हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां, Comments in CCE Holistic Report Card / Important Notes to be Made in Holistic Report Card :- SIQE / एसआईक्यूई के अंतर्गत राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में सीसीई / CCEसतत एवं व्यापक मूल्यांकन की क्रियान्वित हो रही है जिसमें विद्यार्थियों के समग्र प्रगति प्रतिवेदन में विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां दर्ज की जानी होती है|
इस आर्टिकल के तहत हमने विद्वान शिक्षक साथियों के द्वारा सुझाई गई कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियों का उल्लेख किया है जो आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकती है यह टिप्पणियां यहाँ केवल उदाहरण मात्र के लिए है, केवल आप को समझाने के लिए है कि आप इस प्रकार अपने स्वविवेक और परिस्थिति अनुसार समग्र प्रगति रिपोर्ट में ऐसी हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां, Comments in CCE Holistic Report Card टिप्पणियां दर्ज कर सकते हैं |
हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां, Comments in CCE Holistic Report Card / Important Notes to be Made in Holistic Report Card
हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां, Comments in CCE Holistic Report Card
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां
सीसीई के अंतर्गत वार्षिक प्रतिवेदन बनाते समय क्या ना करें :
1. भूलकर भी नकारात्मक टिप्पणी ना करे, यथा – छात्र अंग्रेजी विषय में कमजोर हैं , पुस्तक पढ़ने में अब भी असमर्थ हैं । इसको कुछ इस तरह लिखे – छात्र का अंग्रेजी विषय के प्रति रुझान कम हैं , पुस्तक पढ़ने में शिक्षक की सहायता की आवश्यकता पड़ती हैं।
2. जोड़-बाकी गुना-भाग की जगह संक्रियाये लिखे ।
3. अंग्रेजी भाषा का उपयोग, या किसी तरह का मिक्सअप ना करे, क्योंकि विद्यार्थी वार्षिक प्रतिवेदन हिंदी भाषा में हैं ।
4. एक ही विषय पर ज्यादा नुक्ता चीनी ना करे ,जैसे हिंदी विषय में विलोम शब्द, पर्यायवाची, लिंग, संज्ञा,सर्वनाम आदि पर ना लिखकर सिर्फ इसे व्याकरण कहे और लिखे की व्याकरण का अच्छा ज्ञान हैं / रुझान हैं / संतोषजनक हैं / सराहनीय हैं ।
5. प्रतिवेदन की टिप्पणी में छात्र के नाम का उल्लेख ना करे गोया की प्रतिवेदन उसी छात्र का हैं ।
6. छात्र के व्यवहार पर उनुचित टिप्पणी ना करे, भले ही छात्र थोडा नटखट या उदण्डी हो ।
7. छात्र की ग्रेड के उलट टिप्पणी ना करे । जैसे छात्र के अगर हिंदी में B ग्रेड हैं तो टिप्पणी में ये ना लिखे की, -छात्र का हिंदी के प्रति रुचिपूर्ण द्रष्टीकोण हैं व शब्द भण्डार प्रशंसनीय हैं । हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां, Comments in CCE Holistic Report Card
( आप सभी अध्यापकों से निवेदन हैं की इस पर चर्चा करे, अपने सुझाव देवे, और गलतियों के प्रति ध्यान आकर्षित करे । आप के सहयोग से ही यह पेज सार्थक बन पायेगा ।)
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यहाँ उपलब्ध करवाई गयी टिप्पणियां विद्यार्थी के अभिलेख पंजिका में दर्ज की जाने वाली समेकित टिप्पणियों के कुछ उदाहरण हैं जो आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकती हैं अगर आपने कुछ विशेष टिप्पणियां लिखी है तो आप हमें उदाहरणस्वरूप भेज सकते हैं- हॉलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड में की जाने वाली महत्वपूर्ण टिप्पणियां, Comments in CCE Holistic Report Card
✍बालक रमेश ने सभी विषयों मे अच्छी प्रगति की है ।
✍हिन्दी विषय मे पठन व लेखन मे उत्कृष्ट कार्य कर लेता है
✍सीखने की गति ठीक है ।
✍कक्षा मे शिक्षण के दॊरान सहभागिता अच्छी है ।
✍ साथियों के साथ अच्छा तालमेल रखता है।
✍सहशैक्षिक गतिविधियों मे रूचि रखता है।
✍गृहकार्य एवं कक्षाकार्य समय पर पूरा करता है ।
✍गणित विषय मे विशेष रूचि होने के साथ ही अंग्रेजी विषय मे कम रूचि लेता है ।
✍सृजनात्मक कार्यों मे खास रूचि है।
✍खेलों और सांस्कृतिक कार्यों में रूचि से भाग लेता है।
✍कक्षा में व्यवहार उत्तम है।
✍परिवेशीय सजगता बढी है।
✍बालक में आत्मविश्वास की भावना बढ़ी है।
✍बालिका में साहित्यिक रूचि बनी है
✍व्यक्तिगत,घरेलू और विद्यालय में चीजों के व्यर्थ इस्तेमाल को रोकने की समझ है।
✍प्रजातांत्रिक मूल्यों (समानता,भाईचारा,बन्धुता) का विकास हुआ है।
✍राष्ट्रीयता व सांस्कृतिक धरोहरों की जानकारी
✍विद्यालय कार्यक्रमों में अच्छी भागीदारी है। इसके साथ साथ बच्चें की शैक्षिक स्तिथि, कक्षा कार्य उपस्तिथि, व्यवहार, खेल, विद्यालय प्रोग्राम, स्वच्छता व स्वास्थय, सामान्य ज्ञान , परिवेशिय सजगता तथा विशेष रूचि आदि को ध्यान में रखकर समेकित टिप्पणी की जाए।
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अभिभावक टिप्पणी के अंतर्गत ऐसी टिप्पणियों के उदाहरण यहाँ पर लिखे गए हैं जिन्हें आप अपने विवेक और समझ के अनुसार अभिभावकों से समग्र प्रगति रिपोर्ट और समग्र प्रगति पंजिका में दर्ज करवा सकते हैं-
✍बच्चे ने पढाई के स्तर मे अच्छी प्रगति की है
✍पाठ्य पुस्तक पढने लगा है ।
✍अपने शब्दों मे वाक्य निर्माण करलेता है ।
✍जोड़ बाकि गुणा भाग ,पहाड़े , एवं गणितीय सवाल लिखित एवं मॊखिक हल करने लगा है ।
✍अंग्रेजी मे आसान sentences पढ लेता है
✍अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक पढने मे ओर अभ्यास की आवश्यकता है ।
✍लेख भी सुन्दर लिखने लगा है ।
✍पढने लिखनें में रूचि बढी है।
✍अनुशासन,नियमितता,स्वच्छता व परिवेशिय सजगता का विकास हुआ है ।
✍बच्चे का कार्य संन्तोषजनक /उत्कृष्ट रहा है
✍घर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
✍विद्यालय में शैक्षिक वातावरण अच्छा है ।
✍बच्चे ने वर्षभर कठीन मेहनत कर शैक्षिक प्रगति हासिल की है।
✍बच्चे की प्रगति से मैं संतुष्ट हूं। अभिभावक टिप्पणी यदि गार्जन स्वयं लिखे तो बहुत अच्छा, नही तो जो अभिभावक मौखिक रूप से बालक की वार्षिक शैक्षिक और सहशैक्षिक प्रगति के बारे में बताए उस आधार पर टिप्पणी लिख देवे।
SIQE के अंतर्गत CCE में अध्यापक योजनाएं डायरी में संस्था प्रधान का भी अभिमत दर्ज किया जाता है यहाँ कुछ उदाहरण संस्थाप्रधान के लिए हैं जिनकी सहायता से संस्था प्रधान अपने विवेकानुसार अपना अभिमत या टिप्पणी दे सकते हैं-
👉बच्चे की सीखने की प्रक्रिया के मजबूत पक्ष को ध्यान में रखकर पाठ योजना का निर्माण किया गया है ।
👉रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से पाठ योजना का निर्माण कर संप्रेषित किया गया है ।
👉 बच्चे के व्यक्तित्व के भिन्न-भिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर पाठ योजना बनाई है। तदनुरूप क्रियान्वयन भी किया गया है ।
👉प्रत्येक स्तर केबच्चे को ध्यान में रखकर सीखने की प्रक्रिया को संमुन्नत करने के उद्द्येश्य से उन्हें अधिक अर्थपूर्ण अवसर तथा अनुभव प्रदान कर पाठ योजना का निर्माण किया गया है ।
👉सीखने के क्षेत्र के विशेष संकेतकों ;सूचकों के आधार पर अच्छी पाठ योजना का निर्माण कर अधिगम करवाया गया है ।
👉 बच्चों का आकलन ज़्यादातर क्षेत्रों में कर सीखने के अधिक अवसर देकर एक अच्छी योजना का निर्माण किया गया है। बच्चों ने अच्छा सीखा है ।
👉 विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तक के अतिरिक्त भी सीखने को प्रोत्साहित कर विषय वस्तु को का दायरा बढाया गया है।
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LEARNING OUTCOMES / सीखने के प्रतिफल :- विद्यालयों में अध्यनरत छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर कई नए प्रयास किये जाते है । इन सबका उद्देश्य विद्यालयी छात्रों में शैक्षिक गुणवत्ता का विकास और अच्छी उपलब्धि स्तर को हासिल करना होता है । जिससे छात्रों के समग्र मूल्यांकन के माध्यम से विकास की एक निश्चित योजना बनाकर उनका उन्नयन किया जा सके .वास्तव में, सीखना एक सतत व व्यापक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है । अब हम समझने का प्रयास करते हैं कि सीखने के प्रतिफल (LEARNING OUTCOMES) क्या है ?
किसी विद्यार्थी के लिए पाठ्यक्रम में सीखने के जो लक्ष्य या दक्षतायें निर्धारित की जाती हैं तथा जिन्हें ध्यान में रखकर शिक्षक अपने दैनिक कक्षा शिक्षण को संपादित करते हैं और कक्षा के इतर अनेक सह शैक्षिक गतिविधियों को आयोजित करते हैं, उन्हें Learning outcomes कहते हैं।
सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक अभी तक पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा के आयोजन पर ही ध्यान देते थे। पढ़ाई से बच्चे के मानसिक स्तर, सामान्य ज्ञान और शैक्षिक ज्ञान में क्या सुधार हुआ, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता था। सरकार ने इस वर्ष पहल कर लर्निंग आउटकम के मापदंड तैयार किए हैं। किस कक्षा में शिक्षक बच्चे को किस तरह क्या-क्या पढ़ाएंगे और किस कक्षा में बच्चों को कितना ज्ञान होना चाहिए, यह निर्धारित किया गया है।
सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) की विस्तृत जानकारी
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अक्सर शिक्षकों में इस बात की स्पष्टता नहीं होती कि,
किस प्रकार का सीखना आवश्यक है?
वे कौन से मापदड हैं जिनसे इसे मापा जा सकता है?
वे पाठ्यपुस्तक को संपूर्ण पाठ्यक्रम मानकर पाठों के अत में दिए गए प्रश्नों के आधार पर मूल्यांकन करते हैं। पाठ्यसामग्री के संदर्भ की भिन्नताओ तथा पढ़ाने के विभिन्न सिद्धांतों को वे ध्यान में नहीं रखते। पठन सामग्री में संदर्भानुसार भिन्नताएँ और अपनाई गई शिक्षण तकनीक में विविधता पर सामान्यतया ध्यान नहीं जाता है, क्योंकि इनके आकलन की कोई कसौटी नहीं है।
प्रत्येक कक्षा के सीखने के प्रतिफल शिक्षकों को केवल शिक्षा के वांछित तरीके अपनाने में ही सहायक नहीं है. बल्कि अन्य साझेदारों, जैसे– संरक्षक, माता-पिता, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों, समुदाय तथा राज्य स्तर के शिक्षा अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका के प्रति सर्तक और ज़िम्मेदार भी बनाता है। स्पष्ट रूप से परिभाषित सीखने के प्रतिफल विभिन्न साझेदारों की ज़िम्मेदारी तथा उत्तरदायित्वों को सुनिश्चित करते हुए और दिशा-निर्देश दे सकता है ताकि विभिन्न पाठ्यचर्या क्षेत्र से अपेक्षाओं की पूर्ति हो सके। इसमें शिक्षक की प्राथमिक भूमिका सीखने की प्रक्रिया में सुगमकर्ता के रूप में होती है।
एक शिक्षक की भूमिका –
बच्चे विद्यालय में अपने सीखने के अनुभवों के साथ प्रवेश करते हैं। विद्यालय बच्चे के मौजूदा अनूभवों के आधार पर सीखने की आगामी प्रक्रिया के गठन का दायित्व उठाता है। इस प्रकार हम किसी भी स्तर की शरुआत बच्चे की ‘अधिगम शून्यता’ से नहीं करते। एक शिक्षक, जो कि विद्यार्थियाें के सीखने का परामर्शदाता और सगुमकर्ता है, को भिन्न शिक्षणशास्त्रीय तकनीकों और बच्चेकी सीखने में उन्नति के प्रति भी जागरूक बनाना आवश्यक है।
सीखने के प्रतिफल को बेहतर कैसे बनायें –
सीखने सिखाने की प्रक्रिया के दौरान सतत एवं मूल्यांकन का उपयोग करें।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विद्यार्थी और शिक्षक के अलावा माता-पिता, समुदाय के सदस्य और शैक्षिक प्रशासकों को भी विद्यार्थियों के सीखने के बारे में जानने और उसके अनुसार बच्चों की सीखने संबंधी उन्नति पर नज़र बनाए रखने की ज़रूरत है।
सीखने की निरन्तरता को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था को यह जानकारी देना कि बच्चेने सटीक रूप से क्या सीखा, एक चनुौती भरा कार्य होता है।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनसुंधान और प्रशिक्षण परिषद (ए्नसीईआरटी) के द्वारा विद्यालय से संबंधित सभी हितग्राहियों को शामिल करते हुए सीखने की संप्राप्तियों (Learning outcomes)को निर्धारित किया गया है ये बेंच मार्क के रूप में चिन्हित किये गए है क्योंकि इनकी प्राप्ति के बगैर छात्रों के सर्वागींण विकास की बात उचित नही है.
प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थी के सीखने के बारे में जानने और उसके अनुसार बच्चों के सीखने सम्बन्धी प्रगति पर नज़र बनाये रखने की जरुरत है । इसके लिए आवश्यकता है की शिक्षको को कुछ मानदंड उपलब्ध करवाए जाये जिनकी सहायता से आपेक्षित सीखने के स्तर का आकलन किया जा सके।
सीखने की निरन्तरता को ध्यान में रखते हुए शिक्षक एवं शिक्षा व्यवस्थासे जुड़े सभी अधिकारियो एवं अभिभावकों यह जानना आवश्यक है कि बच्चे ने सटीक रुप से कक्षा में क्या सीखा? इन्ही मापदंडो को “सीखने का प्रतिफल ” के रुप में परिभाषित किया गया है अर्थात जो कुछ भी बच्चे ने सीखाहै उसको जाचने अथवा उस परिणाम को देखने के मापदंड को अधिगम प्रतिफल के रुप में देखा जा सकता है ।
LEARNING OUTCOMES (सीखने के प्रतिफल) की आवश्यकता –
निः शुल्क एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की क्रियान्वित अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी की गुणवत्तायुक्त शिक्षा को सुनिश्चित करने हेतु ।
आयु अनुररोप अपेक्षित स्तर , कौशल विकास एवं गुणवक्तायुक्त शिक्षा को परिभाषित करने हेतु ।
शैक्षिक उदेश्यो की पूर्ति की सटीक जॉच हेतु ।
राष्ट्रीय स्तर की शैक्षिक आकांक्षाओं की क्रियान्वयन हेतु समन्वित प्रयास अन्तर्गत ।
राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर उच्च पायदान पर अवस्थित करने के प्रयास के क्रम में ।
LEARNING OUTCOMES पर अपनी अधिक समझ बनाने के लिए आप नीचे दिये गए link पर जा सकते हैं-
आईये हम जानें प्राथमिक स्तर पर कक्षावार 1 से 8 तक लर्निंग आउटकम (LEARNING OUTCOME) पर आधारित माहवार प्रश्न क्या -क्या हो सकते है ? जिससे हम अपने शिक्षण को गुणवत्ता आधारित बना सकें …
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LATEST RBSE YEARLY EXAM SAMPLE PAPER CLASS 6th 7th 2024. परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए एक रणनीतिक अध्ययन दिनचर्या की योजना बनाने के लिए उपयुक्त अध्ययन सामग्री इकट्ठा करना महत्वपूर्ण है। परीक्षा की तैयारी करते समय प्रश्न पत्रों को हल करना बेहद फायदेमंद साबित हुआ है।LATEST RBSE YEARLY EXAM SAMPLE PAPER CLASS 6th 7th प्रश्न पत्रों का अभ्यास करने के निम्नलिखित कारण हैं:
परीक्षा के पैटर्न को समझने के लिए
परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार को समझने के लिए
प्रश्नों के उत्तर देने में लगने वाले अनुमानित समय का अनुमान लगाने के लिए
अंकों के वितरण को जानने के लिए
संक्षेप में, छात्रों को यहां दिए गए राजस्थान कक्षा 6 के प्रश्न पत्रों को हल करके कक्षा 6 की अंतिम परीक्षा के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलती है। प्रश्न पत्र प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। LATEST RBSE YEARLY EXAM SAMPLE PAPER CLASS 6th 7th
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NOTE : सभी सेम्पल प्रश्न पत्र अपलोड कर दिए हैं | आपसे आग्रह हैं कि पेज को शेयर लिंक के माध्यम से अपने अन्य शिक्षक बंधुओ को शेयर अवश्य करें, साथ अपने अन्य सोशल मिडिया ग्रुप पर भी इस लिंक को जरूर शेयर करें| ध्यान : रखें प्रश्न पत्र को डाउनलोड करके सोशल मीडिया पर शेयर करना वर्जित हैं |
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Transfer of charge in schools / विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण की विस्तृत जानकारी :- नमस्कार इस आलेख के अंदर हम जानेगे कि विद्यालयों में कार्यभार स्थानांतरण की विस्तृत कार्यवाही क्या होती है अगर कोई नया संस्थाप्रधान ज्वॉइन करें तो वह उस संस्थाप्रधान से किस प्रकार विभिन्न प्रकार के रिकॉर्ड अपने हस्तान्तरण में लेंगे अथवा किसी विद्यालय में संस्था प्रधान का पद रिक्त होने की स्थिति में किस व्यक्ति को चार्ज मिलेगा इसके बारे में इस आर्टिकल में विस्तार से जानकारी हमने शेयर की है| Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
1 जब तक कि किन्हीं विशिष्ट लिखित कारणों से जो लोक हित के होने चाहिये, जिसके आदेश के अधीन स्थानान्तरण हुआ है, वह अनुमति प्रदान नहीं कर दे, अथवा कोई विशिष्ट अन्य स्थान अपेक्षित न कर दे या कोई अन्य आज्ञा नहीं दे दे, तब तक किसी पद का भार उनके मुख्यालय पर ही हस्तान्तरित करना चाहिये, जहां पद भार से मुक्त करने वाला तथा पद सम्भालने वाला दोनों राज्य कर्मचारी उपस्थित हों ।
Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण की विस्तृत जानकारी यहाँ से जाने
राजस्थान सरकार का निर्णय - राजस्थान सरकार के ध्यान में आया है कि स्थानान्तरण आज्ञा जारी होने पर, भारमुक्त कर्मचारी जिस पद पर स्थानान्तरित हुआ उस पद का चार्ज लेने हेतु कर्त्तव्य पर उपस्थित होता है लेकिन किसी - कारणवश, कार्यालयाध्यक्ष / विभागाध्यक्ष या राज्य कर्मचारी जिसे भारमुक्त किया जाना है, जानबूझकर चार्ज हस्तान्तरण करने में विलम्ब करता है।
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इस मामले पर विचार किया गया है और यह निर्णय लिया गया है कि स्थानान्तरण आज्ञा प्राप्त होने पर जैसे ही भार ग्रहण करने वाला कर्मचारी उपस्थित होवे शीघ्र ही भार हस्तांतरित कर दिया जाना चाहिये। यदि किसी प्रकार का भार हस्तांतरित करने में जानबूझकर विलम्ब किया जाता है तो भार ग्रहण करने वाला कर्मचारी उस पद का भार ग्रहण करेगा और ऐसा होने के फलस्वरूप भारमुक्त हुआ कर्मचारी उस समय तक असाधारण अवकाश पर माना जावेगा जब तक कि उसे संवेतन अवकाश, जो उसे देय हो, उस दिन से जब से भारमुक्त करने वाले अधिकारी द्वारा भारग्रहण किया जाकर भारमुक्त किया गया हो, से सक्षम अधिकारी, द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया हो।
राजस्थान सरकार के निर्देश—उपरोक्त वित्त विभाग निर्णय दिनांक 7-11-1969 में ये निर्देश दिए गए थे कि यह निश्चय किया जावे कि जैसे ही भारमुक्त कर्ता अधिकारी भार ग्रहण करने हेतु उपस्थित हो उसके शीघ्र ही हस्तान्तरण आज्ञा की पालना आवश्यक हो । महालेखाकार द्वारा यह तथ्य राज्य सरकार के ध्यान में लाया गया है कि इन निर्देशों की पालना उचित प्रकार से नहीं की जाती । राज्य सरकार इस अवज्ञा को गम्भीरता से लेती है और निम्न अग्रिम निर्देश प्रसारित करती है जेनकी पालना कठोरता से की जावे-
भारमुक्त होने वाला राज्य कर्मचारी जैसे ही भार ग्रहण करे, शीघ्र ही अपने भार ग्रहण की सूचना भार मुक्त होने वाले कर्मचारी के नाम दर्शित करते हुए कोषागार अधिकारी और नियंत्रित अधिकारी को करेगा।
उक्त सूचना प्राप्त न होने पर, नियन्त्रण अधिकारी द्वारा सम्बन्धित कोषागार अधिकारी को यह लिखा जाना चाहिये कि उस अधिकारी का जिसने भार संभालने में परिहार्य (avoid) किया और जिसे इन परिस्थितियों के कारण भारमुक्त समझा जावे, भुगतान रोका जावे और इस प्रकार लिखे गए पत्र की प्रतिलिपि महालेखाकार राजस्थान को भी प्रेषित की जावे ।
इस प्रश्न का कि भार सम्भालने में आशयित (intentional) विलम्ब हुआ है या कि राज्य कर्मचारी ने भार सम्भालने में परिहार्य किया है कि उसे इन परिस्थितियों में भारमुक्त समझा जावे, यह निश्चय वह अधिकारी करेगा जो कि स्थानान्तरण आज्ञा देने में सक्षम हो, और वह सक्षम अधिकारी उस विलम्ब अवधि का जिस दिन से कर्मचारी ने पद भार ग्रहण किया था, अवकाश स्वीकृत कर जहां आवश्यक हो, नियमन करेगा।
2 नियम की यह शर्त कि पद भार ग्रहण कर्ता तथा पद भार से मुक्त होने वाले दोनों राज्य कर्मचारी उपस्थित होने चाहिये, उन राज्य कर्मचारियों के सम्बन्ध में प्रभावी करना आवश्यक नहीं है जिनको दीर्घावकाश . ( वेकेशन) के साथ अवकाश जोड़ने की अनुमति दे दी गई हो। ऐसे मामलों में निम्नलिखित प्रणाली का अनुसरण होना चाहिए :
जब कि दीर्घावकाश अवकाश से पूर्व जोड़ा गया हो तो बाह्यगमन करने वाला राज्य कर्मचारी मुख्यालय छोड़ने से पहले रिपोर्ट करेगा अथवा यदि अत्यावश्यक कारणों से अवकाश दीर्घावकाश (वेकेशन) में स्वीकृत हुआ हो तो अवकाश स्वीकृत होते ही अपना पद भार दीर्घावकाश ( वेकेशन) के अन्त से प्रभावशील, हस्तान्तरित करेगा। तत्पश्चात् पद मुक्त करने वाला राज्य कर्मचारी दीर्घावकाश का अन्त होने पर पद सामान्य रूप से सम्भाल लेगा।
जब कि दीर्घावकाश अवकाश के साथ जोड़ी गई हो, पद भार से मुक्त होने वाला राज्य कर्मचारी दीर्घावकाश से पूर्व सामान्य रूप से पद भार हस्तांतरित करेगा, आने वाला राज्य कर्मचारी दीर्घावकाश समाप्ति पर वापस लौटने पर, दीर्घावकाश (वेकेशन) के आरम्भ से पदभार ग्रहण कर लेगा।
सरकारी निर्णय—एक प्रश्न यह उठाया गया है कि क्या राजपत्रित अधिकारी के पद ग्रहण करने / हस्तान्तरित करने की चार्ज रिपोर्ट पर उच्चतर प्राधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षर करना अनिवार्य है। इस प्रश्न पर विचार किया गया और निर्णय किया गया है कि निकटतम उच्च अधिकारी का प्रतिहस्ताक्षर केवल तभी आवश्यक होता है जबकि कोई अधिकारी पद हस्तांतरित करता हो या ग्रहण करता हो और ऐसा कोई अधिकारी नहीं हो जिसको वह पद हस्तांतरित करे या जिससे वह पद ग्रहण करे ।
3 सामान्यतया किसी विशेष मामलों में किसी विशेष प्रतिकूल आज्ञा के, अधीनस्थ राज्य कर्मचारी वर्ग से सरकारी कर्मचारियों, उदाहरणार्थ शासन सचिव या राजकीय सचिवालय के लिपिक का मुख्यालय, जिरा सरकार से वह संलग्न है उसका तत्समय मुख्यालय जहां स्थित हो उसी स्थान पर होगा। किसी अन्य राजकीय कर्मचारी का मुख्यालय वह स्थान होगा जो उनको नियुक्त करने वाला प्राधिकारी मुख्यालय नहीं घोषित करे, अथवा ऐसी घोषणा के अभाव में वह स्थान जहां उसके कार्यालय के अभिलेख रखे जाते हों । Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
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स्थानान्तरित कार्मिको के सम्बन्ध में चार्ज देने के बारे में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी अजमेर का 17/10/2019 का आदेश-
उपरोक्त विषयान्तर्गत लेख है कि आदेशानुसार राज्य सरकार द्वारा जो अधिकारी / कर्मचारी स्थानान्तरित हुए है कतिपय मामलों में स्थानान्तरित हुए अधिकारी / कर्मचारी पूर्व विद्यालय के चार्ज हस्तान्तरण हेतु कई दिन तक पूर्व विद्यालय में ही उपस्थिति देते रहते है इस वावत् स्पष्ट निर्देश दिये जाते है कि समस्त स्थानान्तरित कर्मचारी / अधिकारी अधिकतम तीन दिवस में पूर्व विद्यालय का चार्ज हस्तान्तरित कर दें। इससे अधिक अवधि तक चार्ज रोके जाने पर सम्बन्धित के विरूद्ध कठोर अनुशास्नात्मक कार्यवाही की जाऐगी। समस्त डीईओ / सीवीईओ अधीनस्थ से उक्त आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करें।
Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
प्राथमिक विद्यालय / उच्च प्राथमिक विद्यालय में संस्था प्रधान के चार्ज के सम्बन्ध में जानकारी
राज्य में संचालित राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सुचारू संचालन व दैनिक कार्यों के निष्पादन हेतु विद्यालयों के कार्य प्रभार के संबंध में श्रीमान निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा, बीकानेर के आदेश दिनांक- 20.01.2017 में संशोधन किए जाकर आदेश क्रमांक-शिविरा/प्रारं/शैक्षिक/एबी/विद्यालय व्यवस्था/2017/26 दिनांक-06.05.2017 द्वारा निम्नानुसार संशोधित दिशा निर्देश जारी किए गए हैं-
(1) किसी भी उच्च प्राथमिक प्राथमिक विद्यालय में वरिष्ठ अध्यापक के पद पर कार्यरत होने की स्थिति में संस्था प्रधान का दायित्व/प्रभार उसके पास रहेगा।
(2) वरिष्ठ अध्यापक का पद रिक्त होने अथवा स्वीकृत नहीं होने पर वरिष्ठतम अध्यापक / प्रबोधक पद पर कार्यरत कर्मी द्वारा संस्था प्रधान के दायित्व का निर्वहन किया जाएगा।
(3) वरिष्ठ अध्यापक/अध्यापक/प्रबोधक का पद रिक्त होने की स्थिति में शारीरिक शिक्षक द्वारा संस्था प्रधान का दायित्व का निर्वहन किया जाएगा।
(4)उपयुक्त अनुसार बिंदु संख्या 1 से 3 तक के अलावा अन्य स्थिति के वरिष्ठ शिक्षाकर्मी/पैराटीचर/ट्रेनी अध्यापक के पद पर कार्यरत कार्मिक द्वारा संस्था प्रधान के दायित्व का निर्वहन किया जाएगा। कार्मिक की वरिष्ठता का निर्धारण संपूर्ण सेवा अवधि के आधार पर होगा। Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
प्रबोधक को भी संस्थाप्रधान का चार्ज
किसी विद्यालय में तृतीय श्रेणी अध्यापक और प्रबोधक में से संस्थाप्रधान का चार्ज किसे सौपा जाये❓
निदेशक प्रारभ्भिक शिक्षा बीकानेर के पूर्व निर्देशो के अनुसार प्रबोधक को संस्था प्रधान का चार्ज वरिष्ठ अध्यापक , अध्यापक, शारीरिक शिक्षक के पद रिक्त होने पर देय था। 6/3/17 के नवीन संशोधित आदेशो के अनुसार संस्था प्रधान का पद रिक्त होने पर वरिष्ठ अध्यापक को ,उनकी अनुपस्थिति या पद रिक्त होने पर प्रबोधक / अध्यापक जो भी वरिष्ठ होगा उन्हे संस्था प्रधान का दायित्व दिया जाएगा। *वीन संशोधन से प्रबोधक के पद को अध्यापक के पद के समकक्ष रखा गया है।सम्पूर्ण सेवा अवधि से वरिष्ठता की गणना की जाएगी। Transfer of charge in schools विद्यालयों में कार्यभार हस्तान्तरण
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State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998 / राज्य बीमा नियम 1998 : राज्य बीमा नियम 1998(SI Rules)-राजस्थान राज्य बनने के बाद 1953 में कर्मचारी बीमा नियम के तहत 1-1-1954 से सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सभी राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य राज्य बीमा योजना लागू की गई। इस योजना को आगे बढ़ाया गया और 1-4-1989 से जिला परिषदों और पंचायत समितियों के कर्मचारियों के लिए लागू किया गया। बाद में 1-4-1995 से इस योजना को राज्य सरकार के अधीन विभिन्न विभागों के सभी वर्क चार्ज कर्मचारियों के लिए लागू किया गया।
पुराने नियमों को फिर से लिखा गया और 01-04-1998 से नए बीमा नियम State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998लागू हुए।
State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998
राज्य बीमा कटौती बढ़ाने के संबंध में 55 वर्ष की आयु की गणना कैसे करें?
राज्य बीमा विभाग के State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998 नियमों के अनुसार, राज्य बीमा की कटौती को बढ़ाने के लिए, 1 अप्रैल यानी 1/4/22 को 55 वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए, यदि कार्मिक की आयु 55 वर्ष या उससे अधिक है, तो कटौती समान रहेगी और कटौती योग्य में कोई वृद्धि नहीं होगी क्योंकि बीमा विभाग 55 वर्ष की आयु के बाद किसी भी जोखिम को कवर नहीं करता है। State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998
State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998
उस राज्य बीमा कटौती योग्य का क्या होगा जिसकी परिवीक्षा अवधि 28 मार्च, 2022 को समाप्त हो रही है?
State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998 के अनुसार जिनका पहली बार एसआई काटा जा रहा है, वह 22 मार्च से ही होगा, लेकिन जिनका प्रोबेशन मार्च 2022 या उससे पहले पूरा हो रहा है, पहले ऐसे कर्मियों के लिए एक पुष्टिकरण आदेश जारी किया जाएगा, फिर डीडीओ वेतन तय करेगा, उसके बाद नए वेतन के अनुसार राज्य बीमा की पहली कटौती 22 मार्च से की जा सकती है, जिसमें से बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा।
State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998 के अनुसार राज्य बीमा की कटौती के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी
अगर सरकार द्वारा बढ़ाए गए डिडक्शन को स्लैब के हिसाब से बढ़ाना है तो कोई डिक्लेरेशन नहीं देना होता है| यदि कर्मी अपनी इच्छा से एक या दो कदम आगे बढ़ना चाहते हैं तो उन्हें एसएसओ-आईडी से आगे का परिशिष्ट (अधिक घोषणा पत्र) ऑनलाइन जमा करना होगा।
जिन लोगों का एसआई पहली बार 22 मार्च को काटा जा रहा है, वे अपनी एसएसओ-आईडी से प्रथम घोषणा ऑनलाइन जमा करें, यदि कर्मी चाहें तो एक या दो चरण आगे की कटौती भी करवा सकते हैं।
टिप्पणी: जो 1 अप्रैल, 22 को 55 वर्ष से अधिक आयु के हैं, उनकी SI कटौती समान रहेगी, उनकी कटौती किसी भी तरह से नहीं बढ़ेगी। SIPF पोर्टल पर नए आदेश के अनुसार, कटौती की नई दरें अपडेट होते ही ऑनलाइन डिक्लेरेशन फॉर्म जमा करें। यदि आपने पूर्व में पुरानी दर पर एसआईपीएफ पोर्टल में घोषणा पत्र जमा किया है, तो इसे डीडीओ या राज्य बीमा और भविष्य निधि कार्यालय से खारिज कर दें जहां यह लंबित है और नई दर के अनुसार घोषणा पत्र फिर से जमा करें।
State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998 के अनुसार बीमा पॉलिसी पर स्वीकृत ऋण
बीमित व्यक्ति ऋण के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने पर सरेंडर मूल्य के 90% और अर्जित बोनस की सीमा तक ऋण प्राप्त करने का हकदार होगा।
बीमित व्यक्ति के अनुरोध पर ऋण 60 समान मासिक किस्तों में या कम किस्तों में वितरित किया जाएगा। किश्तें ऋण निकासी के पहले महीने के वेतन से शुरू होंगी। मूल ऋण चुकाने के बाद ऋण पर 8.5% का साधारण ब्याज 10 समान किश्तों में वसूल किया जाएगा। पॉलिसी के विरुद्ध अगला ऋण तब तक स्वीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि पिछले ऋण की स्वीकृति और पिछले ऋण की वसूली के दो वर्ष बीत चुके हों।
State Insurance Rules 1998 SI Rules : राज्य बीमा नियम 1998 के अनुसार राज्य बीमा ऋण पर ब्याज की गणना
राज्य बीमा ऋण की वसूली राज्य बीमा एवं भविष्य निधि विभाग द्वारा 36 समान किश्तों में की जाती है। अत: 01 किश्त पर 666 माह के लिए ब्याज की गणना की जा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी ने रुपये 36000/- का राज्य बीमा ऋण लिया है तो यह रुपये 1000/- प्रति माह की दर से वेतन कटौती से वसूल किया जाएगा। मूल ऋण में कटौती के बाद ब्याज घटाया जाता है । यदि रुपये 1000/- की किश्त पर 666 महीने के लिए ब्याज की गणना की जाए तो सही ब्याज की गणना हो जाती है जो निम्न प्रकार है –
(1000 किश्त x 666 महीने x 9.5 वार्षिक ब्याज दर)/ 1200 = 5273 रुपये ब्याज होगा। इसी प्रकार बैंक ऋण पर भी ब्याज की गणना की जा सकती है।
गणना अवधि = (अवधि x (अवधि+1))/ 2 उदाहरण के लिए यदि ऋण 36 किस्तों में काटा जाता है तो (36 x 37)/ 2 = 666
यदि वसूली 60 किश्तों में की जा रही है तो (60 x 61) = 1830 माह की पहली किस्त का ब्याज पूरे ऋण ब्याज के बराबर होगा।
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