क्या आप जानते हैं इन 75 बहुत उपयोगी वेबसाइट के बारे में?

क्या आप जानते हैं इन 75 बहुत उपयोगी वेबसाइट के बारे में?


्या आप जानते हैं इन 75 बहुत उपयोगी वेबसाइट के बारे में?

INTERESTED WEBSITE

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K. L. SEN MERTA

1. speedtest.net यह वेबसाइट आपकी इटरनेट गति को चेक करती है।

2. hunter.io इस
वेबसाइट की मदद से आप किसी की भी वेबसाइट का नाम डालकर उस वेबसाइट से जुड़े हुए सभी
ईमेल एड्रेस निकल सकते हैं.

3. autodraw.com इस
वेबसाइट द्वारा आप खुले हाथ से चित्रकारी कर सकते हैं। और इसे मशीन लर्निंग द्वारा
जादूई तरीके से सुन्दर चित्रों में परिवर्तित कर सकते हैं।

4. imgflip.com/memegenerator इस वेबसाइट के ज़रिये आप रच्नात्मक मेम (meme) बना कर
प्रसिद्ध हो सकते हैं

5. zerodha.com इस
वेबसाइट में आप स्टॉक ट्रेडिंग की बारीकियां सीख सकते हैं।

6. dictation.io ये
आपके ब्राउजर में ही एक सटीक और त्वरित आवाज पहचान के रूप में काम करता है।

7. reverse.photos एक फोटो अपलोड किजिए और आपको इस फोटो से मिलती जुलती अन्य सभी फोटोएं मिल
जाएंगी।

8. unacademy.com इससे आप कई तरह के कोर्स फ्री में सीख सकते हैं। ख़ास तौर पे यदि आप सिविल
सर्विसेज के इच्छुक हैं तो ये वेबसाइट आपके बहुत काम आएगी.

9. codeacademy.com इस वेबसाइट के जरिये आप कोडिग सीख सकते हैं – बड़ी ही आसानी से

10. manblunder.com इस वेबसाइट में हिन्दू धर्म के बारे में बहुत अच्छी जानकारियाँ हैं. ख़ास
तौर पे श्रीविद्या उपासकों के लिए ये बेहतरीन वेबसाइट है.

11. flaticon.com ये आपको हर प्रकार के काम के लिए लाखों आइकंस उपलब्ध करवाता है।

12. jotti.org ये
किसी भी प्रकार की संदिग्ध फाइल या इमेल अटैचमेंट के अन्दर वायरस की जाँच करता है।

13. pinterest.com इस के ज़रिये आप किसी भी तरह की फोटो ढूंढ सकते हैं और सेव कर सकते हैं या
शेयर कर सकते हैं. ज़रूरत है सिर्फ सर्च वर्ड डालने की

14. unsplash.com यह वेबसाइट आपको मुफ्त तस्वीरें डाउनलोड़ करने देती है।

15. videos.pexels.com ये मुफ्त विडियोज की एक ऑनलाइन लाइब्रेरी है जिसे आप कहीं पर भी देख सकते
है।

16. everytimezone.com ये आपको विश्व की हर जगह का समय बताती है।

17. e.ggtimer.com आपकी दैनिक आवश्यकताओं के लिए एक सरल ऑनलाइन टाइमर है ये वेबसाइट

18. quora.com इसमें
आप किसी भी विषय के बारे में सवाल पूछ सकते हैं तथा अन्य यूज़र्स द्वारा पूछे गए
सवालों के जवाब पढ़ सकते हैं

19. scribd.com यदि
आपको किताबें पढने का शौक है तो इस वेबसाइट में आप थोडा भुगतान करके बहुत साड़ी
किताबें पढ़ सकते हैं. आपको हर किताब खरीदने की ज़रूरत नहीं है.

20. fonts.google.com इसमें बहुत सारे अच्छे अच्छे फाण्टस का संग्रहण है जिसे आप मुफ्त में बिना
किसी रोक के इस्तेमाल कर सकते हैं।

21. snappa.com इसमें
आप अपनी कला का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया के लिए तस्वीरें, बैनर, बुक कवर तथा कोई
भी डिजाईन बना सकते हैं।

22. calligraphr.com अपनी लिखावट को एक असली फाण्ट में बदलें।

23. metapicz.com अपनी तस्वीरों के पीछे छुपे हुए डेटा का पता लगाइये।

24. youtube.com/webcam इससे आप अपने आप को इंटरनेट पर लाइव दिखा सकते हैं।

25. remotedesktop.google.com इससे आप कोई दूसरा कम्प्युटर दूर से ही चला सकते हैं मुझे पक्का पता है आप
इस वेबसाइट का इस्तेमाल जरूर करेंगे।

इस लेख में आपको इंटरनेट की ऐसी
75 उपयोगी एवं मजेदार वेबसाइटस के बारे में बताया गया है जो आपको होशियार बनने,
उत्पादकता बढाने व विकास करने में मदद करेंगी। ये अविश्विसनीय रूप से उपयोगी
वेबसाइटस आपकी कम से कम एक समस्या का तो अच्छे से समाधान कर ही देंगी। और इन
वेबसाइटस के नाम भी याद रखने में आसान है इसलिए आपको बार बार गूगल पर जाकर खोजने
की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

26. homestyler.com किसी भी 3डी डिजाइन में अपने घर को डिजाइन करें।

27. pdfescape.com इससे आप अपनी पी.डी. एफ को तुरंत सम्पादित कर सकते हैं।

28. draw.io चित्र
तथा फ्लोचार्ट बनाने में मदद करता हैं।

29. wunderlist.com किसी से भी विडियो चैट कर सकते हैं।

30. onlineocr.net स्कैन की हुई पीडिफ में टेकस्ट का पता लगाता है।

31. wetransfer.com बडी फाइलों को ऑनलाइन सांझा करने के लिए

32. fiverr.com इस
वेबसाइट पर अपना कोई भी ऑफिसियल काम सस्ते में करवा सकते हैं, जैसे वेबसाइट
बनवाना, लेख लिखवाना, डिजाइनिंग इत्यादि. यदि आप काम करना चाहते हैं तो भी यह
वेबसाइट आपके काम की है.

33. penzu.com यह
वेबसाइट आपकी ऑनलाइन डायरी की तरह काम करती है जिसमें आप अपनी दिनचर्या और भावनाएं
लिख सकते हैं. ये पूरी तरह सेफ है और आपके सिवा इसको कोई नहीं पढ़ सकता।

34. evernote.com इस के ज़रिये आप अपने दस्तावेजों और फाइल्स को अलग अलग फोल्डर में क्लाउड
में रख सकते हैं और फ़ोन से भी बदलाव कर सकते हैं. साथ ही स्क्रीनशॉट भी खींच सकते
हैं.

35. grammarly.com अपने लेखन में वर्तनी, शैली और अन्य त्रुटी की जाँच करें

36. noteflight.com इसमें आप खुद का संगीत लिख सकते हैं।

37. translate.google.com इससे आप किन्हीं भी दो भाषाओं का आपस में अनुवाद कर सकते हैं

38. color.adobe.com अपनी तस्वीरों से रंगों को बाहर निकालना।

39. canva.com इससे
आप सुन्दर ग्राफिक्स व प्रस्तुतियां बना सकते हैं।

40. midomi.com जब
आपकों किसी गाने का नाम जानना हो तो इस वेबसाइट की मदद ले सकते हैं.

41. myactivity.google.com गूगल पर सर्च की गई सारी खोजों को हटाने के लिए।

42. tinychat.com कुछ ही सैकण्ड़ में एक निजी चेट कक्ष बना सकते है और प्राइवेट चेट (बातचीत)
कर सकते हैं.

43. privnote.com पाठ नोट्स बनाये जो पढ़ने के बाद अपने आप ही नष्ट हो जायेंगे।

44. ccleaner.com आपके लैपटॉप और कंप्यूटर के अन्दर की बेकार फाइल्स को हटाके स्पीड अच्छी
करता है

45. gtmetrix.com अपनी वेबसाइट की कार्यक्षमता को देख सकते हैं।

46. builtwith.com एक वेबसाइट की वेब होस्टंग कम्पनी, ईमेल प्रदाता का पता लगाने के लिए।

47. thesaurus.com कठिन शब्दो का मतलब पता लगा सकते हैं।

48. seatguru.com अपनी अगली उडान बुक करने से पहले इस वेबसाइट की सलाह लें।

49. mymaps.google.com स्क्रिबल्स और पिन के साथ एक विशेष प्रकार का गूगल मानचित्र बनाइये।

50. neilpatel.com यदि आप ब्लॉग्गिंग करते हैं या वेबसाइट चलते हैं तो SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) से सम्बंधित हर जानकारी यहाँ पाएं।

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51. typing.com इस
वेबसाइट पर आप टाइपिंग का अभ्यास कर सकते हैं।

52. todo.microsoft.com काम करने के लिए एक खुबसुरत ऐप और टास्क मेनेजर

53. minutes.io बैठकों
के दौरान जल्दी से प्रभावी नोट्स बनाने के लिए।

54. ifttt.com अपने
सभी ऑनलाइन एकाउंट्स को एक साथ जोडिये।

55. screencast-o-matic.com इस वेबसाइट के ज़रिये आप अपने लैपटॉप की स्क्रीन रिकॉर्ड कर सकते हैं और
शेयर कर सकते हैं।

56. gist.github.com अज्ञात व गुप्त लिखित नोट्स बनाइये।

57. powtoon.com इससे
आप मजेदार व्हाइटबोर्ड, एनीमेशन विडियोज और प्रेसेंटेशन बना सकते हैं।

58. clyp.it बिना
कोई खाता खोले अपनी आवाज रिकार्ड किजिये और शेयर कीजिये

59. goodreads.com इस वेबसाइट में दुनिया भर की किताबों की सही समीक्षा की जाती है। यदि आप
पढने लिखने के शौक़ीन हैं तो यह वेबसाइट आपके लिए ही है.

60. spark.adobe.com शानदार विडियों प्रस्तुतीयां बनाइये।

61. duolingo.com अपनी मनपसंद भाषा को सीख सकते है।

62. khanacademy.org इस वेबसाइट से आप किसी भी तरह की पढाई घर बैठे कर सकते हैं और कठिन चीज़ें
विडियो द्वारा सीख सकते हैं.

63. pixton.com अपने
खुद के पात्रों के साथ अपनी खुद की काॅमिक स्ट्रिप्स बनायें

64. gravit.io एक
पूर्ण विशेषताओं वाला वेक्टर ड्राइंग टूल है जो हर जगह काम करता है।

65. vectr.com वेक्टर
ग्राफिक्स बना सकते हैं। और उन्हे सेव कर सकते है (सुरक्षित रख सकते हैं) किसी भी
फॉर्मेट में

66. labnol.org कंप्यूटर
और मोबाइल के ज़रिये बहुत से क्लिष्ट कार्यों को सरलता से करने के बारे में विस्तार
से बताता है

67. mathcha.io गणित
के सिंबल बना सकते हैं और शेयर कर सकते हैं. गणित पढने और पढ़ाने के लिए बहुत
उपयोगी वेबसाइट है ।

68. instructables.com इस वेबसाइट में धीरे धीरे बताया जाता है कि कुछ भी कैसे बनाते है।

69. flowgram.com डेटा संचालित ग्राफिक्स, चार्ट व इन्फोग्राफिक्स बनायें।

70. marvelapp.com इंटरक्टिव वायरफ्रेम्स का इस्तेमाल करें।

71. slide.ly इस्टाग्राम
के लिए बिजनेस कहानियां बनायें।

72. hivedesk.com यदि आप दूर बैठे लोगों से अपने ऑफिस के काम करवाते हैं तो यह जानने के लिए
कि वो काम के समय क्या कर रहे थे, यह बहुत अच्छी वेबसाइट है. इसमें उनकी स्क्रीन
के शॉट रिकॉर्ड कर लिए जाते हैं और उन्होंने कितनी बार माउस या कीबोर्ड दबाया,
सबका लेखा जोखा रहता है.

73. udemy.com अच्छे
कोर्सेज की पढाई डिटेल में कर सकते हैं और विशेषज्ञ बन सकते हैं।

74. wikihow.com इस
वेबसाइट पर आपको हर प्रकार के कार्य को करने के तरीके के बारे में तकनीकी और
व्यक्तिगत जानकारी मिलेगी।

75. upwork.com इस
वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे काम करके पैसा कमा सकते हैं।


अगर आपको ये लेख पढ़
के अच्छा लगा तो हम आप को यह बता कर और भी खुश करना चाहते हैं कि हम इस तरह के और
भी लेख निकलते रहेंगे. हम आपको हर विशेषता में (जैसे ट्रेवल, कुकिंग, एजुकेशन
इत्यादि) में टॉप की वेबसाईट की जानकारी देंगे जिससे आप पूरा लाभ उठा सकें.
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By ARVIND SEN

march 14, 2021




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क्या आप जानते हैं इन 75 बहुत उपयोगी वेबसाइट के बारे में?

रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 3 समय अनमोल है समय की कीमत नमक का स्वाद भगवान भरोसे भगवान का अस्तित्व


समय
अनमोल है समय की कीमत नमक
का स्वाद भगवान भरोसे भगवान का अस्तित्व

INTERESTED INCEDENTS

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K. L. SEN MERTA

भगवान का अस्तित्व

एक बार एक व्यक्ति नाई की दुकान पर अपने बाल
कटवाने गया| नाई और उस व्यक्ति के बीच में ऐसे ही बातें शुरू हो गई और वे लोग
बातें करते-करते “भगवान” के विषय पर बातें करने लगे|

तभी नाई ने कहा – “मैं भगवान (Bhagwan) के
अस्तित्व को नहीं मानता और इसीलिए तुम मुझे नास्तिक भी कह सकते हो”

“तुम ऐसा क्यों कह रहे हो”  व्यक्ति ने
पूछा|

नाई ने कहा –  “बाहर जब तुम सड़क पर जाओगे
तो तुम समझ जाओगे कि भगवान का अस्तित्व नहीं है| अगर भगवान (Bhagwan) होते, तो
क्या इतने सारे लोग भूखे मरते? क्या इतने सारे लोग बीमार होते? क्या दुनिया में
इतनी हिंसा होती? क्या कष्ट या पीड़ा होती? मैं ऐसे निर्दयी ईश्वर की कल्पना नहीं
कर सकता जो इन सब की अनुमति दे”

व्यक्ति ने थोड़ा सोचा लेकिन वह वाद-विवाद नहीं
करना चाहता था इसलिए चुप रहा और नाई की बातें सुनता रहा|

नाई ने अपना काम खत्म किया और वह व्यक्ति नाई को
पैसे देकर दुकान से बाहर आ गया| वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, उसने सड़क पर
एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी और ऐसा
लगता था शायद उसने कई महीनों तक अपने बाल नहीं कटवाए थे|

वह व्यक्ति वापस मुड़कर नाई की दुकान में दुबारा
घुसा और उसने नाई से कहा – “क्या तुम्हें पता है? नाइयों का अस्तित्व नहीं होता”

नाई ने कहा – “तुम कैसी बेकार बातें कर रहे हो?
क्या तुम्हे मैं दिखाई नहीं दे रहा? मैं यहाँ हूँ और मैं एक नाई हूँ| और मैंने अभी
अभी तुम्हारे बाल काटे है|”

व्यक्ति ने कहा –  “नहीं ! नाई नहीं होते
हैं| अगर होते तो क्या बाहर उस व्यक्ति के जैसे कोई भी लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी
वाला होता?”

नाई ने कहा – “अगर वह व्यक्ति किसी नाई के
पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं तो नाई कैसे उसके बाल काटेगा?”

व्यक्ति ने कहा –  “तुम बिल्कुल सही कह रहे
हो, यही बात है| भगवान भी होते है लेकिन कुछ लोग भगवान पर विश्वास ही नहीं करते तो
भगवान उनकी मदद कैसे करेंगे|”

Moral of Hindi Story

<

p style=”line-height: 150%; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0in; mso-outline-level: 3;”>विश्वास ही सत्य है| अगर भगवान पर विश्वास करते है तो हमें हर पल
उनकी अनुभूति होती है और अगर हम विश्वास नहीं करते तो हमारे लिए उनका कोई अस्तित्व
नहीं|
 किसी भी
व्यक्ति के जीवन मे अगर शील यानी चरित्र ना हो तो उनके जीवन के अन्य सभी सद्गुण निरर्थक
है। हमारी संस्कृति में बल, बुद्धि, विद्या,धन और शील यह पांच सद्गुणों का बहुत बड़ा
महत्व है। लेकिन इन पांचो सद्गुणों में शील यानी चरित्र सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। अगर
अच्छा चरित्र नहीं है तो बल, बुद्धि और विद्या का कोई अर्थ नहीं रहता। किसी ने ठीक
ही कहा है-
 “when wealth is lost nothing is lost, when
health is lost something is lost but when character is lost everything is lost”

भगवान
भरोसे

एक गाँव में एक साधू रहते
थे जो दिन रात कड़ी तपस्या करते थे और उनका भगवान पर अटूट विश्वास था|

एक बार गाँव में भयंकर तेज
बारिश हुई| बढ़ते हुए पानी को देखकर गाँव वाले सुरक्षित स्थान पर जाने लगे|

लोगों ने उस साधू को सुरक्षित
स्थान पर चलने को कहा, लेकिन साधू ने यह कहकर मना कर दिया कि – तुम लोग जाओ मुझे मेरे
भगवान पर पूरा भरोसा है, वे मुझे बचाने जरूर आएँगे|

धीरे धीरे पूरा गाँव पानी
से लबालब हो गया और पानी साधू के घुटनों तक आने लगा तभी वहां पर एक गाड़ी आई और उसमें
सवार व्यक्ति ने साधू को गाड़ी में आने के लिए कहा लेकिन साधू ने फिर यह कहकर मना कर
दिया – मुझे तुम्हारी कोई आवश्यकता नहीं, मुझे मेरा भगवान जरूर बचाने आएगा|

गाड़ी वाला वहां से चला गया
| पानी बढ़ने लगा और साधू भगवान को याद करने लगा तभी वहां पर एक नांव आई|

बचावकर्मी ने कहा – जल्दी
से आइये मुनिवर, मैं आपको सुरक्षित स्थान पर छोड़ देता हूँ| साधू ने कहा – मेरे भगवान
मुझे बचाने जरूर आयेंगे, तुम यहाँ से चले जाओ| बचावकर्मी ने कहा – गुरुवर मुझे अन्य
लोगों को भी सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना है, आप समय बर्बाद मत कीजिए, जल्दी आइये| लेकिन
साधू ने अपनी जिद नहीं छोड़ी | आख़िरकार वह नांव वाला अन्य लोगों को बचाने के लिए वहां
से चला गया|

कुछ ही देर बाद साधू
बाढ़ में बह गए और उनकी मृत्यु हो गयी | मरने के बाद साधू जब स्वर्ग पहुंचे तो उन्होंने
भगवान से कहा – “हे भगवान मैंने कई वर्षों तक कड़ी तपस्या की और आप पर इतना विश्वास
किया लेकिन आप मुझे बचाने नहीं आये|

भगवान ने कहा – मैंने तुम्हे
बचाने एक बार नहीं बल्कि तीन बार प्रयत्न किया| तुम्हे क्या लगता है – तुम्हारे पास
लोगों को, गाड़ी को और नावं को किसने भेजा था?

 

Moral of Story

1. भगवान उसी की मदद करता है जो अपनी मदद खुद करता
है|

<

p style=”-webkit-tap-highlight-color: transparent; box-sizing: border-box; line-height: 150%; margin-bottom: .0001pt; margin-bottom: 0in; margin: 1.25rem;”>2. असफलता केवल दो तरह की होती है – पहली असफलता
अवसर को न पहचानना हैं और दूसरी असफलता अवसर को पहचानने के बाद भी प्रयास न करना है|


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नमक का
स्वाद

एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति अपने गुरु के
पास पहुंचा और बोला – “गुरूजी मैं जिंदगी से बहुत परेशान हूँ| मेरी जिंदगी में परेशानियों
और तनाव के सिवाय कुछ भी नहीं है| कृपया मुझे सही राह दिखाइये|”

गुरु ने एक गिलास में पानी भरा और उसमें मुट्ठी भर
नमक डाल दिया| फिर गुरु ने उस व्यक्ति से पानी पीने को कहा|

उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया|

गुरु :- इस पानी का स्वाद कैसा है ??

“बहुत ही ख़राब है” उस ब्यक्ति ने कहा|

फिर गुरु उस व्यक्ति को पास के तालाब के पास ले गए|
गुरु ने उस तालाब में भी  मुठ्ठी भर नमक डाल दिया फिर उस व्यक्ति से कहा – इस
तालाब का पानी पीकर  बताओ की कैसा है|

उस व्यक्ति ने तालाब का पानी पिया और बोला – गुरूजी
यह तो बहुत ही मीठा है|

गुरु ने कहा – “बेटा जीवन के दुःख भी इस मुठ्ठी भर
नमक के समान ही है| जीवन में दुखों की मात्रा वही रहती है – न ज्यादा न कम| लेकिन यह
हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों का कितना स्वाद लेते है| यह हम पर निर्भर करता है
कि हम अपनी सोच एंव ज्ञान को गिलास की तरह सीमित रखकर रोज खारा पानी पीते है या फिर
तालाब की तरह बनकर मीठा पानी पीते है|”

 

Moral of The Story

“एक मुट्ठी भर नमक, एक गिलास में भरे मीठे पानी
को खारा बना सकता है लेकिन वही मुट्ठी भर नमक अगर तालाब या झील में डाल दिया जाए
तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा| इसी तरह अगर हमारे भीतर सकारात्मक उर्जा का स्तर ऊँचा है
तो छोटी-छोटी परेशानियों एंव समस्याओं से हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा|”

Be A Lake, Not
A Glass


समय की कीमत

Value of Time

कल्पना
कीजिए कि आपके पास एक बैंक अकाउंट है (Bank Account) और हर रोज सुबह उस बैंक अकाउंट
में 86,400 रूपये जमा हो जाते है, जिसे आप उपयोग में ले सकते है| आप रूपयों को बैंक
अकाउंट (Bank Account) से निकाल कर अपनी तिजोरी में जमा करके नहीं रख सकते| इस बैंक
अकाउंट में कैरी फोरवर्ड (Carry Forward) का सिस्टम नहीं है यानि कि जिन रूपयों को
आप उपयोग में नहीं ले पाते, वह रूपये शाम को वापस ले लिए जाते है और आपका अब उन पर
कोई अधिकार नहीं रहता|

यह बैंक
अकाउंट कभी भी बंद हो सकता है| हो सकता है कि कल ही यह बैंक अकाउंट (Bank Account)
बंद हो जाए या फिर 2 वर्ष बाद या फिर 50 वर्ष बाद| लेकिन इतना तो निश्चित है कि यह
बैंक अकाउंट एक दिन जरूर बंद होगा|

 

 

ऐसी परिस्थिति
में आप क्या करेंगे????

जाहिर है
आप पूरे के पूरे 86,400 रूपयों का उपयोग कर लेंगे और इन 86,400 रूपयों का उपयोग अच्छे
कार्यों के लिए करेंगे क्योंकि यह बैंक अकाउंट (Bank Account) कभी भी बंद हो सकता है|

 

समय अनमोल है: Time is Precious

क्या आप
जानते है कि ऐसा ही एक बैंक अकाउंट हमारे पास होता है जिसका नाम है “जिंदगी (Life)”
और इस “जीवन” रुपी बैंक अकाउंट में प्रतिदिन 86,400 सेकंड्स (Seconds) जमा होते है
जिनका उपयोग कैसे करना है यह हम पर निर्भर करता है| हम चाहें तो इन 86,400 सेकंड्स
का उपयोग बेहतरीन कार्यों के लिए कर सकते है और अगर ऐसा नहीं करते तो यह व्यर्थ हो
जाएंगे| यह जीवन रुपी बैंक अकाउंट कभी भी बंद हो सकता है इसलिए देर मत कीजिए आपके जीवन
का हर पल अमूल्य है इसलिए समय का सदुपयोग कीजिए|

अगर किसी
को भी ऐसा बैंक अकाउंट दे दिया जाए जिसमें रोज 86,400 रूपये जमा हो तो वह व्यक्ति बहुत
खुश हो जाएगा और एक रूपया भी व्यर्थ नहीं गवाएंगा | क्या हमारे जीवन के एक सेकंड की
कीमत एक रूपये से भी कम है| हम कैसे अपने जीवन की सबसे अनमोल सम्पति को ऐसे ही व्यर्थ
गँवा सकते है|

खोया हुआ
धन फिर कमाया जा सकता  है, लेकिन खोया हुआ समय वापस नहीं आता| उसके लिए केवल पश्चाताप
ही शेष रह जाता है। हर एक दिन को व्यर्थ गंवाना आत्महत्या करने के समान है| बिना समय
प्रबंधन के आज तक कोई भी सफल नहीं हुआ|

कबीर दास
जी का यह छोटा सा दोहा, जीवन का सबसे बड़ा मंत्र बता देता है-

 काल
करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परलै होयेगी, बहुरी करेगा कब।।

<

p style=”-webkit-tap-highlight-color: transparent; box-sizing: border-box; margin: 1.25rem;”> बीते
हुए कल को भूल जाइए, उसका आज कोई वजूद नहीं| आज आपका है, आज एक नयी शुरुआत कीजिए|

  “जो
व्यक्ति अपने समय को नष्ट कर देते है, समय उन्हें नष्ट कर देता है।’’


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रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 2 संगत का असर, कर्तव्य, तेजस्वी बालक नरेंन्द्रनाथ, जीवन और समस्याएं, संघर्ष का महत्व


संगत का असर, कर्तव्य, तेजस्वी बालक नरेंन्द्रनाथ, जीवन और समस्याएं, संघर्ष का महत्व

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K. L. SEN MERTA

प्रेरक प्रसंग 1 – ‘संगत का असर’

एक अध्यापक अपने शिष्यों के साथ घूमने जा रहे थे । रास्ते में वे अपने
शिष्यों के अच्छी संगत की महिमा समझा रहे थे । लेकिन शिष्य इसे समझ नहीं पा रहे थे
। तभी अध्यापक ने फूलों से भरा एक गुलाब का पौधा देखा । उन्होंने एक शिष्य को उस पौधे
के नीचे से तत्काल एक मिट्टी का ढेला उठाकर ले आने को  कहा ।

जब शिष्य ढेला उठा लाया तो अध्यापक बोले – “ इसे अब सूंघो ।”

शिष्य ने ढेला सूंघा और बोला – “ गुरु जी इसमें से तो गुलाब की बड़ी अच्छी
खुशबू आ रही है ।”

तब अध्यापक बोले – “ बच्चो ! जानते हो इस मिट्टी में यह मनमोहक महक कैसे
आई ? दरअसल इस मिट्टी पर गुलाब के फूल, टूट टूटकर गिरते रहते हैं, तो मिट्टी में भी
गुलाब की महक आने लगी है जो की ये असर संगत का है और जिस प्रकार गुलाब की पंखुड़ियों
की संगति के कारण इस मिट्टी में से गुलाब की महक आने लगी उसी प्रकार जो व्यक्ति जैसी
संगत में रहता है उसमें वैसे ही गुणदोष आ जाते हैं ।

संगति का असर कहानी से सीख Moral
of the Story on Sangati Ka Asar  :  इस शिक्षाप्रद कहानी से सीख मिलती है कि हमें सदैव
अपनी संगत अच्छी रखनी चाहिए ।

किसी भी
व्यक्ति के जीवन मे अगर शील यानी चरित्र ना हो तो उनके जीवन के अन्य सभी सद्गुण निरर्थक
है। हमारी संस्कृति में बल, बुद्धि, विद्या,धन और शील यह पांच सद्गुणों का बहुत बड़ा
महत्व है। लेकिन इन पांचो सद्गुणों में शील यानी चरित्र सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। अगर
अच्छा चरित्र नहीं है तो बल, बुद्धि और विद्या का कोई अर्थ नहीं रहता। किसी ने ठीक
ही कहा है-

 “when wealth is lost nothing is lost, when
health is lost something is lost but when character is lost everything is lost”

प्रेरक प्रसंग 2 – ‘कर्तव्य’

एक समय की बात है । एक नदी में एक महात्मा स्नान कर रहे थे । तभी एक बिच्छू
जो पानी में डूब रहा था, उसे बचाते हुए बिच्छु ने महात्मा को डंक मार दिया ।

महात्मा ने उसे कई बार बचाने की कोशिश की । बिच्छू ने उन्हें बार – बार
डंक मारा । अंतत: महात्मा ने उसे बचाकर नदी के किनारे रख दिया । थोड़ी दूर खड़े यह सब
महात्मा के शिष्य देख रहे थे । जैसे ही वे नदी से बाहर आये तो शिष्यों ने पूछा कि जब
वह बिच्छू आपको बार – बार डंक मार रहा था तो आपको उसे बचाने की क्या आवश्यकता थी ।

तब महात्मा ने कहा – बिच्छू एक छोटा जीव है, उसका कर्म काटना है, जब वह
अपना कर्तव्य नहीं भूला, तो मैं मनुष्य हूँ मेरा कर्तव्य दया करना है तो मैं अपना कर्तव्य
कैसे भूल सकता हूँ ।

कर्तव्य की कहानी से सीख Moral
Of Kartvya Ki Kahani : इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि मार्ग कितना भी कठिन क्यों
न हों । मनुष्य को कभी अपना कर्तव्य नहीं भूलना चाहिए ।


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प्रेरक प्रसंग 3 – ‘तेजस्वी बालक
नरेंन्द्रनाथ’

स्वामी विवेकानंदजी जी को बचपन में सब लोग बिले नाम से पुकारते थे। बाद
में नरेन्द्रनाथ दत्त कहलाये। नरेन्द्रनाथ बहुत उत्साही और तेजस्वी बालक थे। इस बालक
को बचपन से ही संगीत, खेलकूद और मैदानी गतिविधियों में रुचि थी। नरेन्द्रनाथ बचपन से
ही अध्यात्मिक प्रकृति के थे और यह खेल – खेल में राम, सीता, शिव आदि मूर्तियों की
पूजा करने में रम जाते थे। इनकी माँ इन्हें हमेशा रामायण व महाभारत की कहानियां सुनाती
थी जिसे नरेन्द्रनाथ खूब चाव से सुनते थे।

एक बार बनारस में स्वामी विवेकानंद जी माँ दुर्गा जी के मंदिर से निकल
रहे थे कि तभी वहां पहले से मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। वे उनसे प्रसाद
छिनने के लिए उनके नजदीक आने लगे। अपने तरफ आते देख कर स्वामी स्वामी जी बहुत भयभीत
हो गए। खुद को  बचाने के लिए भागने लगे। पर
वे बंदर तो पीछा छोड़ने को तैयार ही नहीं थे।

पास में खड़ा एक वृद्ध संयासी ये सब देख रहा था, उन्होंने स्वामी जी को
रोका और कहा – रुको ! डरो मत, उनका सामना करो और देखों कि क्या होता है। बृद्ध संयासी
की बात सुनकर स्वामी जी में हिम्मत आ गई और तुरंत पलटे और बंदरों की तरफ बढ़ने लगे।
तब उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उनके सामना करने पर सभी बंदर भाग खड़े हुए थे। इस
सलाह के लिए स्वामी जी ने बृद्ध संयासी को बहुत धन्यवाद दिया।

इस घटना से स्वामी जी को एक गंभीर शिक्षा मिली और कई सालों बाद उन्होंने एक
सभा में इस घटना का जिक्र किया और कहा – यदि तुम कभी किसी चीज से भयभीत हो, तो उससे
भागों मत, पलटो और सामना करों। वास्तव में, यदि हम अपने जीवन में आये समस्याओं का सामना
करे तो यकीन मानिए बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जायेगा।


प्रेरक प्रसंग 4 – ‘जीवन और समस्याएं’

किसी शहर में, एक आदमी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था। वो अपनी ज़िन्दगी
से खुश नहीं था, हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था। एक बार शहर से कुछ
दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका । शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी। बहुत से
लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे, उस आदमी ने भी महात्मा के दर्शन करने
का निश्चय किया।

छुट्टी के दिन सुबह-सुबह ही उनके काफिले तक पहुंचा । बहुत इंतज़ार के बाद
उसका का नंबर आया।

वह बाबा से बोला- “बाबा , मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ, हर समय समस्याएं
मुझे घेरी रहती हैं, कभी ऑफिस की टेंशन रहती है, तो कभी घर पर अनबन हो जाती है, और
कभी अपने सेहत को लेकर परेशान रहता हूँ …।”

बाबा कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं
और मैं चैन से जी सकूँ ?

बाबा मुस्कुराये और बोले – “पुत्र, आज बहुत देर हो गयी है मैं तुम्हारे
प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा … लेकिन क्या तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे …?”

“हमारे काफिले में सौ ऊंट हैं, मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल
रखो …जब सौ के सौ ऊंट बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना …”

ऐसा कहते हुए महात्मा अपने तम्बू में चले गए ।

अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पुछा – ” कहो बेटा, नींद अच्छी
आई।”

वो दुखी होते हुए बोला – “कहाँ बाबा, मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया। मैंने
बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों को नहीं बैठा पाया, कोई न कोई ऊंट खड़ा हो ही जाता

बाबा बोले – “बेटा, कल रात तुमने अनुभव किया कि चाहे कितनी भी कोशिश कर
लो सारे ऊंट एक साथ नहीं बैठ सकते, तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो
जाएगा। इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी कारणवश दूसरी खड़ी हो जाएगी
” पुत्र जब तक जीवन है ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं … कभी कम तो कभी ज्यादा …।”

“तो हमें क्या करना चाहिए ?” – आदमी ने जिज्ञासावश पुछा।

“इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो”

कल रात क्या हुआ ? :

1) कई ऊंट रात होते -होते खुद ही बैठ गए,

2) कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए,

3) बहुत से ऊंट तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे … और बाद में तुमने
पाया कि उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए …।

कुछ समझे? समस्याएं भी ऐसी ही होती हैं।।

1) कुछ तो अपने आप ही ख़त्म हो जाती हैं ,

2) कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो

3) कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं ,

ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो, उचित समय पर वे खुद ही ख़त्म हो जाती हैं।

जीवन है, तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी, पर इसका ये मतलब नहीं की
तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो …

समस्याओं को एक तरफ रखो और जीवन का आनंद लो, चैन
की नींद सो, जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएँगी”

बिंदास मुस्कुराओ क्या ग़म है, ज़िन्दगी में टेंशन
किसको कम है ।।

अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है, जिन्दगी का नाम ही,
कभी ख़ुशी कभी ग़म है।


प्रेरक प्रसंग 5 – ‘संघर्ष का महत्व’

एक बार एक किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया। कभी बाढ़ आ जाये, कभी
सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये। हर बार कुछ ना कुछ कारण
से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये। एक दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा – देखिये
प्रभु,आप परमात्मा हैं, लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है,
एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये, जैसा मैं चाहूँ वैसा मौसम हो, फिर आप
देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा। परमात्मा मुस्कुराये और कहा – ठीक है, जैसा
तुम कहोगे वैसा ही मौसम दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा।

अब, किसान ने गेहूं की फ़सल बोई, जब धूप चाही, तब धूप मिली, जब पानी चाही
तब पानी। तेज धूप, ओले, बाढ़, आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और
किसान की ख़ुशी भी, क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई थी। किसान ने मन ही मन सोचा
अब पता चलेगा परमात्मा को की फसल कैसे करते हैं, बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान
करते रहे।

फ़सल काटने का समय भी आया, किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन
जैसे ही फसल काटने लगा ,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया! गेहूं की एक भी बाली के
अन्दर गेहूं नहीं था, सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी, बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा
से कहा – प्रभु ये क्या हुआ ?

तब परमात्मा बोले – ”ये तो होना ही था , तुमने पौधों को संघर्ष का ज़रा
सा भी मौका नहीं दिया। ना तेज धूप में उनको तपने दिया, ना आंधी ओलों से जूझने दिया,
उनको किसी प्रकार की चुनौती का अहसास जरा भी नहीं होने दिया, इसीलिए सब पौधे खोखले
रह गए। जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पौधा अपने बल से ही खड़ा
रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता
है वो ही उसे शक्ति देता है, उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है। सोने को भी
कुंदन बनने के लिए आग में तपने, हथौड़ी से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता
है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है। ”

इसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो, चुनौती
ना हो तो आदमी खोखला ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता। ये चुनौतियां
ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं, उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं, अगर प्रतिभाशाली
बनना है तो चुनौतियां तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे।
अगर जिंदगी में प्रखर बनना है, प्रतिभाशाली बनना है, तो संघर्ष और चुनौतियों का सामना
तो करना ही पड़ेगा।

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रोचक प्रेरक प्रसंग भाग : 1 प्रसन्नता का राज, सरदार पटेल की कर्तव्यनिष्ठा, अस्पृश्य (अछूत), स्वभाव बदलो, काम लेने का तरीका, अंत का साथी


प्रसन्नता का राज, सरदार पटेल की कर्तव्यनिष्ठा,  अस्पृश्य (अछूत), स्वभाव बदलो, काम लेने का तरीका,  अंत का साथी

INTERESTED INCEDENTS

देश के महान स्वतंत्रता सैनानी और हिंदुत्ववादी चिंतक विनायक दामोदर सावरकर का संपूर्ण जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। वे ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी। उनके अद्मय साहस और धर्य का लोहा अंग्रेज अधिकारी भी मानते थे।

CITIZEN UTILITY

K. L. SEN MERTA

1- प्रसन्नता का राज

एक बार एक संत एक पहाड़ी टीले पर बैठे बहुत ही प्रसन्न भाव से सूर्यास्त
देख रहे थे। तभी दिखने में एक धनाढ्य व्यक्ति उनके पास आया और बोला, “बाबाजी! मैं एक
बड़ा व्यापारी हूँ। मेरे पास सुख-सुविधा के सभी साधन हैं। फिर भी में खुश नहीं हूँ।
आप इतना अभावग्रस्त होते हुए भी इतना प्रसन्न कैसे हैं? कृपया मुझे इसका राज बताएं।

संत ने एक कागज लिया और उस पर कुछ लिखकर उस व्यापारी को देते हुए कहा,
“इसे घर जाकर ही खोलना। यही प्रसन्नता और सुख का राज है।
सेठ जी घर पहुंचे और बड़ी उत्सुकता से उस कागज को खोला। उस पर लिखा
था
जहां शांति और संतोष होता
है, वहां प्रसन्नता खुद ही चली आती है।

शिक्षा : इसलिये सुख और प्रसन्नता के
पीछे भागने की बजाय जो है उसमें संतुष्ट रहना ही प्रसन्नता का राज है।

देश के महान स्वतंत्रता सैनानी और हिंदुत्ववादी
चिंतक विनायक दामोदर सावरकर का संपूर्ण जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। वे
ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी। उनके अद्मय साहस
और धर्य का लोहा अंग्रेज अधिकारी भी मानते थे।

 यहाँ उनके जीवन से जुड़े कुछ प्रेरक प्रसंग दिये
जा रहे हैं, जो मुख्यतः अंडमान-निकोबार के सेल्लुलर जेल में दि जाने वाली कठोर यातनाओं
और सावरकर के साहस के विषय में हैं।

2- सरदार पटेल की कर्तव्यनिष्ठा

सरदार बल्लभ भाई पटेल अदालत में एक मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। मामला
बहुत गंभीर था। थोड़ी सी लापरवाही भी उनके क्लायंट को फांसी की सजा दिला सकती थी। सरदार
पटेल जज के सामने तर्क दे रहे थे। तभी एक व्यक्ति ने आकर उन्हें एक कागज थमाया। पटेल
जी ने उस कागज को पढ़ा। एक क्षण के लिए उनका चेहरा गंभीर हो गया। लेकिन फिर उन्होंने
उस कागज को मोड़कर जेब में रख लिया।

मुकदमे की कार्यवाही समाप्त हुई। सरदार पटेल के प्रभावशाली तर्कों से
उनके क्लायंट की जीत हुई। अदालत से निकलते समय उनके एक साथी वकील ने पटेलजी से पूछा
कि कागज में क्या था? तब सरदार पटेल ने बताया कि वह मेरी मेरी पत्नी की मृत्यु की सूचना
का तार था। साथी वकील ने आश्चर्य से कहा कि इतनी बड़ी घटना घट गई और आप बहस करते रहे।

सरदार पटेल ने उत्तर दिया, “उस समय मैं अपना कर्तव्य पूरा कर रहा था।
मेरे क्लायंट का जीवन मेरी बहस पर निर्भर था।मेरी थोड़ी सी अधीरता उसे फांसी के तख्ते
पर पहुंचा सकती थी। मैं उसे कैसे छोड़ सकता था? पत्नी तो जा ही चुकी थी। क्लायंट को
कैसे जाने देता?”

ऐसे गंभीर और दृढ़ चरित्र के कारण ही वे लौहपुरुष कहे जाते हैं।


VS 4
VS 3
VS 2
VS 1

3- अस्पृश्य (अछूत)

भगवान बुद्ध की धर्मसभा चल रही थी। गौतम बुद्ध ध्यानमग्न अवस्था में
बैठे चिंतन कर रहे थे। तभी बाहर खड़ा कोई व्यक्ति चिल्लाकर बोला- “आज मुझे इस सभा में
बैठने की अनुमति क्यों नहीं दी गयी है?” शांत सभा में उसके क्रोधित शब्द गुंजायमान
हो उठे। लेकिन बुद्ध उसी प्रकार ध्यानमग्न ही रहे। उसने पुनः पहले से तेज आवाज में
अपना प्रश्न दोहराया।

शिष्यों ने सभा की शांति को बनाये रखने के लिए भगवान बुद्ध से उसे अंदर
आने की अनुमति देने के लिए कहा। बुद्ध ने कहा, ” वह अंदर बैठने के योग्य नहीं है। वह
अछूत है।
शिष्य आश्चर्य में पड़ गए और
बोले, “भगवन! आपके धर्म में तो जाति पांति को कोई स्थान नहीं है। कोई ऊंचा नीचा नहीं
है। फिर यह अस्पृश्य या अछूत कैसे है?”

तब बुद्ध ने शिष्यों को समझाया, “आज यह क्रोध में है। क्रोध से शांति
एवं एकाग्रता भंग होती है। क्रोधी व्यक्ति हिंसा करता है। अगर वह शारीरिक हिंसा से
बच भी जाये तो मानसिक हिंसा अवश्य करता है।
“किसी भी कारण से क्रोध करने
वाला मनुष्य अछूत है। उसे कुछ समय तक एकांत में रहकर पश्चाताप करना चाहिए। तभी उसे
पता चलेगा कि अहिंसा महान कर्तव्य है। परम धर्म है।

शिष्य समझ गए कि अश्पृश्यता
क्या है और अछूत कौन है?


4- स्वभाव बदलो

एक बार संत अबू हसन के पास एक व्यक्ति आया। वह बोला, “मैं गृहस्थी के
झंझटों से बहुत परेशान हो गया हूँ। पत्नी-बच्चों से मेरी पटती नहीं है। मैं सब कुछ
छोड़कर साधू बनना चाहता हूँ। आप अपने पहने हुए साधू वाले वस्त्र मुझे दे दीजिए। जिससे
मैं भी आप की तरह साधू बन सकूं।

उसकी बात सुनकर अबू हसन मुस्कुराकर बोले, “क्या किसी पुरुष के वस्त्र
पहनकर कोई महिला पुरुष बन सकती है या किसी महिला के वस्त्र पहनकर कोई पुरुष महिला बन
सकता है?” उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, “नहीं, ऐसा नहीं हो सकता।

संत ने उसे समझाया, “साधू बनने के लिए वस्त्र नहीं स्वभाव बदलना पड़ता
है। अपना स्वभाव बदलो। फिर तुम्हे गृहस्थी भी झंझट नहीं लगेगी। बात उस व्यक्ति की समझ
में आ गयी। उसने अपना स्वभाव बदलने का संकल्प लिया।


5- काम लेने का तरीका

एक खेत में कुछ मजदूर काम कर रहे थे। एक गहनता काम करने के बाद वे बैठकर
आपस में गप्पें मारने लगे। यह देखकर खेत के मालिक ने उनसे कुछ नहीं कहा। उसने खुरपी
उठायी और खुद काम में जुट गया। मालिक को काम करता देख मजदूर शर्म के मारे तुरंत काम
में जुट गए। दोपहर में मालिक मजदूरों के पास जाकर बोला, “भाइयों! अब काम बंद कर दो।
भोजन कर के आराम कर लो। काम बाद में होगा।

मजदूर खाना खाने चले गए। थोड़ा आराम करके वे शीघ्र ही फिर काम पर लौट
आये। शाम को छुट्टी के समय पड़ोसी खेत वाले ने उस खेत के मालिक से पूछा, ” भाई! तुम
मजदूरों को छुट्टी भी देते हो। उन्हें डांटते भी नहीं हो। फिर भी तुम्हारे खेत का काम
मेरे खेत से दोगुना कैसे हो गया। जबकि मैं लगातार अपने मजदूरों पर नजर रखता हूँ । डांटता
भी हूँ और छुट्टी भी नहीं देता।

तब पहले खेत के मालिक ने बताया, “भैया! मैं काम लेने के लिए सख्ती से
अधिक स्नेह और सहानुभूति को प्राथमिकता देता हूँ। इसलिए मजदूर पूरा मन लगाकर काम करते
हैं। इससे काम ज्यादा भी होता है और अच्छा भी।


6- अंत का साथी

एक व्यक्ति के तीन साथी थे। उन्होंने जीवन भर उसका साथ निभाया। जब वह
मरने लगा तो अपने मित्रों को पास बुलाकर बोला, “अब मेरा अंतिम समय आ गया है। तुम लोगों
ने आजीवन मेरा साथ दिया है। मृत्यु के बाद भी क्या तुम लोग मेरा साथ दोगे?”

पहला मित्र बोला, “मैंने जीवन भर तुम्हारा साथ निभाया। लेकिन अब मैं
बेबस हूँ। अब मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता।
दूसरा मित्र बोला, ” मैं मृत्यु
को नहीं रोक सकता। मैंने आजीवन तुम्हारा हर स्थिति में साथ दिया है। मैं यह सुनिश्चित
करूंगा कि मृत्यु के बाद तुम्हारा अंतिम संस्कार सही से हो।

तीसरा मित्र बोला, “मित्र! तुम चिंता मत करो। में मृत्यु के बाद भी
तुम्हारा साथ दूंगा। तुम जहां भी जाओगे, मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।
मनुष्य के ये तीन मित्र हैं- माल (धन), इयाल (परिवार) और आमाल (कर्म)।
तीनों में से मनुष्य के कर्म ही मृत्यु के बाद भी उसका साथ निभाते हैं|




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वीर सावरकर के प्रेरक प्रसंग

VEER SAVARKAR

    देश के महान स्वतंत्रता सैनानी और हिंदुत्ववादी चिंतक विनायक दामोदर सावरकर का संपूर्ण जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। वे ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी। उनके अद्मय साहस और धर्य का लोहा अंग्रेज अधिकारी भी मानते थे।</p>       
                                    <img width="512" height="512" src="https://shalasugam.com/wp-content/uploads/2019/10/logo.png" alt="CITIZEN UTILITY" loading="lazy" srcset="https://i2.wp.com/shalasugam.com/wp-content/uploads/2019/10/logo.png?w=512&amp;ssl=1 512w, https://i2.wp.com/shalasugam.com/wp-content/uploads/2019/10/logo.png?resize=300%2C300&amp;ssl=1 300w, https://i2.wp.com/shalasugam.com/wp-content/uploads/2019/10/logo.png?resize=150%2C150&amp;ssl=1 150w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" />                                           
        <h4>K. L. SEN MERTA</h4>        
    <p></p><p align="center" style="text-align: center;">पहला प्रसंग<o:p></o:p></p>

 वीर सावरकर को
अंग्रेजों के द्वारा दिया गया घोर कष्ट, भोगी गयी यातनाएँ, भोगलिप्सा के शिकार लोगों
को लज्जित कर सही हैं। उन्हीं से अपने कष्टों का बयान सुनते हैं।

 ‘जब मैं विदेश
को प्रस्थान कर रहा था, उस समय मुझे विदा करने को जो परिवार या मित्र उपस्थित थे, उनमें
ज्येष्ठ बन्धु भी थे। उस समय मैंने उनके दर्शन किए थे। उसके बाद लम्बा अर्सा बीत जाने
पर अब (अण्डमान) जेल में उनके दर्शन करने थे। मन में आया मिलने से उन्हें अत्यनत दुःख
होगा। अतः मिलने की इच्छा छोड़ देनी चाहिए। मगर उसी क्षण विचार आया कि मिलना टालना तो
दुःख से डरना होगा। दुःख रूपी गजराज जब पूरा का पूरा अन्दर समा ही गया, तो केवल उसकी
पूँछ से क्या डर? वे अपनी आशाओं पर राख डालकर अत्यन्त करूणाजनक स्थिति में आज मुझे
देख रहे थे। क्षण भर तो वे विमूढ़ बने रहे। उनके मूक दुःख का परिचायक केवल एक ही उद्गार
उनके मुख से फूट निकला-

 

‘तात्याँ, तुम
यहाँ कैसे?’ ये शब्द उनकी असहाय वेदनाओं के प्रतीक थे और मेरे हृदय में भाले की तरह
बैठ गए।”

देश के महान स्वतंत्रता सैनानी और हिंदुत्ववादी
चिंतक विनायक दामोदर सावरकर का संपूर्ण जीवन हमारे लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। वे
ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई थी। उनके अद्मय साहस
और धर्य का लोहा अंग्रेज अधिकारी भी मानते थे।

 यहाँ उनके जीवन से जुड़े कुछ प्रेरक प्रसंग दिये
जा रहे हैं, जो मुख्यतः अंडमान-निकोबार के सेल्लुलर जेल में दि जाने वाली कठोर यातनाओं
और सावरकर के साहस के विषय में हैं।

दूसरा प्रसंग

 

अब वीर सावरकर
की अण्मान जेल की दिल दहलाने वाली आपबीती सुनें-

”सबेरे उठते ही
लंगोटी पहनकर कमरे में बंद हो जाना तथा अन्दर कोल्हू का डण्डा हाथ से घुमाते रहना।
कोल्हू में नारियल की गरी पड़ते ही वह इतना भारी चलता कि कसे हुए शरीर के बन्दी भी उसकी
बीस फेरियाँ करते रोने लगते। बीस-बीस वर्ष तक की आयु के चोर-डाकुओं तक को इस भारी मशक्कत
के काम से वंचित कर दिया जाता, किन्तु राजबन्दी, चाहे वह जिस आयु का हो, उसे यह कठिन
और कष्टकर कार्य करने से अण्डमान का वैद्यक शास्त्र भी नहीं रोक पाता। कोल्हू के इस
डण्डे को हाथों से उठाकर आधे रास्ते तक चला जाता और उसके बाद का अर्धबोला पूरा करने
के लिए डण्डे पर लटकना पड़ता, क्योंकि हाथों में बल नहीं रहता था। तब कहीं कोल्हू की
गोल दाँडी पूरा चक्कर काटती। कोल्हू में काम करते भीषण प्यास लगती। पानी वाला पानी
देने से इनकार कर देता। जमादार कहता- ‘कैदी को दो कटोरी पानी देने का हुक्म है और तुम
तो तीन पी गए और पानी क्या तुम्हारे बाप के घर से लाएँ?’ लंगोटी पहनकर सवेरे दस बजे
तक काम करना पड़ता, निरन्तर फिरते रहने से चक्कर आने लगते। शरीर बुरी तरह से थक कर चूर
हो जाता, दुखने लगता। रात को जमीन पर लेटते ही नींद का आना तो दूर, बेचैनी में करवटें
बदलते ही रात बीतती। दूसरे दिन सवेरे पही कोल्हू सामने खड़ा होता। उस कोल्हू को पेरते
समय पसीने से तरह हुए शरीर पर जब धूल उड़कर उसे सान देती, बाहर से आते हुए कूड़े-कचरे
की तह उस पर जम जाती, तब कुरूप बने उस नंग-धड़ंग शरीर को देखकर मन बार-बार विद्रोह कर
उठता। ऐसा दुःख क्यों झेल रहे हो, जिससे स्वयं पर घृणा पैदा हो।

इस कार्य के लिए,
मातृभूमि के उद्धार के लिए, कौड़ी का भी मूल्य नहीं है। वहाँ (भारत में) तुम्हारी यातनाओं
का ज्ञान किसी को भी नहीं होगा। फिर उसका नैतिक परिणाम तो दूर की बात है। इसका न कार्य
के लिए उपयोग है, न स्वयं के लिए। इतना ही नहीं भार, भूत बनकर रहने में क्या रखा है?
फिर यह जीवन व्यर्थ में क्यों धारण करते हो? जो कुछ भी इसका उपयोग होना था, हो चुका।
अब चलो फाँसी का एक ही झटका देकर जीवन का अन्त कर डालो।”

इस भयंकर अन्तर्द्वन्द्व
एवं ग्लानि में भी वीर सावरकर अडिग-अडोल बने रहे।

            <figure><img src="https://shalasugam.com/wp-content/uploads/2021/03/VS-4-150x150.jpg" alt="VS 4" /></figure><figure><img src="https://shalasugam.com/wp-content/uploads/2021/03/VS-3-150x150.jpg" alt="VS 3" /></figure><figure><img src="https://shalasugam.com/wp-content/uploads/2021/03/VS-2-150x150.jpg" alt="VS 2" /></figure><figure><img src="https://shalasugam.com/wp-content/uploads/2021/03/VS-1-150x150.jpg" alt="VS 1" /></figure>            
    <p></p><p align="center" style="text-align: center;">तीसरा प्रसंग<o:p></o:p></p>

वीर सावरकर पहले क्रान्तिकारी थे, जिन्हें राजद्रोह
के आरोप में दो आजनम कारावास की सजा सुनायी गई। इन्होंने पहले लेखक की ख्याति
‘1857 का स्वातंन्न्य समर’ लिखकर प्राप्त किया। इस ग्रन्थ का प्रचार भगतसिंह और नेताजी
सुभाष चन्द्र बोस ने किया। ये पहले साहसी बन्दी थे जिन्होंने इंगलैण्ड से भारत लाए
जाते समय सामुद्रिक जहाज से कूदकर भागने का प्रयास किया। ये पहले लेखक थे, जिनके अधिकांश
ग्रन्थ जब्त किए गए। इनकी इंगलैण्ड में लिखी कविताओं ‘ओ शहीदो’ और ‘गुरू गोविन्द सिंह’
को जब्त किया गया और स्कॉटलैण्ड के पुलिस अधिकारी ने कहा – ‘जिस कागज पर सावरकर लिखते
हैं, वह जलकर राख क्यों नहीं हो जाता?’

उन्होंने पचास वर्ष के काले पानी की सजा साहस
और धैर्य से स्वीकार करते हुए अधिकारी से कहा- ‘क्या मुझे इस निर्णय की प्रति देखने
को मिल सकती है?’ अधिकारी ने कहा था, ‘यह बात मेरे हाथ में नहीं है, फिर भी आपके लिए
मुझसे जो कुछ बनेगा, अवश्य करूँगा। तथापि इतनी लम्बी सजा का समाचार, जो मुझ जैसे व्यक्ति
को भी विदीर्ण करने वाला था, आपने जिस धैर्य से सुना, उसे देखकर मैं यह नहीं मानता
कि आप किसी भी सहायता या सहानुभूति के पात्र होंगे।’

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