राजकीय विद्यालयों के नामकरण की नियमावली | सरकारी स्कूल नामकरण नियम  SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES

राजकीय विद्यालयों के नामकरण की नियमावली | सरकारी स्कूल नामकरण नियम SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES

राजकीय विद्यालयों के नामकरण की नियमावली | सरकारी स्कूल नामकरण नियम | SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES | राजस्थान में राजकीय विद्यालयों के नामकरण से संबंधित नियमों को शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित किया गया है। विशेष रूप से शहीद सैनिकों, स्वतंत्रता सेनानियों एवं अन्य महान विभूतियों के नाम पर विद्यालयों का नामकरण करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस लेख में हम राजकीय विद्यालयों के नामकरण की संपूर्ण नियमावली, आवश्यक दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया एवं प्रमुख प्रावधानों की जानकारी सरल भाषा में समझेंगे।


शहीद के नाम से राजकीय विद्यालय का नामकरण

शहीद सैनिकों के नाम पर राजकीय विद्यालयों का नामकरण करने हेतु संबंधित विद्यालय की एसएमसी/एसडीएमसी, ग्राम पंचायत अथवा शहरी क्षेत्र होने पर नगर पालिका/नगर निगम/प्राधिकरण की अनापत्ति एवं अनुशंसा आवश्यक होती है। इसके साथ संस्था प्रधान की रिपोर्ट तथा संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक/माध्यमिक) की अनुशंसा भी अनिवार्य है। SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES

विद्यालय नामकरण प्रस्ताव में निम्न दस्तावेज शामिल किए जाते हैं:

  • प्रपत्र 7(क)
  • बैटल/ऑपरेशनल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट
  • सर्विस पार्टिकुलर्स
  • ग्राम पंचायत/नगर निकाय की अनुशंसा
  • एसएमसी/एसडीएमसी की अनुशंसा
  • संस्था प्रधान एवं जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट

इन दस्तावेजों के आधार पर निदेशक, प्रारंभिक/माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर द्वारा स्वीकृति जारी की जाती है।

राजकीय विद्यालयों के नामकरण की नियमावली | सरकारी स्कूल नामकरण नियम
SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES- राजकीय विद्यालयों के नामकरण की नियमावली | सरकारी स्कूल नामकरण नियम

विवाद की स्थिति में निर्णय

यदि विद्यालय नामकरण को लेकर एसएमसी, ग्राम पंचायत, शहीद के परिजनों अथवा अन्य पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न होता है, तो संबंधित जिला कलेक्टर की अनुशंसा को मान्य माना जाएगा। SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES

जिला कलेक्टर अपनी अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति गठित कर सकते हैं, जिसमें:

  • शिक्षा विभाग
  • सैनिक कल्याण विभाग
  • पुलिस विभाग
  • जिला परिषद
  • जनप्रतिनिधि
  • एसएमसी/एसडीएमसी

से सुझाव लेकर अंतिम निर्णय किया जाएगा।


किन शहीदों के नाम पर विद्यालय नामकरण किया जा सकता है

केवल आजादी के बाद विभिन्न युद्धों एवं ऑपरेशनों में शहीद हुए सैनिकों के नाम पर ही राजकीय विद्यालयों का नामकरण किया जा सकेगा।

निम्न श्रेणियों के नाम पर विद्यालय नामकरण नहीं किया जाएगा:

  • अग्निवीर
  • पुलिस विभाग के शहीद
  • प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध के शहीद
  • आजाद हिन्द फौज के शहीद
  • 01.04.1999 से पूर्व के CAPF शहीद

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एक ग्राम में एक ही शहीद के नाम से नामकरण

यदि किसी विद्यालय भवन का नामकरण पहले से किसी शहीद के नाम पर किया जा चुका है तथा उस ग्राम में अन्य राजकीय विद्यालय संचालित नहीं है, तो उसी विद्यालय का पुनः अन्य शहीद के नाम से नामकरण नहीं किया जाएगा। SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES

यदि ग्राम में कोई विद्यालय उपलब्ध नहीं है, तो शहीद के नाम पर निम्न सार्वजनिक स्थलों का नामकरण प्रस्तावित किया जा सकता है:

  • चिकित्सालय
  • औषधालय
  • राजकीय भवन
  • मार्ग
  • सार्वजनिक स्थल

विद्यालय चयन की प्राथमिकता

विद्यालय नामकरण हेतु प्राथमिकता इस प्रकार होगी:

  1. प्राथमिक विद्यालय
  2. उच्च प्राथमिक विद्यालय
  3. माध्यमिक विद्यालय
  4. उच्च माध्यमिक विद्यालय
  5. राजकीय संस्कृत विद्यालय

यदि ग्राम में प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध नहीं है, तभी उच्च स्तर के विद्यालय का चयन किया जाएगा।


महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों के नामकरण संबंधी नियम

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों के नामकरण में “महात्मा गांधी” नाम यथावत रखा जाएगा तथा उसके बाद शहीद/भामाशाह का नाम जोड़ा जाएगा।

उदाहरण:

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय शहीद ____ सिंह


आवेदन प्रक्रिया

शहीद सैनिक के आश्रित अथवा परिजन संबंधित जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को आवेदन प्रस्तुत करेंगे। SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES

आवेदन का निस्तारण FIFO (First In First Out) प्रणाली के आधार पर किया जाएगा।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी पात्रता जांच के बाद:

  • जिला कलेक्टर से प्रपत्र 7(क) जारी करवाएंगे
  • पूर्ण प्रकरण जिला शिक्षा अधिकारी को भेजेंगे
  • तत्पश्चात निदेशक शिक्षा विभाग को प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा

आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज

विद्यालय नामकरण प्रस्ताव के साथ सामान्यतः निम्न दस्तावेज आवश्यक होते हैं:

  • बैटल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट
  • ऑपरेशनल कैजुअल्टी सर्टिफिकेट
  • सर्विस पार्टिकुलर्स
  • प्रपत्र 7(क)
  • ग्राम पंचायत/नगर निगम की एनओसी
  • एसएमसी/एसडीएमसी अनुशंसा
  • संस्था प्रधान की अनुशंसा
  • जिला शिक्षा अधिकारी की अनुशंसा
  • अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र

महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदन शहीद के कैजुअल्टी सर्टिफिकेट जारी होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर करना आवश्यक है। SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES


स्वतंत्रता सेनानी एवं महान विभूतियों के नाम से नामकरण

स्वतंत्रता सेनानी, महान विभूति, संत, महात्मा, ऐतिहासिक पुरुष, विधायक, सांसद या पूर्व मंत्रियों के नाम से विद्यालय नामकरण का कार्य शिक्षा विभाग द्वारा सीधे नहीं किया जाएगा।

ऐसे मामलों में सामान्य प्रशासन विभाग स्तर पर कार्यवाही की जाएगी तथा विशेष परिस्थितियों में जिला कलेक्टर के अनुरोध पर शासन स्तर से एनओसी जारी की जा सकती है।


नामकरण हेतु आवश्यक दस्तावेज (स्वतंत्रता सेनानी मामलों में)

  • ताम्र पत्र
  • जीवन परिचय
  • स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान विवरण
  • मृत्यु प्रमाण पत्र
  • पेंशन प्रमाण पत्र
  • ग्राम पंचायत/नगर निकाय एनओसी
  • एसएमसी/एसडीएमसी अनुशंसा
  • संभावित स्थानीय प्रतिक्रिया रिपोर्ट
  • संस्था प्रधान एवं जिला शिक्षा अधिकारी की अनुशंसा

विद्यालय परिसरों में मूर्ति एवं नाम पट्टिका संबंधी नियम

राजकीय विद्यालयों में:

  • मूर्ति/प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी
  • चबूतरे निर्माण की अनुमति नहीं होगी
  • खेल मैदान का अलग नामकरण नहीं होगा
  • ब्लॉक, पुस्तकालय, प्रयोगशाला एवं कक्षा-कक्ष पर नाम पट्टिका नहीं लगाई जाएगी

समन्वयन (Merger) की स्थिति में नियम

यदि शहीद, भामाशाह अथवा स्वतंत्रता सेनानी के नाम से नामांकित विद्यालय का समन्वयन किया जाता है, तो विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES


राजकीय विद्यालयों के नामकरण से जुड़े महत्वपूर्ण आदेश और दिशा निर्देश SCHOOL NAME CHANGE GUIDLINES ORDERS

  1. SCHOOL NAME CHANGE CONFUSION GUIDELINE 11-12-2016 DOWNLOAD HERE newImg
  2. SCHOOL NAME CHANGE SAMNAY PRASHASAN VIBHAG ORDER 06-02-2025 DOWNLOAD HERE newImg
  3. SCHOOL NAME CHANGE SCHOOL SHIKSHA GROUP5-5 20-05-2026 DOWNLOAD HERE newImg
  4. SCHOOL NAME CHANGE UPDATE OF 08-05-2008 DATE 30-01-2018 DOWNLOAD HERE newImg
  5. SCHOOL NAMKARAN SCHOOL SHIKSHA GROUP 6 08-05-2008 DOWNLOAD HERE newImg
  6. SHAHID DANDATA FREEDOM FIGHTER SCHOOL NAME CHANGE 26-11-2013 DOWNLOAD HERE newImg
  7. SHAHIDO KE NAME SCHOOL NAME CHANGE 12-03-2012 DOWNLOAD HERE newImg

निष्कर्ष

राजकीय विद्यालयों के नामकरण की नियमावली का उद्देश्य विद्यालयों के नामकरण में पारदर्शिता, सम्मान एवं प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना है। विशेष रूप से शहीद सैनिकों के सम्मान में विद्यालयों का नामकरण एक संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसके लिए शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

यदि आप विद्यालय नामकरण हेतु आवेदन करना चाहते हैं, तो संबंधित जिला सैनिक कल्याण अधिकारी एवं शिक्षा विभाग से संपर्क कर आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त कर सकते हैं।

अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया

अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया : नमस्कार। शिक्षक बंधुओं, इस आर्टिकल में हम आपके लिए विद्यालय या अपने किसी भी कार्यालय में नकारा सामग्री जो आपके विद्यालय या कार्यालय की आवश्यक जगह को रूद्ध रही हैं या रोक रही है उसका निस्तारण करके आप अपने विद्यालय या कार्यालय में जगह खाली करा सकते हैं और उसका एक सदुपयोग आप कर सकते हैं।

यहाँ हमारे अनुभवी जानकार श्री के एल सेन के द्वारा नकारा सामग्री का निस्तारण किस प्रकार किया जाना चाहिए और कौन कौन से प्रपत्र या फॉर्मेट आपको संधारण करने होते है, इन सब के बारे में जानकारी हम आप तक साझा कर रहे हैं। तो चलिए जानते हैं नकारा सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया को.....

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया
Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया :-

  1. एस. आर. 05 तैयार करना (GF&AR Vol.I PART - II Rule 17 (1))
    • एस.आर. 5 में नकारा/ अनुपयोगी सामान की सूची तैयार की जाएगी।
    • एस. आर. 5 पर कार्यालयाध्यक्ष, पुस्तकालय प्रभारी / भण्डार प्रभारी के हस्ताक्षर होंगे।
    • यदि कोई प्रयोगशाला का सामान हो, ऐसी स्थिति में प्रयोगशाला प्रभारी के हस्ताक्षर होंगे। (Click here to download SR 5 )
  2. सामान को अनुपयोगी घोषित करने से पूर्व संबंधित अधिकारी उस वस्तु के उपयोग की न्यूनतम अवधि को ध्यान में रखेंगे। (जी.एफ.एण्ड ए.आर. के भाग।।) (भण्डार की वस्तुओं की न्यूनतम उपयोग की अवधि देखने के लिये यहां क्लिक करें)
  3. अनुपयोगी/अप्रचलित वस्तुओं का निरीक्षण एक समिति द्वारा किया जाएगा जिसमें वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी तथा सहायक लेखाधिकारी/लेखाकार/कनिष्ठ लेखाकार यथास्थिति होंगे। Process of disposal of unusable materials
  4. निरीक्षण / सर्वेक्षण समिति का गठन (GF&AR Vol.I PART-II Rule 18)
    • A. रू 10लाख से कम पुस्तक मूल्य की सामग्री हेतु समिति–
      • वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी
      • AO/AAO-I/AAO-II/Jr.Accountant
      • विशेषज्ञ ( सामान की प्रकृति अनुसार )
    • B. रू 10 लाख एवं अधिक पुस्तक मूल्य की सामग्री हेतु समिति-
      • वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी
      • F.A./C.A.O./Sr.AO/AO/AAO-I
      • विशेषज्ञ (सामान की प्रकृति अनुसार )
      • नोटः-
        • 1 मूल्यवान मशीनरी / उपकरण के निस्तारण हेतु विशेषज्ञ अथवा अधिकृत विक्रेता से रिपोर्ट प्राप्त की जा सकती है।
        • कम्प्यूटर से संबंधित सामग्री की स्थिति में IT Policy 2015 के प्रावधानों की पालना करना आवश्यक होगा।
          एस. आर. 5 में अंकित सामान के निरीक्षण उपरान्त उक्त समिति अपनी रिपोर्ट एस. आर. 6 में प्रस्तुत करेगी ।
  5. अनुपयोगी सामान की सर्वे रिपोर्ट प्रारूप एस.आर. 6 में तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट पर समिति के सदस्य तथा सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे। (Download SR-6)
  6. आरक्षित मूल्य का निर्धारण GF&AR Vol.I PART-II Rule 21 (iv) : आईटम की किस्म यथा अखबार, पुस्तकें, लोहे का सामान, पीतल का सामान इत्यादि के अनुसार आरक्षित मूल्य का निर्धारण किया जाएगा।
  7. 5 लाख या इससे अधिक मूल्य की वस्तुओं के मामलों में निरीक्षण के लिए बनी समिति में वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी, वित्तीय सलाहकार/लेखाधिकारी एवं तकनीकी अधिकारी, जिसे वस्तुओं का ज्ञान हो, होंगे।
  8. पुराने टाइपराईटर का निस्तारण राजकीय मुद्राणालय जयपुर द्वारा किया जायेगा। Process of disposal of unusable materials
  9. नीलामी कमेटियों का गठन जी.एफ. एण्ड ए. आर. के भाग ।। के आर.एन.(1) में दिया गया है। आरक्षित मूल्य वस्तुओं का निरीक्षण करने वाली समिति द्वारा निश्चित किया जाएगा।
  10. नीलामी में भाग लेने वाली फर्मों से बयाना राशि 2 प्रतिशत न्यूनतम 500/अधिकतम 50000/- ली जाए जिसका निर्धारण नीलामी कमेटी द्वारा किया जाएगा।
  11. अनुपयोगी घोषित करने का आदेश जारी करना (GF&AR Vol.I PART-II Rule 17) : सामान को अनुपयोगी घोषित करने हेतु अनुलग्नक 'ख' में उल्लेखित सामान की न्यूनतम उपयोगिता अवधि एवं सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम (खण्ड-1) भाग- II में उल्लेखित वित्तीय शक्तियों के प्रत्यायोजन के आईटम संख्या - 11 में प्रदत्त शक्तियों को ध्यान में रखना है।
  12. व्ययन समिति का गठन (GF&AR Vol.I PART-II Rule 22)
    • (A) रू 2 लाख तक के पुस्तक मूल्य की सामग्री हेतु समिति-
      • कार्यालयाध्यक्ष
      • AAOI/AAO-II/Jr. Accountant
      • कोषाधिकारी का प्रतिनिधि - AAO-I/AAO-II/Jr. Accountant
    • (B) रू 2 लाख से अधिक एवं 10 लाख से कम तक के पुस्तक मूल्य की सामग्री हेतु समिति—
      • कार्यालयाध्यक्ष
      • AO/AAO-I/AAO-II/Jr. Accountant
      • कोषाधिकारी का प्रतिनिधि - AO / AAOI/AAO-II/Jr. Accountant
    • (C) रू 10 लाख एवं अधिक पुस्तक मूल्य की सामग्री हेतु समिति-
      • विभागाध्यक्ष अथवा विभागाध्यक्ष द्वारा नामित वरिष्ठतम अधिकारी
      • कार्यालयाध्यक्ष
      • विभाग के वरिष्ठतम लेखाधिकारी का प्रतिनिधि जो किAAO - II से कम पदधिकारी ना हो। पुस्तक मूल्य रू 15 लाख से अधिक होने पर - AAO-II
    • (D) रद्दी कागज हेतु -
      • कार्यालयाध्यक्ष
      • AAO-I/AAO-II/Jr.Accountant
    • मोटर यान एवं भारी मशीनें और उपकरणों के लिए-
      • नियंत्रक, राज्य मोटर गैराज विभाग, राजस्थान, जयपुर - चेयरमैन
      • वित्तीय सलाहकार / मुख्य लेखाधिकारी सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थापित (सम्बन्धित प्रशासनिक विभाग द्वारा नामित ) - सदस्य
      • मोटर गैराज विभाग का लेखा संवर्ग का वरिष्ठतम अधिकारी- सदस्य
      • स्टोर इंचार्ज (तकनीकी अधिकारी) राज्य मोटर गैराज विभाग - सदस्य
        सचिव
    • जब एक मोटर वाहन अनुपयोगी घोषित कर दिए जाए और इन्हें मोटर गैराज, जयपुर में लाना साध्य / मितव्ययी नहीं है, इन्हें निम्नलिखित गठित समिति द्वारा सम्बन्धित जिले में नीलाम किया जाएगा-

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया

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  1. रुपये 50,000 तक का अनुपयोगी सामान होने पर स्थानीय अनुपयोगी सामान के व्यवसायियों (कबाड़ी) को पत्रों द्वारा सूचित कर दिया जाए तथा 7 दिन की नोटिस अवधि दी जाए। प्रतिलिपि नोटिस बोर्ड पर लगाए।
    • प्रचार कहा करना हैं -
  2. रुपये 50,000 से 2.50 लाख तक का अनुपयोगी सामान होने पर स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रसारित की जावे तथा 10 दिन की नोटिस अवधि दी जाए।
    • प्रचार कहा करना हैं -
  3. रुपये 2.50 लाख से 10 लाख तक के अनुपयोगी सामान के लिए अखिल भारतीय स्तर के समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रसारित की जाए तथा 15 दिन की नोटिस अवधि दी जाए।
    • प्रचार कहा करना हैं -
  4. 10 लाख से अधिक पर 20 दिन की नोटिस अवधि दी जाए। Process of disposal of unusable materials
    • प्रचार कहा करना हैं -
  5. ऐसे यानों का व्ययन, जिनके सुसंगत दस्तावेज नहीं है या जिनका रजिस्ट्रीकरण नहीं हो सका था, यानों के चेसिस / इंजन इत्यादि का सुसंगत दस्तावेज रखने के पश्चात् पुराने लोहे (स्क्रेप) के रूप में नीलाम की अनुमति दी जा सकेगी।
  6. अधिकतम बोलीदाता जिसके नाम बोली छोडी जाती है, से 25 प्रतिशत राशि उसी समय तथा शेष माल सुपुर्दगी के समय ली जाएगी।
  7. माल उठाने के लिए 3 से 7 दिन का समय दिया जाएगा। Process of disposal of unusable materials
  8. अन्य बोलीदाता की धरोहर राशि उसी दिन लौटा दी जाएगी। Process of disposal of unusable materials
  9. नीलामी की राशि पर प्रचलित दरों पर वेट की राशि भी ली जाएगी।
  10. निर्धारित अवधि में माल नहीं उठाने पर 25 प्रतिशत जमा राशि जब्त कर ली जाए।
  11. नीलामी से प्राप्त राशि अगले दिन राजकोष में आमद मद में वेट की राशि सेल टेक्स के हेड में जमा करवाई जाए।
  12. वाहनों को अनुपयोगी करने की शक्तियाँ (जी.एफ. एण्ड ए. आर. के भाग ।। परिशिष्ठ ’बी’) में दी गई है।
  13. नीलामी के पश्चात् विक्रय लेखा प्रारूप एस. आर.-7 में तैयार किया जाता है। (Download SR-7)

बयाना / अमानत राशि (GF&AR Vol.I PART-II Rule 24) : पुस्तक मूल्य का 2 प्रतिशत, न्यूनतम 500 /- अधिकतम 50,000/-

विक्रय लेखा एस. आर. 7 (GF&AR Vol.I PART-II Rule 23) एस. आर. 07 नीलामी के दिन तैयार किया जाएगा। इस पर व्ययन समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर होगें । कोषाधिकारी / उपकोषाधिकारी के प्रतिनिधि के अभाव में नीलामी का कार्य सम्पन्न नहीं किया जाएगा।

जी.एस.टी. सफल बोलीदाता द्वारा जमा करवाया जाएगा।

निरीक्षण/सर्वेक्षण समिति एवं व्ययन समिति में सदस्य संख्या में वृद्धि भी की जा सकती है।

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व्यय (डिस्पोजल)/विक्रय/नीलामी के लिए समिति

Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया के नियम 22, व्यय हेतु समिति में निम्नलिखित होंगे-

रद्दी कागज (वेस्ट पेपर) के अलावा अन्य वस्तुओं के लिए

  • (क) 5 लाख रुपये एवं इससे अधिक के मूल्य के सामानों के लिए।
  • (ख) 1 लाख रुपये एवं इससे अधिक किन्तु 5 लाख से कम मूल्य के सामानों के लिए
  • (ग) 30,000 रुपये से अधिक किन्तु 1 लाख से कम मूल्य के सामानों के लिए

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  • (घ) 30,000 रुपये तक के मूल्य के सामानों के लिए-

Process of disposal of unusable materials रद्दी कागज के लिए

  • (क) 30,000 रुपये से अधिक मूल्य के रद्दी कागजों के लिए-
    • (1) उप विभागाध्यक्ष/क्षेत्रीय अधिकारी जो विभागाध्यक्ष द्वारा नामित किया जाएगा, सदस्य सचिव।
    • (2) संबंधित कार्यालयाध्यक्ष, सदस्य।
    • (3) विभाग का वरिष्ठ लेखाधिकारी/लेखा अधिकारी/ सहायक लेखा अधिकारी सदस्य।
  • (ख) 10,000 रुपये से अधिक किन्तु 30,000 रुपये तक मूल्य के रद्दी कागजों के लिए-
    • (1) क्षेत्रीय अधिकारी/कार्यालयाध्यक्ष सदस्य सचिव।
    • (2) उनके विभाग का लेखाधिकारी/सहायक लेखा अधिकारी/लेखाकार सदस्य।
    • (3) कोई भी राजपत्रित अधिकारी जो क्षेत्रीय अधिकारी/कार्यालयाध्यक्ष द्वारा नामित किया गया हो, सदस्य।
  • (ग) 10,000 रुपये मूल्य तक के रद्दी कागजों के लिए-

नोट :– प्रतिवर्ष वित्त विभाग द्वारा उक्त सीमा में शिथिलीकरण किया जाता है। उस सीमा के अध्यधीन नीलामी की कार्यवाही की जाएगी। Process of disposal of unusable materials / अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया


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प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली

प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली

Age limit for admission in first class changed : प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली

Age limit for admission in first class changed : राजस्थान सरकार की ओर से नई शिक्षा नीति NEP 2020 लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। यह नई शिक्षा नीति शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से ही लागू किया जा रहा है। इसके लिए बच्चों की उम्र सीमा तय कर दी गई है। स्कूल और जन शिक्षा विभाग की ओर से सोमवार को जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार पहली कक्षा में एडमिशन के लिए बच्चे की आयु 6 साल होना जरूरी है। यह उम्र 1 सितंबर 2025 तक पूरी हो जानी चाहिए।

सभी प्राइमरी स्कूलों में 2025-26 से एक नई प्री-स्कूल क्लास भी होगी। इसका नाम 'शिशु वाटिका' रखा गया है। इसमें 5 से 6 साल के बच्चों को एडमिशन दिया जाएगा। इसके अलावा राजस्थान सरकार की ओर से NEP 2020 को कई चरणों में लागू किए जाने की योजना है। पहला चरण 2025-26 से शुरू होगा।

Age limit for admission in first class changed : प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली

NEP 2020 के अनुसार बच्चे की 3 से 18 साल की शिक्षा में बदलाव होंगे। इसे 5+3+3+4 के ढांचे में बांटा जाएगा। इसमें पांच साल की बुनियादी शिक्षा (3 से 8 साल), तीन साल की प्रारंभिक शिक्षा (8 से 11 साल), तीन साल की माध्यमिक शिक्षा (11 से 14 साल) और चार साल की उच्चतर माध्यमिक शिक्षा (14 से 18 साल) शामिल है। Age limit for admission in first class changed

Age limit for admission in first class changed : प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली

1 अक्टूबर को पूरी होनी चाहिए 6 वर्ष की आयु

राजस्थान निदेशक माध्यमिक शिक्षा आशीष मोदी तथा निदेशक प्रारंम्भिक शिक्षा सीताराम जाट ने गुरूवार (11 जुलाई) को एक संयुक्त आदेश जारी किया है. इस आदेश में बताया गया है कि राजकीय तथा गैर राजकीय स्कूलों में प्रवेश (Admission) के लिए आयु गणना की तिथि (Age Calculation Date) 1 अक्टूबर 2024 निर्धारित कर दी गई है.

शैक्षिक सत्र 2025-26 में एन्ट्री कक्षा / प्रथम कक्षा में प्रवेश हेतु आयु निर्धारण तिथि के संबंध में शैक्षिक सत्र 2025–26 से विद्यालयों में नवप्रवेश हेतु बालकों की आयु की गणना 31 जुलाई को आधार तिथि मानते हुए की जानी है। इस तिथि तक 06 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले बालक समस्त राजकीय एवं गैर सरकारी विद्यालयों में नव प्रवेश हेतु पात्र होगें ।

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इन बच्चों पर लागू नहीं होगी आयु गणना की तारीख

इस आदेश के अनुसार राजकीय विद्यालय, गैर राजकीय विद्यालय, बालवाटिका, बालवाड़ी,प्री-प्राईमरी या अन्य संस्थान जहां पर कक्षा एक से पूर्व का अध्ययन करवाया जाता हैं. ऐसी शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत बालक, बालिकाओं पर आयु गणना के लिए एक अक्टूबर 2024 की निर्धारित तिथि लागू नहीं होगी. इसी प्रकार टीसी के आधार पर प्रवेश ​लेने वाले बालक, बा​लिकाओं पर भी एक अक्टूबर 2024 की निर्धारित तिथि पर न्यूनतम आयु 6 वर्ष होने का नियम लागू नहीं होगा.

प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली Age limit for admission in first class changed
प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली Age limit for admission in first class changed

इस आदेश में यह भी बताया गया है कि जन्म तिथि द्वारा आयु की गणना कर आरटीई या गैर आरटीई के अन्तर्गत आयु के आधार पर प्रथम बार कक्षा 1 में नवीन प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर ही 1 अक्टूबर, 2024 तक न्यूनतम आयु 6 वर्ष होने का नियम लागू होगा.

कक्षा 1 में प्रवेश लेने की उपयुक्त आयु का मुद्दा भारत में लंबे समय से बहस का विषय रहा है। Age limit for admission in first class changed

  • मार्च 2022 तक 14 राज्य तथा केंद्रशासित प्रदेश ऐसे थे, जो छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश की अनुमति देते थे।
  • हालाँकि केंद्र सरकार ने हाल ही में नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में कक्षा 1 के लिये प्रवेश की न्यूनतम आयु छह वर्ष करने का आदेश दिया है।

Age limit for admission in first class changed : प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली DOWNLOAD ORDER CLICK HERE

Age limit for admission in first class changed : प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली
Age limit for admission in first class changed : प्रथम कक्षा में प्रवेश निर्धारण की उम्र सीमा बदली

NEP 2020 में कक्षा 1 में प्रवेश हेतु न्यूनतम आयु क्या है? 

  • नई नई शिक्षा नीति 3-8 वर्ष (मूलभूत चरण), 8-11 वर्ष (प्रारंभिक चरण), 11-14 वर्ष (मध्यम चरण) और 14-18 वर्ष (माध्यमिक चरण) के आयु समूहों के अनुरूप औपचारिक स्कूली शिक्षा के लिये "5+3+3+4" की रूपरेखा पर ज़ोर देती है।
    • यह प्रारंभिक बचपन की शिक्षा (जिसे 3 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये प्रीस्कूल शिक्षा के रूप में भी जाना जाता है) को औपचारिक स्कूली शिक्षा के दायरे में लाती है।
  • इसका अर्थ यह है कि तीन वर्ष की प्रारंभिक बचपन की शिक्षा पूरी करने के बाद कक्षा 1 में प्रवेश के लिये बच्चे की उम्र 6 वर्ष होनी चाहिये।

    औपचारिक शिक्षा के लिये प्रवेश आयु के विषय में शोध क्या कहता है?

    • तुलनात्मक अध्ययन में देखा गया कि न्यूज़ीलैंड में बच्चों के समूह 5 और 7 वर्ष की उम्र में औपचारिक साक्षरता पाठ शुरू करते हैं।
      • जिन बच्चों ने 5 वर्ष की उम्र में शुरुआत की, उन्होंने पढ़ने के प्रति कम सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाया और बाद में शुरू करने वालों की तुलना में पाठ की कमज़ोर समझ प्रदर्शित की।
    • प्रवेश आयु को लेकर वैश्विक परिप्रेक्ष्य Age limit for admission in first class changed:
      • पूर्वी एशिया और अधिकांश यूरोपीय देशों में प्राथमिक विद्यालय के लिये छह वर्ष मानक आयु है।
        • स्कैंडिनेवियाई देशों में औपचारिक शिक्षा सात वर्ष की आयु में शुरू होती है।

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    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

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    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

    शिक्षा विभाग में हाल ही लागू समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों को अब एकमुश्त कंपोजिट स्कूल ग्रांट मिलेगी। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक शिवांगी स्वर्णकार ने एक पत्र जारी कर दिया है।

    कम्पोजिट स्कूल ग्रांट सरकार द्वारा समर्थित शैक्षिक निधि है। जिसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है। साथ ही विभिन्न प्रकार के स्कूलों के बीच असमानताओं को कम करना है। अनुदान का उद्देश्य छात्रों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। पाठ्य सहगामी क्रियाओं का विकास करना शामिल है । इसी के साथ विद्यालयों की दैनिक भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी इसमे शामिल किया गया है ।

    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

    समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की सामान्य शैक्षिक, सह- शैक्षिक, भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति एवं पुराने उपकरणों के प्रतिस्थापन तथा विद्यालय स्वच्छता एक्शन प्लान हेतु कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिये जाने का प्रावधान है। विद्यार्थी हित में विद्यालय की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य को बढ़ावा देने के लिये पाठ्य सहगामी क्रियाओं का विकास करना एवं विद्यालयों की दैनिक/भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना है।

    यह अनुदान डाइस डाटा 2022-23 के अनुसार राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों को देय है, जो कि शिक्षा विभाग / पंचायती राज विभाग / केजीबीवी / संस्कृत शिक्षा के विद्य लयों / शिक्षाकर्मी बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालयों / समाज कल्याण विभाग के अधीन आते हैं, को जारी की जानी है।

    Latest Composite School Grant Guideline / कंपोजिट स्कूल ग्रांट 2024-25 दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र
    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

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    वित्तीय प्रावधान

    क्र. सं.विद्यालय में विद्यार्थी संख्या आधारविद्यालय को स्वीकृत राशिविद्यालय स्वच्छता पर खर्च की आजने वाली सालाना राशि
    11-15125001250
    216-100250002500
    3101-250500005000
    4250-1000750007500
    5Above 100010000010000
    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

    नोट :- 1) उपरोक्त तालिका के क्रं. सं. 1 से 5 तक की विस्तृत सूची परिशिष्ट-2 पर संलग्न है।
    2) मर्ज हुए विद्यालय एवं शून्य नामांकन वाले विद्यालयों को यह अनुदान देय नहीं होगा।


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    1. सर्वप्रथम एसएमसी / एसडीएमसी अपने विद्यालय की वार्षिक आवश्यकताओं का चिह्नीकरण करें एवं लिखित प्रस्ताव प्राप्त करें ।
    2. वर्षभर की आवश्यकताओं का वित्तीय अनुमान निर्धारित करें।
    3. एसएमसी / एसडीएमसी के 4 सदस्यों की एक क्रय समिति बनेगी, जिसमें अध्यक्ष एवं सचिव के अतिरिक्त दो अभिभावक सदस्य होंगे।
    4. क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिए ।
    5. सामग्री क्रय कर रोकड़ बही, स्टॉक रजिस्टर, बिल वाउचर्स को सुव्यवस्थित सन्धारित करें |
    6. सीएसजी राशि का उपयोग किया जाकर विद्यालयों द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र ब्लॉक कार्यालय को प्रेषित किया जायेगा। ब्लॉक कार्यालय द्वारा समेकित उपयोगिता प्रमाण-पत्र जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय को प्रेषित किया जायेगा। जिला परियोजना समन्वयक जिले का उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यू.सी.) परिषद् कार्यालय को ई-मेल आईडी smsa.asfe2021@gmail.com पर निर्धारित प्रपत्र (परिशिष्ट - 1 ) के अनुसार प्रेषित करेंगे।
    Latest Composite School Grant Guideline / कंपोजिट स्कूल ग्रांट 2024-25 दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र
    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

    कम्पोजिट स्कूल ग्राण्ट (Composite School Grant) राशि में 10 प्रतिशत राशि स्वच्छता एक्शन प्लान के लिये निर्धारित की गयी है जिसका निम्न कार्याें में उपयोग किया जा सकेगा-

    1. विद्यालय के शौचालय/मुत्रालयों की साफ सफाई व सफाई हेतु वांछित सामग्री यथा एसिड, टाॅयलेट क्लीनर आदि क्रय करने के लिये।
    2. विद्यालय के शौचालय मूत्रालयों का नियमित रख रखाव।
    3. एमडीएम से पूर्व व शौचालय उपयोग उपरान्त छात्र छात्राओं को हाथ धोने के लिये साबुन की व्यवस्था करने के लिये।
    4. शौचालय/मुत्रालय की माइनर रिपेयर करवाने के लिये।
    5. शौचालय मुत्रालय में रनिंग वाटर सुविधा या पानी की टंकी रखाने के लिये।
    6. बेकार पानी तथा सूखे कचरे के निस्तारण की व्यवस्था हेतु।
    7. कक्षा-कक्षों एवं विद्यालय परिसर में रखने के लिये कचरा पात्र क्रय/तैयार करने हेतु।
    8. बालिका शौचालय के साथ इन्सीनेटर लगाने/निर्माण करने के लिये।
    9. पेयजल स्रोत को ठीक करवाने के लिये।
    SHEKHAWATI MISSION 100 QUESTION BANK CLASS 10 2025 DOWNLAOD ALL SUBJECT FREE PDF
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    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र की राशि का उपयोग निम्न सामग्री क्रय करने / कार्य में आवश्यकतानुसार किया जा सकता है –

    • विद्यालय के अक्रियाशील उपकरणों के प्रतिस्थापन हेतु।
    • दरी पट्टी / दरी।
    • श्यामपट्ट मरम्मत एवं रंग-रोगन / ग्रीन बोर्ड / आदमकद दर्पण / कार्मिकों का फोटो युक्त विवरण ।
    • चॉक, डस्टर।
    • परीक्षा संबंधी स्टेशनरी
    • पेयजल व्यवस्था, विद्युत व्यय पंखा।
    • एक दैनिक समाचार पत्र (अनिवार्य) ।
    • प्रतियोगिताओं का आयोजन / खेल सामग्री / उपलब्धि प्रमाण पत्र मुद्रण।
    • अग्निशमन यन्त्र के सिलेण्डर में गैस भरवाने हेतु।
    • शाला स्वास्थ्य कार्यक्रम में रैफर किये गये विद्यार्थियों को अस्पताल ले जाने का किराया
    • प्रयोगशाला संबंधी उपकरणों के रखरखाव एवं मरम्मत हेतु ।
    • इन्टरनेट संबंधी कार्य ।
    • वार्षिक टूट-फूट, मरम्मत व सौंदर्यन (विद्यालय भवन, शौचालय / मूत्रालय व अन्य व्यवस्थाएं ) ।
    • शिक्षण अधिगम सामग्री में उपयोग
    • अन्य उपयोज्य सामग्री यथाः झाडू मटका, बाल्टी, मग आदि।
    • छात्र हित में अन्य आवर्ती खर्च
    • नोट:- उक्त कार्यों के अलावा अन्य कार्यों में उक्त राशि का उपयोग नहीं किया जाये। अति आवश्यक होने पर परिषद् की पूर्वानुमति से उक्त राशि में बचत होने पर अन्य कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा।

    कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट (Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र) में कम से कम 10 प्रतिशत राशि स्वच्छता एक्शन प्लान के लिए निर्धारित गई है, जिसका उपयोग निम्न कार्यों हेतु ही किया जा सकेगा:

    • विद्यालय के शौचालय / मूत्रालयों का नियमित उपयोग एंव रख-रखाव ।
    • शौचालय / मूत्रालयों की साफ-सफाई व सफाई हेतु वांछित सामग्री यथा ब्रश ऐसिड, टॉयलेट क्लीनर आदि क्रय करने के लिए।
    • विद्यार्थियों को हाथ धोने के लिए साबुन की व्यवस्था करने के लिए।
    • शौचालय / मूत्रालय की माईनर रिपेयर करवाने के लिए। शौचालय / मूत्रालय में रनिंग वाटर सुविधा या पानी की टंकी रखवाने के लिए।
    • बेकार पानी तथा सूखे कचरे के निस्तारण की व्यवस्था हेतु ।
    • कक्षा-कक्षों एवं विद्यालय परिसर में रखने के लिए कचरा पात्र क्रय / तैयार करने हेतु।
    • बालिका शौचालय के साथ डिसपेंसर एवं इन्सीनरेटर रिपेयर के लिए।
    • पेयजल स्त्रोत को रिपेयर कराने के लिए।
    • कोविड-19 को ध्यान में रखते हुये सैनेटाईजर, साबुन क्रय ।
    • परिषद कार्यालय आदेश क्रमांक रास्कूशिप / जय / वैशि / 2020-21 / 12925 दिनांक 13.07.2020 के अनुसार कोविड-19 के बचाव हेतु सुरक्षा एवं स्वच्छता पर राशि व्यय करना सुनिश्चित करें।

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    • सर्वप्रथम एसएमसी / एसडीएमसी अपने विद्यालय की वार्षिक आवश्यकताओं का चिह्नीकरण करें एवं लिखित प्रस्ताव प्राप्त करें।
    • वर्षभर की आवश्यकताओं का वित्तीय अनुमान निर्धारित करें।
    • एसएमसी / एसडीएमसी के 4 सदस्यों की एक क्रय समिति बनेगी जिसमें अध्यक्ष एवं सचिव के अतिरिक्त दो अभिभावक सदस्य होंगे।
    • क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिए।
    • सामग्री क्रय कर रोकड़ बही, स्टॉक रजिस्टर, बिल वाउचर्स को सुव्यवस्थित संधारित करें। 6. सीएसजी राशि का उपयोग किया जाकर विद्यालयों द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र ब्लॉक कार्यालय को प्रेषित किया जायेगा। ब्लॉक कार्यालय द्वारा समेकित उपयोगिता प्रमाण-पत्र जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय को प्रेषित किया जायेगा। जिला परियोजना समन्वयक जिले का उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यू. सी.) परिषद् कार्यालय को ई-मेल आईडी rajsmsa.asfe@rajasthan.gov.in पर निर्धारित प्रपत्र (परिशिष्ट-1 ) के अनुसार प्रेषित करेंगे।
    • फर्नीचर क्रय हेतु (छात्र / प्राधानाध्यापक कक्ष / स्टाफ रूम फर्नीचर क्रय नहीं किया जाये ।
    • जलपान आदि पर।
    • उत्सव मनाना अथवा उत्सव आयोजन के फोटो खिंचवाना।

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    Latest Composite School Grant Guideline कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट दिशा-निर्देश सत्र 2024-25 एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

    • कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट से क्रय की जाने वाली सामग्री क्रय में राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम 2012 एवं नियम 2013″ की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जावें।
    • सामग्री क्रय करते समय राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद्, जयपुर के दिशा निर्देशों की पालना करते हुये विद्यार्थी हित एवं विद्यार्थी आवश्यकता को प्राथमिकता दी जावे।
    • क्रय की गई सामग्री का उचित रखरखाव करते हुये, वर्ष पर्यन्त उपयोग सुनिश्चित किया जाये।
    • विद्यालय अवलोकनकर्ता अधिकारी अवलोकन के दौरान कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट के सार्थक भी अवलोकन करें एवं प्रतिवेदन में इसका उल्लेख करें।
    • आईसीटी लैब को प्राथमिकता से क्रियाशील बनाना।
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    राज० स्कूल शिक्षा परिषद से राशि प्राप्त होने के 10 (दस) दिवस में राशि का हस्तान्तरण करवाना सुनिश्चित करें एवं विद्यालय स्तर तक की पहुंच सुनिश्चित करने हेतु व्यक्तिश: मॉनीटरिंग करें। विलम्ब की स्थिति में परिषद कार्यालय अथवा निदेशालय स्तर से की जाने वाली कार्यवाही के लिये सम्बन्धित अधिकारी जिम्मेदार रहेंगे।

    • राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद से कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट की प्राप्त राशि को नामांकन अनुसार विद्यालयों को हस्तान्तरित करना।
    • विद्यालयों को जारी की गयी राशि एवं दिनांक से विद्यालयों को अवगत करवाना ताकि संस्था प्रधान द्वारा का उपयोग यथा समय किया जा सके ।
    • कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट की राशि का विद्यालय स्तर पर छात्र हित में उपयोग करवाया जाना सुनिश्चित करना।
    • पीईईओ / यूसीईईओ से वित्तीय वर्ष 2021-22 का उपयोगिता प्रमाण पत्र सीबीईओ के माध्यम से प्राप्त करना।
    • जिले का वित्तीय वर्ष 2021-22 का कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट का उपयोगिता प्रमाण पत्र राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद को प्रेषित करना ।
    • जिला कार्यालय से प्राप्त राशि को दस दिवस में ब्लॉक के समस्त विद्यालय की एसएमसी / एसडीएमसी को हस्तान्तरित करना। विलम्ब की स्थिति में परिषद कार्यालय अथवा निदेशालय स्तर से की जाने वाली कार्यवाही के लिये सम्बन्धित अधिकारी जिम्मेदार रहेंगे।
    • वित्तीय वर्ष 2021-22 में कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट की राशि का विद्यालय स्तर पर छात्र हित में समस्त राशि का उपयोग करवाया जाना सुनिश्चित करना।
    • विद्यालय स्तर पर राशि के उपयोग की मॉनीटरिंग करना।
    • ब्लॉक के समस्त पीईईओ / यूसीईईओ से वित्तीय वर्ष 2021-22 की सम्पूर्ण राशि के उपयोग का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय को प्रेषित करना।
    • अधीनस्थ विद्यालयों द्वारा कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट राशि का दिशा-निर्देशों अनुसार विद्यार्थी हित में उपयोग किया जाना सुनिश्चित करना।
    • वित्तीय वर्ष 2021-22 पीईईओ विद्यालय एवं यूसीईईओ के अधीनस्थ विद्यालयों से कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट की सम्पूर्ण राशि के उपयोग का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर सीबीईओ कार्यालय को प्रेषित करना।
    • सीबीईओ कार्यालय द्वारा विद्यालयों को जारी राशि के उपयोग की सतत् मॉनीटरिंग करना।
    • विद्यालय की एसडीएमसी / एसएमसी से विद्यालय की सुविधाओं के लिए आवश्यकताओं का चिन्हिकरण कर लिखित में प्रस्ताव प्राप्त करना एवं वर्षभर की आवश्यकताओं का वित्तीय अनुमान निर्धारित करना ।
    • एसडीएमसी / एसएमसी के 4 सदस्यों की क्रय समिति बनाना। इसमें अध्यक्ष एवं सचिव के अतिरिक्त 2 अभिभावक सदस्य हो तथा क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ता उच्च स्तर की होना सुनिश्चित करना।
    • सामग्री क्रय कर रोकड बही स्टॉक रजिस्टर, बिल वाउचर को सुव्यवस्थित संधारित करना। 4. वित्तीय वर्ष के अंत में कम्पोजिट स्कूल ग्रान्ट की समस्त राशि के उपयोग का उपयोगिता प्रमाण-पत्र पीईईओ / यूसीईईओ कार्यालय को प्रेषित करना।

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    1. इस मद में निर्धारित बजट सीमा से अधिक व्यय नहीं किया जाये । निर्धारित सीमा से अधिक व्यय किये जाने पर संबंधित के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाकर वसूली की जाएगी। क्रय हेतु वित्तीय नियमों का ध्यान रखा जाये ।
    2. किये गये व्यय का निर्धारित समयावधि में उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया जाकर समायोजन सुनिश्चित करवाया जाये ।
    3. राशि का उपयोग गतिविधि व शिक्षा मंत्रालय के दिशा निर्देशानुसार एवं वित्तीय नियमों की पूर्ण पालना करते हुये विहित प्रक्रियानुसार किया जाना सुनिश्चित करें ।
    4. क्रय की जाने वाली सामग्री में "राजस्थान लोक उपापन में पादरर्शिता अधिनियम 2012 एवं नियम 2013" की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जाये ।
    Latest Composite School Grant Guideline / कंपोजिट स्कूल ग्रांट 2024-25 दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र
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    गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    Process of recognition to private schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया : इस आर्टिकल में हमने गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिए जाने की संपूर्ण प्रक्रिया और उससे दिशानिर्देश के बारे में विस्तार से लिखा है। इस आर्टिकल में आप जानेगे कि एक गैर सरकारी विद्यालय को मान्यता लेने के लिए किन किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। किस प्रकार कमेटी का गठन करना होता है? साथ ही कौन कौन से मापदंड हैं जिन्हें हमें पूर्ण करना आवश्यक होता है?

    साथ ही आप ये भी जानेगे कि ऑनलाइन आवेदन करते समय किस प्रक्रिया को हमें फॉलो करना है और कौन कौन से डॉक्यूमेंट हमें अपने पास अप टू डेट रखने है और कौन से डॉक्यूमेंट है जो पोर्टल के ऊपर अपलोड होंगे। Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1989 एवं राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था (मान्यता, सहायता अनुदान और सेवा शर्ते आदि) नियम, 1993 में विभिन्न स्तर की गैर सरकारी शैक्षिक संस्थाओं को मान्यता देने का प्रावधान है। राज्य में इन अधिनियम एवं नियमों के अन्तर्गत प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर की 37 हजार से अधिक संस्थाऐं संचालित है। इन संस्थाओं का राज्य में शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन संस्थाओं की अनुभूत कठिनाइयों तथा विभाग की आवश्यकताओं को देख हुए समय-समय पर अधिनियम एवं नियमों के दायरे में अनेक अधिसूचनाओं में संशोधन, नई आज्ञा एवं नए आदेश जारी किए गए हैं।

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    गैर सरकारी शैक्षिक संस्थाओं की सुविधा तथा विभागीय कार्यालयों के कार्य को सुगम एवं पारदर्शी बनाने की दृष्टि से शैक्षिक सत्र 2016-17 से समस्त प्रकार की मान्यताओं को ऑनलाइन किया गया है। शैक्षिक सत्र 2020-21 में ऑनलाइन मान्यता हेतु शैक्षिक संस्थाओं एवं विभागीय कार्यालयों के करणीय कार्यों के सम्बन्ध में राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1989 एवं नियम, 1993 तथा समय-समय पर जारी अधिसूचनाओं / आदेश / परिपत्रों के आधार पर तैयार कर विस्तृत दिशा निर्देश प्रसारित किए जा रहे हैं।

    यदि इन दिशा निर्देशों में और मूल अधिनियम / नियम / अधिसूचना / आदेश / परिपत्रों में कोई विसंगति पायी जाए तो मूल अधिनियम / नियम / अधिसूचना / आदेश / परिपत्र ही मान्य होंगे।

    1.. आवेदन करना राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1999 एवं नियम, 1993 के प्रावधानानुसार गैर सरकारी शैक्षिक संस्थाओं को किसी भी प्रकार की मान्यता (नवीन मान्यता, क्रमोन्नति माध्यम परिवर्तन, नाम परिवर्तन, स्थान परिवर्तन, वर्ग परिवर्तन सोसायटी परिवर्तन, अतिरिक्त माध्यम, अतिरिक्त विषय दो पारी विद्यालय संचालन इत्यादि) के लिए ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा। यह आवेदन राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के प्राइवेट स्कूल पोर्टल (www.rajpsp.nic.in) पर करना होगा।

    2. नवीन मान्यता, कमोन्नति एवं अन्य मान्यताओं हेतु पात्रता कोई भी गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था प्राथमिक ( कक्षा 1-5 तक) अथवा उच्च प्राथमिक (कक्षा 1-8 तक) स्तर की नवीन मान्यता हेतु आवेदन कर सकती है, प्राथमिक से उच्च प्राथमिक, उच्च प्राथमिक से माध्यमिक एवं माध्यमिक से उच्च माध्यमिक स्तर की कमोन्नति हेतु आवेदन कर सकती है तथा माध्यम परिवर्तन, स्थान परिवर्तन, नाम परिवर्तन, अतिरिक्त माध्यम, अतिरिक्त विषय माध्यम परिवर्तन सोसायटी परिवर्तन, दो पारी विद्यालय संचालन इत्यादि के लिए आवेदन कर सकती   है, Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    इन समस्त प्रकार की मान्यताओं के लिए पात्रता की न्यूनतम शर्ते निम्नानुसार हैं

     2.1. आधारभूत संरचना एवं आवश्यक सुविधाऐं: विभिन्न प्रकार की मान्यताओं हेतु आधारभूत संरचना एवं आवश्यक सुविधायें संलग्न परिशिष्ट 3 के अनुसार होगी।

    2.2  शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीवृन्द : विभिन्न प्रकार की मान्यताओं हेतु शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीवृन्द संलग्न परिशिष्ट-4 के अनुसार होंगे।

    2.3  सोसाइटी / ट्रस्ट का पंजीकरण : संस्था की मान्यता के लिए आवेदन करने वाली सोसाइटी / ट्रस्ट का पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण के प्रमाण पत्र को स्कैन करके अपलोड करना होगा।

    2.4 सोसाइटी / ट्रस्ट के उद्देश्यों में शैक्षिक संस्था खोलने का उद्देश्य :- संस्था की मान्यता के लिए आवेदन करने वाली सोसाइटी / ट्रस्ट के उद्देश्यों में शैक्षिक संस्था खोलने का उद्देश्य होना आवश्यक है। सोसाइटी / ट्रस्ट के उद्देश्यों को स्केन करके अपलोड करना होगा।

    2.5 शुल्क :- समस्त प्रकार के आवेदन शुल्क ऑनलाइन ई-ग्रास पोर्टल के माध्यम से जमा कराने होंगे तथा आरक्षित कोष की राशि का डीडी सचिव बालिका शिक्षा फाउण्डेशन, जयपुर के नाम से बनेगा। मान्यता आवेदन शुल्क की राशि आवेदन पत्र के साथ ही देनी होगी तथा आरक्षित कोष की राशि का डी.डी. तथा फिक्सड डिपोजिट की गयी राशि का विवरण आवेदन पत्र की जाँच एवं भौतिक सत्यापन के पश्चात् संस्था के मान्यता के योग्य पाए जाने की स्थिति में ही देना होगा। इसके लिए सम्बन्धित जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदनकर्ता को समय पर सूचित किया जाएगा। समस्त प्रकार के शुल्क प्राप्त होने पर ही मान्यता जारी की जायेगी। समस्त प्रकार का आवेदन शुल्क अदेय (Non Refundable) रहेगा ।

    2.6 शपथ पत्र– सोसाइटी द्वारा विद्यालय से सम्बंधित दी जा रही प्रमुख सूचनाओं को 100 रूपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा प्रमाणित करवाकर शपथ पत्र के रूप में प्रस्तुत करना होगा।

    2.7 विद्यालयों को दी जाने वाली छूट:- गैर सरकारी विद्यालयों को भूमि रूपान्तरण एवं अन्य छूट दिये जाने के लिये राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश क्रमांक प9 (2) शिक्षा-5 / 2010 पार्ट0 3.07.2012, 2007 2012, 14.08.2012 06.05.2013, 31.05.13 एवं आदेश क्रमांक प.9 (1) शिक्षा – 5 / भूमि रूपान्तरण / 2016 जयपुर दिनांक 04.01.2017 द्वारा प्रदत्त छूट / शिथिलन नव कमोन्नत विद्यालयों हेतु लागू नहीं रहेगी।

    2.8 विद्यालयों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में लागू भूमि सम्बन्धित नवीन / संशोधित अनिवार्यता:- गैर सरकारी विद्यालयों को ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की अनिवार्यता में शिथिलन प्रदान किये जाने हेतु राज्य सरकार स्तर से सक्षम स्वीकृति उपरान्त जारी आदेश क्रमांक प.9 (6) शिक्षा-5 / आनलाइन मान्यता / 2020-21 जयपुर दिनांक 23.07.2020 के तहत् ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के माप की अनिवार्यता को पूर्व में प्रभावी 5000 वर्गमीटर से संशोधित कर 4000 वर्गमीटर वर्तमान सत्र से प्रभावी कर दिया गया हैं।

    2.9 किसी भी प्रकार के आवेदन / परिवर्तन के लिए औचित्य सहित प्रबंध कार्यकारिणी का प्रस्ताव आवश्यक होगा।

    2.10 किराये के भवन को रजिस्टर्ड किरायानामा प्रस्तुत करने पर भवन परिवर्तन की स्वीकृति दी जाएगी।

    2.11 विद्यालय के स्थान परिवर्तन किये जाने पर आरटीई के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए विद्यालय को स्वयं के स्तर पर विद्यार्थियों के लिये नये विद्यालय भवन तक आवागमन की निःशुल्क व्यवस्था करनी होगी।

    2.12 दो पारी में वर्तमान में संचालित शिक्षण संस्थाओं को 03 माह की अवधि (विज्ञप्ति जारी होने की दिनाक से)में निर्धारित शुल्क (प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक के लिए 1,00,000 रूपये एवं माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक के लिए 3,00,000 रुपये) जमा करवाये जाकर स्वीकृति प्राप्त करनी है। विलम्ब करने की स्थिति में 10,000 रूपये प्रति 30 दिवस पर शास्ति वसूल की जाएगी।

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    3.1. विद्यालय का पंजीयन एवं पासवर्ड प्राप्त करना – सभी प्रकार की मान्यताओं हेतु आवेदन राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के प्राइवेट स्कूल पोर्टल (www.rajpsp.nic.in) पर करना होगा। सर्वप्रथम गैर सरकारी विद्यालय को पोर्टल पर पंजीयन करना होगा जिसके लिए आवश्यक सूचनाएँ प्रविष्ट करने के बाद मोबाइल पर पीएसपी. कोड एवं पासवर्ड प्राप्त होगा। पंजीयन के बाद विद्यालय स्वयं का पासवर्ड बदल सकेंगे जो भविष्य में लॉगिन करने हेतु आवश्यक होगा। जिन गैर सरकारी विद्यालयों के पास इस पोर्टल पर लॉगिन करने हेतु पहले से ही पीएसपी कोड एवं पासवर्ड उपलब्ध है, वे विद्यालय मान्यता हेतु भी उसी पासवर्ड से लॉगिन करें इन विद्यालयों को नवीन पंजीयन नहीं करना है।

    3.2 विद्यालय सम्बन्धी सूचनाओं की ऑनलाइन प्रविष्टि – लॉगिन करने के बाद विद्यालय अपनी आधारभूत संरचना, आवश्यक सुविधाऐं एवं कर्मचारियों सम्बन्धी सभी आवश्यक सूचनाओं की ऑनलाइन प्रविष्टि करेंगे। इस कार्य में सुविधा के लिए विद्यालय, पोर्टल पर उपलब्ध आवेदन के प्रारूप पहले से ही भर कर तैयार रखे। समस्त सूचनाओं की पूर्ण एवं सही प्रविष्टि की स्थिति में ही इन्हें लॉक करें।

    3.3 विद्यालय सम्बन्धी दस्तावेजों को अपलोड करना – मान्यता के सम्बन्ध में आवश्यक समस्त दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करना है। (अपलोड किये जाने वाले दस्तावेजों की सूची परिशिष्ट-7)। जिन दस्तावेजों को अपलोड किया जाना है, उनको पहले से ही स्केन कर के पैन ड्राइव में तैयार रखें। अपलोड किए जाने वाले समस्त दस्तावेजों का पूर्ण पठनीय होना आवश्यक है। दस्तावेज पीडीएफ / जेपीजी फॉर्मेट में होना तथा प्रत्येक दस्तावेज एक एमबी से कम साइज का होना आवश्यक है।

    3.4 आवेदन हेतु आवश्यक शुल्क को जमा करवाना – विभिन्न प्रकार की मान्यता के लिए शुल्क की राशि भी अलग-अलग है, अतः इस राशि की ठीक से गणना कर लें तथा उसके अनुसार ही समस्त प्रकार के आवेदन शुल्क ई-ग्रास पोर्टल के माध्यम से जमा कराने होंगे। मान्यता आवेदन शुल्क की राशि ई-ग्रास पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा होगी एवं आरक्षित कोष की राशि के डिमाण्ड अलग से जमा होगी। ड्राफ्ट

    3.5 आवेदन की हार्ड कॉपी तैयार करना – समस्त सूचनाओं की पूर्ण एवं सही प्रविष्टि के बाद ई-ग्रास के माध्यम शुल्क जमा करवाने एवं चालान की प्रति प्राप्त हो जाने के उपरान्त ही आवेदन को लॉक करें तथा इसका प्रिंटआउट ले लें। आवेदन के प्रिंटआउट पर विद्यालय संचालन समिति के सचिव के हस्ताक्षर एवं मोहर लगावें। आवेदन के साथ आवश्यक समस्त दस्तावेज (संलग्न किये जाने वाले दस्तावेजों की सूची परिशिष्ट-8) संलग्न करें तथा विद्यालय के 5 फोटो जो अपलोड किये गये है, भी लगावें। पूर्ण आवेदन पत्र तैयार कर विद्यालय में सुरक्षित रखें। उक्त हार्ड कॉपी मय संलग्न पत्रावली निरीक्षण हेतु उपस्थित होने वाले जाँच दल के प्रभारी को विद्यालय निरीक्षण के समय संस्था

    3.6 द्वारा उपलब्ध करवाया जाना सुनिश्चित करें। प्राथमिक या उच्च प्राथमिक स्तर की नवीन मान्यता / कमोन्नति / नाम / स्थान / वर्ग / माध्यम परिवर्तन / अतिरिक्त माध्यम आदि के आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक शिक्षा मुख्यालय को प्रेषित किये जाएंगे।

    3.7 जो विद्यालय पहले से ही मान्यता प्राप्त हैं वे विद्यालय किसी भी स्तर के नाम / स्थान / माध्यम / वर्ग परिवर्तन / माध्यम / संकाय / विषय / उच्च प्राथमिक माध्यमिक / माध्यमिक उच्च माध्यमिक स्तर की कमोन्नति हेतु अपने आवेदन संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय को ऑनलाईन प्रेषित करेंगे।

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    आवेदन पत्रों को कार्यालय में प्राप्त करना एवं ऑन लाइन जॉच करना

    4.1 संस्था द्वारा किये गये ऑनलाइन आवेदन की पत्रावली को कार्यालय में प्राप्त करते समय पत्रावली में उपलब्ध ऑनलाइन आवेदन पत्र की प्रविष्टियों एवं आवेदन में वर्णित एवं संलग्न किये गये दस्तावेजों का ठीक से मिलान कर लें।

    4.2 आवेदन पत्रों की जाँच का कार्य ऑनलाइन तरीके से किया जाना है। यह जॉच संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के लॉगइन में उपलब्ध विद्यालय के ऑनलाइन आवेदन पत्रावली के माध्यम से की जायेगी।

    4.3 सर्वप्रथम विद्यालय द्वारा दी गई मान्यता आवेदन शुल्क की राशि का मिलान करना है। ये जाँच लें आवेदन शुल्क की जितनी राशि आवेदन पत्र में अंकित है, उतनी राशि ई-ग्रास के माध्यम से विद्यालय द्वारा जमा करवा दी गई है। एक से अधिक आवेदन होने की स्थिति में यह सुनिश्चित कर लें कि आवेदन पत्र में सभी प्रकार के निर्धारित शुल्क ई-ग्रास के माध्यम से जमा करवा दिये गए हैं।

    4.4 विद्यालय टीएसपी अथवा नॉन टीएसपी एरिया में है, इसकी भी जाँच कर लें तथा यह सुनिश्चित कर लें कि मान्यता शुल्क की राशि इस विवरण के अनुसार सही है।

    4.5 मान्यता आवेदन शुल्क की जाँच करने के पश्चात् ऑन लाइन आवेदन के समय संस्था द्वारा अपलोड किये गये दस्तावेजों का मिलान किया जाना है। ऑनलाइन अपलोड किये गये दस्तावेजों को खोलकर देख लें तथा यह सुनिश्चित कर लें कि सही दस्तावेज ही अपलोड किये गये हैं।

    4.6. मान्यता आवेदन शुल्क की राशि के ई-ग्रास सबंधी अपूर्ण प्रविष्टियों अथवा सही राशि का ई-ग्रास में जमा शुल्क राशि से मिलान नहीं होने अथवा किसी दस्तावेज के अपलोड न होने अथवा अपूर्ण होने की स्थिति में उसके सामने सही नहीं पाया गया का विकल्प चयन करें। इस विकल्प का चयन करते ही इस विद्यालय के ऑनलाइन आवेदन में मान्यता आवेदन शुल्क विवरण एवं दस्तावेजों के अपलोड करने संबंधी क्षेत्र अनलॉक हो जाएंगे तथा इसकी सूचना विद्यालय के लॉगइन में प्रदर्शित हो जाएगी।

    4.7 विद्यालय की सूचना अनलॉक होने के बाद आगामी पाँच कार्य दिवसों में विद्यालय को अपनी ऑनलाइन आक्षेप पूर्ति पूर्ण कर आवेदन को ऑनलाईन पुन लॉक करना है जिसकी सूचना सम्बंधित जिशिअ के लॉगइन में प्रदर्शित हो जाएगी। संस्था द्वारा प्रिंट आउट एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में निर्धारित अवधि में जमा कराने होंगे जिससे विद्यालय की पत्रावली पूर्ण हो सके। निर्धारित अवधि में संस्था द्वारा आवेदन लॉक एवं पत्रावली सम्बंधित जिशिअ कार्यालय में जमा नहीं करवाये जाने की स्थिति में विद्यालय का आवेदन स्वतः ही निरस्त माना जाएगा, जिसके लिए आवेदक विद्यालय स्वयं उत्तरदायी रहेगा।

    4.8 आक्षेप पूर्ति के लिये अनलॉक किये गये आवेदन एवं अपलोड किये जाने वाले दस्तावेजों की हॉर्डकॉपी को ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि के बाद की तिथियों के उपरान्त भी स्वीकार किये जाएंगे। एक बार आक्षेप लगने के बाद निर्धारित अवधि में आक्षेप पूर्ति नहीं होने की स्थिति में आवेदन को अपूर्ण मानकर निरस्त कर दिया जाएगा तथा इसकी सूचना संस्था को पोर्टल पर दे दी जाएगी।

    4.9 जिन विद्यालयों की मान्यता शुल्क एवं अपलोड किये गए दस्तावेजों की प्रविष्टियों सही पायी जाती हैं, उन विद्यालयों के लिये आवेदन पत्र के साथ संलग्न किये गये दस्तावेजों एवं आवेदन पत्र की अन्य प्रविष्टियों की ऑनलाइन जाँच की जा सकेगी।

    4.10 आवेदन पत्र के साथ संलग्न किये गये दस्तावेजों में किसी दस्तावेज के संलग्न नहीं होने या अपूर्ण पाये जाने पर आक्षेप की सूचना विद्यालय को पोर्टल पर विद्यालय लॉगइन में प्रदर्शित होगी। विद्यालय भौतिक निरीक्षण के समय ऑनलाईन आवेदन की हार्ड कॉपी एवं समस्त वाछित दस्तावेजों की 02 प्रतियों में पत्रावली तैयार कर एक पत्रावली निरीक्षण दल को उपलब्ध करवानी होगी तथा एक पत्रावली विद्यालय द्वारा स्वयं के रिकॉर्ड सधारण हेतु सुरक्षित रखी जाएगी, विद्यालय द्वारा निरीक्षण दल को उपलब्ध करवायी जाने वाली पत्रावली को मय निरीक्षण रिपोर्ट (हॉर्डकॉपी) दल प्रभारी द्वारा 02 दिवस की अवधि में सम्बंधित जिशिअ कार्यालय में जमा करवानी होगी।

    4.11 गैर सरकारी विद्यालयों के आवेदन प्रक्रिया में सम्पर्ण पारदर्शिता एवं आवेदक विद्यालय को सूचना हेतु निम्नानुसार कार्यवाही की जाएगी : निरीक्षण दल गठन की सूचना आक्षेपित प्रकरणों की सूचना निदेशालय द्वारा मान्यता / क्रमोन्नति हेतु अनुमोदन / निरस्त जारी करना, जिशिअ के द्वारा मान्यता प्रमाण पत्र 07 दिवस में जारी करने की सूचना विद्यालय के लॉगईन में प्रदर्शित होगी तथा मान्यता के लिये अपात्र पायी गयी संस्थाओं को जिशिअ द्वारा 07 दिवस की अवधि के भीतर जरिये रजिस्टर्ड पत्र प्रेषित कर सूचित किया जाएगा।

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    5 विद्यालयों के निरीक्षण हेतु दलों का ऑनलाइन गठन :–

    5.1 संस्था द्वारा आवेदन पत्र में दी गई समस्त सूचनाओं का भौतिक सत्यापन एक दल द्वारा किया जाएगा जिसका गठन ऑनलाइन तरीके से किया जाएगा, जिसकी सूचना भौतिक सत्यापन से पूर्व विद्यालय के लॉगईन में प्रदर्शित होगी।

    5.2. विद्यालय द्वारा ऑनलाईन आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण कर लेने के पश्चात् ई-ग्रास के मार्फत निर्धारित शुल्क जमा करवा देने की स्थिति में स्वतः ही ऑनलाईन प्रक्रिया के माध्यम से भौतिक निरीक्षण हेतु दल गठन का कार्य सम्पन्न हो जाएगा। जिसकी सूचना विद्यालय के लॉगइन में प्रदर्शित होगी। निरीक्षण दल के प्रभारी को एस.एम.एस के द्वारा विद्यालय निरीक्षण की सूचना स्वतः ही उपलब्ध होगी।

    5.3 निरीक्षण दल के प्रभारी को शालादर्पण के स्टॉफ लॉगइन में जाकर गठित दल के 02 अन्य सदस्यों से समन्वय स्थापित कर मॉड्यूल में उपलब्ध निरीक्षण प्रतिवेदन की प्रति को डाउनलोड कर विद्यालय में उपस्थित होकर भौतिक सत्यापन करने के उपरान्त निरीक्षण प्रतिवेदन के बिन्दुओं की पूर्ति कर लेने के पश्चात् दल प्रभारी के शाला दर्पण में उपलब्ध स्टॉफ लॉगइन में जाकर निरीक्षण प्रतिवेदन को अनुशंसा सहित अपलोड (07 दिवस) करना है। सम्बंधित विद्यालय से आवेदन प्रपत्र शुल्क की चालान की प्रति एवं समस्त वांछित दस्तावेजों की भौतिक प्रति प्राप्त कर आगामी 02 दिवस में सम्बंधित जिशिअ कार्यालय में जमा करवाया जाना सुनिश्चित करना

    5.4 निरीक्षण दल के प्रभारी को उपलब्ध करवाये गये 02 कार्मिकों को उचित कारण (जिशिअ को कारण की प्रति निरीक्षण रिपोर्ट के साथ जमा करवानी है ) होने पर स्वयं प्रभारी द्वारा परिवर्तित करने की सुविधा स्टॉफ लॉगईन में उपलब्ध है। दल प्रभारी / समस्त दल के कार्मिकों को बदलने हेतु जिशिअ के माध्यम से निदेशालय को प्रार्थना पत्र अग्रेषित किया जाना है।

    5.5 प्रारम्भिक शिक्षा के विद्यालयों के सत्यापन हेतु गठित दल में कुल दो सदस्य होंगे जिनमें से दल के अध्यक्ष के रूप में / अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्राशि / माशि कार्यालय जिशिअ मुख्यालय / अतिरिक्त ब्लॉक शिक्ष अधिकारी प्रथम / द्वितीय / प्रधानाध्यापक माध्यमिक विद्यालय / व्याख्याता को लगाया जाएगा तथा दल के सदस्य के रूप में प्रधानाध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय को लगाया जाएगा।

    5.6 गैर सरकारी विद्यालयों के सत्यापन हेतु गठित दल में कुल 03 सदस्य होंगे जिनमें से दल के अध्यक्ष के रूप में प्रधानाचार्य उमावि / अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्राशि / माशि कार्यालय जिशिअ मुख्यालय / समकक्ष अधिकारी एवं दल के प्रथम सदस्य के रूप में व्याख्याता / प्रधानाध्यापक मावि / समकक्ष अधिकारी एवं दल के द्वितीय सदस्य के रूप में एक लेखा संबंधित कार्मिक / मंत्रालयिक कर्मचारी लगाया जाएगा।

    5.7 एक दल द्वारा अधिकतम दो गैर सरकारी विद्यालयों का सत्यापन किया जाएगा।


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    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    6.1 सत्यापन दलों को ऑनलाइन निरीक्षण आदेश के 7 दिवस या निरीक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अतिम तिथि, जो भी पहले हो तक अनिवार्य रूप से निरीक्षण करना है। सत्यापन के बाद अगले 102 दिवस में सत्यापन रिपोर्ट संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय कार्यालय में जमा करानी होगी। निर्धारित तिथि तक निरीक्षण प्रपत्र जमा नहीं कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

    6.2 निरीक्षण दलों को सामान्यतः बदला नहीं जायेगा। केवल निरीक्षण दल के सदस्यों की मृत्यु, स्थानान्तरण, पदोन्नति पर अन्यत्र कार्यग्रहण अथवा गंभीर बीमारी के कारण कार्य करने में असमर्थता की स्थिति में ही निरीक्षण दल बदला जा सकेगा। इसकी सूचना जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निदेशालय को दी जाएगी तथा निदेशालय द्वारा तथ्यों से संतुष्ट होने की स्थिति में नये निरीक्षण दल का गठन ऑन लाइन तरीके से करना होगा।

    6.3 निरीक्षण कर्ताओं द्वारा निर्धारित अवधि में आवंटित विद्यालयों का निरीक्षण कर निरीक्षण रिपोर्ट संबंधित कार्यालय में जमा करानी होगी।

    6.4 विद्यालय द्वारा दी गई समस्त सूचनाओं तथा संलग्न दस्तावेजों के आधार तथ्यों का सत्यापन करना है। सत्यापन दल को सत्यापित तथ्यों एवं निर्धारित मापदण्डों के आधार पर मान्यता के संबंध में स्पष्ट अनिशेषा करनी होगी।

    6.5 सत्यापन दलों से प्राप्त रिपोर्ट को निरीक्षण दल प्रभारी द्वारा तत्काल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा एवं हॉर्डकॉपी मय पत्रावली सम्बंधित जिशिअ कार्यालय में 02 दिवस की अवधि की में जमा करवाना है।

    6.6 सत्यापन दल द्वारा सत्यापित / दी गई सूचनाओं के संबंध में कोई विसंगति या भिन्न स्थिति पायी जाती है तो सत्यापन दल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    1. मान्यता का निदेशालय / राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करना:

    7.1 निरीक्षण के उपरान्त प्राप्त प्रतिवेदनों का जिला शिक्षा अधिकारी भली-भांति अध्ययन कर लें। प्रतिवेदन में दिए गए तथ्यों से पूर्ण रूप से सन्तुष्ट होने पर ऑनलाईन प्रविष्टि कर दें तथा अपना अभिमत भी दर्ज कर दें।

    7.2. मान्यता के जो आवेदन पत्र अनुमोदन हेतु निदेशालय भिजवाए जाने हैं उन विद्यालयों की सूचना ऑनलाइन दर्ज कर दें तथा पत्रावलियों को तत्काल निदेशालय प्रेषित कर दें।

    7.3. निदेशालय द्वारा अनुमोदन हेतु प्राप्त पत्रावलियों की सूचना ऑनलाइन दर्ज की जाएगी तथा जिन पत्रावलियों पर अनुमोदन दिया जाएगा उनकी सूचना भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

    7.4\ यदि किसी विद्यालय के मान्यता आवेदन में एक से अधिक विकल्पों का चयन किया गया है तो राज्य सरकार से अनुमोदनोपरान्त शेष विकल्पों का अनुमोदन निदेशालय द्वारा किया जाएगा तथा प्रकरण संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को भिजवा दिया जाएगा।

    अध्याय 6 ( A ) मान्यता प्रमाण-पत्र / निरस्ति प्रमाण पत्र जारी करना

    8.1 जिन प्रतिवेदनों में निरीक्षण दल द्वारा मान्यता दिये जाने हेतु स्पष्ट अभिषेशा की है। तथा उनके तथ्यों से संतुष्ट होने की स्थिति में तथा जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा भी मान्यता दिये जाने की अभिशषा की गयी है उन संस्थाओं / विद्यालयों को गुणावगुण एंव समीक्षा के पश्चात् निदेशालय द्वारा मान्यता दिए जाने का अनुमोदन अथवा मान्यता हेतु अपात्र किया जायेगा। मान्यता अथवा अपात्र होने की सूचना एनआईसी द्वारा पोर्टल पर एवं मैसेज द्वारा संबंधित संस्था को 4 कार्य दिवस में दिया जाना सुनिश्चित किया जायें।

    8.2 ऐसे पात्र विद्यालयों के लिए आरक्षित कोष (फिक्सड डिपोजिट) का दस्तावेज तथा बालिका शिक्षा फाउण्डेशन की देय राशि का ड्राफ्ट मान्यता अनुमोदन के 7 दिवस से पूर्व अथवा मान्यता दिए जाने की अंतिम तिथि जो भी पहले है तक जमा कराने हेतु संबंधित संस्था को पत्र भेजा जाएगा।

    8.3 निर्धारित तिथि तक आरक्षित कोष (फिक्सड डिपोजिट) का दस्तावेज तथा बालिका शिक्षा फाउण्डेशन की देय राशि का ड्राफ्ट प्राप्त होने पर इसकी ऑनलाइन प्रविष्टि की जाएगी। जिन संस्थाओं से निर्धारित तिथि तक यह दस्तावेज प्राप्त नहीं होते है वह विद्यालय मान्यता के लिए अपात्र हो जाएंगे। इसकी सूचना एन.आई.सी द्वारा पोर्टल पर एवं मैसेज द्वारा संबंधित संस्था को दिया जाना सुनिश्चित किया जावें।

    8:4 उपरोक्त दस्तावेज के विवरण की ऑनलाईन प्रविष्टि के बाद इन विद्यालयों को मान्यता का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्रिंट होगा तथा जिला शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षरों से जारी किया जाएगा।

    8.5 जिन विद्यालयों कि मान्यता के लिए निदेशालय / राज्य सरकार से अनुमोदन प्राप्त करना है उन विद्यालयों को मान्यता दिए जाने की प्रक्रिया अनुमोदन प्राप्त होने के बाद प्रारम्भ की जाएगी जो उपरोक्तानुसार ही रहेगी। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय कार्यालय द्वारा भी इनको सूचित किया जाएगा।

    8.6 समस्त विद्यालयों की मान्यताऐं निर्धारित तिथि तक तथा संभव एक साथ जारी की जाएंगी। निर्धारित तिथि तक मान्यता का कार्य पूर्ण नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    सरकारी नौकरी, परीक्षा परिणाम, भर्ती और प्रतियोगी अपडेट-

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

    जिन विद्यालयों के आवेदन को निरीक्षण के दौरान अथवा जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अथवा निदेशालय / राज्य सरकार द्वारा मान्यता दिए जाने योग्य नहीं पाया गया है उनकी सूचना पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्ट की जाए तथा इस सूचना का पत्र ऑनलाइन प्रिंट कर आवेदनकर्ता सोसाइटी को भी प्रेषित किया जाएगा।

    1. सोसायटी के पंजीयन प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति।
    2. सोसायटी के विधान की सत्यापित प्रति जिसमें सोसायटी के शैक्षिक उद्देश्यों का उल्लेख है।
    3. सोसायटी की नवीनतम रजिस्टर्ड कार्यकारिणी के सदस्यों की प्रमाणित सूची मय विभागीय प्रतिनिधि।
    4. विद्यालय नवीन मान्यता / क्रमोन्नति / नाम स्थान माध्यम परिवर्तन / अतिरिक्त माध्यम, विषय, संकाय इत्यादि के संबंध में कार्यकारिणी द्वारा लिये गये निर्णय की सत्यापित प्रति |
    5. विद्यालय को पूर्व में जारी समस्त प्रकार की मान्यताओं की सत्यापित प्रतियों (नवीन मान्यता के आवेदन में आवश्यक नहीं) ।
    6. विद्यालय भवन व खेल मैदान की भूमि विद्यालय संचालित करने वाली सोसायटी की है तो भूमि के मालिकाना हक के रजिस्टर्ड दस्तावेज की सत्यापित प्रति।
    7. विद्यालय भवन व खेल मैदान की भूमि सोसायटी की नहीं है तो रजिस्टर्ड किरायेनामे की सत्यापित प्रति ( भूमि के मालिकाना हक के दस्तावेजों सहित ) ।
    8. विद्यालय भवन व खेल मैदान की भूमि का सक्षम स्तर से संस्थानिक प्रयोजनार्थ रूपान्तरण के आदेश की सत्यापित प्रति ।
    9. विद्यालय भवन का सक्षम अधिकारी द्वारा जारी सुरक्षा प्रमाण पत्र की प्रति।
    10. विद्यालय भवन व खेल मैदान का सक्षम अधिकारी द्वारा प्रमाणित ब्लू प्रिंट नक्शे की प्रति।
    11. विद्यालय की आय-व्यय की सी.ए. द्वारा प्रमाणित गत तीन वर्षों की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति (नवीन मान्यता के आवेदन हेतु लागू नहीं) ।
    12. विद्यालय के पाँच रंगीन फोटो जो आवेदन के साथ अपलोड किये गये है।
    13. मान्यता शुल्क का ई-ग्रास चालान।

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    1. सोसाइटी के पंजीयन प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति |
    2. सोसाइटी के विधान की सत्यापित प्रति जिसमें सोसाइटी के भौतिक उद्देश्यों का उल्लेख है।
    3. विद्यालय भवन एवं खेल मैदान का सक्षम अधिकारी द्वारा जारी नवीनतम प्रमाणित ब्लू प्रिन्ट एवं नक्शे की प्रति
    4. शपथ पत्र।
    5. विद्यालय के पांच रंगीन फोटो जो आवेदन के साथ अपलोड किये गये हैं।
    6. विद्यालय का नवीनतम मान्यता प्रमाण-पत्र।

    (नोट:- प्रारम्भिक एवं माध्यमिक स्तर की समस्त प्रकार की मान्यताओं के लिए)

    1. संस्था भवन में बालक-बालिकाओं के लिए पृथक-2 शौचालय व मूत्रालय एवं शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था है।
    2. संस्था के प्रबन्ध मण्डल / सदस्य साम्प्रदायिक एवं राजनैतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेते हैं तथा ना ही भविष्य में भाग लेंगे।
    3. संस्था भवन में अग्नि शमन यंत्र स्थापित कर दिया गया है (रसीद संलग्न है।
    4. संस्था परिसर में किसी प्रकार का मोबाईल टॉवर लगा हुआ नहीं है।
    5. संस्था भवन व परिसर के ऊपर एवं आस-पास से विद्युत की हाई टेन्शन लाईन नहीं गुजर रही है।
    6. संस्था में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था है एवं समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण करवाया जाता है।
    7. संस्था द्वारा राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम, 1989 एवं राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था (मान्यता सहायता अनुदान और सेवा शर्ते आदि) नियम, 1993 तथा बोर्ड की मान्यता संबंधी सभी भौतिक एवं वित्तीय शर्तों की पालना की जायेगी।
    8. संस्था द्वारा निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 एवं राजस्थान निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 की पालना की जायेगी।
    9. संस्था में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा तथा खेलकूद, मनोरंजन की व्यवस्था की जायेगी।
    10. संस्था द्वारा राज्य सरकार / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित पाठयक्रम एवं पाठ्य पुस्तको द्वारा ही अध्ययन करवाया जायेगा।
    11. संस्था द्वारा राज्य सरकार / स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक कलैन्डर का पालन किया जायेगा।
    12. संस्था द्वारा राजस्थान विद्यालय (फीस का विनिमयन) अधिनियम, 2016 एवं राजस्थान विद्यालय (फीस का विनिमयन) नियम, 2017 की पालना की जायेगी तथा विद्यार्थियों से निर्धारित फीस ही ली जायेगी।
    13. संस्था के विरुद्ध न्यायालय में किसी प्रकार का प्रकरण विचाराधीन नहीं है तथा कोई भी विभागीय जांच लम्बित नहीं है।
    14. संस्था के आस-पास का वातावरण प्रदूषण रहित है।
    15. संस्था में सभी शिक्षक पूर्ण रूप से योग्यताधारी एवं विषयानुसार नियुक्त है।
    16. संस्था द्वारा किसी प्रकार के राज्य / विभाग के आदेशों की पालना नहीं किये जाने पर संस्था की मान्यता निरस्त कर नियमों के अन्तर्गत संस्था के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने का विभाग को पूर्ण अधिकार होगा।
    17. विद्यालय में अध्ययन करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का प्रतिवर्ष विद्यार्थी दुर्घटना बीमा करवाया जायेगा।
    18. विद्यालय संचालन समिति द्वारा विद्यार्थियों के आवागमन हेतु वाहन सुविधा उपलब्ध करवाने की स्थिति में वाहन का पंजीकरण बाल वाहिनी के रूप में करवाया जायेगा तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा संबंधी नियमों का पूर्ण पालन किया जायेगा।
    19. संस्था द्वारा राजस्थान विद्यालय (फीस का विनिमयन) अधिनियम, 2016 एवं राजस्थान विद्यालय (फीस का विनिमयन) नियम 2017 के प्रावधानों के अनुसार विद्यालय की फीस निर्धारित कर प्राईवेट स्कूल पोर्टल पर प्रविष्टि कर दी गई है / नवीन मान्यता की स्थिति में प्रविष्टि कर दी जायेगी।

    (नोट:- उपरोक्त की अतिरिक्त माध्यमिक / उच्च माध्यमिक स्तर की समस्त प्रकार की मान्यताओं के लिए)

    1. संस्था में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए सिंगल सीटेड फर्नीचर उपलब्ध है।
    2. संस्था में लिपिक, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं विषयवार प्रयोगशाला सहायकों की नियमानुसार नियुक्ति कर दी गई है।
    3. संस्था में कम्प्यूटर व इंटरनेट (ब्राडबेड) की व्यवस्था कर दी गई है।
    4. संस्था द्वारा बिना विभाग की अनुमति के उच्च कक्षायें संचालित नहीं की जायेगी।
    5. संस्था में नियुक्त अध्यापकों के वेतन से नियमानुसार पी. एफ. की कटौती की जायेगी।

    यह है कि शपथ पत्र के बिन्दु संख्या…………… ………… से ………… ……… में वर्णित कथन मेरी जानकारी के अनुसार पूर्ण सत्य है।

    सचिव
    समिति का नाम……
    समिति का रजिस्टेशन नम्बर व वर्ष

    Process of Recognition to Private Schools in Rajasthan / गैर सरकारी विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता दिये जाने की प्रक्रिया

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    सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) की विस्तृत जानकारी

    सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) की विस्तृत जानकारी

    LEARNING OUTCOMES / सीखने के प्रतिफल :- विद्यालयों में अध्यनरत छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर कई नए प्रयास किये जाते है । इन सबका उद्देश्य विद्यालयी छात्रों में शैक्षिक गुणवत्ता का विकास और अच्छी उपलब्धि स्तर को हासिल करना  होता है ।   जिससे छात्रों के समग्र मूल्यांकन के माध्यम से विकास की एक निश्चित योजना बनाकर उनका उन्नयन किया जा सके .वास्तव में, सीखना एक सतत व व्यापक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है । अब हम समझने का प्रयास करते हैं कि सीखने के प्रतिफल (LEARNING OUTCOMES) क्या है ?

    किसी विद्यार्थी के लिए पाठ्यक्रम में सीखने के जो लक्ष्य या दक्षतायें निर्धारित की जाती हैं तथा जिन्हें ध्यान में रखकर शिक्षक अपने दैनिक कक्षा शिक्षण को संपादित करते हैं और कक्षा के इतर अनेक सह शैक्षिक गतिविधियों को आयोजित करते हैं, उन्हें Learning outcomes कहते हैं।

    सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक अभी तक पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षा के आयोजन पर ही ध्यान देते थे। पढ़ाई से बच्चे के मानसिक स्तर, सामान्य ज्ञान और शैक्षिक ज्ञान में क्या सुधार हुआ, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता था। सरकार ने इस वर्ष पहल कर लर्निंग आउटकम के मापदंड तैयार किए हैं। किस कक्षा में शिक्षक बच्चे को किस तरह क्या-क्या पढ़ाएंगे और किस कक्षा में बच्चों को कितना ज्ञान होना चाहिए, यह निर्धारित किया गया है।

    सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) की विस्तृत जानकारी
    सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) की विस्तृत जानकारी

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    सीखने के प्रतिफल (LEARNING OUTCOMES) क्या है ?

    अक्सर शिक्षकों में इस बात की स्‍पष्‍टता नहीं होती कि,

    • किस प्रकार का सीखना आवश्यक है?
    • वे कौन से मापदड हैं  जिनसे इसे मापा जा सकता है?

    वे पाठ्यपुस्तक को संपूर्ण पाठ्यक्रम मानकर पाठों के अत में दिए गए प्रश्‍नों के आधार पर मूल्यांकन करते हैं। पाठ्यसामग्री के संदर्भ की भिन्नताओ तथा पढ़ाने के विभिन्न सिद्धांतों को वे ध्यान में नहीं रखते। पठन सामग्री में संदर्भानुसार भिन्‍नताएँ और अपनाई गई शिक्षण तकनीक में विविधता पर सामान्‍यतया ध्‍यान नहीं जाता है, क्‍योंकि इनके आकलन की कोई कसौटी नहीं है।

    प्रत्येक कक्षा के सीखने के प्रतिफल शिक्षकों को केवल शिक्षा के वांछित तरीके अपनाने में ही सहायक नहीं है.  बल्‍कि अन्य साझेदारों, जैसे– संरक्षक, माता-पिता, विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों, समुदाय तथा राज्य स्तर के शिक्षा अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका के प्रति सर्तक और ज़िम्‍मेदार भी बनाता है। स्पष्ट रूप से परिभाषित सीखने के प्रतिफल विभिन्न साझेदारों की ज़िम्मेदारी तथा उत्तरदायित्वों को सुनिश्चित करते हुए और दिशा-निर्देश दे सकता है ताकि विभिन्न पाठ्यचर्या क्षेत्र से अपेक्षाओं की पूर्ति हो सके। इसमें शिक्षक की प्राथमिक भूमिका सीखने की प्रक्रिया में सुगमकर्ता के रूप में होती है।

    एक शिक्षक की भूमिका –

    बच्‍चे विद्यालय में अपने सीखने के अनुभवों  के साथ प्रवेश करते हैं। विद्यालय बच्‍चे के मौजूदा अनूभवों के आधार पर सीखने की आगामी प्रक्रिया के गठन का दायित्‍व उठाता है। इस प्रकार हम किसी भी स्‍तर की शरुआत बच्‍चे की ‘अधिगम शून्यता’ से नहीं करते। एक शिक्षक, जो कि विद्यार्थियाें के सीखने का परामर्शदाता और सगुमकर्ता है, को भिन्‍न शिक्षणशास्‍त्रीय तकनीकों और बच्‍चेकी सीखने में उन्‍नति के प्रति भी जागरूक बनाना आवश्‍यक है।

    सीखने के प्रतिफल को बेहतर कैसे बनायें –

    सीखने सिखाने की प्रक्रिया के दौरान सतत एवं मूल्यांकन का उपयोग करें।

    वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में विद्यार्थी और शिक्षक के अलावा माता-पिता, समुदाय के सदस्‍य और शैक्षिक प्रशासकों को भी विद्यार्थियों के सीखने के बारे में जानने और उसके अनुसार बच्‍चों  की सीखने संबंधी उन्‍नति पर नज़र बनाए रखने की ज़रूरत है।

    सीखने की निरन्तरता को ध्‍यान में रखते हुए व्‍यवस्‍था को यह जानकारी देना कि बच्‍चेने सटीक रूप से क्‍या सीखा, एक चनुौती भरा कार्य होता है।

    राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनसुंधान और प्रशिक्षण परिषद (ए्नसीईआरटी) के द्वारा विद्यालय से संबंधित सभी हितग्राहियों को शामिल करते हुए सीखने की संप्राप्तियों (Learning outcomes)को निर्धारित किया गया है ये बेंच मार्क के रूप में चिन्हित किये गए है क्योंकि इनकी प्राप्ति के बगैर छात्रों के सर्वागींण विकास की बात उचित नही है.


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    LEARNING OUTCOMES (सीखने के प्रतिफल) क्यों ?

    1. प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थी के सीखने के बारे में जानने और उसके अनुसार बच्चों के सीखने सम्बन्धी प्रगति पर नज़र बनाये रखने की जरुरत है । इसके लिए आवश्यकता है की शिक्षको को कुछ मानदंड उपलब्ध करवाए जाये जिनकी सहायता से आपेक्षित सीखने के स्तर का आकलन किया जा सके।
    2. सीखने की निरन्तरता को ध्यान में रखते हुए शिक्षक एवं शिक्षा व्यवस्थासे जुड़े सभी अधिकारियो एवं अभिभावकों यह जानना आवश्यक है कि बच्चे ने सटीक रुप से कक्षा में क्या सीखा? इन्ही मापदंडो को “सीखने का प्रतिफल ” के रुप में परिभाषित किया गया है अर्थात जो कुछ भी बच्चे ने सीखाहै उसको जाचने अथवा उस परिणाम को देखने के मापदंड को अधिगम प्रतिफल के रुप में देखा जा सकता है ।

    LEARNING OUTCOMES (सीखने के प्रतिफल) की आवश्यकता –

    1. निः शुल्क एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की क्रियान्वित अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी की गुणवत्तायुक्त शिक्षा को सुनिश्चित करने हेतु ।
    2. आयु अनुररोप अपेक्षित स्तर , कौशल विकास एवं गुणवक्तायुक्त शिक्षा को परिभाषित करने हेतु ।
    3. शैक्षिक उदेश्यो की पूर्ति की सटीक जॉच हेतु ।
    4. राष्ट्रीय स्तर की शैक्षिक आकांक्षाओं की क्रियान्वयन हेतु समन्वित प्रयास अन्तर्गत ।
    5. राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर उच्च पायदान पर अवस्थित करने के प्रयास के क्रम में ।

    LEARNING OUTCOMES पर अपनी अधिक समझ बनाने के लिए आप नीचे दिये गए link पर जा सकते हैं-

    LEARNING OUTCOMES
    कक्षा 1वीं से 8वीं
    Open
    LEARNING OUTCOMES
    सेकेन्डरी स्तर
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    कक्षावारसीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) के स्तर पर अपनी अधिक समझ बनाने के लिए आप नीचे सारणी में दिये गए link पर जा सकते हैं

    कक्षावार सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) के स्तर

    प्राथमिक स्तरउच्च प्राथमिक स्तर
    कक्षा 1कक्षा 6
    कक्षा 2कक्षा 7
    कक्षा 3कक्षा 8
    कक्षा 4
    कक्षा 5

    प्रारंभिक स्तर पर कक्षावार सीखने के प्रतिफल

    आईये हम जानें प्राथमिक स्तर पर कक्षावार 1 से 8 तक लर्निंग आउटकम (LEARNING OUTCOME) पर आधारित माहवार प्रश्न क्या -क्या हो सकते है ? जिससे हम अपने शिक्षण को गुणवत्ता आधारित बना सकें …

    प्रारंभिक स्तर पर सीखने के प्रतिफल
    अधिगम परिणाम – 1-5 LOs (हिन्दी)
    अधिगम परिणाम – 6 -8 LOs (हिन्दी)

    सेकेन्डरी स्तर पर सीखने के प्रतिफल

    सेकेन्डरी स्तर पर सीखने के प्रतिफल-हिन्दी 
    सेकेन्डरी स्तर पर सीखने के प्रतिफल-अंग्रेजी 
    सेकेन्डरी स्तर पर सीखने के प्रतिफल

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