगा बशर्ते गोद लिए बच्चे की आयु 1 वर्ष से कम हो और कुल जीवित बच्चो की संख्या 2 से कम हो।

प्रश्न-13. मातृत्व अवकाश को सेवा पुस्तिका में कहाँ पर एवं कैसे दर्ज करते हैं ?
उत्तर – सेवा पुस्तिका में दायीं तरफ के सत्यापन वाले पेज पर हेडिंग में “प्रथम/द्वितीय प्रसूति अवकाश” लिखकर अवकाश स्वीकृति आदेश क्रमांक सहित लिखा जाता है।

प्रश्न -14. कोई महिला कर्मचारी वेतनवृद्धि तिथि से पूर्व मातृत्व अवकाश पर हैं और वेतनवृद्धि तिथि 01 जुलाई के बाद ज्वाइन करती है तो इसका वेतनवृद्धि पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर – कार्मिक को नियमित वेतनवृद्धि का लाभ 1 जुलाई से ही काल्पनिक रूप से दिया जाएगा लेकिन वेतनवृद्धि का नकद आर्थिक लाभ कार्यग्रहण करने की तिथि से देय होगा।

प्रश्न-15. प्रोबेशन में मातृत्व अवकाश संस्थाप्रधान/डीडीओ स्वयं स्वीकृत कर सकता है या फिर नियुक्ति अधिकारी ही स्वीकृत करेंगे ?
उत्तर – परिवीक्षाकाल में भी महिला कार्मिक को 180 दिवस का मातृत्व अवकाश राजस्थान सेवा नियम 103 के तहत डीडीओ (कार्यालयाध्यक्ष) स्वयं स्वीकृत करने में पूर्ण सक्षम है।

नोट :- प्रश्नोत्तरी के निर्माण में राजस्थान सेवा नियमों, अवकाश नियमों एवं विभगीय परिपत्रों के अनुसार पूर्ण रूप से सही एवं तथ्यात्मक एवं संक्षिप्त जानकारी देने का प्रयास किया गया है। किसी भी त्रुटि के लिए प्रश्नोत्तरी निर्माणकर्ता या एडमिन पैनल जिम्मेदार नही होगा।

अधिक जानकारी के लिए रा.से.नि. भाग 1 के नियम 103 एवं 104 का अध्ययन करें।

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गैर-सरकारी विद्यालयों में भौतिक सत्यापन प्रक्रिया की क्या प्रक्रिया हैं ? What is the process of physical verification process in private schools?

प्रश्न : गैर-सरकारी विद्यालयों में भौतिक सत्यापन प्रक्रिया की क्या प्रक्रिया हैं ? What is the process of physical verification process in private schools?

उत्तर:- 

गैर सरकारी विद्यालयों में सत्र 2020-21 तथा सत्र 2021-22 में निःशुल्क शिक्षा हेतु नवप्रवेशित एवं पूर्व सत्रों के कमोन्नत बालक-बालिकाओं के भौतिक सत्यापन संबंधी दिशा-निर्देश

(निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के प्रावधानान्तर्गत)

10.1 भौतिक सत्यापन हेतु किये जाने वाले कार्य :-

सत्यापन दलों का गठन:-

10.1.1 जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.शि.)एवं जिला शिक्षा अधिकारी (मा.शि.) अपने-अपने परिक्षेत्र केगैर-सरकारी विद्यालयोंकी संख्या के आधार पर सत्यापन दलों का गठन करेंगे।

10.1.2 दलों का गठन केवल उन्ही विद्यालयों के लिए किया जायेगा, जिनमे आरटीई की धारा 12(1)(ग) के तहनिःशुल्क सीट्स पर विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यह सूची डीईओ प्रा.शि./डीईओ मा.शि. के लॉगिन में उपलब्ध है।

10.1.3 सत्यापन दलों का गठन ऑनलाइन तरीके से किया जाएगा। प्रत्येक दल में शामिल दोनों सदस्यों का चुनाव एक ही विद्यालय से किया जाएगा। एक सत्यापन दल को अधिकतम 3 विद्यालय आवंटित किए जाएंगे। पूर्व में गठित दल यदि किसी कारण से भौतिक सत्यापन करने में असमर्थ है तो परिवेदना के आधार पर दल को निरस्त करने एवं नवीन दल के ऑनलाइन गठन का अधिकार सम्बन्धित जिला शिक्षा अधिकारी का रहेगा।

10.1.4 सत्यापन दल का अध्यक्ष राजपत्रित अधिकारी होगा तथा एक अन्य सदस्य उपलब्धता के आधार पर व्याख्याता/व.अ./अध्यापक/लिपिक वर्ग होगा।

10.1.5 प्रारम्भिक शिक्षा में पर्याप्त संख्या में राजपत्रित अधिकारी उपलब्ध न होने की स्थिति में दलों के अध्यक्ष के रूप में माध्यमिक शिक्षा से प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक/व्याख्याता लिए जा सकेगें तथा शेष एक सदस्य प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय/अध्यापक में से लिया जा सकेगा।

10.1.6 दल गठन के समय यथा सम्भव दल सदस्यों के पदस्थापन के ब्लॉक में ही गैर-सरकारी विद्यालय सत्यापन हेतु दिये जायें।

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10.2 विशेष सत्यापन दलों का गठन:-

10.2.1जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक शिक्षा/माध्यमिक शिक्षा (प्रथम/द्वितीय) अपने अधीन विद्यालयों के सेम्पल सत्यापन के लिए आवश्यकतानुसार अपने कार्यालय से विशेष सत्यापन दलों का गठन करेंगे।

10.2.2 यह विशेष सत्यापन दल जिले में विद्यालयों की संख्या का एक प्रतिशत अथवा 20 विद्यालय, जो भी अधिक हों, का अनिवार्य रूप से सत्यापन करेंगे।

10.2.3 ये विशेष दल उन विद्यालयों का पुनः सत्यापन करेंगे जो सत्यापन दलों द्वारा सत्यापित किए जा चुके हैं। निरीक्षण से पूर्व उन विद्यालयों की मूल सत्यापित रिपोर्ट को साथ लेकर जाएंगे तथा मूल सत्यापन से भिन्नता पाये जाने पर विशेष सत्यापन दल के अध्यक्ष द्वारा मूल सत्यापन रिपोर्ट में लाल स्याही के पैन से आवश्यक संशोधन किये जाएंगे। उक्त संशोधन विद्यालय प्रति एवं कार्यालय प्रति दोनों में किये जाएंगे।

10.24 विद्यालय द्वारा विशेष सत्यापन दल द्वारा संशोधित सत्यापन रिपोर्ट को ही आरटीई वेबपोर्टल पर अपलोड किया जाऐगा तथा सम्बन्धित कार्यालय द्वारा उसी के अनुरूप इसका मिलान कर सत्यापन किया जाएगा।

10.2.5 विशेष सत्यापन दलों द्वारा उन विद्यालयों की भी पुनः जाँच की जायेगी जिन विद्यालयों के भौतिक सत्यापन के सम्बन्ध में परिवेदनायें प्राप्त हुई हैं।

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10.2.6 विशेष जाँच दल द्वारा निरीक्षण किये गये विद्यालयों की सूचना की प्रविष्टि जिला शिक्षा अधिकारी के लॉगिन से करनी है।

10.3.1जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा अपने-अपने परिक्षेत्र के विद्यालयों के लिए गठित सत्यापन दलों का प्रशिक्षण कराया जाना सुनिश्चित करेंगे। बिना प्रशिक्षण के किसी भी सत्यापन दल को सत्यापन हेतु विद्यालय में नहीं भेजा जायेगा। सत्यापन दलों को यह स्पष्ट किया जाए कि इस बार सत्र 2021-22 के साथ सत्र 2020-21 का भी भौतिक सत्यापन प्रपत्र भरा जाएगा। दोनों सत्रों के अलग-अलग प्रपत्र भरे जाने है।

10.3.2 प्रशिक्षण के दौरान सत्यापन दलों को “दुर्बल वर्ग” व “असुविधाग्रस्त समूह की परिभाषा, प्रवेश हेतु कैचमेंट एरिया, आयु पॉलिसी व एन्ट्री कक्षा एवं आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों की जॉच के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

10.3.3 निःशुल्क सीट्स पर प्रवेश की ऑनलाइन व विगत सत्रों की ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया की जानकारी सत्यापन दलों को दी जायेगी।

10.3.4 यह जानकारी इन दिशा-निर्देशों के आधार पर दी जायेगी। यह दिशा निर्देश प्राइवेट स्कूल वेब-पोर्टल http://www.rajpsp.nic.inपर उपलब्ध हैं।

10.3.5 सत्यापन दलों को सम्बन्धित विद्यालयों के नाम की सूची मय पता मोबाइल नम्बर, लैण्डलाइन नम्बर उपलब्ध करवायी जाएगी तथा सत्यापन दलों को भौतिक सत्यापन के दिशा-निर्देशों की एक-एक प्रति भी दी जाएगी।

10.3.6 जिले के आरटीई प्रभारी अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी के फोन नम्बर भी सत्यापन दलों को उपलब्ध करवायें जायें जिससे सत्यापन दल आवश्यकता पड़ने पर जानकारी प्राप्त कर सकें।

10.4.भौतिक सत्यापन प्रतिवेदनों को कार्यालय स्तर से सत्यापित करना :-

10.4.1 भौतिक सत्यापन के दौरान सत्त मॉनिटरिंग कर विद्यालयों से सत्यापन प्रतिवेदनों की प्रविष्टि करवायी जाए।

10.4.2 जिन विद्यालयों के सत्यापन प्रतिवेदन ऑनलाइन प्रविष्ट कर लॉक कर दिए जाएं उन प्रतिवेदनों की कार्यालय प्रति से मिलान करते हुए उन्हें तत्काल सत्यापित या असत्यापित कर दिया जाए।

10.4.3 सत्यापन करते समय यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि निःशुल्क सीट्स पर अध्ययनरत समस्त बालकों के आधार नम्बर अथवा आधार नामांकन ऑनलाइन प्रविष्ट कर दिए गए हैं।

10.4.4 कार्यालय स्तर से निर्धारित तिथि तक सत्यापन प्रतिवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं होने तथा विद्यालय के फीस पुनर्भरण से वंचित होने पर सम्बन्धित अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

नोट:-कार्यालय द्वारा सत्यापन रिपोर्ट के मिलान के दौरान रिजेक्ट की गयी रिपोर्ट को विद्यालय द्वारा सही प्रविष्ट कर अधिकतम 7 दिवस के अन्दर पुनः लॉक करना है। यदि विद्यालय तय अवधि में रिपोर्ट को लॉक नहीं करता है तो विभाग द्वारा इन बालकों की फीस का पुनर्भरण नहीं किया जायेगा तथा विद्यालय निःशुल्क सीट्स पर प्रवेशित बालकों को निःशुल्क प्रारम्भिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होगा।

आरटीई के भौतिक सत्यापन दल में बदलाव हेतु पूरे दल में ही बदलाव नहीं करते हुए केवल संबंधित अधिकारी/कार्मिक को ही बदलने की सुविधा पोर्टल पर उपलब्ध करवाई जाएगी तथा आरटीई के अन्तर्गत यह कार्य जिशिअ कार्यालय के स्तर पर ही सम्पादित की जाए।

जिले के समस्त CBEO को पीएसपी पोर्टल का लॉगिन दिया गया हैं जिसमें उनके क्षेत्र की समस्त गैर-सरकारी विद्यालयों का स्कूल प्रोफाईल तथा अन्य आवश्यक डेटा उपलब्ध है। CBEO भी उनके क्षेत्राधिकार के समस्त गैर-सरकारी विद्यालयों की मॉनिटरिंग करेंगें तथा अनियमिततओं की सूचना जिला मुख्यालय पर उच्चाधिकारियों को करेंगें।

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सत्यापन हेतु सामान्य निर्देश :- 

11.1 विद्यालय प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर अपने लॉगिन से भौतिक सत्यापन प्रतिवेदन सत्र 2020-21 व सत्र 2021-22 की दो प्रतियों का प्रिंट आउट लेकर तैयार रखें। प्रिंट आउट लेने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि विद्यालय में अध्ययनरत सभी कक्षाओं के सशुल्क बालक-बालिकाओं की पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टि की जा चुकी है तथा निःशुल्क छात्र भी प्रदर्शित हो रहे है।

11.2 भौतिक सत्यापन दल के अवलोकन हेतु बालकों के आवेदन पत्र मय संलग्नक व रिपोर्टिंग प्रपत्र, कैश बुक, रसीद बुक, बैंक पास बुक, एस.आर. रजिस्टर, कक्षा उपस्थिति रजिस्टर व पूर्व के सत्रों में आय के आधार पर प्रवेशित बालकों (केवल सामान्य, ओबीसी व एसबीसी वर्ग के लिए) के आय प्रमाण-पत्र तैयार रखें। आरटीई अधिनियम की धारा 12(3)के तहत उक्त समस्त सूचनायें विद्यालय द्वारा उपलब्ध करवाया जाना बाध्यकारी है। केवल सत्र 2020-21 हेतु छात्र का उपस्थिति रजिस्टर उपलब्ध करवाया जाना बाध्यकारी नहीं है।

11.3 सत्यापन दल, विद्यालय द्वारा उपलब्ध कराये गये भौतिक सत्यापन प्रतिवेदन के प्रिंट आउट के आधार पर ही विद्यालय में उपस्थित होकर प्रतिवेदन में पूर्व से भरी सूचनाओं व बालकों का भौतिक सत्यापन करेंगे।

11.4 भौतिक सत्यापन प्रतिवेदन में प्रविष्ट विद्यालय की स्थिति (Location), कक्षा स्तर (किस कक्षा तक), मान्यता, एण्ट्री कक्षा व आयु पॉलिसी की ध्यानपूर्वक जाँच करने के बाद ही इनको सत्यापित करें।

11.5 विद्यालय की स्थिति के संबंध में ब्लॉक, शहरी स्थानीय निकाय (नगर पालिका/नगर परिषद/नगर निगम), ग्राम पंचायत, ग्राम, वार्ड तथा शहरी या ग्रामीण क्षेत्र की गहन जॉच के बाद ही इन्हें सत्यापित करें। यदि विद्यालय के ग्राम/वार्ड अथवा ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय में परिवर्तन है तो यह परिवर्तन विद्यालय लॉगिन से सत्यापन रिपोर्ट ऑनलाइन करते समय किया जा सकता है लेकिन यदि विद्यालय के ब्लॉक के नाम में परिवर्तन है तो रिपोर्ट ऑनलाइन प्रविष्ट होने के बाद डीईओ प्रा.शि./डीईओ मा.शि. के लॉगिन से रिपोर्ट सत्यापित करने से पूर्व यह परिवर्तन किया जाये तथा सत्यापन रिपोर्ट की एक प्रति सम्बन्धित डीईओ कार्यालय को भिजवाई जाये।

11.6 प्रतिवेदन में भरी सूचनाओं में यदि कोई सूचना गलत है तो उस पर गोला करना है तथा उसके पास ही सही सूचना को अंकित करना है। सूचनाओं में परिवर्तन निरीक्षण प्रतिवेदन की दोनों प्रतियों में करने हैं।

11.7 इस प्रपत्र में पूर्व में भरे हुए डाटा में बदलाव से विद्यालय सहमत है। इसमें किसी भी प्रकार के परिवर्तन की स्थिति में इस सत्र में प्रवेशित बालकों का पोर्टल पर यथानुसार परिवर्तन हो जायेगा, जिसके लिए विद्यालय स्वयं जिम्मेदार होगा एवं उसे ज्ञात है कि इसमें दुबारा से बदलाव सम्भव नहीं है।

11.8 भौतिक सत्यापन दल द्वारा विद्यालय से किसी भी दस्तावेज की छाया प्रति देने की मांग नहीं की जायेगी ओर न ही निरीक्षण प्रतिवेदन के साथ सलंग्न की जायेगी ।भौतिक सत्यापन दल द्वारा जो भी रिकार्ड अवलोकित किया जाए प्रमाण के रूप में दल के अध्यक्ष द्वारा अवलोकित दस्तावेजों के प्रत्येक पृष्ठ पर अपने हस्ताक्षर एवं दिनांक अंकित की जाए।

11.9 सत्यापन प्रक्रिया के पूर्ण होने पर सत्यापन दल के अध्यक्ष द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट की एक प्रति निरीक्षण के दिन ही सम्बन्धित संस्थाप्रधान/प्रभारी को प्राप्ति के हस्ताक्षर प्राप्त कर उपलब्ध करवायी जायेगी तथा दूसरी प्रति सम्बन्धित डीईओ (प्रारम्भिक शिक्षा)/डीईओ (माध्यमिक शिक्षा) कार्यालय जमा करवायी जायेगी।

11.10 सत्यापन दल द्वारा उपलब्ध करवाये गये निरीक्षण प्रतिवेदन को गैर-सरकारी विद्यालय द्वारा 5 दिवस में आरटीई वेबपोर्टल पर अपलोड करना है।

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12 आधार कार्ड सत्यापन सम्बन्धी निर्देश

12.1 स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार आरटीई की धारा 12(1)(ग) के तहत् विद्यालयों में अध्ययनरत समस्त बालक-बालिकाओं (वर्तमान सत्र में नव प्रवेशित तथा पूर्व सत्रों के क्रमोन्नत) के आधार कार्ड की फोटोकॉपी अथवा आधार कार्ड हेतु नामांकन रसीद की फोटोकॉपी लिया जाना अनिवार्य है।

12.2 जिन बालक-बालिकाओं के आधार कार्ड अथवा आधार कार्ड हेतु नामांकन की रसीद की फोटोकॉपी प्राप्त नहीं हुई है, उन बालक-बालिकाओं को सत्यापित नहीं किया जाये परन्तु जिन बालक-बालिकाओं के आधार कार्ड अथवा आधार नामांकन रसीद की फोटोकॉपी विद्यालय को शीघ्र प्राप्त होने की संभावना है उन्हें अपात्र नहीं किया जाये। भौतिक सत्यापन प्रतिवेदन में ऐसे बालक-बालिकाओं के कॉलम को रिक्त छोड़ दिया जाये।

12.3 यदि किसी विद्यालय में अध्ययनरत सभी बालक-बालिकाओं में से कुछ के आधार कार्ड अथवा आधार नामांकन की रसीद की फोटोकॉपी प्राप्त नहीं हुई है तथा इनके शीघ्र प्राप्त होने की सम्भावना है वह विद्यालय अपनी सत्यापन रिपोर्ट को ऑनलाइन प्रविष्ट कर लॉक नहीं करें।

12.4 विद्यालय ऐसे बालक-बालिकाओं के अभिभावकों से आधार कार्ड अथवा आधार नामांकन रसीद की फोटोकॉपी प्राप्त करने की कोशिश करें। यदि फोटोकॉपी सत्यापन रिपोर्ट तैयार होने के बाद प्राप्त होती है तो विद्यालय के संस्थाप्रधान सत्यापन रिपोर्ट की विद्यालय प्रति एवं आधार कार्ड अथवा आधार नामांकन रसीद की फोटोकॉपी को सम्बन्धित कार्यालय (प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों हेतु जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक शिक्षा) एवं माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों हेतु जिला शिक्षा अधिकारी, मा.शि.) में प्रस्तुत करेंगे।

12.5 सम्बन्धित कार्यालय में आरटीई प्रभारी द्वारा आधार कार्ड अथवा आधार नामांकन रसीद की फोटोकॉपी का मिलान सत्यापन रिपोर्ट में बालक-बालिका के विवरण से किया जायेगा तथा विवरण सत्यापित होने पर सभी फोटोकॉपी पर आरटीई प्रभारी द्वारा हस्ताक्षर किये जायेंगे। इन बालक-बालिकाओं को सत्यापन रिपोर्ट की दोनों प्रतिओं (विद्यालय एवं कार्यालय प्रति) में सत्यापित फीस के पुनर्भरण योग्य किया जायेगा।

12.6 सत्यापन रिपोर्ट में आधार कार्ड अथवा आधार नामांकन के सम्बन्ध में सभी बालक-बालिकाओं की स्थिति स्पष्ट होने के पश्चात् ही विद्यालय द्वारा रिपोर्ट को ऑनलाइन कर लॉक किया जायेगा लेकिन यह कार्य सत्यापन रिपोर्ट की प्रविष्टि हेतु निर्धारित अंतिम तिथि से पूर्व किया जाना अनिवार्य है।

12.7 सम्बन्धित कार्यालय प्रत्येक विद्यालय की सत्यापन रिपोर्ट को कार्यालय प्रति के आधार पर प्रमाणित (verify) करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि रिपोर्ट में पात्र पाये गये बालक-बालिकाओं की आधार संख्या अथवा आधार नामांकन संख्या प्रविष्ट कर दी गई है।

12.8 यदि किसी बालक/बालिका के विद्यालय में उपलब्ध विवरण यथा बालक/बालिका का नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्म दिनांक या पता, आधार कार्ड में दी गई सूचनाओं की तुलना में आंशिकरूप से भिन्न है तो इन बालक-बालिकाओं के प्रवेश को निरस्त नहीं किया जाए।

12.9 इन बालक-बालिकाओं के विवरण की आशिक अशुद्धियों को आधार कार्ड के आधार पर बाद में सही कर दिया जायेगा यदि इन अशुद्धियों को सही करने से बालक/बालिका की पात्रता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।

13.1 निःशुल्क प्रवेश संबंधी समस्त रिकॉर्ड का अवलोकन कर निःशुल्क शिक्षा हेतु प्रवेशित बालक की पात्रता की जॉच की जाए तथा पात्रता के आधार पर पुनर्भरण योग्य पाये गये बालकों को सत्यापित किया जाए। जो बालक प्रवेश हेतु अपात्र पाए जावें अर्थात पुनर्भरण योग्य नहीं पाये जावें उनके अयोग्य होने के कारणों के कोड अंकित करने है।

13.2 सत्यापन दल 25 प्रतिशत निःशुल्क एवं शेष 75 प्रतिशत सःशुल्क सीट्स पर अध्ययनरत बालकों की नियमित उपस्थिति की भी जांच करेंगे। यदि निःशुल्क प्रवेशित बालक ड्राप आउट पाया जाए तो उसका उल्लेख प्रतिवेदन में करेंगे। सःशुल्क सीट्स पर अध्ययनरत बालकों के आवेदन पत्रों व अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर यह सुनिश्चित कर लें कि ये बालक वास्तविक रूप से विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

13.3 शैक्षिक सत्र 2020-21 में एन्ट्री कक्षा में निःशुल्क व सःशुल्क सीट्स पर नवप्रवेशित बालक-बालिकाओं की गहनता से जाँच करें। यदि सत्यापन के समय निःशुल्क 25 प्रतिशत सीट्स पर दिये गये प्रवेश की तुलना में सःशुल्क 75 प्रतिशत सीट्स पर कम संख्या में बालक-बालिकाएँ अध्ययनरत पाये जाते है तो सःशुल्क 75 प्रतिशत सीट्स पर अध्ययनरत बालक-बालिकाओं की संख्या के आधार पर ही 25 प्रतिशत निःशुल्क सीट्स पर बालक-बालिकाओं को सत्यापित किया जाये। निःशुल्क सीट्स पर 25 प्रतिशत से अधिक संख्या में प्रवेशित बालक-बालिकाओं में से वरीयता सूची में नीचे से बालक-बालिकाओं के प्रवेश को निरस्त किया जायेगा। यह व्यवस्था केवल वर्तमान सत्र में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए ही लागू होगी।

13.4 यह भी सुनिश्चित कर लें कि प्रवेशित बालक-बालिका प्रवेश के बाद लगातार विद्यालय में आ रहे हैं तथा इनका अन्यत्र किसी विद्यालय में प्रवेश नहीं हुआ है।

13.5 आय के आधार पर प्रवेशित बालक-बालिकाओं से प्रतिवर्ष नये आय प्रमाण पत्र लिये जाते है। अतः  पूर्व सत्रों में प्रवेशित आरटीई विद्यार्थियों के आय प्रमाण पत्रों की जांच सत्र 2020-21 व सत्र 2021-22 दोनों सत्रों हेतु की जानी है।

 

14.1 सत्यापन दल विद्यालय के अभिलेखों की सावधानी पूर्वक जॉच कर विद्यालय द्वारा अन्य बालकों से ली जा रही फीस का सत्यापन करेंगे।

14.2 फीरा के रात्यापन के लिए विद्यालय के अभिलेखों यथा रसीद बुक,कैशबुक, बैंक पारावुक,फीरा संधारण रजिस्टर एवं वाउचर पंजिका का निरीक्षण करेंगे। यदि आवश्यक हो तोबालकों एवं अभिभावकों से बात कर फीस की पुष्टि कर ली जावे।

14.3 फीस के समस्त रिक्त कॉलमों में फीस की प्रविष्टि करनी है। विद्यालय को यह ज्ञात होना चाहिए कि वर्तमान शैक्षिक सत्र की वार्षिक फीस की राशि अंकित नहीं करने पर इस सत्र की प्रथम एवं द्वितीय किस्त की पुनर्भरण राशि का भुगतान किया जाना संभव नहीं होगा परन्तु निःशुल्क शिक्षा हेतु प्रवेशित एवं सत्यापित बालकों को अपने स्तर पर निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने हेतु बाध्य होगा।

14.4 सत्यापन दल द्वारा निर्देशों के विपरीत गलत तरीके से अथवा अभिलेखों का अवलोकन किये बिना ही फीस का आकलन कर राशि अंकित करने एवं पुनर्भरण की अनुशंषा करने पर गलत/अनियमित भुगतान होने की स्थिति में सत्यापन दलका उत्तरदायित्व निर्धारित होगा तथा उनके विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही अमल में लायी जायेगी।

15.1 यह जॉच बालक के “दुर्बल वर्ग” या “असुविधाग्रस्त समूह” से सम्बन्धित होने, प्रवेश हेतु निर्धारित कैचमेन्ट एरिया के निवासी होने तथा प्रवेश के लिए कक्षा अनुरूप आयु संबंधी पात्रता पूरी करनेके आधार पर की जायेगी तथा इनसे सम्बन्धित प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी कि प्रमाण पत्र निर्धारित तिथि तक तथा सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किए गए हैं अथवा नहीं। यह च कार्य सत्र 2020-21 व सत्र 2021-22 दोनों सत्रों के लिए तत्कालीन समय अनुरूप की जाएगी।

15.2 दल द्वारा जिन अभिलेखों का अवलोकन किया जाए उन पर लघु हस्ताक्षर भी किए जाएं।

15.3 सत्यापन प्रतिवेदन दो प्रतियों में तैयार कर सत्यापन दिवस को ही एक प्रति विद्यालय को तथा दूसरी प्रति सम्बन्धित कार्यालय को उपलब्ध करवा दी जाए। सत्यापन रिपोर्ट के प्रत्येक पृष्ठ पर सत्यापन दल सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य है।

नोट:-स्कूल शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर के आदेश क्रमांक प.21(32) प्राशि/आयो./2017 पार्टीvजयपुर दिनांक 18.07.2019 के बिन्दु संख्या 3.3 में आरटीई की धारा 12(1)(ग) के तहत् गैर-सरकारी विद्यालयों में 25 प्रतिशत निःशुल्क सीट्स पर अध्ययनरत बालकों के भौतिक सत्यापन व सत्यापित बालकों की फीस के पुनर्भरण कार्य को जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक/माध्यमिक कार्यालय को आवंटित किया गया है। अतः इन दिशा-निर्देशों का अध्याय-3 व 4 इस आदेश के अधीन रहेगा तथा आवश्यकता होने पर इस अध्यायों में संशोधन किया जाएगा।

RTE निरीक्षण दल के सदस्यों के नाम, पद एवं पदस्थापन स्थान सत्र 2020-21 एवं 2021-22 सेलेक्ट डिस्ट्रिक्ट एंड ब्लॉक और इससे आप ब्लॉक बार सूची देख सकते है|
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गैर-सरकारी विद्यालयों में भौतिक सत्यापन प्रक्रिया की क्या प्रक्रिया हैं ? What is the process of physical verification process in private schools?

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SIPF से लोन लेनी क्या प्रक्रिया हैं ? What is the procedure to take loan from SIPF?

प्रश्न : SIPF से लोन लेनी क्या प्रक्रिया हैं ? What is the procedure to take loan from SIPF?

उत्तर:- SI Loan Process

कार्मिक समर्पण मूल्य व अर्जित बोनस का 90% तक ऋण ले सकते हैं।

➡️ बोनस की वर्तमान दर 90 रुपये प्रति 1000 रुपये है।

➡️यदि पूर्व में SI का Loan ले रखा है तो वह पूर्ण रूप से चुकाया जाना आवश्यक है साथ ही पूर्व ऋण व वर्तमान आवेदित ऋण के बीच 2 वर्ष का अंतराल होना चाहिए।

➡️ ऋण के मूल की अदायगी 60 समान किस्तों में होंगी या 60 से कम किस्तों में करा सकते हैं।
◆ ऋण के ब्याज की अदायगी 10 समान किस्तों में।(10 से कम किश्तों में भी कर सकते हैं।)
कार्मिक चाहें तो मूल ऋण व उस पर संदेय ब्याज की किस्तें एक साथ भी जमा करा सकता है या पहले मूल ऋण एवं फिर ब्याज चुका सकता है पर बेहतर यही रहेगा कि पहले मूल एवं फिर ब्याज जमा करवाया जाए।
फार्मूला-कुल किस्तें÷12×(मूल ऋण+अंतिम क़िस्त)÷2×ब्याज दर÷100)
वैसे Online आवेदन Submit करते समय System EMI (मासिक क़िस्त) की राशि Show कर देता है अतः उसे नोट कर लेना चाहिए।
◆नोट:अगला ऋण 2 वर्ष से पूर्व स्वीकृत नहीं होगा।(नियम-44)

➡️ वर्तमान में SI Loan पर ब्याज दर 7.5% है।
Note:- SI Loan Online आवेदन से पूर्व 2015 से पूर्व नियुक्त कार्मिक 2015 तक की SI Passbook अद्यतन(प्रविष्टि किए हुए सभी पृष्ठों में से प्रत्येक पृष्ठ पर DDO के Sign&Seal, प्रत्येक पृष्ठ पर SI Premium राशि का महायोग, TV No एवं Encashment Date आदि Update होना चाहिए) की हुई pdf Format में Upload कर दें। क्योंकि इसके बिना आवेदन अस्वीकार्य होगा।

➡️ SI Policy Bond भी दोनों तरफ़ से Scan कर pdf Format में Upload करना होगा। SI Bond SIPF कार्यालय द्वारा पहले से ही Upload किया जा चुका है तो इसकी जांच कर लें।

➡️sso.rajasthan.gov.in पर Employee Login करें।
Pop Up द्वारा Paperless आवेदन से सम्बंधित सूचना को Close करें।
➡️ Transaction में जाएं।
➡️ SI Loan Tab पर Click करें।
➡️ SI Loan Tab पर Click करने पर कार्मिक के आवेदन से सम्बंधित पूरा Page Open होगा जिसमें अधिकांश सूचनाएं पहले से ही भरी होंगी जिनकी अच्छी तरह से जांच कर लें अगर कोई त्रुटि हो तो DDO Level/SIPF Office से सुधार करवाएँ। अतः आप अपनी Loan की Maximum Eligible Amount की जांच करें अगर यह Amount आपकी जमा राशि से नियमानुसार कम आ रही है तो पहले सम्बंधित SIPF Office से Update करवाएँ।
➡️ इसके बाद आप अपनी Loan Amount भरें। यह आपकी Maximum Eligible Amount के बराबर या कम होनी चाहिए।
➡️ EMI (मासिक क़िस्त) की राशि System Auto Calculate करेगा जिसे Note कर लें।
➡️ इसके बाद Form में नीचे Submit , Upload E-Passbook व Upload Bond Options दिखाई देंगे । यदि आपने पहले से ही SI Passbook व Bond Upload कर दिए हैं तो आपको Upload की जगह Download का Option दिखाई देगा जिसके द्वारा आप Passbook व Bond Download कर Check कर लें। यदि Upload नहीं किए हैं तो उनकी ऊपर बताए गए अनुसार Scan कर pdf File बनाकर Upload कर दें।

नोट- यदि SI Passbook व Bond Upload नहीं किए हैं तो आवेदन करने से पूर्व उनकी pdf File बनाकर अपने Mobile/PC/Laptop में Save कर लें ताकि आवेदन के समय अधिक समय ना लगें।

➡️ ये कार्य करने के बाद Submit पर Click करें।
➡️ Are you sure want to submit Loan Details का Message Show होगा जिस पर Click करने पर Data Saved Successfully का Response आएगा।
➡️ इसके बाद आपको *Submit Without E-Sign, Submit With E-Sign एवं Close Options Show होंगे।आप Submit With E-Sign पर Click करें।

नोट-E-Sign केवल आधार OTP Base पर ही होने हैं कोई Digital Dongle से नहीं होंगे।

➡️ फिर कार्मिक के Mobile पर Adhaar Based OTP आएगा जिसको Fill करने के बाद Submit पर Click करने पर आपका ऋण आवेदन आपके DDO के पास Forward हो जाएगा।
➡️ अब Homepage पर आकर Pending Task पर Click करें वहाँ आपके द्वारा Submit Loan की Details एक पंक्ति में Show होंगी उस पंक्ति पर कहीं भी Click करने पर पूरी Details Show होंगी जिसे भलीभांति Check कर लें यदि कोई त्रुटि हो तो Cancel Application Option पर Click कर Application Cancel करें एवं आवश्यक सुधार के बाद पुनः पूर्व प्रक्रियानुसार Submit करें।

Note:- कार्मिक द्वारा Loan Application को DDO के पास Pending रहने तक ही Cancel किया जा सकता है अगर DDO ने SIPF को Forward कर दिया है तो Cancel नहीं कर सकते एवं ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार के संशोधन हेतु सम्बंधित SIPF संपर्क करना होगा।

➡️अगर आवेदन की Details सही है तो Proceed Application के नीचे Print Application पर Click कर Application का Print ले लें यदि Proceeding के बाद कोई System Error आ जाता है तो My Transactions में जाकर भी Print ले सकते हैं।

➡️उसके बाद आप Application पर Validation के लिए Pending E-Sign को Adobe Reader 11 (Updated Version) में pdf File Open कर अपने E-Signature Validate कर सकते हैं।

➡️ DDO Login से Loan Application SIPF कार्यालय को Forward करने की प्रक्रिया-👇
➡️http://sso.rajasthan.gov.in Open कर Login करें एवं SIPF Icon पर Click करें
➡️ As a ddo Select करें।
➡️ Pending Task में CLICK HERE TO SEARCH पर Click करें।
➡️ उसके बाद Pending Task Details में Red Colour में Q पर Click करने पर DDO के Forward किए गए आवेदन विभिन्न Modules के रूप में Show होंगे।
➡️ सम्बंधित कार्मिक द्वारा Forward किए गए SI Loan Application की पंक्ति पर Click करने पर आवेदन की Details Show होंगी।
➡️ Declaration के नीचे एक Check Box के सामने एक घोषणा Show होगी उसे पढ़कर Check Box पर ✅ Mark करें।
➡️फिर नीचे की तरफ Forward, Upload E-Passbook, Upload Bond आदि Options Show होंगे।
➡️ यदि कार्मिक के स्तर पर गलती से SI Passbook/SI Bond Upload नहीं किया गया है या स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है तो DDO स्वयं आवश्यकता अनुसार SI Passbook /SI Bond की pdf File Upload कर सकते हैं।
➡️ अगर सभी Details सही हैं तो Forward पर Click करें।
➡️ DDO के Aadhaar से Link Mobile पर OTP आएगा उसे Fill कर आवेदन को Forward करें।
➡️ DDO द्वारा Forward किए हुए आवेदन का Print लेकर कार्मिक स्तर पर बताई गई उपरोक्त प्रक्रियानुसार E-Signature Validate कर सकते हैं।
➡️ Loan की राशि स्वीकृत होने एवं सम्बंधित कार्मिक के Acconut में जमा होने के अगले महीने से SI Loan की कटौती निर्धारित EMI के अनुसार शुरू की जानी है।

 

राज्य बीमा के नियम 1 अप्रेल-1998 से प्रभावी होंगे।

➡️ राज्य बीमा की प्रथम कटौती कार्मिक के सेवा स्थायीकरण के उस वित्तीय वर्ष जिसमें वह नियुक्त हुआ है , के मार्च माह से की जाएगी।

➡️बीमा इस शर्त पर किया जाएगा कि बीमित कार्मिक क्षय, अस्थमा,कैंसर, मधुमेह, एड्स या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी गम्भीर बीमारी से ग्रसित नहीं हो। नियम-8

➡️ वेतन वृद्धि तथा आगे के 2 Slabs तक अतिरिक्त प्रीमियम कटौती कराने पर जोखिम बिना स्वास्थ्य परीक्षण के ही वहन की जाएंगी। नियम-11(4)

➡️ Duplicate Policy Bond जारी करवाना
यदि बीमित व्यक्ति द्वारा मूल Policy Bond खो गया है या नष्ट/विकृत हो गया है तो उसके बदले निम्नानुसार अपनी sso id से Login कर Online Challan या फिर व्यक्तिगत रूप से निर्धारित शुल्क जमा करवाकर क्षतिपूर्ति बंध पत्र के साथ बीमा निदेशक को आवेदन कर Duplicate Policy जारी करवा सकता है- नियम-47

(i) मूल Policy खो जाने/नष्ट होने पर शुल्क-100/-
(ii) Policy विकृत/कटी-फटी हो जाने पर शुल्क-50/-

➡️ बीमित व्यक्ति की Policy परिपक्वता से पूर्व मृत्यु हो जाती है तो बीमित व्यक्ति के द्वारा नियमानुसार नामित व्यक्ति को बीमित राशि का दुगना भुगतान किया जाएगा। नियम-51

➡️ अतिरिक्त बीमा नियम-
(1) विद्यमान वेतन Slabs में बदलाव होने या किसी कारण से वेतन वृद्धि की वजह से यदि प्रीमियम दरों में वृद्धि होती हैं तो वे वृद्धिशील वसूलियां उसी वित्तीय वर्ष के मार्च माह के वेतन से की जाएंगी,एवं इसके लिए अलग से घोषणा पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। नियम-11(i)(ii)

(2) बीमित कार्मिक स्वेच्छा से उस पर लागू प्रीमियम दर से अधिक आगे के 2 Slabs तक की प्रीमियम दरों का अभिदान कर सकता है जिसके लिए उसे नियम-8(3) में वर्णित रोगों से ग्रसित नहीं होने की घोषणा करते हुए नियम-11(2) के तहत अधि घोषणा पत्र Online प्रस्तुत करना होगा।

(3) 55 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद कोई भी कार्मिक अधिघोषणा का लाभ नहीं ले सकता। नियम-11(3)

(4) यदि किसी वजह से वेतन Slabs में कमी हो जाती है तो पूर्व में संदेय प्रीमियम दर को कम नहीं किया जा सकता। नियम-13

➡️ऋण आवेदन या दावे के निपटारे के लिए मूल Policy बीमा विभाग को प्रस्तुत करना अनिवार्य है। नियम-49(i)

➡️विभाग के आदेश क्रमांक-(प 4(8)वित्त/राजस्व/05/पार्ट दिनाँक 13.12.2017 के अनुसार बीमा ऋण एवं दावों की राशि 1 जनवरी,2018 से SIPF कार्यालय के द्वारा जारी अधिकार पत्र(Authority Letter)के स्थान पर अब सीधे ही सम्बंधित कार्मिक/दावेदार के बैंक खाते में Online स्थानांतरित की जाएगी।

➡️ विभाग के आदेश क्रमांक-(प.108/कम्प/एसआईपीएफ पेमेंट/2017/1214-141 दिनाँक-15.12.2017 के अनुसार 1 जनवरी,2018 से बीमा ऋण एवं दावों के Online भुगतान की प्रक्रिया आरंभ की गई है।

➡️ घोषणा पत्र एवं अधि घोषणा पत्र Online Submit होंगे-
मार्च-2017 से जिन कार्मिकों की प्रथम/अधिक कटौती होनी है तो उन्हें sso.rajasthan.gov.in पर Login कर SIPF Portal के माध्यम से Online ही Submit करना होगा।

➡️ निलम्बन अवधि के दौरान प्रीमियम की वसूली-
यदि किसी बीमित व्यक्ति को निलंबित किया जाता है तो SI प्रीमियम की वसूली उसको देय निर्वाह भत्ते से की जाएगी यदि उक्त अवधि में प्रीमियम वसूल नहीं किया जाता है तो उस प्रीमियम राशि पर प्रीमियम देय होने की तिथि से जमा कराने की तिथि तक 7.5% की दर से ब्याज़ वसूल किया जाएगा।
नियम-28

➡️ SI में नामित व्यक्ति का निर्देशन
बीमित व्यक्ति नाम निर्देशन के लिए निर्धारित प्रारूप संख्या-2 में किसी एक/अधिक व्यक्तियों को कार्यालय अध्यक्ष को सूचित कर नियमानुसार नामित कर सकते हैं परन्तु शादी से पूर्व किसी भी व्यक्ति के पक्ष में किया गया मनोनयन यदि रदद् नहीं किया गया है तो शादी के बाद स्वतः ही पति या पत्नी नाम हुआ माना जायेगा। नियम-31

➡️ व्यक्ति जिन्हें नाम निर्देशीति नियुक्त किया जा सकता है-
बीमित व्यक्ति अपने पति/पत्नी,संतान, भाई, बहन,माता-पिता को मनोनीत कर सकता है। यदि उपरोक्त में से कोई भी सम्बंधी जीवित हो।
तो किसी अन्य व्यक्ति का नाम निर्देशन अकृत और शून्य माना जायेगा। नियम-32

➡️ सेवानिवृत्ति के पश्चात आने वाले 31 मार्च तक बीमा Policy जारी रखने का विकल्प-
नियमानुसार कार्मिक अपनी सेवानिवृत्ति तिथि के ठीक पूर्व में आने वाले 1 अप्रेल को अपनी राज्य बीमा Policy के दावे के भुगतान प्राप्त कर लेता है।राजस्थान सरकारी कर्मचारी बीमा नियम 1998 के नियम-39(2)(i) के प्रावधान के अनुसार अगर कार्मिक चाहे तो SI कटौती मूल परिपक्वता तिथि के 15 दिन पूर्व DDO के Through Application के तौर पर विकल्प भरकर सम्बंधित जिले के SIPF Office भेजकर सेवानिवृति के ठीक बाद में आने वाले मार्च तक अपनी SI Policy Continue रख सकते हैं, परन्तु बीमा नियम 18(2) के अनुसार इसका Due Premium सेवानिवृति तक के वेतन से Advance में कटाना होगा। और संचित असन्दत Premium बिना ब्याज के बीमा के दावे की रकम में से वसूलीय होगा। जो के सेवानिवृत्ति तिथि के ठीक बाद में आने वाले 1 अप्रेल को प्राप्त होगी।
क्रमांक:एफ 19/बीमा/व्यय.एवंपं./2010-11/1068-1118/Dated:04.12.19

How to Get all payment timely at retirement

हमारे स्कूल में एक कार्मिक की मृत्यु गई है अब स्कूल स्तर पर Ddo को कौन- कौन से कार्य करने है ?

प्रश्न:-हमारे स्कूल में एक कार्मिक की मृत्यु गई है अब स्कूल स्तर पर Ddo को कौन- कौन से कार्य करने है ?

उत्तर:- किसी कार्मिक की सेवा में रहते हुए मृत्यु हो गई है तो Ddo को अनपे स्तर पर निम्न कार्य प्रथमिकता से पूर्ण करने चाहिये ।

(1) सर्व प्रथम कार्मिक के परिवार से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करे।

(2) मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त होने पर नियुक्ति अधिकारी से उनकी सेवा समाप्ति के आदेश जारी करवावे।

(3) सेवा समाप्ति के आदेश प्राप्त होने पर शाला दर्पण से उनको डेथ का कारण चयन कर कार्य मुक्त करे।

(4) कार्मिक के घर पर रिजिस्टर्ड पत्र द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति चाहते है तो इस बाबत आवेदन पत्र 90 दिन की सीमा में प्रस्तुत करने का निवेदन करे यदि इसके साथ ही अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पत्र की कॉपी संलग्न कर देते है तो उनको सुविधा रहेगी।

(5) Ddo लॉगिन से sipf पोर्टल से कार्मिक के राज्य बीमा एवं GPF के डेथ क्लेम ऑन लाइन सबमिट कर सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर प्रकरण Sipf office में भेजे। क्लेम का भुगतान नॉमिनी को होगा अतः कार्मिक के नॉमिनी की sipf पर बैंक डिटेल्स अपडेट नही है तो Ddo लॉगिन से पहले नॉमिनी की बैंक डिटेल्स को अपडेट कर लेवे।

(6) Nps कार्मिक है तो nps राशि के क्लेम का निर्धारित आवेदन पत्र भर कर sipf आफिस में जमा करवावे।

(7) वेतन से LIC की कटौती है तो मृतक के LIC क्लेम के आवेदन पत्र को भरवा कर LIC का क्लेम अजमेर कार्यालय( सेलेरी शाखा) में भेजे।

(8) यदि कार्मिक की किसी दुर्घटना में मृत्यु हुई है तो दुर्घटना बीमा राशि के क्लेम का निर्धारित आवेदन पर मय समस्त दस्तावेज संलग्न कर प्रकरण sipf आफिस में जमा करावे।

(9) पारिवारिक पेंशन एवम ग्रेच्यूटी के भुगतान हेतु निर्धारित पेंशन कुलक मय सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर प्रकरण अपने Cbeo के माध्यम से पेंशन विभाग को भेजे। पेंशन प्रकरण के साथ ही जमा उपार्जित अवकाश के नगद भुगतान के लिए निर्धारित प्रपत्र में बजट की मांग भी करे।

(10) शिक्षा विभाग के कार्मिक है तो मृत्यु पर हितकारी निधि एवम शिक्षक कल्याण कोष से भी आर्थिक सहायता मिलती है इस बाबत निर्धारित आवेदन पत्र भर कर उचित माध्यम से निदेशालय बीकानेर को प्रकरण अग्रेषित करे।

(11) PPO जारी होने के बाद 2071 हेड में बकाया जमा PL का बजट प्राप्त होने के बाद पे मैनेजर से उपार्जित अवकाश का बिल बना कर भुगतान करे।

(12) कार्मिक की मृत्यु के बाद उसके कोई भी भुगतान बकाया है तो वह उसके नॉमिनी को किया जाता है इस हेतु पहले PM पर नॉमिनी ऐड करे उसके बाद सम्बन्धित ट्रेजरी से नॉमिनी की बैंक डिटेल्स को PM पर अपडेट करवावे उसके बाद उनके बकाया कोई भी बिल हो वह बनावे।

मृतक कार्मिको के आश्रितो को यथाशीघ्र राहत प्रदान कर हमें सहयोग प्रदान करना चाहिए यह अपनी ड्यूटी के साथ साथ एक पूण्य का कार्य है।

नोट:- कार्मिक की मृत्यु के दिन को कार्य दिवस माना जाता है अतः मृत्यु प्रमाण पत्र में अंकित मृत्यु की दिनांक तक वेतन का भुगतान होगा एवं मृत्यु के अगले दिन से पारिवारिक पेंशन स्वीकृत होगी।