वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियमावली

वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियमावली

वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियमावली Annual Performance Appraisal Report Rules :- वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) एक महत्त्वपूर्ण राजकीय दस्तावेज है । प्रत्येक सरकारी कार्मिक (लोकसेवक) के प्रदर्शन का मूल्यांकन प्रतिवर्ष APAR के माध्यम से किया जाता है। APAR में कार्मिक के कार्य, आचरण चरित्र और क्षमताओं को दर्ज किया जाता है। प्रत्येक राजकीय कार्मिक के लिए यह आवश्यक है वह अपने पदानुरूप दायित्व का नियमित मूल्यांकन करें।

वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियमावली Annual Performance Appraisal Report Rules

वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियमावली Annual Performance Appraisal Report Rules
वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन नियमावली Annual Performance Appraisal Report Rules

वह स्वयं इस तथ्य की समीक्षा करे कि राजकीय कार्मिक के रुप में जो कार्य / लक्ष्य उसे सौंपे गए हैं उनकी प्रगति/प्राप्ति किस स्तर तक हुई है, ताकि वह आगामी समय में सुधार कर अपनी कार्यक्षमताओं में वृद्धि कर सके।

वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) प्रणाली का एक अन्य उद्देश्य कर्मचारियों के गुणों, लक्षणों, शक्तियों और कमजोरियों के बारे में उच्चतर अधिकारियों को जानकारी प्रदान करना है ताकि उन्हें उन दायित्वों को सौंपा जा सके जहाँ उनकी योग्यता का सबसे अधिक उपयोग किया जा सके। APAR प्रणाली कर्मचारियों की योग्यता का आकलन करने के लिए डेटा भी प्रदान करती है जब पुष्टि, पदोन्नति, चयन ग्रेड, दक्षता पार करने और एक निश्चित आयु से परे सेवा में निरंतरता या कुछ वर्ष की सेवा पूरी होने पर उपयोगी होते हैं।

इस प्रकार, APAR विभिन्न प्रयोजनों के लिए बुनियादी और महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं । इसलिए सभी कार्मिकों को जिम्मेदारी के साथ APAR फॉर्म भरने का कार्य करना चाहिए।

व्याख्या- यदि इन निर्देशों के आवेदन व्याख्या और दायरे से संबंधित कोई भी संदेह उत्पन्न होता है, तो कार्मिक विभाग के परिपत्र दिनांक 05.06.2008 में प्रदत निर्देश और समय-समय पर कार्मिक विभाग द्वारा जारी संशोधन मान्य होगे और तत्संबंधी निर्णय अंतिम होगा।

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वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन के अतिरिक्त निम्न निर्दिष्ट दस्तावेजों और संचार की प्रतियां वार्षिक कार्य मूल्याकंन प्रतिवेदन डोजियर में रखी जाएंगी-

  1. राष्ट्रपति/ राज्य सरकार द्वारा दिए गए पुरस्कारों की प्रतियां।
  2. सरकार द्वारा जारी किए गए प्रशंसा- पत्र ।
  3. विशेष निकायों के प्रमुखों द्वारा जारी किए गए प्रशंसा पत्र या आयोग या ऐसे निकायों की रिपोर्ट में शामिल नाम से सराहना के पैराग्राफ।
  4. व्यक्तिगत गैर-अधिकारियों से प्रशंसा के पत्र अगर वे सचिव के पूर्व अनुमोदन से विभाग के प्रमुख / विभाग के अनुमोदन के साथ सामान्य कर्तव्य से परे सेवा की सराहना से संबंधित हैं।
  5. अधीनस्थ/मंत्रालयिक सेवा से संबंधित कर्मचारी संबंध में विभागाध्यक्ष द्वारा जारी किए गए प्रशंसा पत्र।
  6. राजस्थान सिविल सेवा (CC&A) नियमों में निर्दिष्ट किसी भी दंड को लागू करने के आदेश की
  7. नियुक्ति अधिकारी या उच्च अधिकारियों द्वारा लोकसेवक के कार्य व व्यवहार पर नाराजगी या चेतावनी देते हुए जारी किए गए पत्र की प्रतियाँ।
  8. संबंधित लोकसेवक द्वारा किए गए अध्ययन या प्रशिक्षण के अनुमोदित पाठ्यक्रमों के अभिलेख।
  1. प्रत्येक लोकसेवक का वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन का डोजियर निर्धारित चैनल के अनुरूप स्वीकारकर्ता अधिकारी के पास सुरक्षित रखा जाएगा।
  2. APAR की डूप्लीकेट प्रतियों का रखरखाव वांछनीय नहीं है हालांकि, यदि प्रतिवेदन की प्रतियों को बनाए रखना आवश्यक माना जाता है, तो कार्मिक विभाग की विशिष्ट स्वीकृति लेनी होगी।
  3. अपूर्ण प्रतिवेदन प्राप्त होने उसे संबंधित प्रतिवेदक/समीक्षक अधिकारी को वापस कर दिया जाए। अपूर्ण प्रतिवेदन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाए।
  4. किसी मृत कर्मचारी से संबंधित प्रदर्शन उसकी मृत्यु तारीख से दो वर्ष की अवधि के बाद नष्ट किया जा सकता है और सेवानिवृत्त लोकसेवक की उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख के पांच साल बाद या पेंशन लाभ के निपटाने के बाद, जो भी बाद में हो।
क्र.सं.श्रेणीप्रपत्र
1जिला व मण्डल स्तर के पदों को धारण करने वाले राज्य सेवा के लोकसेवकफॉर्म- I
2जिला व मण्डल स्तर के पदों के अलावा अन्य पदों को धारण करने वाले राज्य सेवा के लोकसेवकफॉर्म- II
3अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवाओं पर कार्यरत लोकसेवकफॉर्म- III

SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति

(1) कार्यालय में कार्यरत समस्त लोकसेवकों के संबंध में वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन वित्तीय वर्ष के आधार पर तैयार किया जायेगा।

(2) विद्यालय में कार्यरत समस्त लोकसेवकों (मंत्रालयिक कार्मिक वित्तीय वर्ष के आधार पर) के संबंध में APAR 01 जुलाई से 30 जून के आधार पर तैयार किया जायेगा।

(3) यदि किसी लोकसेवक ने संबंधित प्रतिवेदक अधिकारी के अधीन / सुपरविजन में न्यूनतम 03 माह की अवधि में कार्य नहीं किया है तो संबंधित लोकसेवक की APAR तैयार नहीं की जायेगी।

(4) किसी कर्मचारी की एक ही वर्ष की अवधि में (भिन्न-भिन्न नियंत्रण अधिकारी के अधीन 3 या 3 माह से अधिक की सेवा अवधि होने पर) 2 या 2 से अधिक प्रतिवेदन (APAR) भी हो सकते है, लेकिन उनमें से पहला प्रतिवेदन उस नियंत्रण अधिकारी के स्थानान्तरण के तत्काल बाद का होना चाहिए। वर्ष के अंत की प्रतीक्षा नहीं करनी है।


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यदि वर्ष के मध्य में समीक्षक अधिकारी या स्वीकारकर्ता अधिकारी परिवर्तित हुए हैं लेकिन प्रतिवेदक अधिकारी वहीं रहते हैं तो नए सिरे से प्रतिवेदन लिखने की आवश्यकता नहीं है।

यदि रिपोर्टिंग अवधि में एक से अधिक समीक्षक अधिकारी रहते है तो अंत में आए अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन की समीक्षा की जाएगी लेकिन शर्त यह है कि उस अधिकारी के द्वारा संबंधित कार्मिक के कार्य का कम से कम 3 माह की अवधि का सुपरविजन किया गया हो यदि ऐसा नहीं है तो पूर्व के समीक्षा अधिकारी का प्रतिवेदन मान्य होगा, लेकिन यहां भी शर्त कम से कम 3 माह के सुपरविजन की रहेगी।

(5) जहां एक प्रतिवेदक/ समीक्षक / स्वीकारकर्ता अधिकारी ने किसी भी प्रकार का अवकाश (उपार्जित / अर्धवैतनिक आदि) लिया है या लंबे समय तक प्रशिक्षण पर रहता है (प्रतिवेदन अवधि के दौरान 15 दिन से अधिक) तो APAR लिखने/समीक्षा करने हेतु आवश्यक न्यूनतम 03 महीने की अवधि की गणना के लिए उक्त अवकाश / प्रशिक्षण की अवधि को कुल अवधि से घटाया जाना चाहिए

हालांकि न्यूनतम प्रतिवेदन अवधि का यह सिद्धांत अनाधिकृत अनुपस्थिति मामले में लागू नहीं होगा जहां ऐसी अनुपस्थिति के लिए संबंधित लोकसेवक के APAR में प्रतिकूल प्रविष्टि की जानी है। कम अवधि के अवकाश / प्रशिक्षण को उक्त उद्देश्य के लिए प्रासंगिक नहीं माना जाना चाहिए ।

(6) पर्सनल असिस्टेंट / पर्सनल सेक्रेटरी के वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) की समीक्षा की आवश्यकता नहीं है।

(7) वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) में किसी व्यक्ति के काम और आचरण के बारे में उसकी टिप्पणी लिखने के लिए प्रतिवेदक, समीक्षक और स्वीकारकर्ता अधिकारी के अलावा किसी भी प्राधिकरण के लिए कोई प्रावधान नहीं है। परन्तु जिला स्तर के अधिकारियों के मामले में, संबंधित जिला कलेक्टर तथा संभाग स्तर के अधिकारियों के मामले में संभागीय आयुक्त, प्रतिवेदक अधिकारी से प्राप्त APAR पर निर्धारित स्थान पर अपनी टिप्पणी कर समीक्षक अधिकारियों को प्रेषित करेंगे।

(8) प्रतिवेदन की प्रत्येक अवधि के लिए, किसी भी परिस्थिति में एक से अधिक प्रतिवेदक / समीक्षक अधिकारी नहीं होने चाहिए। हालाँकि, कुछ मामलों में प्राधिकारी के रूप में अपनी टिप्पणी दर्ज करने के लिए एक से अधिक अधिकारी हो सकते हैं।

(1) लोकसेवक को अपने कैडर के लिए निर्धारित APAR फॉर्म का उपयोग करना चाहिए यथा- फॉर्म I II या III आदि।

(2) प्रत्येक लोकसेवक की जिम्मेदारी होगी कि वह तय समय-सारणी के अनुसार भाग-I को पूर्ण करने के बाद अपने प्रतिवेदक अधिकारी को अपने कैडर के अनुरूप APAR फॉर्म प्रस्तुत करे।

(3) वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) की तारीख और अवधि सही हो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए ।

(4) APAR के प्रत्येक पृष्ठ पर लोकसेवक अपना नाम पद, विषय (यदि कोई हो) जन्मतिथि, मूल्यांकन वर्ष, एम्प्लॉय आईडी एवं हस्ताक्षर अवश्य अंकित करें।

(5) वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) में रव-मूल्यांकन के संबंध में लोकसेवकों के लिए आवश्यक प्रविष्टियाँ बनाने के लिए पर्याप्त स्थान आवंटित किया गया है और उन्हें आवंटित स्थान पर अपना स्व-मूल्यांकन अंकित करना चाहिए। APAR फॉर्म सबमिट करते समय स्टेटमेंट्स और सर्टिफिकेट्स के साथ-साथ सेल्फ -एप्रिसिएशन का विवरण आदि वांछनीय नहीं है।

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(1) प्रतिवेदक अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह निर्धारित मापदंडों पर ध्यान से विचार करे / या लोकसेवक को सौपे गए कर्तव्यों को अपनी राय दर्ज करने से पहले बताए। जहां कोई मापदंड तय नहीं हैं. वहीं प्रतिवेदक अधिकारी को प्रतिवेदन अवधि की शुरुआत से पहले सम्भव मात्रा लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

यदि वर्ष की शुरुआत या प्रतिवेदन की अवधि में कोई लक्ष्य नहीं सौंपा गया है, तो वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) बहुत अधिक व्यक्तिपरक होगा, जो परिहार्य है प्रतिवेदक अधिकारी को जल्दबाजी में राय नहीं बनानी चाहिए या अपर्याप्त आंकड़ा/सूचना या अफवाह के आधार पर निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

(2) वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन के भाग सख्या II के बिंदु संख्या 01 के तहत विभिन्न प्रविष्टियों में प्रतिवेदक अधिकारी सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, प्रत्येक प्रविष्टि के सम्मुख अंकित पांच में से किसी एक बॉक्स में अपने लघु हस्ताक्षर अवश्य अंकित करें, कोई टिप्पणी या सही ()का निशान अंकित नहीं किया जाए।

(3) भाग सख्या II के बिंदु संख्या 02(क) लोकसेवक के सामान्य मूल्यांकन से संबंधित है इसमें प्रतिवेदक अधिकारी को आवश्यक रूप से और बुद्धिमानी से संबंधित व्यक्ति के प्रदर्शन और क्षमताओं का आंकलन करना चाहिए। इसमें उन तरीको पर भी टिप्पणी करनी चाहिए जिनके द्वारा संबंधित लोकसवेक ने इस अवधि के दौरान अपने विभन्न कर्त्तव्यों को पूरा किया है।

रिपोर्ट करने वाले अधिकारी द्वारा मूल्यांकन करते समय संबंधित लोकसेवक के सामान्य महत्त्व के कुछ गुण जैसे कि बुद्धिमता, उत्सुकता, परिश्रम, चातुर्य, वरिष्ठों के प्रति रवैया, अधीनस्थों और आम जनता, साथी-कर्मचारियों के साथ संबंध, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति/समाज के कमजोर वर्ग के लोगों, निःशक्तजन के प्रति संवेदनशीलता आदि पर भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा इसमें लोकसेवक के चरित्र, व्यक्तित्व, आचरण, योग्यताओं, कमियों और क्षमताओं का सामान्य उल्लेख भी होना चाहिए।

(4) प्रतिवेदक अधिकारी को न केवल अपने अधीनस्थ के कार्यों और गुणों का एक वस्तुपरक मूल्यांकन करना चाहिए बल्कि उनके दोषों को ठीक करने के लिए आवश्यक सलाह, मार्गदर्शन और सहायता अपने अधीनस्थों को हर समय देनी चाहिए। इस तरह की सलाह या आलोचना को भाग सख्या II के बिंदु संख्या 2(ख) में दर्ज किया जाना चाहिए।

(5) प्रतिकूल प्रविष्टियाँ, यदि कोई हों, तो APAR फॉर्म के निर्धारित स्थान पर ही दर्ज की जानी चाहिए और कहीं नहीं। यदि किसी लोकसेवक को लगातार सुधार/मार्गदर्शन के बावजूद वह सुधार दिखाने में विफल रहता है तो प्रतिकूल टिप्पणी APAR में दर्ज की जानी चाहिए। किसी भी दोष की प्रविष्टि करते समय प्रतिवेदनक अधिकारी उल्लेख करना चाहिए। किए गए सुधारात्मक प्रयासों और इन प्रयासों के परिणाम का उल्लेख करना चाहिये।

(6) समग्र मूल्यांकन के कॉलम को भरने के दौरान, प्रतिवेदक अधिकारी को लोकसेवक की समग्र ग्रेडिंग / विशिष्ट वर्गीकरण अर्थात् “उत्कृष्ट”, “बहुत अच्छा”, “अच्छा”, “संतोषजनक”, “असंतोषजनक” में संबंधित एक श्रेणी में अपने लघु हस्ताक्षर के रूप में प्रविष्टि अंकित करनी चाहिए। कोई टिप्पणी या सही ()का निशान अंकित नहीं किया जाए। उसे इन श्रेणियों के अतिरिक्त अन्य श्रेणी या दो श्रेणी के मध्य की स्थिति यथा “अच्छे और बहुत अच्छे के बीच” या बहुत संतोषजनक” आदि दर्ज नहीं किया जाना है।

(7) समग्र मूल्यांकन के आधार पर कॉलम को भरने के दौरान, प्रतिवेदक अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऊपर (बिन्दु सं. 6) में बताए अनुसार दर्ज की गई ग्रेडिंग टिप्पणी के अनुसार हो , जैसा कि भाग- II के बिंदु संख्या 5 के तहत आवश्यक है अर्थात् यदि किसी व्यक्ति को बिंदु संख्या 1 में “असंतोषजनक” श्रेणीबद्ध किया जाता है, तो उसी ग्रेडिंग को बिंदु संख्या 5 में दर्ज किया जाना चाहिए। उद्देश्य यह है कि समग्र मूल्यांकन बिंदु संख्या 1 से बिंदु संख्या 2 में की गई टिप्पणी / प्रविष्टियों के अनुसार होना चाहिए।

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(1) हालांकि एक उच्च अधिकारी के लिए अपने से दो या दो से अधिक ग्रेड नीचे के वृहद संख्या में कार्यरत लोकसेवकों को जानना कठिन हो सकता है, फिर भी उसका उन लोकसेवकों के चरित्र, प्रदर्शन और क्षमता का समग्र मुल्यांकन किया जाना अत्यन्त आवश्यक है ताकि सुधारात्मक कार्य किया जा सके। किसी लोकसेवक का अगला उच्चाधिकारी (प्रतिवेदक अधिकारी) अपने निर्णय में हो सकता है कि पूरी तरह निष्पक्ष हो फिर भी कभी-कभी उसका निर्णय अत्यन्त संकीर्ण और व्यक्तिपरक हो सकता है |

इसलिए प्रतिवेदक अधिकारी से उच्चतर अधिकारी यानि समीक्षक अधिकारी को उन लोकसेवकों के कार्य और आचरण के बारे में व्यक्तिगत रूप से पता होना चाहिए और उनको प्रति अपना स्वयं का निर्णय स्थापित करना चाहिए जिनकी APAR भरी जा रही है।

(2) भाग III या भाग IV (जो भी लागू हो) के बिंदु सं. 1 के तहत अपनी टिप्पणी करते समय अधिकारी को तदनुसार प्रतिवेदक अधिकारी की टिप्पणियों पर सकारात्मक और स्वतंत्र निर्णय का प्रयोग करना चाहिए और उन टिप्पणियों के साथ स्पष्ट रूप से अपनी सहमति या असहमति व्यक्त करनी चाहिए। प्रतिकूल टिप्पणी के मामले में यह विशेष रूप से आवश्यक है कि वहां उच्चतर अधिकारी की राय को सही मूल्यांकन के रूप में माना जाएगा।

(3) प्रतिवेदक अधिकारी की टिप्पणी की शुद्धता को सत्यापित करने की जिम्मेदारी समीक्षक अधिकारी की है। यदि समीक्षा करने वाला अधिकारी लोकसेवक के कार्य से पर्याप्त रूप से परिचित नहीं है, जिस पर उसको स्वयं के उचित और स्वतंत्र निर्णय पर पहुंचने में सक्षम होने के रूप में सूचित किया गया है, तो वह इस संबंध में पूछताछ कर सकता है जिससे वह सही निर्णय ले सके।

(4) प्रतिवेदक अधिकारी से समीक्षा हेतु प्राप्त APAR में यदि प्रविष्टियाँ पर्याप्त रूप से सार्थक नहीं है या अस्पष्ट या अप्रतिबद्ध हो तो ऐसे प्रतिवदेन को प्रवर्धन या स्पष्टीकरण के लिए प्रतिवेदक अधिकारी को वापस किया जाना चाहिए।

(5) जहाँ प्रतिवेदक अधिकारी ने प्रतिकूल प्रविष्टियों दर्ज की हैं, समीक्षक अधिकारी प्रतिवेदक अधिकारी के साथ ऐसी प्रतिकूल प्रविष्टियों पर चर्चा कर सकता है, और प्रतिकूल प्रविष्टियों सहित प्रतिवेदन संशोधित यथा निम्नगत/क्रमोन्नत(Down-grade/Up grade) कर सकता है।

(6) समीक्षा अधिकारी को लोकसेवक के समग्र ग्रेडिंग / विशिष्ट वर्गीकरण अर्थात् “उत्कृष्ट”, “बहुत अच्छा”, “अच्छा”, “संतोषजनक”, “असंतोषजनक” भाग III के बिंदु संख्या 2 पर दर्ज करना होगा समीक्षा अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके द्वारा किया गया समग्र मूल्यांकन भाग III या भाग IV में इस प्रयोजन के लिए प्रदान की गई जगह में उसके द्वारा दर्ज की गई वर्णनात्मक टिप्पणियों के अनुरूप हो। समीक्षा करने / स्वीकार करने वाले अधिकारी को अधीनस्थ अधिकारी द्वारा किए गए मूल्यांकन को डाउन-ग्रेड / अपग्रेड करने का अधिकार है|

जहां इसे सार्वजनिक हित में समीचीन माना जाता है। ऐसा करते समय, न केवल अधिकारी कोप्रतिवेदक या समीक्षा करने वाले अधिकारी के मूल्यांकन के साथ अपनी असहमति व्यक्त करनी चाहिए, बल्कि इस तरह के डाउन-ग्रेडेशन / अपग्रेडेशन के विशिष्ट कारणों को भी प्रदान किए गए स्थान पर ही प्रपत्र में दर्ज किया जाना चाहिए।

यह स्वीकार करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह प्रतिवेदक और समीक्षा करने वाले अधिकारियों द्वारा यहां दिए गए निर्देशों के अनुसार APAR को भरें। जहां प्रविष्टियाँ पर्याप्त रूप से सार्थक नहीं हैं तो ऐसे प्रतिवेदन को प्रतिवेदक/ समीक्षा अधिकारी को प्रवर्धन या स्पष्टीकरण के लिए लौटाया जाना चाहिए।


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(1) “संदिग्ध चरित्र”, ” अनुचित लाभ प्राप्त करने की शिकायतें” जैसे रिमार्कस स्वीकार्य नहीं हैं। प्रविष्टियाँ स्थापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए न कि केवल संदेह पर । जो तथ्य, मूल्यांकन, निष्कर्ष, आदि विरोधाभासी है उन्हे APAR को लिखते / समीक्षा / स्वीकार करते समय टाला जाना चाहिए इसके अलावा, प्रतिवेदन के समय से पहले के तथ्यों, घटनाओं और परिस्थितियों का उल्लेख APAR में नहीं किया जाना चाहिए।

(2) प्रतिवेदन लिखने वाले अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि APAR लिखने के लिए वह सक्षम है। इसे विशेष रूप से प्रतिवेदन अवधि वर्ष की जांच करनी चाहिए और स्वयं को संतुष्ट करना चाहिए कि उसे निश्चित रूप से प्रतिवदेन अवधि के लिए संबंधित लोकसेवक हेतु सक्षम प्रतिवेदक/ समीक्षा / स्वीकार करने का अधिकार था।

(3) APAR लिखने के लिए समय-सारिणी में दिए गए समय का पालन किया जाना चाहिए राज्य सरकार के आदेश क्रमांक 13(48)कार्मिक(क-1) / गोप्र/ 77 दिनांक 16-7-80 एवं एफ13(51)कार्मिक/ए1/एसीआर/08 दिनांक 05.06.2008 में स्पष्ट प्रावधान है कि निर्धारित तिथि तक लोकसेवक द्वारा प्रतिवेदन के भाग-1 की पूर्ति कर समय पर प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो प्रतिवेदक अधिकारी निर्धारित तिथि पश्चात् प्रतीक्षा नहीं करें तथा कार्यालय अभिलेख से भाग- 1 की पूर्ति करें एवं अपनी टिप्पणी अंकित कर सम्बन्धित समीक्षक अधिकारी को भिजवा देवें। यह प्रतिवेदक अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।

(4) प्रतिवेदक/समीक्षक अधिकारी APAR पर अपनी टिप्पणी अंकित करते समय इस बात की पुष्टि अवश्य करें कि उसने अपने अधीनस्थ सभी लोकसेवकों की APAR पर प्रतिवेदन/समीक्षक टिप्पणी अंकित कर सम्बन्धित अधिकारी को प्रस्तुत कर दिये हैं। APAR उच्च अधिकारी को भेजने से पूर्व संधारण रजिस्टर (संलग्न प्रपत्र-“B” ) में प्रत्येक संवर्ग व पदवार इन्द्राज अवश्य किया जावे।

(5). सेवानिवृत होने वाले प्रतिवेदक/समीक्षक अधिकारी का वैधानिक कर्त्तव्य है कि उनके अधीन कार्यरत लोकसेवक जिसने कम से कम तीन माह से अधिक समय तक कार्य किया हो उनका APAR प्रतिवेदन अवश्य भरें अन्यथा उनको अदेय प्रमाण -पत्र जारी नहीं किया जायेगा ।

(7), तीन वर्षों से पूर्व के प्रतिवेदन राज्य सरकार के आदेश कमांक एफ-14(29)कार्मिक / एसीआर / 73 दिनांक 16-7-85 के अनुसार स्वीकार योग्य नहीं हैं। अतः तीन वर्षो से पूर्व के मूल प्रतिवेदन तैयार नहीं करवाये जायें, इसके स्थान पर तीन वर्ष से पूर्व के प्रतिवेदन प्रतिवेदक अधिकारी स्वयं द्वारा कार्यालय अभिलेख के आधार पर कार्यालय स्तर पर) तैयार कर भिजवाये जाएँ । ध्यान रहे कि ऐसे प्रतिवेदनों में समग्र मूल्यांकन संतोषप्रद से ऊपर की श्रेणी का नहीं भरा जावे।

(8). प्रतिवेदक अधिकारी लोकसेवक के प्रतिवेदन पर टिप्पणी अंकित करने से पूर्व जाँच करे कि लोकसेवक द्वारा अपने विभाग का मूल पद, मूल विषय, कार्य करने की सेवा अवधि, वर्तमान पद का चयन वर्ष, उस वर्ष का बोर्ड परीक्षा परिणाम आदि सही रूप से भरा है अथवा नहीं? लोकसेवक का मूल पद एवं विषय का सही उल्लेख नहीं होने के कारण प्रतिवेदन संधारण में असुविधा एवं अनावश्यक विलम्ब होता है।

(9), प्रतिवेदक अधिकारी, समीक्षक अधिकारी और स्वीकारकर्ता अधिकारी का नाम उनके हस्ताक्षरों के बाद संबंधित पदनामों के साथ स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में दर्शाया जाना चाहिए। प्रतिवेदक अधिकारी प्रतिवेदन के भाग-1 की प्रविष्टियों को प्रमाणित कर अपने हस्ताक्षर अंकित करें। भाग-II की पूर्ति के पश्चात् अपनी मोहर अवश्य लगायें, जिसमें अपना नाम, पदनाम का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि पदस्थापन स्थान परिवर्तित हो गया है तो पूर्व स्थान की मोहर तथा वर्तमान पदस्थापन की मोहर दोनों लगायें । उल्लेखित पदनाम प्रतिवेदन की अवधि से संबंधित होना चाहिए। उपर्युक्त प्रक्रिया समीक्षक अधिकारी द्वारा भाग-।। एवं भाग-111 में भी अपनायी जावे।

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(10), जिला स्तरीय अधिकारियों के APAR प्रतिवेदक अधिकारी की टिप्पणी के बाद सम्बन्धित जिला कलेक्टर की टिप्पणी हेतु एवं मंडल स्तरीय अधिकारियों का प्रतिवेदन प्रतिवेदक अधिकारी की टिप्पणी के बाद सम्बन्धित संभागीय आयुक्त को प्रेषित किया जावेगा कलेक्टर/ संभागीय आयुक्त अपनी टिप्पणी के बाद APAR रामीक्षक अधिकारी को प्रेषित करेंगे।(कार्मिक विभाग का आदेश गाक 13/51)/क/-1/गोए/2015 जयपुर दिनाक 29.06.2015)

(11) बोर्ड परीक्षा का परिणाम APAR में अवश्य अंकित करने के साथ-साथ परीक्षा परिणाम की प्रमाणित
प्रति भी साथ में संलग्न करें। न्यून परीक्षा परिणाम की स्थिति में प्रतिवेदक / समीक्षक अधिकारी अपनी टिप्पणी में इसका उल्लेख अवश्य करें। चूंकि शिक्षा विभाग में संस्थाप्रधानों/ व्याख्याता /वरिष्ठ अध्यापक/ अध्यापक का परीक्षा परिणाम मुख्य उपलब्धि की श्रेणी में आता है, अतः जिन कार्मिकों का परीक्षा परिणाम न्यून है. अन्य उपलब्धियां चाहे जितनी भी श्रेष्ठ हो उनका सनग्र मूल्यांकन अच्छा से ऊपर अंकित नहीं किया जावे इसकी पालना कठोरता से की जाये, ताकि प्रतिवेदन संधारण में अनावश्यक पत्र व्यवहार न करना पड़े।

(12) APAR में प्रतिकूल प्रविष्टि का इन्द्राज प्रतिवेदक/समीक्षक अधिकारी उस समय तक नहीं करे जब तक कि प्रतिकूल प्रविष्टि के साक्ष्य में उनके पास पर्याप्त ठोस प्रमाण न हो। प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा की गयी प्रतिकूल प्रविष्टि को समीक्षक अधिकारी, प्रतिवेदक अधिकारी से लिखित सलाह मशविरा कर ही निरस्त कर सकता हैं।

(13) प्रतिवेदक यह सुनिश्चित करें कि बिन्दु संख्या 1 से 2 तक में की गई अभियुक्तियों एवं बिन्दु संख्या 5 में किए गए समग्र मूल्यांकन में एकरूपता हो। बिन्दु 1 से 2 तक में कहीं पर भी प्रतिकूल अभियुक्ति नहीं होने पर बिन्दु संख्या 5 में तदनुरूप ही समग्र मूल्यांकन किया जावे। यदि कहीं पर भी कोई प्रतिकूल अभियुक्ति हो तो समग्र मूल्यांकन भी असंतोषप्रद ही किया जावे।

(14) समीक्षक अधिकारी प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा किये गये समग्र मूल्यांकन को उस स्थिति में ही परिवर्तित कर सकता है जबकि वह कार्मिक एवं उसके व्यवहार से पूर्णतया परिचित हो तथा प्रतिवेदक द्वारा किये गये मूल्यांकन को परिवर्तित करने के उसके पास ठोस प्रमाण हो। समग्र मूल्यांकन परितवर्तित करते समय वह उन पर्याप्त कारणों/ औचित्य का उल्लेख अपनी समीक्षक टिप्पणी में अवश्य अंकित करें, तत्पश्चात् ही किये गये समग्र मूल्यांकन को परिवर्तित करें।

(15) समीक्षक एवं स्वीकारकर्ता अधिकारी को प्रतिवेदक अधिकारी के अभिमत से सहमति/असहमति दोनों ही स्थितियों के संबंध में स्पष्ट तथ्यों सहित अभिमत अभिलिखित करना चाहिए विशेषतः उच्च अधिकारी के अभिमत को मूल्यांकन की दृष्टि से सर्वोत्तम माना जाता है अतः उच्च अधिकारीगण को प्रतिकूल प्रविष्टियों एवं प्रविष्टियों को निम्नगत/ क्रमोन्नत (Down grade / Up grade) करने की स्थिति में मूल्यांकन के साथ-साथ स्वयं की टिप्पणियों के बारे में सकारण विवरण आवश्यक रूप से अंकित करना चाहिए। (कार्मिक विभाग के आदेश क्रमांक प. 13(51) कार्मिक/एसीआर/2008 जयपुर दिनांक 12.10.2009)

(16) पातेय वेतन व्यवस्था में कार्यरत लोकसेवक APAR प्रतिवेदन जिस मूल पद से चयनित किये गये हो उसके संधारण अधिकारी द्वारा ही संधारित किये जावेगें।

(17) अन्य विभाग में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले लोकसेवक मूल पद एवं विषय, मूल विभाग का ही अंकित करें। सम्बन्धित प्रतिवेदक अधिकारी भी अपनी प्रतिवेदन टिप्पणी अंकित करने से पूर्व विशेष रूप से इसकी जाँच करें।

(18) कार्मिक विभाग के पत्रांक प. 13(51) / का० /क-1 / गो.प. / 2016 जयपुर दिनांक 17.05.2018 के अनुसार राजपत्रित अधिकारियों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन के साथ संलग्न अचल सम्पति विवरण प्रपत्र को हटा दिया गया है डीपीसी के वक्त संबंधित कार्यालय अपने अधीन कार्यरत राजपत्रित अधिकारी जिसकी डीपीसी प्रस्तावित है का अचल सम्पत्ति विवरण जो कि स्वयं राजपत्रित अधिकारी ने SSO ID द्वारा ऑनलाईन किया है की स्व – प्रमाणित प्रति आवश्यक रूप से प्रेषित करेंगे। (कार्मिक विभाग के आदेश क्रमांक प. 13(51) का. /क-1/गो.प्र./2016 जयपुर दिनांक 17.05.2018)

सरकारी नौकरी, परीक्षा परिणाम, भर्ती और प्रतियोगी अपडेट-

(1) अधिकारी के निलंबन के तहत- यदि प्रतिवेदक/समीक्षक / स्वीकारकर्ता अधिकारी निलंबन के अधीन है, तो उसके ड्यूटी के समय कार्यरत रहे लोकसवको की वह APAR लिखने/समीक्षा करने में सक्षम नहीं होगा।

(2) रिश्तेदार की APAR- अधिकारी अपने करीबी रिश्तेदार की APAR को लिखने या समीक्षा करने के लिए अधिकृत नहीं है।

(3) तीन महीने से कम की अवधि- प्रतिवेदक/ समीक्षक अधिकारी उन लोकसेवकों की APAR को लिखने/समीक्षा के लिए सक्षम नहीं है जिन लोकसेवकों ने उनके सुपरविजन में 03 माह से कम अवधि हेतु काम किया है।

(4) न्यायालय में साक्ष्य – जहां किसी लोकसेवक ने प्रतिवेदक/ समीक्षक अधिकारी के खिलाफ न्यायालय के समक्ष सबूत पेश किए हैं, वहाँ प्रतिवेदक/ समीक्षा करने वाला अधिकारी संबंधित लोकसेवक की APAR लिख नहीं सकते हैं / समीक्षा नहीं कर सकते हैं ।

(5) वे लोकसेवक जिन्हें निलंबन के तहत रखा गया है अथवा पोस्टिंग आदेश की प्रतीक्षा में है अथवा अध्ययन अवकाश पर है उनकी उक्त अवधि की APAR तैयार नहीं की जायेगी।

(6) प्रतिवेदक/ समीक्षक / स्वीकृति अधिकारी की सेवानिवृत्ति- जब प्रतिवेदक/ समीक्षा /स्वीकारकर्ता अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाता है या कार्यालय से किसी कारण से वंचित हो जाता है, तो वह APAR से संबंधित दायित्त्व का निर्वहन नहीं कर सकता और न ही पूर्व में किसी APAR में अपने द्वारा अंकित की गई प्रतिकूल प्रविष्टि के खिलाफ प्रस्तुत अभ्यावेदन पर टिप्पणियां दे सकता है।

(7) पुनर्नियुक्त कर्मचारी- पुनर्नियोजन पर एक सेवानिवृत्त अधिकारी इस पुनर्नियोजन की अवधि के दौरान उसके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों/अधिकारियों का APAR लिखने, समीक्षा करने या स्वीकार करने (इनमें से कोई भी मामला हो) के लिए सक्षम होगा हालांकि, ऐसा कोई अधिकारी उस समय के APAR को लिखने / समीक्षा करने / स्वीकार करने में सक्षम नहीं होगा (यदि कोई हो) जो उस प्रासंगिक समय में लिखा/समीक्षा / स्वीकार नहीं किया गया था, जब वह पुनर्नियोजन से पहले सेवा में था। (अर्थात् सेवानिवृत्त नहीं हुआ था तब का कोई बकाया मामला अब वह पूरा करने हेतु अधिकृत नहीं है)

(8) अतिरिक्त प्रभार धारण करने वाला अधिकारी के संबंध में- यदि किसी प्रतिवेदक/समीक्षा करने वाले अधिकारी ने तीन महीने से अधिक समय तक अतिरिक्त प्रभार संभाला है और जिस व्यक्ति को रिपोर्ट किया गया है, उससे वरिष्ठ है, तो वह अतिरिक्त प्रभार की क्षमता में उन लोकसवेकों के APAR लिख सकता है, जिनके कार्य का पर्यवेक्षण किया था ।

(9) जहां प्रतिवेदक अधिकारी किसी विशेष अवधि के लिए कर्मचारी के संबंध में एक प्रतिवेदक अधिकारी के रूप में APAR को लिखने के लिए सक्षम नहीं है, वहां रिपोर्ट(APAR) समीक्षा अधिकारी द्वारा प्रतिवेदक अधिकारी के रूप में लिखी जाएगी और स्वीकारकर्ता अधिकारी द्वारा समीक्षा अधिकारी और स्वीकारकर्ता अधिकारी दोनों के रूप में रिपोर्ट लिखी जाएगी।

यदि कोई अधिकारी किसी विशेष अवधि के लिए किसी कर्मचारी के APAR की समीक्षा करने के लिए सक्षम नहीं है, तो स्वीकारकर्ता अधिकारी APAR को स्वीकार करने के साथ ही समीक्षा भी करेगा।

इसी तरह, किसी भी अधिकारी के किसी प्रतिवेदक अधिकारी के रूप में या किसी समीक्षा अधिकारी के रूप में लिखने के लिए सक्षम नहीं होने की स्थिति में रिपोर्ट (APAR) की शुरुआत, समीक्षा और स्वीकृत्ति ये तीनों कार्य स्वीकारकर्ता अधिकारी द्वारा किए जाएंगे।

जहां कोई भी अधिकारी APAR को लिखने, उसकी समीक्षा करने या उसे स्वीकार करने के लिए सक्षम नहीं है, तो इस आशय की प्रविष्टि APAR में की जाएगी। समीक्षक अधिकारी को प्रतिवेदक अधिकारी के रूप में कार्य करते समय और स्वीकारकर्ता अधिकारी को समीक्षक अधिकारी के रूप में कार्य करते समय विशेष रूप से उन परिस्थितियों के बारे में बताना चाहिए जिनके तहत उन्हें ऐसा करना पड़ा।

(1) विभागाध्यक्ष/कॉडर नियन्त्रण अधिकारी द्वारा संबंधित लोकसेवक की APAR पूर्ण होकर प्राप्त होने पर उस लोकसेवक को सूचित कर अवलोकन हेतु आमंत्रित किया जाएगा एवं लोकसेवक को प्रतिवेदन का अवलोकन कराने के पश्चात अवलोकन करने का उससे प्रमाण पत्र लिया जाएगा।

यदि अवलोकन पश्चात लोकसेवक अपने कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन में अंकित प्रतिवेदक /समीक्षक/स्वीकारकर्ता अधिकारी की ग्रेडिंग/टिप्पणी/मूल्यांकन से सन्तुष्ट नहीं हो तो वह ग्रेडिंग / टिप्पणी/ मूल्यांकन सुधार हेतु 15 दिवस में अपना अभ्यावेदन संबंधित विभागाध्यक्ष/कॉडर नियंत्रण अधिकारी को प्रस्तुत करेगा।* लोकसेवक द्वारा APAR के अवलोकन करने पर यात्रा भता एवं उपस्थिति प्रमाण पत्र नहीं दिए जाने का प्रावधान है।**

(2) यदि संबंधित लोकसेवक अपने मूल्यांकन के विरूद्ध 15 दिवस में अभ्यावेदन प्रस्तुत नहीं करे तोवार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन (Annual Performance Appraisal Report) कार्मिक /संबंधित विभाग को भिजवाया जाए।

(3) यदि लोकसेवक किए गए मूल्यांकन के विरूद्ध ग्रेडिंग / टिप्पणी / मूल्यांकन में सुधार हेतु अभ्यावेदन प्रस्तुत करें तो विभागाध्यक्ष/कॉडर नियंत्रण अधिकारी द्वारा सक्षम स्तर से अनुमोदन प्राप्त कर एक माह में उस पर निर्णय लिया जायेगा।*

(4) यदि विभागाध्यक्ष/कॉडर नियन्त्रण अधिकारी द्वारा अभ्यावेदन पर लिए गए निर्णय से लोकसेवक सन्तुष्ट नहीं हो तो वह उसके विरूद्ध अपीलीय बोर्ड के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकता है ।

(5) अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवाओं के कर्मचारियों के मामलों में नियुक्ति अधिकारी और राज्य सेवाओं के अधिकारियों के मामले में कार्मिक विभाग तय करेगा कि APAR में कौन सी टिप्पणियां प्रतिकूल प्रविष्टियों का निर्माण करेगी और कौनसी टिप्पणियों के बारे में उस व्यक्ति को (जिसकी APAR है) सूचित किया जाना चाहिए। प्रतिवेदक अधिकारी के मामले में, निर्धारित स्थान (भाग – 1 1) के तहत दर्ज की गई टिप्पणियों को प्रतिकूल माना जाएगा समीक्षक अधिकारी के लिए, किसी प्रविष्टि को तब तक प्रतिकूल नहीं माना जाएगा जब तक कि समग्र मूल्यांकन भी असंतोषजनक न हो।

(6) किसी लोकसेवक की APAR में अंकित सभी प्रतिकूल प्रविष्टियाँ चाहे वे उसके प्रदर्शन से संबंधित हो चाहे उसके मूलभूत गुणों व क्षमताओं से संबंधित हो का निर्देशों में निर्धारित अवधि के भीतर भीतर उस लोकसेवक को सूचित करना चाहिए। एक लोकसेवक को कभी भी अपने उच्चाधिकारियों की राय से अनभिज्ञ नहीं रहना चाहिए। जहाँ उस लोकसेवक की सेवा को संतोषजनक नहीं माना जाता है, तो उससे संबंधित आलोचना को सूचित किया जाना चाहिए।

(*कार्मिक विभाग के आदेश क्रमांक प. 13(51)का/-1/ गो.प्र./2012 जयपुर दिनांक 22.02.2013
**कार्मिक विभाग के आदेश क्रमांक प. 1351)का /क-1/गो.प्र./2013 जयपुर दिनांक 17.9.2013)

(7) लाईलाज प्रकृति के सूचित दोषों को संप्रेषित करते समय एक निश्चित मात्रा में विवेक रखना चाहिए। उदाहरणतः किसी लोकसेवक को प्रतिवर्ष यह बताया जाता है कि उसकी बुद्धिमता औसत से कम है या वह बहुत संवेदनशील है ऐसे प्रकरण में यह लाभदायक की जगह हानिकारक हो सकता है। इसी प्रकार किसी व्यक्ति के शारीरिक दोषों के बारे में यदि APAR में अंकन है तो इस बारे मे उसको सूचित किया जाना आवश्यक नहीं है।

(8) प्रतिकूल टिप्पणियों को संप्रेषित करते समय, अच्छे बिंदुओं का उल्लेख भी किया जाना चाहिए। इसी तरह, जहां एक रिपोर्ट से पता चलता है कि किसी व्यक्ति ने दोषों को दूर करने के लिए सफल प्रयास किए हैं, जिन पर उसका ध्यान पहले आकर्षित किया गया था तो उसे उनके बारे में भी सूचित किया जाना चाहिए ताकि उसे मालूम हो सके कि सुधार के उसके प्रयासों को अनदेखा नहीं किया गया है।

(9) केवल ऐसी प्रतिकूल प्रविष्टियों को ही जिन्हें समीक्षा / स्वीकार करने वाले अधिकारी द्वारा स्वीकार किया गया है, को ही संप्रेषित किया जाना चाहिए। इसलिए समीक्षा करने / स्वीकार करने वाले अधिकारी को सामान्य रूप से यह बताना चाहिए कि वह प्रतिवेदक अधिकारी की टिप्पणी से सहमत है अथवा नहीं। यदि प्रतिवेदन बहुत संक्षिप्त, गूढ या अस्पष्ट हो तो आवश्यकता होने पर अतिरिक्त टिप्पणी भी दर्ज करनी चाहिए। जिन मामलों में निर्णय निलंबित किया गया है, उन पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।

(10) नियमान्तर्गत भरी हुई APAR में दर्ज की गई किसी भी प्रतिकूल प्रविष्टि को उस अधिकारी द्वारा लिखित रूप में संबंधित व्यक्ति को सूचित किया जाएगा, जिसके अधीन रिपोर्ट रखी गई है, निर्धारित समय सीमा में, व्यक्ति को अभ्यावेदन हेतु लिखित सूचना दी जानी चाहिए और उस आशय का अभिलेख संबंधित लोकसेवक के APAR डोजियर में रखा जाना चाहिए।

(11) किसी लोकसेवक के स्वभाव के संबंध में जब कोई सलाह/चेतावनी/प्रतिबन्धों के रूप में मौखिक या लिखित माध्यम से सूचना दी जाए तो अन्यन्त सावधानी रखने की आवश्यकता है। यह सलाह उसके लिए लाभदायक हो और उसमें सुधरात्मक प्रयास लाने वाली होनी चाहिए।

(12) संबंधित लोकसेवक को APAR में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणी की सूचना देते समय संबंधित अधिकारी की पहचान का खुलासा करना आवश्यक नहीं है।

(13) प्रतिकूल प्रविष्टियों के खिलाफ प्राप्त अभ्यावेदन को APAR में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इन्हें लोकसेवक के APAR फाइल के साथ एक अलग फाइल कवर में रखा जा सकता है। प्रतिकूल टिप्पणियों के खिलाफ प्राप्त अभ्यावेदन का निस्तारण कार्मिक विभाग द्वारा समय -समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाए।

(1) अन्य विभागों / संगठनों में प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारियों के मामले में जो राज्य द्वारा नियंत्रित होते हैं की APAR संलग्न परिशिष्ट में यथा निर्धारित चैनल के अनुसार लिखा जाएगा तथा नियुक्ति अधिकारी या कार्मिक विभाग को भेजा जा सकता है, जैसा भी मामला हो।

(2) ऐसे मामलों में, जब कोई लोकसेवक जो अपनी मूल सेवा में अपने ग्रहणाधिकार (LIEN) को धारण करते हुए किसी अन्य सेवा में शामिल हो गया था, अपनी मूल सेवा में लौट जाता है. तो निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है-

A. यदि अन्य सेवा में कार्यरत अवधि के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट (एस) / गोपनीय रिपोर्ट (एस) उपलब्ध हैं, तो उन्हें कर्मचारी के मूल्यांकन डोजियर में रखा जाएगा और पदोन्नति के प्रयोजनों के लिए इसे ध्यान में रखा जाएगा।

B. यदि वे उपलब्ध नहीं हैं, तो अप्राप्त रिपोर्ट के मामले में निर्धारित प्रक्रिया लागू होगी। 13. अध्ययन या प्रशिक्षण के अनुमोदित पाठ्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रतिनियुक्त लोकसेवकों के APAR के लेखन की प्रक्रिया जिस अवधि के लिए किसी कर्मचारी ने भारत या विदेश में किसी अनुमोदित संस्थान में कोई प्रशिक्षण लिया है, उसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए –

(1) जब भी कोई अधिकारी अध्ययन या प्रशिक्षण के अनुमोदित पाठ्यक्रम में भाग लेता है तो इसका इन्द्राज इस अवधि की APAR में करना चाहिए।

(2) प्रतिनियुक्त संस्था के प्रमुख से प्राप्त यदि कोई प्रतिवेदन है तो उस लोकसेवक की डोजियर में मूल रूप से रखी जानी चाहिए या उसका कोई सारभूत तथ्य उसमें प्रविष्ट होना चाहिए।

(1) प्रति वर्ष 31 मार्च को प्रशासनिक सचिव द्वारा राज्य सेवा के अधिकारियों की तथा नियुक्ति अधिकारी द्वारा अधीनस्थ और मंत्रालयिक सेवा के उन लोकसेवकों की सूची तैयार की जायगी जो कि निम्न श्रेणियों के अंतर्गत आते हैं:

A. जिन कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश दिया गया है।
B. जिन कर्मचारियों को निलंबित रखा गया।
C. जिन कर्मचारियों को आदेशों की प्रतीक्षा में रखा गया हैं।
D.उन कर्मचारियों के मामले में, जिनमें से कोई भी प्रतिवेदक अधिकारी, समीक्षा करने वाला अधिकारी और स्वीकार करने वाला अधिकारी APAR लिखने के लिए सक्षम नहीं है।
E. उन कर्मचारियों के मामले में जिनकी अवधि पाँच वर्ष से अधिक पुरानी है, पूरा होने के लिए लंबित है। (कार्मिक विभाग के आदेश क्रमांक ए. 1351)5./3-1/गोप्र./2006 जयपुर दिनांक 30.112012)

(2) उपर्युक्त व्यक्तियों के लिए, यदि अवधि तीन महीने या उससे अधिक है, तो कारणों का उल्लेख करने वाले एक नोट को डोजियर में “नो रिपोर्ट सर्टिफिकेट” के रूप में रखा जाना चाहिए।

वित्त विभाग (नियम अनुभाग) के पत्र क्रमांक प. 14 (B6) वित/नियम /2008 जयपुर दिनांक 04.11.2016 के निर्देश के तहत यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी के वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन गत 07 वर्षों की निरन्तरता में उपलब्ध नहीं है तो एसीपी के प्रकरणें का निर्धारण निम्न आधार पर किया जाए –

A. राज्य सेवा के अधिकारियों के मामले में जितने वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं है उतने वर्षों के अधिकतम गत 03 वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन देखे जा सकतें है।

B. इसी प्रकार राज्य सेवा के अतिरिक्त अन्य अधिकारियों / कर्मचारियों के मामले में जितने वर्षों के कार्यमूल्यांकन प्रतिवदेन उपलब्ध नहीं है उतने वर्षों के अधिकतम गत 02 वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवदेन देखे जा सकेगें।

C. यदि फिर भी 07 वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होते है तो ऐसे प्रकरणो में जितने वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन कम है उतने आगामी वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन के आधार पर 07 वर्षों के कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन पूर्ण होने पर ही एसीपी स्वीकार की जा सकेगी ।

क्र.सं.प्रतिवेदन प्रस्तुत करना, टिप्पणी अंकित करना व प्रेषित करनाप्रस्तुत/प्रेषित करने की अंतिम तिथि कार्यालय में कार्यरत लोकसेवकों के लिए (शिक्षक संवर्ग सहित)प्रस्तुत/प्रेषित करने की अंतिम तिथि विद्यालयों में कार्यरत लोकसेवकों के लिए (मंत्रालयिक कार्मिकों के अतिरिक्त)
1लोकसेवकों द्वारा APAR प्रस्तुत करना10 अप्रेल
15 अगस्त
2प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन पर टिप्पणी अंकित करना10 मई15 सितम्बर
3प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा समीक्षक अधिकारी को प्रेषित करना15 मई20 सितम्बर
4समीक्षक अधिकारी द्वारा प्रतिवेदन में टिप्पणी अंकित करना एवं संबंधित कार्यालय को संधारण हेतु निजवाना15 जून20 अक्टूबर

क्र.स.पदनाम (लोकसेवक) – Reporteeप्रतिवेदक अधिकारी – Reporting Officerसमीक्षक अधिकारी – Reviewing Officer स्वीकार कर्ता अधिकारी – Accepting Officer
1Govt. Secondary & Senior Secondary School Teacher Grade 3rd L-1 & L-2, PET Grade 3rd, Librarian Grade 3rd, Junior Assistant, Lab Technician Grade 3rdसंस्था प्रधानमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOजिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक
2Govt. Primary & Upper Primary School Teacher Grade 3rd L-1 & L-2, Prabodhak (ग्रामीण क्षेत्र)PEEO – पदेन पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारीमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOजिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारम्भिक
3Govt. Upper Primary School PET Grade 3rd (ग्रामीण क्षेत्र)PEEO – पदेन पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारीमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOजिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक
4Govt. Primary & Upper Primary School Teacher Grade 3rd L-1 & L-2, Prabodhak (शहरी क्षेत्र)अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रथम- ACBEO – Istमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOजिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) प्रारम्भिक
5Govt. Upper Primary School PET Grade 3rd (शहरी क्षेत्र)अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रथम- ACBEO – Istमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOजिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक
6Govt. Upper Primary School SENIOR TEACHER – वरिष्ठ अध्यापक (ग्रामीण क्षेत्र)PEEO – पदेन पंचायत प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारीमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOसंयुक्त निदेशक संभाग Joint Director
7Govt. Upper Primary School SENIOR TEACHER – वरिष्ठ अध्यापक (शहरी क्षेत्र)अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रथम- ACBEO – Istमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOसंयुक्त निदेशक संभाग Joint Director
8Govt. Secondary & Senior Secondary School Senior Teacher, PET Grade-2nd, Librarian Grade-2nd, Senior Assistant, Assistant Administrative Officer, Lab Assistant Grade-2ndसंस्था प्रधानमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOसंयुक्त निदेशक संभाग Joint Director
9Govt. Senior Secondary School Lecturer, PET Grade-1st, Librarian Grade-1stसंस्था प्रधानमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा Director
10Govt. Secondary & Senior Secondary School Principal & Headmasterमुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी – CBEOमुख्य जिला शिक्षा अधिकारीनिदेशक, माध्यमिक शिक्षा Director

नोट- 1. जिन माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक प्रधानाचार्य व व्याख्याता का पद रिक्त है एसे विद्यालयों में रिपोर्टिंग अधिकारी का कार्य उस विद्यालय का आहरण व वितरण अधिकारी करेगा अर्थात जिसके पास 03 पावर हैं।

2. उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है कार्यवाहक के रूप में यदि व्याख्याता , प्रधानाचार्य का निर्वहन कर रहा है तो रिपोर्टिंग अधिकारी संबन्धित सीबीईओ होगा।

3. Do you want choose dir/addirsec as reporting/reviewing officer का चयन फील्ड को नहीं करना है फील्ड इसे by डिफ़ॉल्ट नो (No) ही रखें यह ऑप्शन केवल निदेशालय व आईएएसीई अजमेर, बीकानेर के चुनिंदा पदों के लिए ही है।

क्र. सं. प्रश्न जबाब
1मैं शहरी क्षे़त्र में कार्यरत उप्रा विद्यालय में संस्थाप्रधान हूॅ निर्धारित चैनल के अनुसार मेरा रिर्पोटिग ACBEO प्रथम है वर्तमान में UCEO व्यवस्था प्रारंम्भ की गई मुझे अपना प्रतिवेदन किसे प्रेषित करना है?निर्धारित चैनल के अनुसार ही प्रतिवेदन प्रेषित किया जाना है
2मैं व्याख्याता पद पर कार्यरत हुंॅ मेरे पास स्वयं के विद्यालय(राउमावि) का आहरण वितरण अधिकार( 03 पावर) है। मेरे रिपोर्टिंग अधिकारी कौन होंगे?आप अपना रिपोर्टिंग अधिकारी के रूप में न्यूनतम 03 माह के सपुरविजन में सेवा शर्त की पालना करते हुए मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को उनके अधीन की गई अवधि के अनुसार चयन करें।
3मेरे विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। प्रधानाचार्य का दायित्व किसी व्याख्याता के पास है लेकिन उनके पास 03 पावर नहीं है। इस परिस्थिति मे मेरे रिपोर्टिग अधिकारी कौन होंगे?विद्यालय के अन्य कार्मिकों के साथ-साथ आपके भी रिपोर्टिग अधिकारी वहीं होंगे जिनके पास आपके विद्यालय का आहरण वितरण अधिकार/03 पॉवर है।
4मैंने दिनांक 01.02.2022 को द्वितीय श्रेणी से पदोन्न्त होकर अन्य स्कूल में व्याख्याता पद पर कार्यग्रहण किया है। मेरे रिपोर्टिग व त्मअपमूपदह अधिकारी अलग-अलग होंगे क्या?दोनों अवधि में रिपोर्टिग अधिकारी संबंधित प्रधानाध्यापक(मावि)/प्रधानाचार्य होगें जिनके अधीन आपने सेवा की है एवं रिवींविगअधिकारी एक ही होंगे जो आपके अंतिम पदस्थापन के अनुसार हांेगे। परिपत्र 23.11.20 के दिशा-निर्देशों की पालना करते हुए
5रामावि/राउमावि में द्वितीय श्रेणी अध्यापक के पास प्रधानाचार्य का चार्ज हैं। क्या उन्हे रिपोर्टिग अधिकारी के रूप में चयन किया जा सकता है?नहीं
6मैं दिनांक 01.07.2022 से 01.10.2022 तक द्वितीय श्रेणी अध्यापक था मैने विभागीय पदोन्नति उपरांत दिनांक 02.10.2022 को व्याख्याता के रूप मे कार्यग्रहण कर लिया है। मैं एपीएआर भरते समय लोकसेवक के प्रकार के रूप में किस पद का चयन करूंगा?एपीएआर वर्ष के अन्तिम पद का चयन लोक सेवक प्रकार में करना होता है। आपके संबंध में आपको लोक सेवक के प्रकार के रूप में व्याख्याता पद का चयन करना होगा।
7मैं रिपोर्टिग अधिकारी हुॅं मैं अपने शाला दर्पण लॉगिन से लोकसेवक से प्राप्त एपीएआर कैसे फारवर्ड करूॅंगा?आप लोकसेवक से प्राप्त एपीएआर पर अपनी टिप्पणी अंकित करने से पश्चात् सबमिट करें एवं ई-साइन कर उसे समीक्षक अधिकारी को फारवर्ड करें।
8मैंने अपने एपीएआर में रिपोर्टिग/ रिवीविग /अवधि/रिजल्ट/अन्य विवरण गलत भर दिया है अब मैं उसे किस प्रकार डिलीट/रिजेक्ट करवा सकता हूॅं?आप अपना एपीएआर आवेदन यथोचित कारण सहित प्रार्थना पत्र नियंत्रण अधिकारी से अग्रेषित करवाकर सीबीईओ/सीडीईओ कार्यालय लॉगिन से डिलीट करवा सकते है। उक्त कार्य प्रतिवेदक अधिकारी द्वारा समीक्षक अधिकारी को प्रेषित करने से पूर्व होगा।
9मॉड्यूल में प्रविष्टियॉ कौनसे font में की जानी है?English या Mangal (Unicode)
10मैं अपने समीक्षक अधिकारी के रूप सीडीईओ का चयन करना चाहता हूॅ जिनके पास जिशिअ (मुख्यालय)का भी प्रभार है। सीडीईओ के रूप में सर्च करते समय इनका नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है?मूल पदस्थापित पद के अनुसार ही नाम प्रदर्शित होगा। आपको जिशिअ (मुख्यालय) के रूप में सर्च करके चयन करना होगा।
11मेरे समीक्षक अधिकारी पदोन्न्ति उपनिदेशक से संयुक्त निदेशक के पद पर हो गई है क्या मुझे अपना प्रतिवेदन उन्हे भेजना है?जिसके सुपरविजन में न्युनतम 03 माह सेवा की है उसे ही प्रतिवेदन प्रेषित किया जाना है चाहे पदनाम या कार्यालय परिवर्तन हो गया है।
12मैं शिक्षा विभाग का कार्मिक हुॅं एवं वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर अन्य विभाग में कार्यरत हुॅं क्या मुझे अपनी एपीएआर ऑनलाईन भरनी है?नहीं। आप अपनी एपीएआर पूर्व की भांति ऑॅफलाईन ही भेजें।
13मैं अपना एपीएआर स्टेटस कैसे देख सकता हुॅं?आप अपने स्टाफ लागिन में एपीएआर टेब में एपीएआर स्टेटस कॉलम मे जाकर एपीएआर की वर्तमान स्थिति को देख सकते है।
14मैं रिपोर्टिग अधिकारी हुॅं। लोकसेवक द्वारा प्रेषित एपीएआर मैं अपने लॉगिन पर किस टेब मे देख सकता हुॅं?आप अपने स्टाफ लॉगिन मे एपीएआर टेब में Request for Apar assessment मेे जाकर देख सकते है।
15मै संस्था प्रधान के रूप मेे शाला के समग्र रिजल्ट का विवरण कैसे भर सकता हुॅ?आप रिजल्ट वाले कॉलम में कक्षा 5,8,10 का परिणाम ऑल का चयन कर एवं कक्षा 12 का रिजल्ट संबंधित स्ट्रीम का चयन कर भर सकते है।
16मैने प्रथम बार राजकीय सेवा में दिनांक 03.10.2022 को कार्यग्रहण किया है। मैने दिनांक 01.07.2022 से 02.10.2022 तक एपीएआर की प्रविष्टि कॉलम में राजकीय सेवा में नहीं था एवं 03.10.2022 से 30.06.2023 तक एपीएआर की प्रविष्टि की जानी का चयन कर रिपोर्टिग अधिकारी को अग्रेषित कर दिया था।
रिपोर्टिग अधिकारी द्वारा मेरे विवरण का सत्यापन कर दिया गया है उसके उपरांत भी एपीएआर नहीं भरी जा रही है। क्या कारण हो सकता है?
दिनांक 01.07.2022 से 02.10.2022 तक की अवधि का राजकीय सेवा में नहीं होने का सत्यापन सीबीईओ कार्यालय की लॉगिन से होने के उपरांत ही भरा जाएगा।
17मेरे रिपोर्टिंग एवं रिवीविंग अधिकारी सर्च करने पर प्रदर्शित नहीं हो रहे है। क्या कारण हो सकता है?संबंधित अधिकारी का शाला दर्पण स्टॉफ विंडो में रजिस्ट्रेशन एवं शाला दर्पण पोर्टल पर आधार वेरिफिकेशन होना आवश्यक है इसके अभाव में उनका नाम प्रदर्शित नहीं होगा।
18मैंने प्रथम बार राजकीय सेवा में दिनांक 03.09.2022 को शिक्षा विभाग में कार्यग्रहण किया है। मैं एपीएआर प्रपत्र में 1 जुलाई, 2022 से 02.09.2022 तक की अवधि का उल्लेख किस प्रकार से करूगा?आप एपीएआर में 1 जुलाई, 2022 से 02.09.2022 तक की अवधि का उल्लेख उक्त अवधि में ’लोकसेवक राजकीय सेवा में नहीं था’ आप्शन का चयन कर करें। उक्त प्रविष्टि संबंधित सीबीईओं लॉगिन से वेरिफाई भी की जानी है।

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यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र

यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र / Youth And Eco Club Guideline And Utility Certificate : - समग्र शिक्षा द्वारा सत्र 2023-24 की वार्षिक कार्य योजना एवं बजट के अतंर्गत राज्य के प्राथमिक शालाओं हेतु राशि रू. 5000 व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 10000 सीनियर सेकेण्डरी शालाओं हेतु राशि रू. 10,000 की राशि जारी कर व्यय के लिये प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान गयी है।

शिक्षा का सर्वोपरि उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास है। समाज में शहरीकरण, तकनीकी प्रगति और जनसंचार माध्यमों के प्रभाव जैसे बदलावों के कारण यह आवश्यकता पैदा हुई है कि स्कूलों को न केवल अपने छात्रों के संज्ञानात्मक विकास का पोषण करना चाहिए, बल्कि उनकी भावात्मक और मनो-मोटर क्षमताओं को भी बढ़ावा देना चाहिए जो उन्हें सक्षम बनाएगा। ज़िंदगी।

समग्र शिक्षा की परिकल्पना है कि स्कूलों में दी जाने वाली शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि शिक्षार्थी अपनी प्रतिभा को पूरी क्षमता से विकसित कर सकें। शैक्षिक और सह-शैक्षिक दोनों क्षमताओं को समान महत्व देने से, बच्चे और युवा जीवन कौशल हासिल करेंगे जो उन्हें अपने अधिकारों को जानने, अपनी चिंताओं को स्पष्ट करने, आत्मसम्मान का निर्माण करने, आत्मविश्वास और लचीलापन विकसित करने और नकारात्मक भावनाओं का मुकाबला करने में मदद करेगा। तनाव शर्म और डर. इससे उनकी स्वयं की जिम्मेदारी लेने, समाज में दूसरों के साथ संबंध बनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की क्षमता भी बढ़ेगी। इन कौशलों को सैद्धांतिक दृष्टिकोण के बजाय अनुभवात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है।

यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र / Youth And Eco Club Guideline And Utility Certificate
यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र / Youth And Eco Club Guideline And Utility Certificate

यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र Youth And Eco Club Guideline And Utility Certificate

यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र / Youth And Eco Club Guideline And Utility Certificate

  1. यूथ क्लब के तहत बच्चों में जीवन जीने का कौशल, आत्मसम्मान एवं आत्मविश्वास विकसित करने तथा तनाव, भय एवं संकोच जैसे मनोविकारों को दूर कर सोच में लचीलापन विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक राजकीय विद्यालय में यूथ क्लब की स्थापना की गयी है।
  2. ईको क्लब के तहत बच्चों को अपने आस-पास के पर्यावरण, जैव-विविधता, जलवायु, स्थानीय पारिस्थितिकी, पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाने तथा पर्यावरण गतिविधियों एवं प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने के लिए क्षमता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रत्येक राजकीय विद्यालय में ईको क्लब की स्थापना की गयी है। विशेष रूप से विद्यार्थियों में स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की समझ विकसित की जानी है।
  3. विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण हेतु हरित पाठशाला एवं विद्यालय वाटिका / किचन गार्डन को लागू करने के लिये ईको क्लब पुर्नगठित करना। साथ ही बच्चों में पर्यावरण की समझ, संरक्षण के महत्व, वातावरण को स्वच्छ बनाना, वृक्षारोपण व संरक्षण आदि कार्य को यूथ एवं ईको क्लब अन्तर्गत विद्यार्थियों को भी सहभागी बनाया जाये ।
  4. ईको क्लब के गठन का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को कम कर जलवायु के प्रति विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाना ।
  5. विश्व पर्यावरण की थीम "ईको सिस्टम रिस्टोरेशन: रीइमेजिन ( फिर से बनाना) एवं पुर्नस्थापना" करने के उद्देश्य की क्रियान्विति हेतु राजस्थान के भौगोलिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुये उष्ण व अर्द्ध शुष्क जलवायु में हरियाली को बनाये रखना, जल संरक्षण एवं वनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है।

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यूथ एवं ईको क्लब गठन की प्रक्रिया:-

  1. प्रत्येक विद्यालय में यूथ एवं ईको क्लब के तहत प्रारम्भिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8) के विद्यार्थियों के लिये यूथ एवं ईको क्लब के तहत पांच सदन (हाऊस) बनाये जायेंगे इनके नाम पृथ्वी, जल, वायु, आकाश एवं अग्नि होंगे।
  2. माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 9 से 12 ) के लिये यूथ एवं ईको क्लब के तहत पांच सदन (हाऊस) बनाये जायेंगे इनके नाम. पृथ्वी, जल, वायु, आकाश एवं अग्नि होंगे।
  3. विद्यालय संस्था प्रधान यूथ एवं ईको क्लब के प्रभारी अधिकारी होंगे।
  4. संस्था प्रधान (प्रभारी अधिकारी) की भूमिका सहायक मार्गदर्शक एवं कार्यक्रम के लिये सुविधा उपलब्ध कराने की होगी। विद्यालय में हाऊस व्यवस्था के तहत यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियों को संचालित करने की समस्त जिम्मेदारी संस्था प्रधान की होगी ।
  5. संस्था प्रधान द्वारा विद्यालय के प्रत्येक शिक्षक / शिक्षिका को सदन (हाऊस) का प्रभार दिया जायेगा। विद्यालय में शिक्षकों की संख्या सदन (हाऊस) की संख्या से अधिक होने की स्थिति में कुछ सदनों के लिये एक से अधिक प्रभारी शिक्षक / शिक्षिका बनाये जायेंगे। विद्यालय में सदन (हाऊस) से कम शिक्षक उपलब्ध होने की स्थिति में कुछ शिक्षकों को एक से अधिक सदन (हाऊस) का प्रभारी शिक्षक नियुक्त किया जायेगा। वरिष्ठता के आधार पर वरिष्ठ शैक्षिक कार्मिक को अपेक्षाकृत अधिक सदन (हाऊस) का प्रभार दिया जायेगा ।
  6. प्रारम्भिक शिक्षा की प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों को पांच भागों में विभाजित कर प्रत्येक भाग के विद्यार्थी को एक सदन (हाऊस) के नाम से सम्बोधित किया जायेगा। इस प्रकार प्रारम्भिक शिक्षा की कक्षाओं के पांचों सदनों में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों का समान संख्या में प्रतिनिधित्व हो सकेगा। इसी प्रक्रिया के तहत माध्यमिक शिक्षा की कक्षाओं के लिये पांच सदन बनाये जायेंगे।
  7. इस प्रकार प्रारम्भिक शिक्षा के विद्यालयों में यूथ एवं ईको क्लब के तहत पांच सदन (हाऊस) कार्य करेंगे एवं माध्यमिक शिक्षा के विद्यालयों में यूथ एवं ईको क्लब के तहत उन्हीं नाम से पांच सदन (हाऊस) कार्य करेंगे।
  8. विद्यालय में नव प्रवेशित विद्यार्थी जिस सदन (हाऊस) का सदस्य बनेगा विद्यालय की अन्तिम कक्षा तक उसी सदन (हाऊस) का सदस्य रहेगा।
  9. प्रत्येक सदन (हाऊस) की गतिविधियों को प्रभारी शिक्षक / शिक्षकों द्वारा संचालित करवाया जायेगा। प्रत्येक सदन (हाऊस) में सभी विद्यार्थियों का स्तर समान होगा। विद्यार्थियों में वरिष्ठ एवं कनिष्ठ जैसी व्यवस्था को विकसित नहीं करनी है। सदन (हाऊस) की गतिविधियों को संचालित करने में विद्यार्थियों का सक्रिय सहयोग लिया जायेगा। अच्छा प्रदर्शन करने के लिये बच्चों को प्रोत्साहित किया जायेगा एवं प्रत्येक बच्चे को समान रूप से अवसर प्रदान किया जायेगा।
  10. विद्यालय समय पश्चात रोटेशन के आधार पर एक अध्यापक / शारीरिक शिक्षक प्रभारी के रूप में विद्यालय समय पश्चात बच्चों के साथ खेल मैदान में उपस्थित रहकर विद्यालय के खेल मैदान, खेल संसाधन इत्यादि का उपयोग करेंगे।
  11. पांच मूल तत्व आधारित नामों में से जिस नाम तत्व से सम्बन्धित सदन (हाऊस) में विद्यार्थियों को प्रवेश मिला है, उस सदन (हाऊस) के नाम के अनुरूप विषय पर विद्यार्थियों के लिये भाषण, निबन्ध लेखन, पत्र लेखन, पोस्टर बनवाना, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करवायी जायें। साथ ही भाषा, सामाजिक विज्ञान के विषय यथा भूगोल, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान तथा विज्ञान संकाय के विषयों यथा जीव विज्ञान, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, गणित तथा खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनोमी) आदि को सदन (हाऊस) के नाम से साथ जोड़ते हुए विषय एवं प्राकृतिक मूल तत्व की महत्वता एवं सम्बद्धता को समझाने का उपक्रम विद्यार्थियों से करवायें।
  12. सदस्य विद्यार्थीगणों को उनके स्वयं के नाम के अर्थ को समझाते हुए उसे अपने सदन (हाऊस) के नाम के परिप्रेक्ष्य में सम्बद्ध करने के प्रयास के लिये प्रेरित किया जायेगा। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी को सदन (हाऊस) के नाम की महत्वता बतलाते हुए इस नाम की अन्य विषयों से सम्बद्धता को इन्टरनेट, पत्र-पत्रिकाओं इत्यादि स्त्रोतों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिये प्रेरित किया जायेगा। इससे बच्चों के ज्ञान में वृद्धि होगी तथा वे अपने सदन के नाम को समग्र रूप से समझ सकेंगे एवं अन्य विषयों से सम्बद्ध कर सकेंगे।
  13. प्रत्येक सदन (हाऊस) में यूथ एवं ईको क्लब की समस्त गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। ये गतिविधियां प्रभारी शिक्षक / शिक्षकों के निर्देशन में संचालित की जायेंगी।
  14. समस्त विद्यार्थियों को यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियों में भाग लेने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा।
  15. समय - समय पर प्रारम्भिक शिक्षा के विद्यार्थियों के पांचों सदन (हाऊस) के मध्य यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियों की प्रतियोगिता आयोजित की जायेंगी एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिये पुरस्कृत किया जायेगा। इसी प्रकार की प्रतियोगिताएं माध्यमिक शिक्षा के विद्यार्थियों के पांचों सदनों के मध्य आयोजित की जायेंगी।
  16. यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियों का आयोजन शिविरा कलैण्डर अनुसार निर्धारित दिवसों एवं विद्यालय समय पश्चात् तथा अवकाशों के दौरान किया जायेगा।
  17. यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों से बाल सभा के दौरान गतिविधि का प्रदर्शन कराया जायेगा।
  18. विद्यार्थी उपस्थिति रजिस्टर में विद्यार्थी के नाम के सम्मुख उसके सदन (हाऊस) का नाम भी अंकित किया जाये ताकि विद्यार्थी को सदन (हाऊस) के नाम से भी पहचाना जाये।
  19. विद्यालय की प्रारम्भिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा के प्रत्येक सदन (हाऊस) का रजिस्टर संधारित किया जायेगा। रजिस्टर के मुख्य पृष्ठ पर यूथ एवं ईको क्लब तथा सदन (हाऊस) का नाम अंकित होगा रजिस्टर में सदन * (हाऊस) के विद्यार्थियों के नाम व कक्षा अंकित होगी। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी की रूचि की गतिविधि अंकित की जायेंगी आयोजित की गई प्रत्येक गतिविधि का संक्षिप्त विवरण एवं दिनांक तथा आयोजन की समयावधि अंकित कर नोडल अधिकारी व संस्था प्रधान द्वारा प्रमाणित किया जायेगा । SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति
  20. विद्यालय अवलोकन के समय संस्थाप्रधान द्वारा अवलोकन अधिकारी को "यूथ एवं ईको क्लब रजिस्टर" का अवलोकन करवाया जाकर हस्ताक्षर प्राप्त किये जायेंगे।

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यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियाँ:-

यूथ क्लब गतिविधियाँ:-

  • यूथ क्लब गतिविधियों में समस्त खेल व शारीरिक गतिविधियाँ, योग, ड्रामा, वाद-विवाद, संगीत, कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ एवं रीडिंग गतिविधियाँ इत्यादि शामिल हैं।
  • विद्यालयों में अनुपयोगी सामग्रियों को उपयोगी बनाने हेतु विद्यार्थियों के रचनात्मक कार्य कौशल बोद्धिक क्षमताओं का विकास करने के अवसर प्रदान किये जायें। इस हेतु विद्यार्थियों को गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों का मार्गदर्शन / सहयोग लिया जाये।

ईको क्लब गतिविधियाँ:-

  • ईको क्लब गतिविधियों में पर्यावरण, जैवविविधता, जलवायु स्थानीय पारिस्थितिकी, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति बच्चों में जागरूकता लाने वाले कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
  • प्रदर्शनी, पेंटिंग, लेखन, वृक्षारोपण, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य पर आधारित चलचित्रों का प्रदर्शन, अभिभावकों व सेवानिवृत्त एवं सेवारत राजकीय अधिकारी, शिक्षक, डॉक्टर, कोच, पर्यावरण के लिए कार्य करने वाले व्यक्तियों की वार्ता का आयोजन किया जायेगा।
  • सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जाँच में सहयोग प्रदान किया जायेगा। इसके अन्तर्गत सभी बच्चों की लम्बाई, वजन एवं शारीरिक बीमारी का रिकॉर्ड विद्यार्थी उपस्थिति रजिस्टर में संधारित किया जायेगा। विद्यालय में आयोजित सभी प्रकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सहयोग प्रदान किया जायेगा ।
  • प्रत्येक माह के अंतिम दिवस को विद्यालय में "स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। जिसमें विद्यालय परिसर एवं कक्षा कक्षों की साफ-सफाई, ठोस कचरा निस्तारण, जल निकास एवं पानी की टंकियों की साफ-सफाई, सामूहिक रूप से शिक्षकों के निर्देशन में की जायेगी।
  • सप्ताह में एक बार प्रार्थना स्थल पर सभी बच्चों की शारीरिक स्वच्छता जैसे कि नाखून, स्नान, सिर के बालों, दाँतों, यूनिफॉर्म, जूते-मोजों इत्यादि की साफ-सफाई की जाँच की जायेगी एवं बच्चों को शारीरिक स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जायेगा।
  • जल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों आयोजित की जाकर अपने आस-पास के लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जायेगा जल संरक्षण के प्रति आयोजित होने वाले "जल शक्ति अभियान अन्तर्गत सभी विद्यालयों के ईको क्लब द्वारा जल संरक्षण के प्रचार-प्रसार के आयोजन किये जायेंगे।
  • विद्यार्थियों में सृजनात्मक क्षमताओं को पहचानने एवं उन्हें प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विद्यालय के अनुपयोगी, निष्क्रिय व अन्य संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग किया जाकर उनकी सृजनात्मक क्षमताओं को विकसित किया जाये।
  • विद्यार्थियों में सहशैक्षिक व मनोरंजक गतिविधियों का बढ़ावा देने के लिये विद्यालय के अनुपयोगी, निष्क्रिय सामानों का विद्यालय समय पश्चात व अवकाश दिवसों में भी विद्यालय के खेल मैदान, खेल उपकरण व अन्य गतिविधियों में उपयोग में लिया जा सकता है, जिससे बच्चों में सृजनात्मक एवं संज्ञानात्मक समझ का विकास हो सके।जिला व राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता फॉर्म एक्सल प्रोग्राम : उम्मेद तरड
  • विद्यालयों में पर्यावरण को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न गतिविधियां, पर्यावरण संरक्षण सम्बन्धी वार्तायें, निबन्ध प्रतियोगिता, रैली इत्यादि का आयोजन किया जाये।
  • विद्यालय में चारदीवारी, पर्याप्त भूमि एवं जलस्त्रोत उपलब्ध होने की स्थिति में पोषण वाटिका एवं फलदार पौधों एवं किचन गार्डन को लगाया जाये।
  • विद्यालय परिसर में 200 पौधे लगाये जाने की स्थिति में सम्बन्धित सीआरसी / संस्था प्रधान द्वारा सम्बन्धित ग्राम पंचायत सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी से अग्रिम सम्पर्क समन्वय स्थापित कर विद्यालय में लगाये जाने वाले पोषण वाटिका / नर्सरी की समुचित सुरक्षा हेतु राज्य सरकार के आदेश क्रमांक PS/PSSE / 2021 जयपुर दिनांक 23.06.2021 के अनुसार महात्मा गांधी मनरेगा योजना से एक श्रमिक की सेवायें प्राप्त करने के सम्बन्ध में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज द्वारा सहमति प्रदान की गयी है। समस्त सीआरसी/ संस्था प्रधान संलग्न आदेशानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें।
  • पर्यावरण को सुरक्षित एवं संरक्षित रखना हमारा कर्त्तव्य है। पर्यावरण संतुलन बनाने व विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों में पर्यावरण की समझ विकसित करने के लिये निदेशालय माध्यमिक शिक्षा राज, बीकानेर के आदेश क्रमांक शिविरा-माध्य / मा-स / पर्यावरण / 2017 / 136 दिनांक 11 जून, 2021 द्वारा लागू "विद्यालय वाटिका", "हरित विद्यालय योजना" की कार्ययोजना बनाकर ईको क्लब में बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित की जाये।
  • विद्यार्थियों को सड़क पर पैदल चलने एवं वाहन चलाने के नियमों की जानकारी दी जायेगी।

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यूथ एवं ईको क्लब अन्तर्गत हरित विद्यालय हेतु मानक -

भौतिक सुविधाओं में

  • विद्यालय की समस्त भौतिक सुविधाऐं यथा बालक बालिकाओं हेतु पृथक-पृथक सुविधाओं युक्त शौचालय-मूत्रालय, पेयजल एवं हाथ धुलाई व्यवस्थायें क्रियाशील होनी चाहिये।
  • विद्यालय के प्रवेश द्वार के समीप यूथ एवं ईको क्लब युक्त संलग्न प्रारूप के अनुसार बोर्ड बना हुआ हो ।
  • विद्यालय में पेड़ पौधों की सुरक्षा एवं सुरक्षित वृक्षारोपण हेतु पूर्ण एवं सुरक्षित चार दीवारी।
  • विद्यालय में हरित जलवायु क्षेत्र / ग्रीन कॉर्नर स्थापित किया हुआ हो जहाँ बच्चों द्वारा पाँचों हाउस अर्थात पंच तत्वों पर नवाचार किया गया हो।
  • विद्यालय में सुचारू एवं पर्याप्त विधुत सुविधा की उपलब्धता हो।
  • विद्यालय में नवाचार हेतु आवश्यक उपकरणों की किट अर्थात बागवानी किट, कबाड़ से जुगाड़ द्वारा उपयोगी सामग्री निर्माण हेतु उपकरण एवं सामग्री की उपलब्धता।
  • सुचारू एवं पर्याप्त जल युक्त जल स्त्रोत एवं जल भंडारण व्यवस्था । Baseline Assessment Model Papers
  • विद्यालय प्रबन्धन समिति का यूथ एवं ईको क्लब की गतिविधियों में सहयोग एवं सहभागिता ।

जिलेवार भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य -

  • डाइस 2021-22 में प्रविष्ट राजकीय प्रारम्भिक शिक्षा के 53005 एवं माध्यमिक शिक्षा मद के 15360 विद्यालयों के लिये बजट का प्रावधान स्वीकृत है (शून्य नामांकन वाले विद्यालयों को छोड़ते हुये ) ।
  • प्रति विद्यालय वित्तीय प्रावधान (राशि रूपये) :-
    • प्राथमिक विद्यालय 5000/-₹
    • उच्च प्राथमिक विद्यालय 10000/-₹
    • माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय 15000/-₹

समग्र शिक्षा अभियान (योजना संचालन पोर्टल) SNA COMPONENT 2023 संचालन पोर्टल) SNA COMPONENT 2023

यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र  Youth And Eco Club Guideline And Utility certificate
यूथ एवं ईको क्लब : समग्र दिशा निर्देश एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र Youth And Eco Club Guideline And Utility certificate

सरकारी नौकरी, परीक्षा परिणाम, भर्ती और प्रतियोगी अपडेट-

लेखा सम्बन्धी बिन्दु

  • इस मद में निर्धारित बजट सीमा से अधिक व्यय नहीं किया जाये। निर्धारित सीमा से अधिक व्यय किये जाने पर
    संबंधित के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाकर वसूली की जाएगी। क्रय हेतु वित्तीय नियमों का ध्यान रखा जाये ।
  • किये गये व्यय का निर्धारित समयावधि में उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया जाये ।
  • राशि का उपयोग गतिविधि व शिक्षा मंत्रालय के दिशा निर्देशानुसार एवं वित्तीय नियमों की पूर्ण पालना करते हुये विहित प्रक्रियानुसार किया जाना सुनिश्चित करें।
  • क्रय की जाने वाली सामग्री में "राजस्थान लोक उपापन में पादरर्शिता अधिनियम 2012 एवं नियम 2013" की अक्षरशः पालना सुनिश्चित की जाये ।
  • प्रत्येक प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रवेश द्वार के पास 4ft x 2.5ft का स्थायी बोर्ड लगवा कर हरे रंग की पूर्ण पृष्ठभूमि में पीले रंग से *यूथ एवं ईको क्लब, समग्र शिक्षा राजस्थान* अंकित करवाना है|

अन्य निर्देश

  • संलग्न परिशिष्टानुसार विद्यालय / ब्लॉक से उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकल रूप से जिला उपयोगिता प्रमाण पत्र कर परिषद का प्रेषित करें।
क्र सं.विवरण डाउनलोड लिंक
1.विद्यालयी स्तरीय उपयोगिता प्रमाण पत्र यहाँ क्लिक करें
2.ब्लॉक स्तरीय उपयोगिता प्रमाण पत्र यहाँ क्लिक करें
3.यूथ एवं ईको क्लब बोर्ड सेम्पलयहाँ क्लिक करें
4.यूथ एवं ईको क्लब विभागीय ऑफिशियल दिशा निर्देशयहाँ क्लिक करें

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सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि : List of articles being commonly used in the Departments giving the minimum period of their serviceability- (सरकारी कार्यालयों में सामान्यतया उपयोग की जाने वाली भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि)

नमस्कार, शिक्षक बंधुओं। इस आर्टिकल में हम अपने विद्यालय या अपने कार्यालय में काम में आने वाली सरकारी भंडार सामग्री का उपयोग अवधि के बारे में जानेंगे। हमने यह जानकारी सरकारी आदेशों और सर्कुलरों के माध्यम से तथा विद्वज्जनों के माध्यम से एकत्र की है और आपको बताने का प्रयास किया है कि सरकारी कार्यालयों या विद्यालयों के अंदर पड़ी भौतिक सामग्री की जीवन अवधि कितनी होती है? (Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि) उन्हें कितने समय के बाद नकारा घोषित किया जा सकता है, इसके बारे में पूरा आर्टिकल है। कृपया इस आर्टिकल को अपने मित्रों और दोस्तों के साथ तथा कर्मचारियों को जरूर शेयर करे।

नकारा सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया यहाँ से जाने

Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि
Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि
S. No.Name of articleMinimum period of serviceabilityS. No.Name of articleMinimum period of serviceability
1पलङ्ग लोहे के15 वर्ष26बरसाती5 वर्ष
2टी ट्रे आयरन8 वर्ष27फ्लीट पम्प2 वर्ष
3एश ट्रे टिन5 वर्ष28मुढ्ढा1 वर्ष
4घाट स्टेण्ड लोहे का5 वर्ष29लेदर बेग3 वर्ष
5साइन बोर्ड10 वर्ष30चिकें5 वर्ष
6नोटिस बोर्ड10 वर्ष31प्लास्टिक बाल्टी4 वर्ष
7डोरमेन्ट लोहे की10 वर्ष32प्लास्टिक मग2 वर्ष
8अंगीठी5 वर्ष33थर्मस फ्लास्क5 वर्ष
9तसला लोहे का10 वर्ष34टी सेट2 वर्ष
10घडा लोहे का15 वर्ष35गिलास शीशे का5 माह
11खुरपा, फावडा, कुल्हाडी आदि5 वर्ष36जंग शीशे के1 वर्ष
12सुराही स्टेण्ड लोहे का5 वर्ष37फोटोग्राफ10 वर्ष
13ताले बडे10 वर्ष38तस्वीरें10 वर्ष
14ताले छोटे3 वर्ष39टेबल ग्लास5 वर्ष
15लालटेन5 वर्ष40पीतल ताम्बे का कप15 वर्ष
16वाटर कुलर/एयर कुलर10 वर्ष41स्टेनलेस स्टील के गिलास10 वर्ष
17साइकिल5 वर्ष42स्टेनलेस स्टील के जग10 वर्ष
18दीवार घडी20 वर्ष43पीतल तांबे के रामसागर10 वर्ष
19टेबल घडी (टाइम पीस)10 वर्ष44पीतल तांबे का लोटा10 वर्ष
20पेट्रोमेक्स10 वर्ष45पीतल तांबे का घडा10 वर्ष
21टाॅर्च5 वर्ष46पीतल तांबे का भगोना10 वर्ष
22इमरजेन्सी ओटोमेटिक लाइट5 वर्ष47पीतल तांबे का गिलास, थाली, चम्मच, कटोरी आदि10 वर्ष
23एम्प्लीफायर, ग्रामोफोन, लाउडस्पीकर15 वर्ष48पीतल ताम्बे की बाल्टी10 वर्ष
24रेडियो, ट्रांजिस्टर10 वर्ष49पीतल ताम्बे का स्टोव15 वर्ष
25छाता5 वर्ष50पीतल ताम्बे का तराजू15 वर्ष
Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

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Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

S.No.Name of articleMinimum period of serviceabilityS.No.Name of articleMinimum period of serviceability
51पीतल ताम्बे के चरास15 वर्ष74मेट्रेसेज फोम15 वर्ष
52एल्यूमीनियम मग6 वर्ष75जाजम10 वर्ष
53सनमाइका ट्रे5 वर्ष76मेजपोश, गरम ब्लेजर8 वर्ष
54बिजली के हीटर5 वर्ष77मेज, रेक अलमारी आदि लकडी की15 वर्ष
55बिजली के स्टेबलाइजर10 वर्ष78कुर्सी, स्टूल बैन्च आदि15 वर्ष
56बिजली की घंटी2 वर्ष79पेपर रैक/बुक रैक आदि15 वर्ष
57बिजली की ट्यूबलाइट3 वर्ष80पलंग लकडी का15 वर्ष
58दरी15 वर्ष81सोफा सेट20 वर्ष
59जूट कारपेट5 वर्ष82लकडी की सन्दूक10 वर्ष
60निवार8 वर्ष83लकडी के पार्टिशन15 वर्ष
61तकिये5 वर्ष84पेपर टी ट्रे लकडी की8 वर्ष
625 वर्ष85टेलीफोन केरियर बाॅक्स10 वर्ष
63कुर्सी/मुढढे की गद्दीयां5 वर्ष86लेटर बाॅक्स10 वर्ष
64पर्दे5 वर्ष87पायदान लकडी का5 वर्ष
65मेजपोश सूती3 वर्ष88सुराही स्टेण्ड लकडी का2 वर्ष
66कम्बल10 वर्ष89नेम प्लेट5 वर्ष
67बैडशीट2 वर्ष90वुडन बाथ बोर्ड4 वर्ष
68डोरमेट जूट2 वर्ष91वेस्ट पेपर बास्केट लकडी की10 वर्ष
69तोलिये6 Months92डेस्क10 वर्ष
70राष्ट्रीय ध्वज5 वर्ष93इजी चेयर्स लकडी की10 वर्ष
71गलीचा15 वर्ष94भगोना एल्यूमीनियम6 वर्ष
72तकिये के कवर्स1 वर्ष95प्लेट एल्यूमीनियम6 वर्ष
73मेट्रेसेज (साधारण)10 वर्ष96लोटा6 वर्ष
97ब्रीफकेस6 वर्ष
Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

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Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के उपयोग हेतु निम्न भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि निम्नानुसार होगी-(परिपत्र संख्या 14/99, दिनांक 11.05.1999)

Note- (a) Articles to be destroyed without the permission of any committee :

“Any article used in Treatment/Management of AIDS patient is to be destroyed immediately as soon as the patent leaves the Hospital.”

(b) Articles to be destroyed with the permission of the committee at local level :

“Articles like linen, Mattresses, Bed-sheets, Towels, pillow and pillow covers having permanent stains of blood and pus and can not be removed on repeated washing or get torn. could be condemned, if the committee thinks that the articles can spread infection to other patients (cross infection) in the Hospitals.” (परिपत्र संख्या 14/99, दिनांक 11.05.1999 द्वारा जोडा गया।) Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

Name of articleMinimum period of serviceabilityName of articleMinimum period of serviceability
Name of articleMinimum period of serviceabilityName of articleMinimum period of serviceability
तकिये2तोलिये3 Months
गद्दे3तकिये के कवर्स6 Months
कम्बल6मेट्रेसेज (साधारण)5
बैडशीट6 Monthsमेट्रेसेज फोम7
Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि


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मोटर वाहन की न्यूनतम उपयोग अवधि

Order Dated: 20-07-1995 and 11-05-1999 Minimum period of serviceability of Store Items

S.No.वाहन की किस्मन्यूनतम किलोमीटरन्यूनतम वर्ष
1मोटरसाइकिल व थ्री व्हीलर1.20 लाख7
2हल्के मोटर वाहन2.00 लाख8
3मध्यम मोटर वाहन3.00 लाख10
4भारी मोटर वाहन4.00 लाख10
5ट्रेक्टर व बुलडोजर20000 घंटे10
Minimum period of serviceability of Store Items / सरकारी भण्डार सामग्री की उपयोग अवधि

निर्धारित अवधि व निर्धारित किलोमीटर दोनों का पूर्ण होना आवश्यक है।

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विद्यालयों में प्रभार व प्रभारी और उनके दायित्व

विद्यालयों में प्रभार व प्रभारी और उनके दायित्व

Incharges in schools and their responsibilities / विद्यालयों में प्रभार व प्रभारी और उनके दायित्व :- श्रीमान निदेशक, माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर के परिपत्र क्रमांक : शिविरा-मा/ माध्य / शाला दर्पण /60304 (2) / 2016-17/198 दिनांक: 22/06/2020 द्वारा “शाला दर्पण पोर्टल” को अपडेट करने से सम्बन्ध में संस्था प्रधान के साथ ही विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रभारियों का भी दायित्व निर्धारण किया गया है उन्हें यह काम उनके प्रभार के अनुसार करना होगा लेकिन प्रश्न यह बनता हैं कि विद्यालय में कौन कौन से प्रभार होते हैं और उनके प्रभारी कौन हो सकते हैं साथ उनके दायित्व क्या रहेंगे|

अब सरकारी स्कूलों में शाला दर्पण पोर्टल का काम केवल शाला दर्पण प्रभारी ही नहीं अपितु विद्यालय के विभिन्न गतिविधियों के प्रभार वाले प्रभारी करेंगे। इस सम्बन्ध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी ने आदेश जारी किए है। गौरतलब है कि शाला दर्पण पोर्टल शिक्षा विभाग का महत्वपूर्ण सूचनाएं अपलोड अथवा अपडेट करने का पोर्टल है। इसका विभिन्न उद्देश्यों को लेकर बड़े स्तर पर उपयोग किया जाता है।

इस पोर्टल के उपयोग के लिए सरकारी स्कूलों में शाला दर्पण पोर्टल से संबंधित सभी काम करने के लिए प्रभारी बनाए गए थे। लेकिन विद्यालयों में कार्य की अधिकता के कारण कई बार सूचनाएं समय पर अपलोड नहीं हो पाने एवं त्रुटि पूर्ण कार्य होने की संभावना को देखते हुए अब विद्यालय के विभिन्न प्रभार वाले सभी प्रभारी अपने अपने प्रभार का शाला दर्पण से संबंधित काम स्वयं करेंगे।

क्या कहते है सीबीईओ-सीबीईओ गोविंद प्रसाद बंसल ने बताया कि पहले विद्यालयों में शाला दर्पण प्रभारी को ही ये सब काम करने होते थे। जिसके कारण काम त्रुटिपूर्ण होने अथवा विलम्ब से होने की संभावना रहती थी। अब सभी अलग अलग प्रभार वाले प्रभारी अपने अपने प्रभार का काम स्वयं करेंगे जिससे त्रुटि की संभावना नही होगी ।

आपके इन्ही प्रश्नों के जबाब देने के लिए और शिक्षको व संस्था प्रधानो की सहायत के लिए हमारे एक्सपर्ट और शाला सुगम की टीम ने आपके लिए सम्पूर्ण आलेख तैयार किया हैं जिसे आप ध्यान पूर्वक अध्ययन करें और अच्छा लगने पर अपने साथियों तक जरूर साझा करें |

Incharges in schools and their responsibilities / विद्यालयों में प्रभार व प्रभारी और उनके दायित्व

Incharges in schools and their responsibilities / विद्यालयों में प्रभार व प्रभारी और उनके दायित्व

क्र.सं.प्रभार का नाम उतरदायित्व प्रभार किसे दिया जाए
1बालिका शिक्षानेपकिन वितरण, आत्म रक्षा, गरिमा पेटी प्रभारी, राजू व मीना मंच प्रभारीमहिला शिक्षिका
2खेलकूद व प्रतियोगिता प्रभारखेल कूद, प्रतियोगिता करवाना, प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को लेकर जाना, स्वास्थ्य व शारीरिक शिक्षा, टेबलेट या टिका, वेक्सिनेशनPTI या खेलकूद में सक्रिय शिक्षक
3स्थानीय परीक्षा प्रभारविभिन्न परीक्षाओं के सफल आयोजन करवाना,पेपर तैयार करवाना, उत्तर पुस्तिका जंचवानी, परीक्षा व्यवस्था करना और परिणाम तैयार करवाना, बोर्ड परीक्षा के ऑनलाईन आवेदन पत्र, परीक्षा परिणाम तैयार करना, क्रमोन्नति आदि।वरिष्ठ व अनुभवी शिक्षक
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क्र.सं.प्रभार का नामउतरदायित्वप्रभार किसे दिया जाए
4बोर्ड परीक्षा प्रभारीबोर्ड परीक्षा आवेदन, फॉर्म केंद्र पर जमा, अंकतालिका संग्रहण व वितरण, डाटा मिलान, फीस संग्रहण, उपस्थिति व बोर्ड सम्प्रेषण,  यथा समय अंकों / सत्रांकों की फीडिंगवरिष्ठ व अनुभवी शिक्षक
5शाला दर्पण प्रभारशाला दर्पण के विभिन्न कार्य अन्य प्रभारियो की सहायता से पूर्ण करवाना, परीक्षा प्रभारी की सहायता से फॉर्म ऑनलाइन करवानावरिष्ठ व कम्प्यूटर अनुभवी शिक्षक
6मध्याह्न भोजन प्रभारमध्याह्न भोजन की सम्पूर्ण व्यवस्था करवाना, MDM की सुचना संकलन, अनाज रखरखाव आदि पर ध्यान देना, दूध वितरण MDM रिकोर्ड संधारणभोजन आदि में जानकार हो तथा विद्यालय में कम कार्यप्रभार हो
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क्र.सं.प्रभार का नामउतरदायित्वप्रभार किसे दिया जाए
7PEEO / UCEEO प्रभारPEEO स्कुलो के कार्य की देखरेख करना, सूचना संकलित करना, संबलन में सहयोग करना,अनुभवी वरिष्ठ शिक्षक
8संस्थापन प्रभारसंस्थापन कार्य यथा समस्त कार्मिकों के सेवा अभिलेख के अनुसार शाला दर्पण पर पूर्ण शुद्ध विवरण (प्रपत्र- 10) दर्ज करना, कार्यमुक्ति / कार्यग्रहण, इन्फ्रास्ट्रक्चर विवरण, विद्यालय प्रोफाइल कार्मिक उपस्थिति, अवकाश अद्यतन करना आदि।, विद्यालय डाक सूचना, स्कोलर रजिस्टर संधारण, केशबुक संधारण, वेतन भत्ते, पे पोस्टिंग पंजिका, कार्मिक डाटा अपडेशन, TC व नवीन प्रवेश, अध्ययन व चरित्र प्रमाण पत्र, UDISE, शाला सिद्धि, ज्ञान संकल्प पोर्टलसंस्था प्रधान व मंत्रालयिक कार्मिक या लेखा अनुभवी कार्मिक
9विद्यार्थी कल्याणकारी योजना प्रभारट्रांसपोर्ट वाउचर, साईकिल वितरण, पालनहार योजना, राजश्री योजना, विद्यार्थी निशुल्क गणवेश प्रभारीअनुभवी वरिष्ठ शिक्षक
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क्र.सं.प्रभार का नामउतरदायित्वप्रभार किसे दिया जाए
10छात्रवृत्ति प्रभारविभिन्न छात्रवृत्ति के पात्र सभी विद्यार्थियों से संबंधित सम्पूर्ण विवरण संकलन करना और यथासमय शाला दर्पण पोर्टल पर अपलोड करने संबंधी सम्पूर्ण कार्यअनुभवी वरिष्ठ शिक्षक
11अकेडमिक कार्य प्रभारीनौ बेग डे, बालसभा, दैनिक उत्सव आयोजन, विशेष गतिविधियाँसम्बंधित अनुभवी
12हेडटीचरविद्यालय में RKSMBK, SIQE, भारतीय संस्कृति ज्ञान व अन्य परीक्षाएं, कक्षा 1  से 5 के शिक्षको को संबलनसर्व प्रथम व्याख्याता या व. अध्यापक या अध्यापक
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क्र.सं.प्रभार का नामउतरदायित्वप्रभार किसे दिया जाए
13सांस्कृतिक प्रभारविद्यालय में विभिन्न में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन, 15 अगस्त, 26 जनवरी व अन्य उत्सव, समय-समय पर आयोजित होने वाले विभिन्न प्रकार के उत्सवों से संबंधित वांछित सूचनाओं की शाला दर्पण पर यथासमय प्रविष्टियां दर्ज करना।संभवत महिला शिक्षक या अनुभवी शिक्षक
14सामुदायिक गतिशीलता प्रभारSMC, SDMC गठन, बैठक, अभिभावक सम्पर्क, PTM आयोजन, एसडीएमसी/एसएमसी से संबंधित वार्षिक /अर्द्धवार्षिक / त्रैमासिक /मासिक प्रविष्टियां, प्रशिक्षण, सदस्यों का विवरण, बैठकों का विवरण, बैंक खातों संबंधी विवरण आदि।संस्था प्रधान या अनुभवी शिक्षक
15भारत स्काउट व NSS प्रभारीस्काट व NSS गतिविधियो का आयोजन, ट्यूर, जम्बूरीसम्बंधित अनुभवी प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति
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क्र.सं.प्रभार का नामउतरदायित्वप्रभार किसे दिया जाए
16SUPW प्रभारसमाजोत्पादन कार्यअनुभवी शिक्षक
17निःशुल्क पाठ्य-पुस्तक वितरण प्रभारनिःशुल्क पाठ्य-पुस्तकों, वर्क बुक, डेस्क वर्क, अन्य प्रश्न बैंक प्रकाशन, वितरण रखरखाव, व  इससे संबंधित सम्पूर्ण विवरण यथा समय शाला दर्पण पर दर्ज करना।पुस्तकालय अध्यक्ष या अनुभवी शिक्षक
18कक्षाध्यापकअपनी कक्षा से संबंधित समस्त छात्रों का प्रवेश / पुनः प्रवेश, नाम पृथकीकरण, प्रपत्र- 7 / 7 – अ (तृतीय भाषा व वैकल्पिक विषय संबंधित) की पूर्ति, प्रपत्र 9 की परिशुद्ध पूर्ति, छात्र उपस्थिति सूचना, कक्षा क्रमोन्नति, साईकिल / ट्रान्सपोर्ट वाउचर हेतु पात्र विद्यार्थियों की सूचना आदि। समस्त कक्षाओ के कक्षाध्यापक जिनकी शाला दर्पण पर मेपिंग हैं
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क्र.सं.प्रभार का नामउतरदायित्वप्रभार किसे दिया जाए
19शैक्षिक उप समितिशैक्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट, विद्यालय शैक्षिक उत्थान  योजनासंस्था प्रधान और समिति के सदस्य
20विद्यालय भवन उपसमितिविद्यालय भौतिक विकास, निर्माण, रिपेयरिंग योजना निर्माण और प्रस्ताव लेनासंस्था प्रधान और समिति के सदस्य
21बाल संसद प्रभारसम्बंधित 7 मंत्रालय से जुड़े शिक्षक सम्बंधित प्रभारी के रूप में दिए कार्यो का निष्पादन करेंगेंमंत्रालय अनुसार प्रभारी
22ICT लैबICT लैब, मिशन स्टार्ट, मिशन बुनियाद, आफ्टर स्कुल, व अन्य ऑनलाइन शिक्षण कार्यICT लैब के लिए ICT के कम्प्यूटर अनुदेशक और उनकी अनुपस्थिति में विज्ञान या गणित के वरिष्ठ शिक्षक
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Incharges in schools and their responsibilities / विद्यालयों में प्रभार व प्रभारी और उनके दायित्व के बारे विशेष -

  • उपर्युक्त समस्त प्रभारों के अतिरिक्त विद्यालय के अन्य प्रभारों से संबंधित सूचना का संधारण भी शाला दर्पण पोर्टल पर किया जाना हो, तो संबंधित प्रभारी यथासमय सही सूचना अद्यतन/दर्ज करवाने हेतु उत्तरदायी होगा।
  • अगर किसी शिक्षक के पास चुनाव से जुड़े कार्य जैसे BLO, सुपरवाईजर का कार्यभार हैं तो उसे ऐसा कार्यभार देवें ताकि चुनाव कार्य प्रभावित न हो |
  • विभागीय निर्देशानुसार किसी भी पंचायत सहायक या विद्यालय सहायक को पूर्ण चार्ज न देकर केवल सहायक बनाया जाएगा |
  • विषयों से जुड़े कार्य सम्बंधित विषय के अध्यापको की जिम्मेदारी रहेगी जैसे 1. विज्ञान मेले व ईको क्लब के लिए विज्ञान शिक्षक गणित मेला के लिए गणित के शिक्षक, हिंदी काव्य सम्मेलन आदि के लिए हिंदी के शिक्षक, ICT लैब के लिए ICT के कम्प्यूटर अनुदेशक और उनकी उपस्थिति में विज्ञान या गणित के शिक्षक
  • सम्बंधित प्रभार का प्रभारी ही उक्त प्रभार की सुचना शाला दर्पण प्रभारी की निगरानी में ऑनलाइन दर्ज करेगा | और सूचनाओं के लिए सम्बंधित प्रभारी जिम्मेदार रहेगा |

विद्यालय दायित्व व प्रभार से जुड़े महत्वपूर्ण आदेश व निर्देश :-

जल्द नवीन निर्देश और आदेश अपडेट हो रहे हैं कृपया WAIT करें

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SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति

SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति

SDMC Work Duty Organisation: विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति गठन की सम्पूर्ण रुपरेखा नियमावली और प्रस्ताव लेखन कार्यवाही, अपने विद्यालय में त्रुटी रहित और प्रभावी SDMC का गठन करने की सम्पूर्ण जानकारी इस आलेख में हमारे एक्सपर्ट ने आपको उपलब्ध करवाया हैं |

कार्यालय निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर के आदेश दिनांक: 21.01.15 के द्वारा समस्त राजकीय माध्यमिक / उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक के लिए विद्यालय विकास एवं प्रबन्धन समिति (SDMC) तथा कक्षा 1-8 तक के लिये विद्यालय प्रबन्धन समिति (SMC) के गठन के आदेश जारी किये गये हैं। इन आदेशों के अनुसार विद्यालय प्रबन्धन समिति द्वारा कक्षा 1-8 तक की कक्षाओं में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ सर्व शिक्षा अभियान तथा मिड-डे-मील की राशि की प्राप्ति व व्यय का लेखा जोखा पृथक से संधारित किया जायेगा। विद्यालय प्रबन्धन समिति का गठन पूर्व प्रदत्त आदेशों के अनुसार ही होगा।

विद्यालय की विद्यालय विकास योजना प्रतिवर्ष 31 जुलाई से पूर्व तैयार करना।

2- राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्ययोजना बनाकर लक्ष्य प्राप्त करना-

विद्यालय की नामांकन दर आदर्श नामांकन संख्या तक लाना।माध्यमिक स्तर की ड्राप आउट दर 25 प्रतिशत से नीचे लाना।विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिये भौतिक, मानवीय, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संसाधन उपलब्ध कराना जिससे कि विद्यार्थी एवं विद्यालय के शैक्षिक एवं सहशैक्षिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके तथा विद्यालय का समाज के साथ सह संबंध स्थापित हो सके ।

3- अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में तैयार की गई विद्यालय की योजना को शाला दर्पण में आवश्यक रूप से अपलोड करवाया जाकर उसकी एक प्रति विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवाना।

4- प्रत्येक 3 माह में विद्यालय योजना की प्रगति शाला दर्पण पर अपलोड करवाकर विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवाना।

माध्यमिक / उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9-12 के विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार एवं विद्यालय भवन के विकास सम्बन्धी कार्य विद्यालय विकास एवं प्रबन्धन समिति (SDMC) द्वारा किये जायेंगे। इसके साथ ही RMSA से प्राप्त अनुदान विकास शुल्क एवं अन्य प्राप्त होने वाली राशियों का लेनदेन / लेखा-जोखा इस समिति द्वारा संधारित किया जायेगा। विद्यालय विकास एवं प्रबन्धन समिति (SDMC) तथा अन्य उप समितियों के गठन हेतु संरचना एवं इनके दायित्व शासन की स्वीकृति क्रमांक प.17 (22) शिक्षा 1 / 2016 जयपुर दिनांक 01.07.2016 के क्रम में आंशिक संशोधनोपरान्त एतद् द्वारा निर्धारित किए जाते हैं |

SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति

SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति
SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति
क्र सं सदस्य विवरण पद व संख्या
1प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापकअध्यक्ष
2अभिभावकों में से एससी/एसटी समुदाय के प्रतिनिधि2 सदस्य
3अभिभावकों में से महिला प्रतिनिधि2 सदस्य
4अभिभावकों में से अन्य प्रतिनिधि2 सदस्य
5सामाजिक विज्ञान का अध्यापक प्रतिनिधि1 सदस्य
6विज्ञान का अध्यापक प्रतिनिधि1 सदस्य
7गणित का अध्यापक प्रतिनिधि1 सदस्य
8पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि2 सदस्य
9आॅडिट व वित्त विभाग का एक व्यक्ति (संस्था का लेखा कार्मिक)1 सदस्य
10शैक्षिक रूप से पिछड़ेे अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधि1 सदस्य
11महिला समूहों में से प्रतिनिधि सदस्य1 सदस्य
12ग्राम शिक्षा विकास समिति का सदस्य/शिक्षाविद्1 सदस्य
13विज्ञान, मानविकी एवं कला/संस्कृति/क्राफ्ट की पृष्ठभूमि वाले
(जिला परियोजना समन्वयक द्वारा मनोनीत) प्रतिनिधि
1 सदस्य
14जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मनोनीत अधिकारी1 सदस्य
15विद्यार्थी प्रतिनिधि2 सदस्य
16विधायक प्रतिनिधि2 सदस्य
17प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक द्वारा नामित मुख्य शिक्षक (हेड सदस्य सचिव
टीचर) वरिष्ठतम व्याख्याता उमावि में/व0अ0-मावि में
सदस्य सचिव
कुल सदस्य23

(I)  विद्यालय द्वारा नॉन रेकरिंग मद में खरीद करने पर बीईईओ / डीपीसी कार्यालय लेखाकार / कनिष्ठ लेखाकार को सदस्य रूप में मनोनीत किया जाये।

(II)  विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति के निर्धारित सदस्यों में से कम से कम एक सदस्य ऐसा हो, जो एसएमसी में भी संदस्य हो एवं कुल SDMC सदस्यों में से कम से कम 50 प्रतिशत महिला सदस्य हों |

(III) SDMC की कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल दो शैक्षिक सत्र हेतु होगा। तत्पश्चात् नवीन चयन होगा।

(IV)  सत्रारम्भ में SDMC के गठन के लिये साधारण सभा की बैठक जुलाई के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाये। उक्त बैठक में साधारणतया सर्वसम्मति से सदस्यों का मनोनयन किया जाये। जहां सर्वसम्मति न हो पाये, वहां उपस्थित सदस्यों में से बहुमत की राय को प्राथमिकता दी जावे।

(V) प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता के लिये सभाध्यक्ष प्रस्तावित किया जाये जो कि स्थानीय समुदाय से होना चाहिए।

(VI) SDMC गठन के उपरान्त एक बोर्ड तैयार कर सभी कार्यकारिणी सदस्यों के नाम, पता एवं दूरभाष / मोबाईल नम्बर सर्व साधारण हेतु उपलब्ध कराए जाएं।

S.N.कार्यालय आदेश
1विद्यालय प्रबंथ समिति का नवीन संशोधित संविधान प्रारूप
2SDMC/SMC रजिस्ट्रेशन के समय प्रस्तुत किया जाने वाला शपथ पत्र
3संविधान संशोधन होने पर दिया जाने वाला शपथ पत्र
4संविधान संशोधन नहीं होने पर दिया जाने वाला शपथ पत्र
5SDMC REGISTRATION ONLINE PROCESS
6धारा 4 (क) की सुचना नयी कार्यकारिणी के रजिस्ट्रेशन हेतु
7SDMC REGISTRATION - 80G
8SDMC संरचना, गठन एवं दायित्व आदेश दिनांक 27-10-2015
9SMC/SDMC सम्बन्धी दिशा निर्देश आदेश दिनांक 21-01-2015
10छात्रकोष / विकास कोष के सामयिक एवं समुचित उपयोग के सम्बन्ध में दिशा निर्देश दिनांक 27-02-2015
11SMC के गठन के दिशा निर्देश
12SMC or SDMC Registration Process
SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति

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वर्तमान गाइड लाइन के अनुसार एसडीएमसी में कार्य कारिणी समिति में कुल 23 सदस्य शामिल होंगे जिसमें प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक समिति का अध्यक्ष होगा तथा प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक द्वारा नामित मुख्य शिक्षक (हेड टीचर)/ वरिष्ठतम व्याख्याता उच्च माध्यमिक विद्यालय में ) वरिष्ठतम वरिष्ठ अध्यापक माध्यमिक विद्यालय में सदस्य सचिव के रूप में काम करेंगे।

1.विद्यालय द्वारा अनावर्ती मद (non-recurring )में खरीद करने पर सी बी ई ई ओ /SMSA कार्यालय के लेखाकार /कनिष्ठ लेखाकार को सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाए।

2. एसडीएमसी के निर्धारित सदस्यों में कम से कम 1 सदस्य ऐसा हो जो एसएमसी में भी सदस्य हो एवं कुल एसडीएमसी सदस्यों में से कम से कम 50% महिला सदस्य हो।

3.एसडीएमसी की कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल दो शैक्षिक सत्र हेतु होगा तत्पश्चात नवीन कार्यकारिणी हेतु निर्वाचन होगा।

4.सत्रारंभ में एसडीएमसी के गठन के लिए साधारण सभा की बैठक जुलाई के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जानी चाहिए उक्त बैठक में साधारणतया सर्वसम्मति से सदस्यों का मनोनयन किया जाए जहां सर्वसम्मति न हो वहां उपस्थित सदस्यों में से बहुमत की राय को प्राथमिकता दी जाए। SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति

5 .प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता के लिए सभा अध्यक्ष प्रस्तावित किया जावे जो कि स्थानीय समुदाय से होना चाहिए।

6.एसडीएमसी गठन के बाद एक बोर्ड तैयार कर सभी कार्यकारिणी सदस्यों के नाम ,पता ,दूरभाष अथवा मोबाइल नंबर सर्वसाधारण हेतु उपलब्ध कराए जाएं।


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*️⃣एसडीएमसी के कार्य एवं दायित्व👇

SDMC के कार्य एवं दायित्व निम्न अनुसार होंगे-

  • विद्यालय की विद्यालय सुधार योजना तैयार करना l
  • राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के निम्न उदेश्यों की प्राप्ति हेतु कार्य योजना बनाकर लक्ष्य प्राप्त करना –
  1. कक्षा नौ व दस का सकल नामांकन दर बढ़ाना l
  2. माध्यमिक स्तर की ड्राप आउट दर 25 प्रतिशत से निचे लाना l
  3. विद्यार्थियों में जीवन कौशल का विकास करना l
  4. वियालय में आई सी टी का उपयोग सुनिश्चित करना l
  5. समुदाय की सह-भागिता सुनिश्चित करना l
  6. राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान से प्राप्त राशि का रिकॉर्ड संधारण करना l
  7. समिति अपने कोष का उपयोग Recurring and Non-Recurring मद में कर सकेगी l
  8. समिति भारत सरकार के वित्तीय मैनुअल के अनुसार व्यय कर सकेगी l
  9. समिति द्वारा माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर के लिए सभी गतिविधियों की योजना बनाना, यू डाइस का डाटा एकत्रित करना, योजना की क्रियान्विति एवं मॉनिटरिंग आदि का कार्य करेगी l
  10. विद्यालय स्तर पर निर्माण संबंधी कार्य तथा शैक्षणिक गुणवत्ता वृद्धि हेतु संबंधित सभी कार्य करेगी l
  11. समिति की प्रत्येक मीटिंग में नियमित रूप से वित्तीय लेखों का अनुमोदन कराया जाएगा l
  12. समिति सभी गतिविधियों की प्रगति की सूचना नियमित रूप से ब्लॉक में जिले के अधिकारियों को प्रेषित करेगी  l
  13. समिति की पाक्षिक बैठक रखी जाएगी l
  14. समिति की मीटिंग हेतु प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक द्वारा सभी सदस्यों को लिखित में सूचित किया जाएगा l
  15. बैंक खाते से लेनदेन समिति के अध्यक्ष व सदस्य सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किए जाएंगे l  किसी भी स्थिति में एकल हस्ताक्षर से बैंक से लेन देन नहीं किया जाएगा l SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति
  • विद्यालय की विकास योजना प्रतिवर्ष 31 जुलाई से पूर्व तैयार करना।
  • समग्र शिक्षा अभियान के निम्नांकित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कार्य योजना बनाकर लक्ष्य प्राप्त करना।
  • विद्यालय की नामांकन दर आदर्श नामांकन संख्या प्राप्त करना।
  • माध्यमिक स्तर की ड्रॉपआउट दर 2.5% से नीचे लाना।
  • विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक, मानवीय, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संसाधन उपलब्ध कराना जिससे कि विद्यार्थियों में विद्यालय के शैक्षिक एवं सह शैक्षिक विकास को सुनिश्चित किया जा सके तथा विद्यालय का समाज के साथ संबंध स्थापित हो सके।
  • प्रत्येक तीन माह में विद्यालय विकास की या विद्यालय योजना की प्रगति शाला दर्पण पर अपलोड करवा कर विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवाना।

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  • एसडीएमसी के खाते में प्राप्त राशि का रिकॉर्ड संधारण किया जाना।
  • समिति अपने कोष का उपयोग आवृत्ति (recurring )/अनावर्ती (non recurring) मद में कर सकेगी।
  • समिति केंद्र अथवा राज्य सरकार के वित्तीय मैनुअल के अनुसार व्यय कर सकेगी।
  • बैंक खाते से लेन-देन समिति के अध्यक्ष व सदस्य सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किए जाएंगे समिति की प्रत्येक बैठक में नियमित रूप से वित्तीय लेखों का अनुमोदन कराया जाएगा।
  • एसडीएमसी की सलाह से ही विद्यालय की वार्षिक सहायता, भामाशाह/जनसहयोग राशि , विद्यार्थी कोष तथा विकास शुल्क का उपयोग किया जाएगा। SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति
  • कार्यकारिणी समिति की मासिक बैठक विभाग के निर्देशानुसार प्रत्येक अमावस्या को रखी जाएगी जिसका कोरम न्यूनतम 50 % कार्यकारिणी सदस्यों की उपस्थिति से ही पूर्ण होगा।
  • अति आवश्यक होने पर विद्यालय हित में कभी भी एसडीएमसी बैठक का आयोजन किया जा सकेगा।
  • समिति की कार्यकारिणी की बैठक हेतु प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक द्वारा सभी सदस्यों को 2 सप्ताह पूर्व लिखित में अथवा एस एम एस द्वारा सूचित किया जाएगा।
  • समिति की सभी गतिविधियों की प्रगति की सूचना प्रत्येक तीन माह में शाला दर्पण पर अपडेट की जाएगी।
  • एसडीएमसी की प्रत्येक बैठक के कार्यवाही विवरण का संधारण निर्धारित प्रारूप में नियमित रूप से एक रजिस्टर में संधारित किया जाएगा जैसे बैठक आयोजन की दिनांक ,सभा अध्यक्ष का नाम ,बैठक में उपस्थित सदस्यों की संख्या ,बैठक में लिए गए प्रस्ताव विवरण या प्रस्तुतीकरण ,प्रस्ताव प्रस्तुत करने वालों की संख्या , प्रस्ताव प्रस्तुत करने वालों में महिलाओं की संख्या …
    (निर्धारित प्रपत्र)
बैठक की दिनांकसभाध्यक्ष का नामबैठक में उपस्थित
सदस्यों की संख्या
बैठक में लिये गये प्रस्तावप्रस्ताव प्रस्तुत करने वालों की संख्याप्रस्ताव प्रस्तुत करने वालों में महिलाओं की संख्या

3. उप समितियों का गठन एवं दायित्व :

  • प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक = अध्यक्ष
  • पंचायत या स्थानीय शहरी निकाय का प्रतिनिधि = 1 सदस्य
  • अभिभावक प्रतिनिधि = 1 सदस्य
  • निर्माण कार्य से जुड़े अनुभवी / तकनीकी व्यक्ति (JEN, RMSA/SSA) = 1 सदस्य
  • लेखा / ऑडिट शाखा का प्रतिनिधि व्यक्ति (संस्था का लेखा कार्मिक) = 1 सदस्य
  • प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक द्वारा नामित मुख्य शिक्षक (हेड टीचर) (वरिष्ठतम व्याख्याता उमावि में / वरिष्ठतम वरिष्ठ अध्यापक-मावि में) = 1 सदस्य सचिव

(अ) विद्यालय भवन उपसमिति School Building Committee की संरचनाः

1प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापकअध्यक्ष
2पंचायत या स्थानीय शहरी निकाय का प्रतिनिधि1 सदस्य
3अभिभावक प्रतिनिधि1 सदस्य
4निर्माण कार्य से जुडे अनुभवी/तकनीकी व्यक्ति JEN RMSA/SSA।1 सदस्य
5लेखा/Audit शाखा का प्रतिनिधि व्यक्ति (संस्था का लेखा कार्मिक)1 सदस्य
6प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक द्वारा नामित मुख्य शिक्षक (हेड टीचर)सदस्य सचिव
  • इस प्रकार 6 सदस्यों की यह विद्यालय भवन उप समिति होगी। SDMC Work Duty Organisation विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति
  • भवन निर्माण एवं मेजर रिपेयर हेतु योजना बनाना विद्यालय भवन का प्रबन्धन एवं संचालन, मॉनिटरिंग, पर्यवेक्षण रिपोर्टिंग, लेखों का संधारण, लेखों की मासिक रिपोर्ट बनाना आदि कार्यों को करने के लिए जिम्मेदार होगी, जिसकी रिपोर्ट SDMC को नियमित रूप से की जायेगी।
  • वह समिति निर्माण कार्यों को वित्तीय नियमानुसार अनुबंध पर करवा सकेगी अथवा स्वयं भी कर सकेगी।
  • विद्यालय भवन उप समिति जो कि भवन निर्माण एवं मेजर रिपेयर हेतु योजना बनाने का, विद्यालय भवन का प्रबंधन एवं संचालन , मॉनिटरिंग पर्यवेक्षण, रिपोर्टस लेखों का संधारण ,लेखों की मासिक रिपोर्ट बनाना आदि के लिए जिम्मेदार होगी जिसकी रिपोर्ट एसडीएमसी को नियमित रूप से की जाएगी। यह समिति निर्माण कार्यों को वित्तीय नियम अनुसार अनुबंध पर करवा सकेगी अथवा स्वयं भी कर सकेगी
  • प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक अध्यक्ष तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठ व्याख्याता वह माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठतम वरिष्ठ अध्यापक इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
  • साथ ही पंचायत या स्थानीय शहरी निकाय का एक प्रतिनिधि व एक अभिभावक प्रतिनिधि , निर्माण कार्य से जुड़े अनुभवी अथवा तकनीकी व्यक्ति (JEN SMSA ) यह भी सदस्य होंगे, इसके अलावा लेखा, ऑडिट शाखा का प्रतिनिधि ( संस्था का लेखा कार्मिक ) होगा।
  •  प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक = अध्यक्ष
  • अभिभावक प्रतिनिधि = 1 सदस्य
  • निम्न में से प्रत्येक क्षेत्र का एक विशेषज्ञ : i) विज्ञान या गणित ii.) मानविकी iii.) कला / संस्कृति / क्रांपट / खेलकूद iv) भाषा विशेषज्ञ  = 4 सदस्य
  • प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक द्वारा मनोनीत विद्यार्थी  = 1 सदस्य
  • प्रधानाचार्य / प्रधानाध्यापक द्वारा नामित मुख्य शिक्षक (हेड टीचर) (वरिष्ठतम व्याख्याता उमावि में / वरिष्ठतम वरिष्ठ अध्यापक मावि में) =1 सदस्य सचिव
1प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापकअध्यक्ष
2अभिभावक प्रतिनिधि1 सदस्य
3निम्न में से प्रत्येक क्षेत्र का एक सदस्य
(विज्ञान या गणित/मानविकी/कला/संस्कृति/क्राफ्ट/खेलकूद/भाषा विशेषज्ञ)
4 सदस्य
4प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक द्वारा मनोनीत विद्यार्थी1 सदस्य
5प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक द्वारा नामित मुख्य शिक्षक (हेड टीचर)सदस्य सचिव
  • शैक्षिक गतिविधियों की कार्य योजना निर्माण तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन , मूल्यांकन , रिपोर्टस की समीक्षा, सुझावों का परीक्षण का कार्य करेगी तथा आगामी कार्य योजना में शैक्षिक मुद्दों से संबंधित विचारों को शामिल करने हेतु अनुशंसा करेगी।
  • शैक्षिक गुणवत्ता सुधार हेतु समय बद्ध कार्य योजना निर्माण और क्रियान्वयन, शैक्षिक समंको का विश्लेषण एवं निम्न उपलब्धि के क्षेत्रों में सम्बलन हेतु कार्य योजना प्रस्तुत करने का कार्य इस शैक्षिक उप समिति के कार्य होगें।
  • शैक्षिक उप समिति में कुल 8 सदस्य होंगे जिसमें प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक इस समिति का अध्यक्ष होगा तथा उच्च माध्यमिक विद्यालय में वरिष्ठतम व्याख्याता व माध्यमिक विद्यालय में वरिष्ठतम अध्यापक इस समिति के सदस्य सचिव होंगे इसके अलावा अभिभावक प्रतिनिधि तथा विज्ञान, गणित मानविकी ,कला ,संस्कृति, क्राफ्ट खेलकूद ,भाषा विशेषज्ञ व प्रधानाचार्य अथवा प्रधानाध्यापक द्वारा मनोनीत विद्यार्थी इसके सदस्य होंगे।

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RAJASTHAN GOVERNMENT CALANDER 2023 PDF राजस्थान सरकार मासिक कलेंडर 2023

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RAJASTHAN GOVERNMENT CALANDER 2023 PDF राजस्थान सरकार मासिक कलेंडर 2023 : Rajasthan govt calendar 2023 pdf – राजस्थान गवर्नमेंट (Government) कैलेंडर Raj Calendar is an unique high quality monthly calendar सरकारी कैलेंडर Public Holidays Rajasthan Govt Holidays 2023 List the government of Rajasthan has dispatch public holidays for September and October, November, December upcoming months for full year 2023. Holidays list in Rajasthan school / college and government sectors departments remains all Sundays and some pf general and options special days

RAJASTHAN GOVERNMENT CALANDER 2023 PDF राजस्थान सरकार मासिक कलेंडर 2023 : सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2023 के सार्वजनिक और ऐच्छिक अवकाश की सूची जारी कर दी। विभाग ओर से जारी आदेश में 29 सार्वजनिक और 21 ऐच्छिक अवकाश घोषित किए गए हैं। यह आदेश राजकीय कार्यालयों पर लागू होगा। कर्मचारियों को 07 सार्वजनिक अवकाश शनिवार या रविवार को आ रहे , नुकसान हो रहा है।

माह : जनवरी 2023

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माह : फरवरी 2023

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मार्च 2023

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अप्रेल 2023

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मई 2023

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जून 2023

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जुलाई 2023

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अगस्त 2023

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सितम्बर 2023

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अक्टूबर 2023

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माह : नवम्बर 2023

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माह : दिसम्बर 2023

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